विविध (भारतीय राजव्यवस्था) भाग-I

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1. फरवरी, 2022 में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कर्नाटक 45 पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2021 के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया, जिनमें निम्नलिखित में से किससे जुड़ी गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया था और उन्हें आपराधिक बताया गया था? [CHSL (T-I) 03 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) ऑनलाइन गेमिंग
Solution:
  • फरवरी, 2022 में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कर्नाटक पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2021 के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित कर दिया
  • जिनमें ऑनलाइन गेम से जुड़ी गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया था और उन्हें आपराधिक बताया गया था।
  • ऑनलाइन गेमिंग पर कर्नाटक उच्च न्यायालय
    • कौशल-आधारित गेमिंग प्लेटफॉर्म से संबंधित गतिविधियों को प्रतिबंधित और आपराधिक बनाता है।
    • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने तीन मुख्य आधारों पर कर्नाटक पुलिस अधिनियम में परिवर्तन को अमान्य कर दिया:
    • भाषण और अभिव्यक्ति की मौलिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21), स्वतंत्रता और गोपनीयता (अनुच्छेद 19), और व्यापार और वाणिज्य (अनुच्छेद 19) का उल्लंघन।
    • स्पष्ट रूप से मनमाना और अनुचित होने के कारण यह दो अलग-अलग प्रकार के खेलों के बीच अंतर नहीं करता था, अर्थात् कौशल का खेल और मौका का खेल।
    • कौशल का खेल" मौके से ज्यादा एक खिलाड़ी के मानसिक या शारीरिक प्रतिभा के स्तर पर निर्भर करता है।
    • हालांकि, "मौका का खेल मुख्य रूप से किसी भी प्रकार के यादृच्छिक तत्व द्वारा निर्धारित किया जाता है।
    • यहां तक कि जब मौका के खेल में प्रतिभा का उपयोग किया जाता है, तब भी सफलता ज्यादातर मौके से निर्धारित होती है।
    • जबकि मौके के खेल को जुए के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और आम तौर पर पूरे देश में इसे खेलने से मना किया जाता है
    • कौशल-आधारित खेलों को अक्सर अनुमति दी जाती है। चूंकि बेटिंग और गेमिंग राज्य के मुद्दे हैं, इसलिए प्रत्येक राज्य के अपने कानून हैं।
    • राज्य विधायिकाओं के पास ऑनलाइन कौशल-आधारित खेलों को विनियमित करने वाले कानून पारित करने का अधिकार नहीं है।
    • ऑनलाइन गेमिंग की वैधता के संबंध में वर्तमान में कोई पूर्ण कानून नहीं है, जो इसे एक नियामक ग्रे क्षेत्र में रखता है।
      Other Information
  • कर्नाटक पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2021
    • कर्नाटक सरकार ने कौशल आधारित गेमिंग और ऑनलाइन जुए पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून पारित किया।
    • निषिद्ध खेलों में ऑनलाइन रम्मी, पोकर और फैंटसी खेल शामिल हैं, साथ ही साथ कोई भी अन्य खेल जिसमें किसी अज्ञात घटना पर सट्टेबाजी या पैसे को जोखिम में डालना आवश्यक है।
    • तमिलनाडु सरकार द्वारा अधिनियमित इसी तरह के एक नियम को भी कर्नाटक कानून के अलावा, मद्रास उच्च न्यायालय ने अगस्त 2021 में खारिज कर दिया था।
    • केरल उच्च न्यायालय ने सितंबर 2021 में पैसे के लिए खेले जाने पर विशेष रूप से ऑनलाइन रम्मी पर प्रतिबंध लगाने वाली राज्य सरकार की अधिसूचना को भी रद्द कर दिया।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय अधिनियम वर्ष 2005 में पारित किया गया था? [CGL (T-I) 13 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम वर्ष 2005 में पारित किया गया था।
  •  महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने के लिए घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 में पारित किया गया था, जबकि इसे 2006 में लागू किया गया था।
  •  घरेलू हिंसा की शिकार महिला को पुलिस, आश्रय गृहों और चिकित्सा प्रतिष्ठानों की सेवाओं का अधिकार होगा।
  •  उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत एक साथ अपनी शिकायत दर्ज कराने का भी अधिकार है।
    Other Information
  • भारत ने CBD के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए 2002 में जैविक विविधता अधिनियम बनाया।
  • इस अधिनियम का उद्देश्य आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और जैव विविधता के संरक्षण को विनियमित करना है।
  • धन शोधन निवारण अधिनियम संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया और 17 जनवरी 2003 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई।
  • यह 1 जुलाई 2005 को लागू हुआ।
  • प्रतिस्पर्धा अधिनियम वर्ष 2002 में अधिनियमित किया गया था।
  • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
    • भारतीय संसद ने वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act, 2005) पारित किया था
    • जो अधिनियम संख्या 22/2005 के रूप में जाना जाता है। यह कानून 15 जून 2005 को पारित हुआ और 12 अक्टूबर 2005 को पूर्ण रूप से लागू हुआ।
  • मुख्य उद्देश्य
    • यह अधिनियम नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों के रिकॉर्ड तक पहुंच प्रदान करता है
    • जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सभी भारतीय नागरिक सरकारी दस्तावेजों की सूचना मांग सकते हैं।
    • यह आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 को निरस्त करता है।
  • अन्य 2005 अधिनियम
    • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम भी 2005 में पारित हुआ, लेकिन 26 अक्टूबर 2006 को लागू हुआ। जैव विविधता अधिनियम 2002 का है।
  • प्रभाव
    • RTI ने लाखों आवेदनों के माध्यम से शासन में सुधार लाया, औसतन प्रतिदिन 4800 से अधिक RTI दाखिल होते हैं।

3. ....... सप्तपदी अनुष्ठान के पूरा होने पर विवाह को पूर्ण और बाध्यकारी मानता है। [CGL (T-I) 21 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
Solution:
  • हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 सप्तपदी अनुष्ठान के पूरा होने पर विवाह को पूर्ण और बाध्यकारी मानता है।
  • सप्तपदी का अर्थ
    • सप्तपदी संस्कृत शब्द है, जहां 'सप्त' का अर्थ सात और 'पदी' का अर्थ चरण या कदम होता है।
    • प्रत्येक फेरे के साथ वे एक-दूसरे से जीवनभर के वचन लेते हैं, और अग्नि इनकी साक्षी बनती है।​
  • सात फेरों के वचन
    • प्रथम फेरा: भोजन, पोषण और कल्याण के लिए वचन—दंपति एक-दूसरे को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से पोषित करने का संकल्प लेते हैं।​
    • द्वितीय फेरा: बल और समृद्धि—एक-दूसरे के साथ शक्ति और धन-संपदा में वृद्धि करने का वादा।​
    • तृतीय फेरा: विश्वास और निष्ठा—परस्पर पूर्ण विश्वास और वफादारी का संकल्प।​
    • चतुर्थ फेरा: सुख और सम्मान—परिवार में सुख-शांति और आदर बनाए रखने का वचन।​
    • पंचम फेरा: संतान और परिवार—स्वास्थ्यपूर्ण संतान और सुखी गृहस्थ जीवन की कामना।​
    • षष्ठ फेरा: स्वास्थ्य और दीर्घायु—लंबे और आनंदमय जीवन का आशीर्वाद।​
    • सप्तम फेरा: मित्रता और एकता—जीवन भर के साथी और मित्र बनने का अंतिम वचन, जो विवाह को पूर्ण करता है।​
  • कानूनी महत्व
    • हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 7(1) कहती है कि विवाह के लिए प्रचलित संस्कार अनिवार्य हैं। धारा 7(2) स्पष्ट रूप से उल्लेख करती है
    • जहां सप्तपदी रीति का हिस्सा है, वहां सातवें फेरे के पूरा होने पर विवाह कानूनी रूप से पूर्ण और बाध्यकारी हो जाता है।
    • मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जैसे निर्णयों ने भी पुष्टि की है कि बिना सप्तपदी के विवाह वैध नहीं माना जा सकता।​
  • अनुष्ठान की प्रक्रिया
    • विवाह के अंतिम चरण में, दुल्हन का वस्त्र दूल्हे के साथ बंधा जाता है। चावल के सात ढेरों पर वे फेरे लेते हैं
    • जो समृद्धि का प्रतीक हैं। पंडित मंत्रों के साथ वचन दिलाते हैं। क्षेत्रीय भिन्नताओं के बावजूद, सप्तपदी विवाह का मूल तत्व है।

4. संविधान (अनुसूचित जाति और जनजाति) आदेश विधेयक, 2022 को भारत के ....... राज्य में पेश किया गया था। [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) झारखंड
Solution:
  • झारखंड वह राज्य है, जहां संविधान (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) आदेश विधेयक, 2022 पेश किया गया था।
  • इसका उद्देश्य अधिक-से-अधिक समुदायों को शामिल कर उन्हें लाभान्वित करना है।
  • विधेयक का उद्देश्य
    • यह विधेयक संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 और संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1967 में उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रावधानों को संशोधित करने के लिए लाया गया।
    • मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में गोंड समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करने और अन्य समुदायों की सूची में बदलाव करने का प्रावधान था।
    • इससे सामाजिक न्याय सुनिश्चित होता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति की बड़ी आबादी है।​
  • पृष्ठभूमि और प्रक्रिया
    • अनुसूचित जाति-जनजाति की सूची में संशोधन अनुच्छेद 341 और 342 के तहत राष्ट्रपति की शक्ति पर आधारित है।
    • राज्य सरकार की सिफारिश पर जनजातीय मंत्रालय समीक्षा करता है
    • फिर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की मंजूरी और संसदीय विधेयक के माध्यम से बदलाव होता है।
    • यह विधेयक 28 मार्च 2022 को लोकसभा में पेश हुआ और शीतकालीन सत्र में पारित।​
  • महत्वपूर्ण प्रभाव
    • उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में यह संशोधन आरक्षण, प्रतिनिधित्व और कल्याण योजनाओं को प्रभावित करता है।
    • गोंड जैसे समुदायों को ST दर्जा मिलने से शिक्षा, नौकरी और राजनीतिक भागीदारी बढ़ती है।
    • अन्य राज्यों जैसे तमिलनाडु या कर्नाटक के अलग विधेयक हैं
    • लेकिन यह स्पष्ट रूप से उत्तर प्रदेश केंद्रित था।​

5. निम्नलिखित में से कौन-सी कैबिनेट समिति नहीं है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) मंत्रियों के बीच विवाद पर समिति
Solution:
  • कैबिनेट की नियुक्ति समिति (Appointment Committee of the Cabinet), निवेश और विकास संबंधी समिति राजनीतिक मामलों की समिति (Committee on Political Affairs) ये सभी समितियां कैबिनेट समिति हैं
  • परंतु मंत्रियों के बीच विवाद पर समिति (Committee on Conflicts among ministers) कैबिनेट समिति नहीं है।
  • भारत सरकार की कैबिनेट समितियां केंद्र सरकार के प्रमुख नीति-निर्धारक निकाय हैं, जो प्रधानमंत्री द्वारा समय-समय पर गठित की जाती हैं।
  • वर्तमान में (2025 तक) कुल 8 स्थायी कैबिनेट समितियां कार्यरत हैं
  • जो विभिन्न क्षेत्रों जैसे आर्थिक, सुरक्षा, राजनीतिक और विकास संबंधी मामलों पर निर्णय लेती हैं।​
  • वर्तमान कैबिनेट समितियां
    • ये समितियां अतिरिक्त-संवैधानिक हैं, अर्थात संविधान में इनका उल्लेख नहीं है
    • लेकिन ये मंत्रिमंडल के कार्यभार को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मुख्य समितियां निम्न हैं:
    • कैबिनेट की नियुक्ति समिति
    • आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति
    • राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति
    • सुरक्षा पर कैबिनेट समिति
    • संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति
    • निवेश और विकास पर कैबिनेट समिति
    • रोजगार और कौशल विकास पर कैबिनेट समिति आवास पर कैबिनेट समिति
  • कौन-सी समिति कैबिनेट समिति नहीं है?
    • प्रश्न में "निम्नलिखित में से" कहा गया है, लेकिन विकल्प नहीं दिए गए हैं
    • इसलिए सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नों के आधार पर "मंत्रियों के बीच विवादों पर समिति कैबिनेट समिति नहीं है।
    • यह एक अनौपचारिक या काल्पनिक नाम है, जो वास्तविक सूची में शामिल नहीं। वास्तविक समितियां ऊपर सूचीबद्ध हैं
    • कोई "विवाद समाधान समिति" जैसी अलग कैबिनेट समिति अस्तित्व में नहीं।​
  • समितियों की विशेषताएं
    • इन समितियों में 3 से 8 सदस्य होते हैं, जो केवल कैबिनेट मंत्री होते हैं, हालांकि गैर-कैबिनेट मंत्रियों को भी शामिल किया जा सकता है।
    • अधिकांश समितियों (आवास और संसदीय को छोड़कर) की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
    • ये समितियां विशिष्ट मुद्दों पर तेज निर्णय लेती हैं और पूर्ण कैबिनेट को प्रस्ताव भेजती हैं।​

6. निम्नलिखित में से कौन-सी भारतीय राजनीतिक दलीय प्रणाली की विशेषता नहीं है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) एकदलीय प्रणाली
Solution:
  • भारतीय राजनीतिक दलीय प्रणाली की विशेषता एकदलीय प्रणाली नहीं है। एकदलीय प्रणाली एक प्रकार की सरकार है
  • जिसमें देश पर एक ही राजनीतिक दल का प्रभुत्व होता है; अर्थात केवल एक ही राजनीतिक दल का अस्तित्व होता है
  • किसी अन्य दल का नहीं। बहुदलीय प्रणाली, प्रभावी विपक्ष का अभाव एवं गुटबाजी और दलबदल भारतीय राजनीतिक दलीय प्रणाली की विशेषता है।
  • प्रमुख विशेषताएं
    • भारतीय दलीय प्रणाली की मुख्य विशेषता बहुदलीय व्यवस्था है, जिसमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल सक्रिय हैं।
    • वर्तमान में 6 राष्ट्रीय दल जैसे भाजपा, कांग्रेस आदि और 50 से अधिक राज्य स्तरीय दल हैं
    • जो गठबंधन सरकारें बनाते हैं। पंजीकरण अनिवार्य है, जो निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है।​​
  • एकल दलीय प्रणाली क्यों नहीं?
    • एकल दलीय प्रणाली में केवल एक दल का प्रभुत्व होता है, जैसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी, लेकिन भारत में लोकतंत्र बहुदलीय प्रतिस्पर्धा पर आधारित है।
    • 2014 और 2019 में भाजपा को बहुमत मिला, फिर भी अन्य दल संसद में मौजूद हैं। यह प्रणाली विविधता को बढ़ावा देती है, न कि एकाधिकार।​​
  • अन्य महत्वपूर्ण लक्षण
    • क्षेत्रीय दलों का उदय: बीजेडी, तेदेपा, डीएमके जैसे दल कई राज्यों में सत्तारूढ़ हैं।​
    • गठबंधन राजनीति: 1989, 1998, 2004, 2009 में बहुदलीय गठबंधन सरकारें बनीं।​
    • आंतरिक लोकतंत्र की कमी: अधिकांश दलों में केंद्रीकृत नेतृत्व है, विचारधाराएं कमजोर हैं।​​
  • क्षेत्रवाद और सांप्रदायिकता
    • क्षेत्रीय दल स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि कुछ दल धर्म-आधारित राजनीति करते हैं।
    • यह दलीय प्रणाली की जटिलता दर्शाता है, लेकिन एकल दलीय एकाधिकार इससे पूर्णतः विपरीत है।​

7. भारत रक्षा अधिनियम (Defence of India Act) कब लागू किया गया था? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 1915
Solution:
  • भारत रक्षा अधिनियम वर्ष 1915 में लागू किया गया था। इस अधिनियम को सबसे पहले लाहौर षड्यंत्र के परीक्षण के दौरान लागू किया गया था।
  • इस कानून का उद्देश्य शांति बनाए रखना और क्रांतिकारियों की गतिशीलता को सीमित करना था।
  • 1915 का भारत रक्षा अधिनियम (प्रथम विश्व युद्ध)
    • भारत रक्षा अधिनियम 1915 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने पारित किया।​
    • यह अधिनियम 19 मार्च 1915 को लागू किया गया था; उसी दिन इसे अधिनियमित (enacted) और प्रभावी (commenced) माना जाता है।​
    • उद्देश्य था: सार्वजनिक सुरक्षा, ब्रिटिश भारत की रक्षा और राष्ट्रवादी‑क्रांतिकारी गतिविधियों को तीव्रता से दबाने के लिए असाधारण दंडात्मक प्रावधान देना, विशेषकर पंजाब और बंगाल जैसे क्षेत्रों में।​
  • 1939 का भारत रक्षा अधिनियम (द्वितीय विश्व युद्ध)
    • 1915 के अधिनियम की जगह बाद में एक और कड़ा भारत रक्षा अधिनियम 1939 लाया गया, जब द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ।​
    • यह अधिनियम 29 सितम्बर 1939 को पारित हुआ, पर इसे प्रभावी 3 सितम्बर 1939 से माना गया, वही दिन जब ब्रिटेन ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की।​
    • 1939 के अधिनियम ने सेंसरशिप, संचार पर नियंत्रण, निवारक निरोध (preventive detention) और युद्धकालीन कड़े सुरक्षा उपायों के लिए व्यापक शक्तियाँ प्रदान कीं।​
  • 1962 का भारत रक्षा अधिनियम (स्वतंत्र भारत)
    • स्वतंत्र भारत में चीन‑भारत युद्ध के बाद संसद ने “The Defence of India Act, 1962” पारित किया।​
    • यह अधिनियम 12 दिसम्बर 1962 को पारित और लागू (enacted and commenced) किया गया
    • ताकि राष्ट्रीय रक्षा, नागरिक सुरक्षा (civil defence) और कुछ अपराधों के त्वरित अभियोजन के लिए विशेष उपाय किए जा सकें।​
    • 1962 का अधिनियम अस्थायी प्रकृति का था, जो आपतकालीन परिस्थितियों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा तथा रक्षा के लिए बनाया गया था।​
  • परीक्षा या उत्तर लिखते समय क्या लिखें?
    • यदि प्रश्न “प्रथम विश्व युद्ध के संदर्भ में भारत रक्षा अधिनियम” पूछता है, तो उत्तर होगा: यह 19 मार्च 1915 को लागू किया गया था।​
    • यदि संदर्भ द्वितीय विश्व युद्ध हो, तो लिखें: भारत रक्षा अधिनियम 1939, 29 सितम्बर 1939 को अधिनियमित हुआ और 3 सितम्बर 1939 से प्रभावी माना गया।​
    • आधुनिक (स्वतंत्र भारत) संदर्भ में पूछा जाए, तो: Defence of India Act, 1962 – 12 दिसम्बर 1962 को लागू किया गया।​
    • इस प्रकार सामान्य इतिहास/UPSC‑स्तर की पुस्तकों में “भारत रक्षा अधिनियम” कहने पर प्रायः 1915 वाले अधिनियम को ही लक्षित किया जाता है
    • जो 19 मार्च 1915 को लागू किया गया था।​

8. समुद्री डकैती विरोधी विधेयक, 2022 (Maritime Anti-Piracy Act, 2022) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

1. संसद ने दिसंबर 2022 में समुद्री डकैती विरोधी विधेयक, 2022 को राज्य सभा से मंजूरी दे दी।

2. यह अधिनियम भारतीय अधिकारियों को खुले समुद्र में समुद्री डकैती के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है।

3. यह विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र से परे समुद्र पर लागू होता है, जो भारत के समुद्र तट से 500 समुद्री मील से ऊपर है।

4. अधिनियम समुद्री डकैती को किसी निजी जहाज या विमान के चालक दल या यात्रियों द्वारा निजी उद्देश्यों के लिए किसी जहाज, विमान या व्यक्ति के खिलाफ हिंसा, हिरासत या विनाश के किसी भी अवैध कार्य के रूप में परिभाषित करता है।

Correct Answer: (b) 1, 2 और 4
Solution:
  • समुद्री डकैती विरोधी विधेयक, 2022 के संबंध में कथन 1, यह कि संसद ने दिसंबर, 2022 में समुद्री डकैती विरोधी विधेयक, 2022 को राज्य सभा से मंजूरी दे दी
  • अतः सत्य है। यह अधिनियम भारतीय अधिकारियों को खुले समुद्र में समुद्री डकैती के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है
  • अतः कथन 2 भी सत्य है। परंतु कथन 3, यह विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र से परे समुद्र पर लागू होता है, जो भारत के समुद्र तट से 500 समुद्री मील है
  • स्थान पर 200 समुद्री मील होगा, अतः यह कथन असत्य है।
  • कथन 4, यह अधिनियम समुद्री डकैती को किसी निजी जहाज या विमान के चालक दल या यात्रियों द्वारा निजी उद्देश्यों हेतु किसी जहाज, विमान या व्यक्ति के खिलाफ हिंसा, हिरासत या विनाश के किसी भी अवैध कार्य के रूप में परिभाषित करता है
  • सत्य है। इस प्रकार केवल कथन 1,2 एवं 4 सत्य हैं।
  • विधेयक का उद्देश्य
    • यह अधिनियम भारत के समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है
    • क्योंकि भारत का 90% से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है। यह उच्च समुद्रों (भारतीय तट से 200 समुद्री मील से परे) पर समुद्री डकैती की रोकथाम और अपराधियों पर मुकदमा चलाने का प्रावधान करता है
    • जिसमें भारतीय अधिकारियों को किसी भी राष्ट्रीयता के डाकुओं या जहाजों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति मिलती है।
    • अधिनियम युद्धपोतों या गैर-व्यावसायिक सरकारी जहाजों को इससे बाहर रखता है।​
  • प्रमुख प्रावधान
    • परिभाषा: समुद्री डकैती को निजी जहाज या विमान के चालक दल/यात्रियों द्वारा हिंसा, हिरासत या विनाश के अवैध कार्य के रूप में परिभाषित किया गया है।​
    • अधिकार क्षेत्र: यह भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से परे सभी जलक्षेत्रों पर लागू होता है, न कि 500 समुद्री मील पर जैसा कुछ गलत कथनों में कहा जाता है।​
    • सशक्त अधिकारी: भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड), और अधिकृत सरकारी जहाज/विमान के कर्मियों को जहाजों पर चढ़ना, गिरफ्तारी और जब्ती की शक्ति दी गई है।​
  • विधेयक पारित होने की प्रक्रिया
    • विधेयक को दिसंबर 2022 में राज्यसभा से मंजूरी मिली, लेकिन लोकसभा में सीधे पारित होने के बाद राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई।
    • यह UNCLOS (जिसे भारत ने 1995 में अनुमोदित किया) के अनुरूप है और ऑपरेशन संकल्प जैसी कार्रवाइयों को मजबूत बनाता है।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • कई MCQ-शैली प्रश्नों में दिए विकल्पों में सत्य कथन यह है कि अधिनियम भारतीय अधिकारियों को खुले समुद्र पर कार्रवाई सक्षम बनाता है
    • जबकि EEZ से परे 200 समुद्री मील का क्षेत्र सही है (न कि 500)। यह भारत की समुद्री सुरक्षा को बढ़ाता

9. 16 जुलाई, 2021 के एक आदेश के बाद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर, 2021 में कौन-सी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली की शुरुआत की, जिसके माध्यम से इसके महत्वपूर्ण निर्णयों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से जेल अधिकारियों और जांच एजेंसियों को भेजा जा सकता है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) फास्टर (FASTER)
Solution:
  • जुलाई, 2021 के एक आदेश के बाद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर, 2021 में 'फास्टर' (Fast and Secured Transmission of Electronic Records: FASTER) नामक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली की शुरुआत किया।
  • इस प्रणाली के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में जेल अधिकारियों और जांच एजेंसियों को भेजा जा सकता है
  • जिससे विचाराधीन कैदियों को रिहा होने के लिए आदेश की प्रमाणित प्रति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
  • जो अदालत के महत्वपूर्ण निर्णयों को जेल अधिकारियों और जांच एजेंसियों तक तुरंत इलेक्ट्रॉनिक रूप से पहुंचाने के लिए डिज़ाइन की गई है।​
  • प्रणाली का उद्देश्य
    • FASTER का मुख्य लक्ष्य न्याय वितरण में देरी को कम करना है, जहां पहले निर्णयों की मैन्युअल प्रसंस्करण और भौतिक डिलीवरी में कई दिन लग जाते थे।
    • यह सुनिश्चित करता है कि विचाराधीन कैदी (undertrials) या दोषसिद्ध व्यक्तियों को रिहाई या अन्य आदेशों के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
    • जेल सुपरिंटेंडेंट्स और जांच एजेंसियां जैसे CBI, ED आदि को सीधे सुरक्षित ईमेल या पोर्टल के माध्यम से निर्णय प्राप्त होते हैं।​
  • कार्यान्वयन और प्रक्रिया
    • शुरुआत: 16 जुलाई 2021 को सर्वोच्च न्यायालय ने इसकी आवश्यकता पर जोर देते हुए आदेश जारी किया, और नवंबर 2021 में इसे पूर्ण रूप से लॉन्च किया गया।
    • कवरेज: प्रारंभ में जेल अधिकारियों के लिए शुरू हुई, लेकिन बाद में जांच एजेंसियों को भी जोड़ा गया। निर्णय PDF फॉर्मेट में एन्क्रिप्टेड रूप से भेजे जाते हैं।
    • लाभ: पारदर्शिता बढ़ती है, मानवीय त्रुटि कम होती है, और 24x7 उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
    • ई-कोर्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा होने से यह डिजिटल इंडिया पहल को मजबूत बनाता है।​
  • पृष्ठभूमि और महत्व
    • यह प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति द्वारा विकसित की गई, जो न्यायिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के लिए जिम्मेदार है।
    • इससे पहले, निर्णयों की कॉपी भेजने में देरी से कई मामले प्रभावित होते थे, जैसे बेल आदेशों का पालन।
    • अब, निर्णय के तुरंत बाद संबंधित पक्षकारों को सूचना मिल जाती है, जो संवैधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 21: जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) की रक्षा करती है।​
  • विस्तार और प्रभाव
    • 2025 तक, FASTER को अन्य उच्च न्यायालयों में भी विस्तारित करने की योजना है। इससे न्याय प्रणाली की दक्षता में 50% से अधिक सुधार हुआ है
    • जैसा कि विभिन्न रिपोर्ट्स में उल्लेखित है। यह COVID-19 के दौरान डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का परिणाम है, जो भविष्य में AI-आधारित केस मैनेजमेंट से जुड़ सकता है।​

10. किस राज्य ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए विधेयक पारित किया और ऐसा करने वाला पहला राज्य बना गया ? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) राजस्थान
Solution:
  • राजस्थान राज्य ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए अधिवक्ता संरक्षण विधेयक, 2023 पारित किया।
  • जिसका उद्देश्य अधिवक्ताओं के खिलाफ मारपीट, आपराधिक बल और आपराधिक धमकी के अपराधों एवं उनकी संपत्ति नुकसान को रोकना है।
  • इस प्रकार राजस्थान अधिवक्ताओं की सुरक्षा हेतु कानून पारित करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
  • विधेयक का परिचय
    • राजस्थान अधिवक्ता संरक्षण विधेयक, 2023 को 15 मार्च 2023 को विधानसभा में पेश किया गया और 22 मार्च को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
    • इसका मुख्य उद्देश्य वकीलों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान हिंसा, हमले, गंभीर चोट, आपराधिक बल और धमकी से बचाना है।
    • यह कानून अदालत परिसर या वकीलों के पेशेवर कार्य से जुड़े मामलों पर विशेष रूप से लागू होता है।​
  • प्रमुख प्रावधान
    • धारा 3: वकील के खिलाफ हमला, गंभीर चोट, आपराधिक बल या धमकी को अपराध घोषित करता है, यदि यह उनके कर्तव्य से संबंधित हो।​
    • धारा 4: शिकायत पर पुलिस को वकील को सुरक्षा प्रदान करने का अधिकार।​
    • धारा 5: सजाएं निर्धारित—हमले या बल प्रयोग पर 2 वर्ष कारावास और 25,000 रुपये जुर्माना; गंभीर चोट पर 7 वर्ष कारावास और 50,000 रुपये; धमकी पर 2 वर्ष और 10,000 रुपये।​
    • धारा 6: अपराध संज्ञेय, बिना वारंट गिरफ्तारी संभव। धारा 11 में दुरुपयोग पर 2 वर्ष की सजा।​
  • पारित होने का पृष्ठभूमि
    • यह विधेयक राजस्थान में वकीलों पर बढ़ते हमलों के कारण लाया गया, विशेषकर एक वकील की दिनदहाड़े हत्या के बाद बार काउंसिल की हड़ताल।
    • बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी सरकार से ऐसा कानून बनाने की मांग की थी। राजस्थान सरकार प्रतिवर्ष बार काउंसिल को 5 करोड़ रुपये अधिवक्ता कल्याण के लिए देती है।​
  • महत्व और प्रभाव
    • यह विधेयक वकीलों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करता है, जिससे न्याय व्यवस्था मजबूत होगी।
    • अन्य राज्य भी इसी तरह के कानून पर विचार कर रहे हैं, जो राजस्थान को मिसाल बनाता है। कार्यान्वयन से कानूनी पेशे में अधिक लोग आकर्षित होंगे।​