महान्यायवादी, महाधिवक्ता और नियंत्रक महालेखापरीक्षक

Total Questions: 11

1. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत के महान्यायवादी का कर्तव्य है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) कानूनी मामलों पर भारत सरकार को सलाह देना
Solution:
  • भारत के महान्यायवादी (Attorney-General for India) का कर्तव्य संविधान के अनुच्छेद 76 में वर्णित है।
  • वह भारत सरकार के सर्वोच्च कानूनी अधिकारी हैं।
  • उनका मुख्य कर्तव्य कानूनी मामलों पर भारत सरकार को सलाह देना और राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए कानूनी स्वरूप के अन्य कर्तव्यों का पालन करना है।
  • वह भारत सरकार से जुड़े मामलों में उच्चतम न्यायालय सहित देश के किसी भी न्यायालय में सरकार का प्रतिनिधित्व भी करते हैं।
  • भारत के महान्यायवादी का मुख्य कर्तव्य केंद्र सरकार को विधिक मामलों पर सलाह देना और अदालतों में उसका प्रतिनिधित्व करना है।
  • यह पद संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत स्थापित है।​
  • नियुक्ति और योग्यता
    • महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। योग्यता सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की समान है
    • अर्थात कम से कम 10 वर्ष उच्च न्यायालय में वकालत का अनुभव या न्यायिक सेवा। कार्यकाल निश्चित नहीं होता और राष्ट्रपति की इच्छा पर निर्भर है।​
  • प्रमुख कर्तव्य
    • राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित विधिक मामलों पर भारत सरकार को सलाह देना।​
    • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में भारत सरकार की ओर से उपस्थित होना, विशेषकर उन मामलों में जहां सरकार पक्षकार हो।​
    • अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति के न्यायिक संदर्भों में सरकार का प्रतिनिधित्व करना।​
    • राष्ट्रपति द्वारा सौंपे अन्य विधिक कर्तव्यों का पालन, जैसे संविधान या कानून द्वारा प्रदत्त कार्य।​
  • अधिकार और विशेषाधिकार
    • महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों में बोलने का अधिकार है (अनुच्छेद 88), लेकिन मतदान का नहीं।
    • सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। आधिकारिक कर्तव्यों में संसद सदस्यों जैसी उन्मुक्तियां मिलती हैं।​
  • सीमाएं
    • भारत सरकार के विरुद्ध आपराधिक मामलों में अभियुक्तों की पैरवी नहीं कर सकते।
    • सरकार की अनुमति बिना कंपनी निदेशक पद स्वीकार नहीं। विधि एवं न्याय मंत्रालय के माध्यम से ही सलाह देनी होती है।
    • ये सीमाएं स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती हैं।

2. सितंबर, 2022 में किसे भारत के नए महान्यायवादी के रूप में नियुक्त किया गया है? [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) आर. वेंकटरमणी
Solution:
  • आर. वेंकटरमणी को 1 अक्टूबर 2022 से प्रभावी, भारत के 16वें महान्यायवादी के रूप में नियुक्त किया गया था।
  • उन्होंने के.के. वेणुगोपाल का स्थान लिया। उनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की गई थी और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (Pleasure) पद धारण करते हैं।
  • नियुक्ति का विवरण
    • भारत के राष्ट्रपति ने 28 सितंबर 2022 को वरिष्ठ अधिवक्ता आर. वेंकटरमणि को तीन वर्ष की अवधि के लिए महान्यायवादी नियुक्त किया।
    • कानून मंत्री किरेन रिजिजू के कार्यालय ने ट्वीट के माध्यम से इसकी आधिकारिक पुष्टि की।​
  • पृष्ठभूमि और योग्यता
    • आर. वेंकटरमणि सुप्रीम कोर्ट में दशकों से प्रैक्टिस कर रहे वरिष्ठ वकील हैं
    • जिनका संवैधानिक, सिविल और आपराधिक कानून में गहन अनुभव है। वे विधि आयोग के सदस्य रह चुके हैं
    • न्यायमूर्ति एम.एन. वेंकटचलैया की अध्यक्षता वाली संविधान समीक्षा आयोग की उप-समिति में शामिल रहे।
    • वे अंतरराष्ट्रीय कानून सोसाइटी के आजीवन सदस्य हैं तथा घरेलू कानून में अंतरराष्ट्रीय उपकरणों पर पुस्तक लिख रहे हैं।​
  • महान्यायवादी की भूमिका
    • भारत का महान्यायवादी सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है
    • सुप्रीम कोर्ट में उसका प्रतिनिधित्व करता है। संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त यह पद तीन वर्ष का होता है
    • जिसे विस्तार योग्य बनाया जा सकता है। यह नियुक्ति सरकार के कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है।

3. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) की बात करता है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 165
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 165 राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General for the State) के पद से संबंधित है।
  • महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होता है।
  • उसकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और उसका कर्तव्य कानूनी मामलों पर राज्य सरकार को सलाह देना है।
  • यह पद केंद्रीय स्तर पर महान्यायवादी के पद के समान है।
  • अनुच्छेद 165 का पाठ
    • अनुच्छेद 165 के खंड (1) में कहा गया है कि प्रत्येक राज्य का राज्यपाल एक ऐसे व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करेगा जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य हो।
    • खंड (2) महाधिवक्ता के मुख्य कर्तव्यों का उल्लेख करता है: राज्य सरकार को विधि संबंधी विषयों पर सलाह देना, राज्यपाल द्वारा सौंपे गए
    • अन्य विधिक कर्तव्यों का पालन करना, तथा संविधान या अन्य कानूनों द्वारा प्रदत्त कार्यों का निर्वहन करना।
    • खंड (3) स्पष्ट करता है कि महाधिवक्ता राज्यपाल की इच्छा के अनुसार पद पर रहता है और उसका पारिश्रमिक राज्यपाल द्वारा निर्धारित किया जाता है।​
  • नियुक्ति और योग्यता
    • महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, जो सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह पर होती है।
    • योग्यता अनुच्छेद 217 के समान है: व्यक्ति को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अर्ह होना चाहिए
    • अर्थात् कम से कम 10 वर्ष अधिवक्ता के रूप में अनुभव या न्यायिक सेवा। यह पद राज्य का सर्वोच्च विधिक पद है
    • जो केंद्र के महान्यायवादी (अनुच्छेद 76) के समकक्ष है।​
  • कर्तव्य और अधिकार
    • महाधिवक्ता राज्य सरकार का विधिक सलाहकार होता है और उच्च न्यायालयों में राज्य का प्रतिनिधित्व करता है।
    • अनुच्छेद 177 के तहत वह राज्य विधानसभा में भाग ले सकता है, किंतु मतदान का अधिकार नहीं।
    • अन्य कर्तव्यों में विधायी प्रस्तावों की वैधता जांचना, सरकारी मुकदमों में पैरवी और संवैधानिक मामलों पर राय देना शामिल है।​
  • कार्यकाल और पदत्याग
    • महाधिवक्ता का कार्यकाल राज्यपाल की इच्छा पर निर्भर है, अर्थात् कोई निश्चित अवधि नहीं।
    • पदत्याग के लिए राज्यपाल को हटाने का पूर्ण अधिकार है, किंतु हटाने की कोई संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित नहीं।
    • वेतन राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित होता है और पद के दौरान बदला नहीं जा सकता।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • महाधिवक्ता विधानसभा सत्रों में सरकार की ओर से स्पष्टीकरण दे सकता है।
    • यह पद संवैधानिक है तथा संघीय ढांचे में राज्य की विधिक स्वायत्तता सुनिश्चित करता है।
    • उदाहरण: विभिन्न राज्यों में वर्तमान महाधिवक्ता उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश या वरिष्ठ अधिवक्ता होते हैं।​​

4. भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति कैसे/किसके द्वारा की जाती है? [Phase-XI 30 जून, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जैसा कि अनुच्छेद 76(1) में उल्लेखित है।
  • महान्यायवादी को ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए योग्य हो।
  • वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं और राष्ट्रपति ही उनका पारिश्रमिक निर्धारित करते हैं।
  • पात्रता मानदंड
    • महान्यायवादी बनने के लिए व्यक्ति को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त होने योग्य होना चाहिए।
    • इसमें भारत का नागरिक होना अनिवार्य है, साथ ही या तो 5 वर्ष उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अनुभव हो
    • या 10 वर्ष उच्च न्यायालय में वकालत का अनुभव हो, या राष्ट्रपति की राय में वह न्यायिक मामलों का प्रख्यात विद्वान हो।​
  • नियुक्ति प्रक्रिया
    • नियुक्ति औपचारिक रूप से राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, लेकिन वास्तविक चयन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
    • सरकार कानून मंत्री के माध्यम से संभावित उम्मीदवारों पर विचार करती है, जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता या पूर्व न्यायाधीश शामिल होते हैं।
    • एक बार चयनित होने पर राष्ट्रपति वारंट जारी करता है, और पद ग्रहण करने के लिए शपथ दिलाई जाती है।​
  • कार्यकाल और पद त्याग
    • इस पद का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता; यह राष्ट्रपति की इच्छा पर निर्भर करता है।
    • महान्यायवादी अपनी सहमति से या राष्ट्रपति को संबोधित इस्तीफा देकर पद छोड़ सकता है।
    • कार्यकाल को बढ़ाया भी जा सकता है, जैसा कि पूर्व महान्यायवादी के.के. वेणुगोपाल के मामले में हुआ।​
  • महत्वपूर्ण भूमिकाएं
    • महान्यायवादी भारत का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जो केंद्र सरकार को कानूनी सलाह देता है
    • सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों में सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। वह संसद में बोल सकता है
    • लेकिन मतदान का अधिकार नहीं रखता। यह पद संवैधानिक है और स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।​

5. भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के वेतन, भत्तों और पेंशन को ....... पर प्रभारित किया जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) भारत की संचित निधि
Solution:
  • भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) के वेतन, भत्ते और पेंशन को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित व्यय (Charged Expenditure) किया जाता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 148(6) के तहत, यह सुनिश्चित किया जाता है कि CAG के खर्च पर संसद में चर्चा तो हो सकती है
  • लेकिन मतदान नहीं किया जा सकता। यह प्रावधान CAG के पद की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
  • संवैधानिक आधार
    • अनुच्छेद 148(6) स्पष्ट रूप से कहता है कि CAG के कार्यालय के प्रशासनिक व्यय, जिसमें उसके वेतन, भत्ते, पेंशन तथा उसके अधीनस्थ कर्मचारियों के वेतन-भत्ते शामिल हैं
    • वे सभी भारत की संचित निधि पर सीधे भारित होते हैं। संचित निधि एक विशेष कोष है
    • जिसमें राष्ट्रपति के पूर्वानुमोदन वाले व्यय दर्ज होते हैं और ये संसद के मत पर निर्भर नहीं होते।
    • इससे CAG कार्यालय को सरकार के राजनीतिक दबाव से मुक्त रखा जाता है।​
  • संचित निधि का महत्व
    • संचित निधि (Consolidated Fund of India) संविधान के अनुच्छेद 266 के अंतर्गत आती है
    • जहां सरकार के सभी राजस्व, उधार और अन्य प्राप्तियां जमा होती हैं। CAG के खर्चों को इसी पर भारित करने से संसदीय अनुदान की आवश्यकता नहीं पड़ती
    • जिससे उसकी स्वायत्तता बनी रहती है। उदाहरणस्वरूप, CAG का वेतन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होता है
    • जो संसद द्वारा तय किया जाता है, लेकिन इसमें नियुक्ति के बाद कोई हानिकर परिवर्तन नहीं हो सकता।​
  • वेतन और भत्तों की संरचना
    • CAG का वेतन दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है, जो वर्तमान में लगभग ₹2.50 लाख प्रति माह (मुख्य न्यायाधीश के बराबर) है
    • जिसमें महंगाई भत्ता, आवास भत्ता आदि शामिल होते हैं। पेंशन सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए निश्चित राशि होती है
    • जैसे पूर्व में ₹15,000 वार्षिक या संशोधित दरें। ये सभी व्यय संचित निधि से ही वितरित होते हैं, बिना किसी बहस के।​
  • स्वतंत्रता के अन्य पहलू
    • CAG को पदछोड़ने के बाद सरकार या राज्य के किसी पद पर नियुक्ति नहीं की जा सकती, जो उनकी निष्पक्षता को मजबूत करता है।
    • वर्तमान CAG गिरीश चंद्र मुर्मू (2020 से) भी इसी व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है
    • CAG बिना किसी वित्तीय बाधा के सरकारी खर्चों का स्वतंत्र audit कर सके।​

6. एक स्थायी समिति संसद के निम्नलिखित सदनों में से किस सदन के सदस्यों से मिलकर बनी एक समिति है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

  • 1. राज्य सभा
  • 2. लोक सभा
  • 3. विधानसभा
Correct Answer: (c) राज्य सभा और लोक सभा, दोनों
Solution:
  • संसद की स्थायी समितियाँ (Standing Committees) वे समितियाँ होती हैं जो स्थायी प्रकृति की होती हैं और निरंतर कार्य करती हैं।
  • ये समितियाँ आमतौर पर लोक सभा और राज्य सभा दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनी होती हैं।
  • उदाहरण के लिए, वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समितियाँ (जैसे अनुमान समिति, लोक लेखा समिति) दोनों सदनों के सदस्यों को शामिल करती हैं
  • जो संसद के व्यापक पर्यवेक्षण कार्य को सुनिश्चित करता है।
  •  लेकिन अधिकांश मामलों में ये सदन-विशिष्ट होती हैं, अर्थात् प्रत्येक सदन अपनी अलग स्थायी समितियाँ गठित करता है।
  • ये समितियाँ संसद के नियमों के अनुसार स्थायी रूप से कार्य करती रहती हैं
  • विधायी कार्यों, वित्तीय अनुमानों तथा सरकारी नीतियों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।​
  • स्थायी समितियों के प्रकार
    • स्थायी समितियाँ मुख्यतः वित्तीय, विभागीय स्थायी समितियाँ, नियमित समितियाँ आदि श्रेणियों में विभाजित होती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, लोकसभा में सार्वजनिक खाते समिति (22 सदस्य, सभी लोकसभा से), अनुमान समिति (30 सदस्य, सभी लोकसभा से) जैसी समितियाँ केवल निचले सदन के सदस्यों से बनती हैं।
    • वहीं, याचिका समिति, विशेषाधिकार समिति और कार्य मंत्रणा समिति जैसी समितियाँ दोनों सदनों में अलग-अलग गठित होती हैं
    • लोकसभा में 15 सदस्य और राज्यसभा में 10 सदस्य।​
    • विभागीय स्थायी समितियाँ (24 समितियाँ) दोनों सदनों के सदस्यों का मिश्रण होती हैं
    • जिसमें प्रत्येक समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य होते हैं, जो मंत्रालयों के कार्यों की निगरानी करती हैं।
    • ये समितियाँ विधेयकों की जांच, बजट अनुमानों पर विचार तथा नीतिगत मुद्दों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करती हैं।​​
  • गठन की प्रक्रिया
    • स्थायी समितियों का गठन संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अनुच्छेद 118(1) के तहत नियमावली के अनुसार किया जाता है।
    • लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा सभापति इनके अध्यक्ष नियुक्त करते हैं, तथा सदस्यता दलीय अनुपात के आधार पर तय होती है।
    • ये समितियाँ वर्ष भर कार्य करती रहती हैं और सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करती हैं।​
  • महत्वपूर्ण उदाहरण
    • लोकसभा-विशिष्ट: अनुमान समिति—सरकारी व्यय की अर्थवत्ता जांचती है।​
    • दोनों सदनों में: विशेषाधिकार समिति—सदन एवं सदस्यों के अधिकारों की रक्षा।​
      ये समितियाँ संसद के जटिल कार्यभार को सुगम बनाती हैं
    • क्योंकि पूर्ण सदन में हर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा संभव नहीं।​​

7. भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग का प्रशासनिक प्रमुख कौन होता है? [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक
Solution:
  • नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General - CAG) भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग (Indian Audit and Accounts Department) के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं।
  • यह विभाग संघ और राज्यों के खातों का ऑडिट करता है। CAG अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र प्राधिकरण है
  • जो सरकारी खर्चों की लेखा परीक्षा करके लोक वित्त के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
  • लेकिन अधिकांश मामलों में ये सदन-विशिष्ट होती हैं, अर्थात् प्रत्येक सदन अपनी अलग स्थायी समितियाँ गठित करता है।
  • ये समितियाँ संसद के नियमों के अनुसार स्थायी रूप से कार्य करती रहती हैं
  • विधायी कार्यों, वित्तीय अनुमानों तथा सरकारी नीतियों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।​
  • स्थायी समितियों के प्रकार
    • स्थायी समितियाँ मुख्यतः वित्तीय, विभागीय स्थायी समितियाँ, नियमित समितियाँ आदि श्रेणियों में विभाजित होती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, लोकसभा में सार्वजनिक खाते समिति (22 सदस्य, सभी लोकसभा से), अनुमान समिति (30 सदस्य, सभी लोकसभा से) जैसी समितियाँ केवल निचले सदन के सदस्यों से बनती हैं।
    • वहीं, याचिका समिति, विशेषाधिकार समिति और कार्य मंत्रणा समिति जैसी समितियाँ दोनों सदनों में अलग-अलग गठित होती हैं
    • लोकसभा में 15 सदस्य और राज्यसभा में 10 सदस्य।​
    • विभागीय स्थायी समितियाँ (24 समितियाँ) दोनों सदनों के सदस्यों का मिश्रण होती हैं
    • जिसमें प्रत्येक समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य होते हैं, जो मंत्रालयों के कार्यों की निगरानी करती हैं।
    • ये समितियाँ विधेयकों की जांच, बजट अनुमानों पर विचार तथा नीतिगत मुद्दों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करती हैं।​​
  • गठन की प्रक्रिया
    • स्थायी समितियों का गठन संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अनुच्छेद 118(1) के तहत नियमावली के अनुसार किया जाता है।
    • लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा सभापति इनके अध्यक्ष नियुक्त करते हैं, तथा सदस्यता दलीय अनुपात के आधार पर तय होती है।
    • ये समितियाँ वर्ष भर कार्य करती रहती हैं और सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करती हैं।​
  • महत्वपूर्ण उदाहरण
    • लोकसभा-विशिष्ट: अनुमान समिति—सरकारी व्यय की अर्थवत्ता जांचती है।​
    • दोनों सदनों में: विशेषाधिकार समिति—सदन एवं सदस्यों के अधिकारों की रक्षा।​
      ये समितियाँ संसद के जटिल कार्यभार को सुगम बनाती हैं, क्योंकि पूर्ण सदन में हर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा संभव नहीं।

8. भारत में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की नियुक्ति के लिए कौन उत्तरदायी है? [C.P.O.S.I. 7 जून, 2016 (I-पाली), C.P.O.S.I. 4 जून, 2016 (I-पाली), MTS (T-I) 16 अगस्त, 2019 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • अनुच्छेद 148 के अनुसार, CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह अपने पद से केवल उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है
  • जिस तरह से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है
  • यह प्रावधान CAG की कार्यकाल सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
  • नियुक्ति की प्रक्रिया
    • राष्ट्रपति द्वारा CAG की नियुक्ति एक अधिपत्र (warrant under his hand and seal) के माध्यम से की जाती है।
    • यह नियुक्ति सामान्यतः प्रधानमंत्री की सिफारिश पर आधारित होती है, हालांकि संविधान में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
    • CAG का पद स्वतंत्र रखने के लिए इसे कार्यपालिका या विधायिका के प्रत्यक्ष नियंत्रण से बाहर रखा गया है।​
  • कार्यकाल और शर्तें
    • CAG का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है या 65 वर्ष की आयु प्राप्त होने तक, जो भी पहले हो।
    • पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है
    • अर्थात् संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर ही हटाया जा सकता है।
    • वेतन और भत्ते संचित निधि (Consolidated Fund of India) से दिए जाते हैं, जो इसे वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करता है।​
  • CAG की भूमिका और महत्व
    • CAG केंद्र और राज्य सरकारों के सभी खातों की लेखापरीक्षा करता है
    • जिसमें सरकारी कंपनियां, निगम और राजस्व से वित्त पोषित निकाय शामिल हैं।
    • अनुच्छेद 149-151 इसके कर्तव्यों, शक्तियों और रिपोर्ट प्रस्तुति को नियंत्रित करते हैं।
    • CAG की रिपोर्टें राष्ट्रपति या राज्यपाल के माध्यम से संसद या विधानमंडलों में प्रस्तुत होती हैं
    • जहां लोक लेखा समिति (PAC) द्वारा उनकी जांच की जाती है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • स्वतंत्रता पूर्व 1936 के लेखा एवं लेखा परीक्षा आदेश के तहत यह व्यवस्था थी
    • जिसे संविधान ने अपनाया। भारत के प्रथम CAG वी. नारहरि राव (1948-1954) थे।
    • वर्तमान CAG के. संजय मूर्ति हैं, जो 2024 में नियुक्त हुए। CAG लोकतंत्र का संरक्षक माना जाता है
    • जो वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाता है।​

9. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 76 निम्नलिखित में से किसके कार्यालय से संबंधित है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) भारत के महान्यायवादी
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी (Attorney-General for India) के कार्यालय से संबंधित है।
  • यह अनुच्छेद महान्यायवादी की नियुक्ति, योग्यता, कर्तव्य और पारिश्रमिक का प्रावधान करता है।
  • महान्यायवादी केंद्र सरकार का प्रथम विधि अधिकारी होता है।
  • नियुक्ति और योग्यताएं
    • महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद के लिए योग्य व्यक्ति होता है।
    • योग्यताओं में शामिल हैं: भारतीय नागरिक होना, किसी उच्च न्यायालय में 5 वर्ष न्यायाधीश के रूप में या 10 वर्ष अधिवक्ता के रूप में अनुभव, या राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यात विधिवेत्ता माना जाना।
    • कार्यकाल निश्चित नहीं है; यह राष्ट्रपति की इच्छा पर निर्भर करता है
    • अर्थात् पद से हटाया जाना संभव है बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के।​
  • कर्तव्य और शक्तियां
    • महान्यायवादी का मुख्य कर्तव्य भारत सरकार को विधिक मामलों पर सलाह देना है।
    • वह सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करता है, अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति के संदर्भों में भाग लेता है
    • उच्च न्यायालयों में भी सरकार की ओर से उपस्थित होता है। अन्य कर्तव्यों में संसद या राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित विधिक सलाह शामिल है
    • लेकिन वह स्वतंत्र रूप से मुकदमे दायर या वापस नहीं ले सकता।​
  • महत्व और स्वतंत्रता
    • यह पद सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार बनाता है, जो विधायी प्रस्तावों की वैधता सुनिश्चित करता है।
    • हालांकि संवैधानिक रूप से स्वतंत्र, व्यवहार में यह राजनीतिक नियुक्ति मानी जाती है।
    • वर्तमान महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी हैं, जिनका कार्यकाल 2025 तक विस्तारित हुआ।
    • अनुच्छेद 76 लोकतंत्र में विधि प्रमुखता को मजबूत करता है।

10. भारत का सर्वोच्च विधि अधिकारी कौन होता है? [CHSL (T-I) 15 अगस्त, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) भारत का महान्यायवादी
Solution:
  • भारत का महान्यायवादी (Attorney-General for India) देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी (Highest Law Officer) होता है।
  • जैसा कि अनुच्छेद 76 में प्रावधान है, वह भारत सरकार को कानूनी मामलों पर सलाह देता है और केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व देश के सभी न्यायालयों में करता है।
  • सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया महान्यायवादी की सहायता करते हैं, लेकिन वह सर्वोच्च विधि अधिकारी नहीं होते।
  • नियुक्ति और योग्यता
    • महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह पर की जाती है।
    • वह व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने योग्य होना चाहिए, अर्थात् कम से कम 5 वर्ष उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका हो
    •  10 वर्ष उच्च न्यायालय में वकालत की हो, या राष्ट्रपति द्वारा एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता माना गया हो।
    • कार्यकाल संविधान द्वारा निश्चित नहीं है; वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है और इस्तीफा राष्ट्रपति को देता है।​
  • कर्तव्य और अधिकार
    • महान्यायवादी को भारत सरकार को कानूनी सलाह देनी होती है, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में सरकार का प्रतिनिधित्व करना होता है
    • राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए अन्य कानूनी कार्य निभाने होते हैं। उसे संसद के दोनों सदनों या समितियों में भाग लेने और बोलने का अधिकार है
    • लेकिन मतदान का नहीं। अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति के न्यायिक संदर्भों में भी प्रतिनिधित्व करता है।​
  • अन्य संबंधित पद
    • राज्यों में महाधिवक्ता (Advocate General) राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है
    • जो अनुच्छेद 165 के तहत राज्यपाल द्वारा नियुक्त होता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायिक प्रमुख है, न कि विधि अधिकारी।
    • सॉलिसिटर जनरल महान्यायवादी के अधीन सहायक होता है।​