Solution:ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गाँधी को 1915 में 'कैसर-ए-हिंद' (Kaiser-i-Hind) की उपाधि से सम्मानित किया था। गाँधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में बोअर युद्ध के दौरान एम्बुलेंस सेवाओं के लिए यह उपाधि प्राप्त की थी। उन्होंने 1920 में असहयोग आंदोलन (या खिलाफत आंदोलन के विरोध में) के दौरान यह उपाधि और पदक वापस लौटा दिए थे।
• नाइटहुड (Sir/सर): यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान था, जो रबींद्रनाथ टैगोर, फिरोजशाह मेहता और सर चमनलाल जैसे प्रमुख व्यक्तियों को दिया गया था।
टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि 3 जून 1915 को प्राप्त की थी।
• 'राय बहादुर' (Rai Bahadur) ब्रिटिश राज के दौरान भारत में हिंदुओं (मुख्यतः) को दी जाने वाली एक सम्मानित उपाधि थी।
मुसलमानों और पारसियों के लिए 'खान बहादुर' और सिखों के लिए 'सरदार बहादुर' दी जाती थी।
यह 'राय साहब' से ऊँची और 'दीवान बहादुर' से नीचे की उपाधि थी।
• राय साहब (Rai Sahib/Rai Saheb) ब्रिटिश भारत के दौरान अंग्रेजों द्वारा भारतीय नागरिकों को राष्ट्र के प्रति वफादारी, समाज सेवा या उत्कृष्ट कार्यों के लिए दी जाने वाली एक सम्मानित नागरिक उपाधि थी। यह जमींदारों और प्रभावशाली व्यक्तियों को दी जाती थी और 1911 के बाद इसके साथ एक विशेष पदक (बैज) भी मिलता था।
• हिन्द केसरी (Hind Kesari) भारत में कुश्ती के क्षेत्र में दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय खिताब है। यह उपाधि 1958 से हर साल उस पहलवान को दी जाती है जो राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कुश्ती शैली में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करता है। पहले हिन्द केसरी का खिताब रामचंद्र बाबू ने 1958 में जीता था।