राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र (भारतीय राजव्यवस्था)

Total Questions: 7

1. आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था? [Phase-XI 28 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 2014 में
Solution:
  • आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 को भारतीय संसद द्वारा फरवरी 2014 में पारित किया गया था। इस अधिनियम के तहत, 2 जून 2014 को तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग करके एक नए राज्य के रूप में स्थापित किया गया था।
  •  इस कानून का अधिनियमन तेलंगाना आंदोलन की प्रतिक्रिया थी, जिसने अलग तेलंगाना राज्य के निर्माण की वकालत की थी।
  •  परिणामस्वरूप, आंध्र प्रदेश राज्य को तेलंगाना और शेष आंध्र प्रदेश में विभाजित कर दिया गया।
  •  आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014, दो नवगठित राज्यों के बीच संपत्तियों, देनदारियों, कर्मचारियों और अनुबंधों के विभाजन को अनिवार्य करता है, जिससे एक सुचारु परिवर्तन और प्रशासन सुनिश्चित होता है।
    Othe Information
  • अगस्त 2013 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आंध्र प्रदेश को विभाजित करने की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए मंत्रियों के समूह (GoM) समिति की स्थापना की।
  • समिति की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने की। समिति के अन्य सदस्यों में वित्त मंत्री पी चिदंबरम, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री वीरप्पा मोइली केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और प्रधान मंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री नारायणस्वामी शामिल थे।
  • समिति का उद्देश्य तेलंगाना पर श्रीकृष्ण समिति के निष्कर्षों से अंतर्दृष्टि प्राप्त करते हुए, संभावित विभाजन के विभिन्न पहलुओं की जांच करना था।
  • अधिनियम कब और कैसे पारित हुआ
    • यह विधेयक लोकसभा में 18 फरवरी 2014 और राज्यसभा में 20 फरवरी 2014 को पारित हुआ, जिसके बाद यह संसद का अधिनियम बना।​
    • राष्ट्रपति ने इस अधिनियम को 1 मार्च 2014 को अपनी स्वीकृति दी और इसे अधिसूचित किया गया।​
  • अधिनियम का नाम उद्देश्य
    • इसका औपचारिक नाम “आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014” है, जिसे सामान्यत: “तेलंगाना अधिनियम” के नाम से भी जाना जाता है।​
    • इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य संयुक्त आंध्र प्रदेश राज्य का पुनर्गठन करके उसे दो राज्यों—तेलंगाना और अवशिष्ट आंध्र प्रदेश—में विभाजित करना था।​
  • लागू होने की तिथि और प्रभाव
    • अधिनियम में दोनों नए राज्यों की सीमाएँ, संपत्ति और देनदारियों का बँटवारा, कर्मचारियों का विभाजन तथा प्रशासनिक व्यवस्थाएँ निर्धारित की गईं।​
  • प्रमुख प्रावधानों का स्वरूप
    • यह अधिनियम 12 भागों, 108 धाराओं और 13 अनुसूचियों में विभाजित है, जिनमें शासन, न्यायपालिका, लोकसेवा, सार्वजनिक उपक्रम, जल-विभाजन आदि से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।​
    • इसमें हैदराबाद को एक निर्दिष्ट अवधि के लिए दोनों राज्यों की साझा/अस्थायी राजधानी और उसके बाद तेलंगाना की स्थायी राजधानी के रूप में रखने की व्यवस्था की गई।​
  • पृष्ठभूमि और प्रक्रिया
    • लग तेलंगाना राज्य के लिए लंबे समय से चल रहे आंदोलन और श्रीकृष्ण समिति जैसी समितियों की रिपोर्टों के आधार पर केंद्र सरकार ने पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की।​
    • 2013 के पूर्ववर्ती विधेयक (आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2013) को आंध्र प्रदेश विधानसभा ने 30 जनवरी 2014 को अस्वीकार कर दिया था, जिसके बाद संशोधित 2014 विधेयक संसद से पारित किया गया।​

2. निम्नलिखित में से कौन-सा उन आदर्शों को दर्शाता है जिन्हें राज्य द्वारा नीतियां बनाते समय और कानून बनाते समय ध्यान में रखना चाहिए? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) राज्य के नीति-निदेशक तत्त्व
Solution:
  • संविधान के भाग IV में निहित राज्य के नीति-निदेशक तत्त्व (DPSP) वे आदर्श और निर्देश हैं
  • जो राज्य (सरकार) को सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए नीतियां और कानून बनाते समय ध्यान में रखने चाहिए।
  • ये प्रवर्तनीय (enforceable) नहीं हैं, लेकिन देश के शासन में मौलिक हैं।
  • ये गैर-न्यायसंगत हैं, अर्थात ये किसी भी अदालत द्वारा लागू नहीं किए जा सकते हैं, लेकिन निर्धारित सिद्धांतों को देश के शासन में मौलिक माना जाता है।
  • इनका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियाँ बनाना है जिनके तहत नागरिक एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकें।
  • DPSP भारत के संविधान के भाग IV में, अनुच्छेद 36 से 51 तक शामिल हैं।
  • प्रस्तावना
    • भारत के संविधान की प्रस्तावना एक संक्षिप्त परिचयात्मक कथन है जो दस्तावेज़ के मार्गदर्शक उद्देश्य और सिद्धांतों को निर्धारित करता है।
    • यह इंगित करता है कि संविधान अपना अधिकार किस स्रोत से प्राप्त करता है और उन उद्देश्यों को बताता है जिन्हें संविधान स्थापित और बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
    • प्रस्तावना भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करती है।
    • यह अपने नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता का आश्वासन देता है, और उनके बीच भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
  •  मौलिक अधिकार
    • मौलिक अधिकार उन अधिकारों का एक समूह है जिन्हें भारत के संविधान द्वारा व्यक्तियों के अस्तित्व और विकास के लिए आवश्यक माना जाता है।
    • ये अधिकार अदालतों द्वारा लागू किए जा सकते हैं, विशिष्ट प्रतिबंधों के अधीन।
    • इनमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धर्म की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार और संवैधानिक उपचार का अधिकार शामिल हैं।
    • ये संविधान के भाग III में, अनुच्छेद 12 से 35 तक शामिल हैं।
  • मौलिक कर्तव्य
    • मौलिक कर्तव्य नैतिक दायित्वों का एक समूह है जिसका पालन सभी नागरिकों से देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने और भारत की एकता को बनाए रखने में मदद करने
      की अपेक्षा की जाती है।
    • ये कर्तव्य कानून द्वारा लागू नहीं किए जा सकते हैं लेकिन देश के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारियों की निरंतर याद दिलाते हैं।
    • ये संविधान के भाग IV-A में, अनुच्छेद 51A के तहत शामिल हैं।
    • 11 मौलिक कर्तव्य हैं, जिन्हें 42वें और 86वें संवैधानिक संशोधनों द्वारा जोड़ा गया था।

3. भारत के संविधान के कौन-से अनुच्छेद का संबंध संघ एवं राज्य क्षेत्र (Union and its territory) से है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 1-4
Solution:
  • भारतीय संविधान का भाग I, जो 'संघ और उसका राज्य क्षेत्र' से संबंधित है, अनुच्छेद 1 से 4 तक फैला हुआ है।
  • अनुच्छेद 1: संघ का नाम और राज्य क्षेत्र।
  • अनुच्छेद 2: नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।
  • अनुच्छेद 3: नए राज्यों का निर्माण और मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन।
  • अनुच्छेद 4: अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानूनों के संबंध में।
  • अनुच्छेद 1: भारत का नाम और क्षेत्र
    • अनुच्छेद 1(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि "भारत, अर्थात् इण्डिया, राज्यों का संघ होगा।" यह भारत को एक संघीय ढांचे में स्थापित करता है, जहां राज्य संविधान पर निर्भर हैं।
    • अनुच्छेद 1(2) भारत के राज्यक्षेत्र को तीन भागों में वर्गीकृत करता है: (1) राज्य, (2) संघ राज्यक्षेत्र (केंद्रशासित प्रदेश), तथा (3) ऐसे अन्य क्षेत्र जिन्हें भारत सरकार अधिग्रहित कर सकती है।
    • भारत का क्षेत्र संघ से व्यापक है, क्योंकि इसमें केंद्रशासित प्रदेश और भविष्य के अधिग्रहीत क्षेत्र शामिल हैं।​
  • अनुच्छेद 2: नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
    • यह अनुच्छेद संसद को शक्ति देता है कि वह नए राज्यों को भारत संघ में प्रवेश दिला सके या स्थापित कर सके।
    • उदाहरणस्वरूप, 1975 में सिक्किम को अनुच्छेद 2 के तहत शामिल किया गया, जो 36वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा पूर्ण राज्य बना।
    • यह प्रावधान विदेशी क्षेत्रों को संघ में मिलाने के लिए भी उपयोगी है।​
  • अनुच्छेद 3: राज्यों का गठन और परिवर्तन
    • अनुच्छेद 3 संसद को व्यापक अधिकार प्रदान करता है, जिसमें नए राज्य बनाना, किसी राज्य की सीमाओं में वृद्धि या कमी करना, दो या अधिक राज्यों का विलय, राज्य का नाम बदलना या उसके क्षेत्र को प्रभावित करना शामिल है।
    • संसद ऐसा विधेयक पास कर सकती है, बशर्ते प्रभावित राज्य विधानसभा की राय ली जाए (जो बाध्यकारी नहीं है)।
    • उदाहरण: 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम से भाषाई आधार पर राज्य बने, जैसे आंध्र प्रदेश; हाल ही में जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।​​
  • अनुच्छेद 4: संशोधन की प्रक्रिया
    • अनुच्छेद 4 स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 2 या 3 के अधीन पारित कानून संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368) के रूप में नहीं गिने जाएंगे, बल्कि साधारण बहुमत से पारित हो सकेंगे।
    • ये कानून पहली एवं चौथी अनुसूची में आवश्यक संशोधन भी कर सकते हैं। इससे संसद को लचीला क्षेत्रीय पुनर्गठन का अधिकार मिलता है।​​
    • ये अनुच्छेद भारतीय संघीयता की एकात्मक झुकाव वाली प्रकृति दर्शाते हैं, जहां केंद्र को राज्यों पर प्रभुत्व प्राप्त है।
    • संविधान सभा की बहसों में यह सुनिश्चित किया गया कि राज्य संप्रभु न हों, बल्कि संघ का हिस्सा बने रहें।​

4. निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में इंडिया को भारत भी कहा गया है? [C.P.O.S.I. (T-I) 1 जुलाई, 2017 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 1
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1(1) स्पष्ट रूप से कहता है: "इंडिया, अर्थात् भारत, राज्यों का एक संघ होगा।" (India, that is Bharat, shall be a Union of States.)
  • डिया को भारत भी कहने वाला अनुच्छेद, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1(1) है।​
  • सही अनुच्छेद कौनसा है?
    • प्रश्न “निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में इंडिया को भारत भी कहा गया है?” का सही उत्तर अनुच्छेद 1 है।​
    • संविधान के भाग I में स्थित अनुच्छेद 1(1) में देश के नाम के रूप में यह स्पष्ट किया गया है कि “इंडिया, अर्थात् भारत” एक राज्यों का संघ है।​
  • अनुच्छेद 1(1) की मुख्य बातें
    • अनुच्छेद 1(1) दो बातों को एक साथ स्थापित करता है
    • देश का नाम “इंडिया” और “भारत” दोनों मान्य हैं;
    • यह कि यह राष्ट्र “राज्यों का संघ” (Union of States) है, न कि साधारण महासंघ।​
    • यही कारण है कि संवैधानिक और आधिकारिक संदर्भों में देश के लिए India तथा Bharat दोनों नाम प्रयोग किए जाते हैं, और दोनों समान रूप से वैध संवैधानिक नाम हैं।​
  • अन्य अनुच्छेद क्यों नहीं?
    • अनुच्छेद 2 नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना से, अनुच्छेद 3 राज्यों की सीमाओं/नाम में परिवर्तन से और अनुच्छेद 4 संबंधित विधियों एवं अनुसूचियों में संशोधन से जुड़ा है; ये देश के नाम “इंडिया अर्थात् भारत” को परिभाषित नहीं करते।​
    • इस प्रकार, “इंडिया को भारत भी कहा गया है” यह विशिष्ट उल्लेख केवल अनुच्छेद 1(1) में मिलता है, इसलिए बहुविकल्पीय प्रश्नों में विकल्पों में से सही विकल्प अनुच्छेद 1 ही माना जाता है।​

5. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद नए राज्यों के गठन और मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 3
Solution:
  • विवरण:
    • अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून द्वारा:
    • किसी राज्य से क्षेत्र अलग करके या दो या दो से अधिक राज्यों को मिलाकर एक नया राज्य बना सकती है।
    • किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ा सकती है या घटा सकती है।
    • किसी राज्य की सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है।
    • किसी राज्य के नाम में परिवर्तन कर सकती है।
  • विधेयक प्रक्रिया
    • किसी भी ऐसे विधेयक को संसद के किसी सदन में तभी पेश किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की सिफारिश हो।
    • यदि विधेयक किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम को प्रभावित करता है
    • तो राष्ट्रपति उस राज्य के विधानमंडल को अपने विचार व्यक्त करने के लिए निर्दिष्ट अवधि (या विस्तारित अवधि) में संदर्भित करता है।
    • विधेयक पेश होने से पहले यह अवधि समाप्त होनी चाहिए, लेकिन राज्य के विचार बाध्यकारी नहीं होते—संसद अंतिम निर्णय लेती है।​​
  • ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व
    • यह अनुच्छेद संविधान के मूल पाठ में था, लेकिन 1955 के संविधान (पांचवां संशोधन) अधिनियम ने राष्ट्रपति की संदर्भ प्रक्रिया को मजबूत किया।
    • अनुच्छेद 1 (राज्य क्षेत्र) और अनुच्छेद 2 (नए राज्यों का प्रवेश) से भिन्न, अनुच्छेद 3 मौजूदा राज्यों के पुनर्गठन पर केंद्रित है।
    • इसका उपयोग तेलंगाना (2014), उत्तराखंड (2000) जैसे राज्यों के निर्माण में हुआ।​
  • न्यायिक व्याख्या
    • सर्वोच्च न्यायालय ने फैसलों में स्पष्ट किया कि राज्य विधानमंडल के विचार केवल सलाहकारी हैं, और संसद की शक्ति असीमित है
    • जब तक मौलिक अधिकार प्रभावित न हों। स्पष्टीकरण 2 के तहत, राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के भागों को मिलाकर नए गठन की अनुमति है।
    • यह संघीय एकता बनाए रखते हुए विकेंद्रीकरण को संभव बनाता है।​

6. 2022 तक की स्थिति के अनुसार, भारत में ....... संघ राज्यक्षेत्र हैं। [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) 8
Solution:
  • 2022 की स्थिति के अनुसार, भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश (संघ राज्यक्षेत्र) हैं।
  • यह स्थिति तब बनी जब दमन और दीव, तथा दादरा और नगर हवेली को मिलाकर एक एकल केंद्र शासित प्रदेश (दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव) बना दिया गया।
  • 8 संघ राज्यक्षेत्रों के नाम
    • दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली)
    • चंडीगढ़
    • पुडुचेरी
    • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
    • लक्षद्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव (दो पुराने यूटी के विलय के बाद बने)
    • जम्मू और कश्मीर
    • लद्दाख
    • इन सभी के नाम और सीमाएँ संविधान की पहली अनुसूची में दी गई हैं।​
  • संख्या 8 कैसे बनी
    • पहले लंबे समय तक भारत में 29 राज्य और 7 केंद्रशासित प्रदेश थे।​
    • 2019 में जम्मू और कश्मीर राज्य को पुनर्गठित कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों – जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख – में बाँटा गया, जिससे यूटी की संख्या अस्थायी रूप से 9 हो गई।​
    • इसके बाद दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव दो अलग‑अलग यूटी को मिलाकर एक नया केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया, जिससे कुल संख्या फिर 8 पर स्थिर हो गई।​
  • राज्य और संघ राज्यक्षेत्र में अंतर
    • राज्य अपने निर्वाचित विधानमंडल और अपेक्षाकृत व्यापक स्वायत्त शक्तियों के साथ संघीय ढाँचे के पूर्ण सदस्य होते हैं।​
    • संघ राज्यक्षेत्र सीधे केंद्र सरकार के अधीन होते हैं; कुछ में चुनी हुई विधानसभा होती है
    • (जैसे दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू‑कश्मीर), जबकि कुछ पूरी तरह से केंद्र द्वारा नियुक्त प्रशासक/उपराज्यपाल द्वारा संचालित होते हैं।​

7. भारतीय संदर्भ में 'राज्यों के संघ' के अर्थ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन गलत है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भारतीय संघ इसमें शामिल होने के लिए संप्रभु इकाइयों द्वारा एक समझौते का परिणाम था।
Solution:
  • यह कथन गलत है। भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है, जैसा कि अमेरिका जैसे परिसंघ (Federation) में होता है।
  • सही अर्थ (डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार):
    • भारतीय संघ समझौते का परिणाम नहीं है (कथन (d) गलत है)।
    • किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है (कथन (b) सही है)।
  • राज्यों के संघका सही अर्थ
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को “राज्यों का संघ” कहा गया है, न कि “संघीय समझौते से बना संघ”।
    • इसका अर्थ है कि संविधान ने ही राज्यों का सृजन किया है और उनका अस्तित्व संघ पर निर्भर है।​
    • भारत में राज्य संविधान द्वारा निर्मित इकाइयाँ हैं, न कि पहले से स्वतंत्र संप्रभु राज्य जिन्होंने किसी संधि पर हस्ताक्षर कर संघ बनाया हो।​
  • कौनसा कथन गलत क्यों है
    • यह कहना कि “भारतीय संघ संप्रभु इकाइयों के आपसी समझौते का परिणाम है” वस्तुतः गलत है, क्योंकि न तो राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार है
    • उनका संघ में सम्मिलन किसी संधि या कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित है।​
    • भारत की संघीय व्यवस्था को अक्सर “क्वासी‑फेडरल” या “केन्द्राभिमुख (unitary with federal features)” कहा जाता है
    • यहाँ अंतिम संप्रभुता भारतीय संघ (एकक राष्ट्र) में निहित है, न कि राज्यों के समूह में जो अलग‑अलग सार्वभौम हों।​
  • राज्यों का संघके मुख्य बिंदु
    • संविधान के तहत संसद को राज्यों की सीमाओं, नाम और क्षेत्र में परिवर्तन का अधिकार है; यह भी दिखाता है कि राज्य संघ के अधीन हैं, उससे ऊपर नहीं।​
    • किसी भी राज्य को भारत से पृथक होने का अधिकार नहीं है, इसलिए भारत को “indestructible Union of destructible states” (अविनाशी संघ, परिवर्तनीय राज्य) के रूप में समझा जाता है, न कि “indestructible union of indestructible states” जैसा कि शुद्ध संघीय प्रणालियों में होता है।​