Correct Answer: (a) ज्योतिराव गोविंदराव फुले
Solution:- ज्योतिबा फुले (ज्योतिराव गोविंदराव फुले) इस समाज के संस्थापक थे। वह जातिगत अन्याय के विरोध में अपना जीवन समर्पित करने वाले एक प्रमुख समाज सुधारक थे।
- उन्होंने और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने विशेष रूप से दलितों और महिलाओं की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- उन्होंने 24 सितंबर 1873 को महाराष्ट्र के पुणे में सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी।
- यह समाज मुख्य रूप से जातिगत अन्याय और अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए समर्पित था
- जिसने महिलाओं, शूद्रों, दलितों और अन्य निम्न जातियों के सामाजिक अधिकारों और राजनीतिक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए काम किया।
- फुले ने सामाजिक सुधारक के रूप में ब्राह्मणों के वर्चस्व के खिलाफ आवाज उठाई और किसानों व निम्न जाति के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
- उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और जीवन भर लड़कियों की शिक्षा के लिए प्रयासरत रहे।
- सत्यशोधक समाज का उद्देश्य था पौराणिक मान्यताओं और सामाजिक पाखंडों के बंधनों को तोड़ना, जातिगत भेदभाव और सामाजिक अन्याय का अंत करना।
- फुले ने अपनी पुस्तक "गुलामगीरी" के माध्यम से भी जाति प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई। डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे सामाजिक सुधारक भी फुले के विचारों से प्रेरित थे।
- इस समाज ने महाराष्ट्र में सामाजिक सुधारों की एक नई दिशा दी और आधुनिक भारतीय समाज के रूप में दलित और अन्य पिछड़े वर्गों के उत्थान हेतु प्रभावशाली आंदोलन का स्वरूप लिया