भौतिक विभाजन (भारत का भूगोल) (भाग-I)

Total Questions: 30

1. भारत का निम्नलिखित में से कौन-सा भौतिक विभाजन सघन जनसंख्या वाला क्षेत्र है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) उत्तर भारतीय मैदान
Solution:
  • भारत का उत्तर भारतीय मैदान सघन जनसंख्या वाला क्षेत्र है
  • क्योंकि यह कृषि के लिए उपजाऊ भूमि है
  • इसके आस-पास नदियों के रूप में जल संसाधन उपलब्ध है।
  • गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदान है
  • जो हिमालय से लेकर प्रायद्वीपीय पठार तक फैला हुआ है।​
  • उत्तर भारतीय मैदान की विशेषताएँ
    • यह मैदान लगभग 7 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है
    • जो 2400 किलोमीटर लंबा और 240-320 किलोमीटर चौड़ा है।
    • उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, प्रचुर जल संसाधन और अनुकूल जलवायु के कारण यह कृषि के लिए अत्यधिक उत्पादक क्षेत्र है
    • जिससे यहाँ जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्य इसी मैदान पर स्थित हैं
    • जहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर 500 से अधिक व्यक्ति रहते हैं।​
  • अन्य भौतिक विभाजनों से तुलना
    • हिमालय पर्वत क्षेत्र दुर्गमता के कारण कम घनत्व वाला है
    • जबकि प्रायद्वीपीय पठार और थार मरुस्थल में जल की कमी से जनसंख्या विरल है।
    • तटीय मैदान और द्वीप समूह मध्यम घनत्व रखते हैं
    • लेकिन उत्तर मैदान में 900+ व्यक्ति प्रति वर्ग किमी तक घनत्व पाया जाता है।
    • दिल्ली (11,297 व्यक्ति/वर्ग किमी) और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्र इसी मैदान से जुड़े हैं।​
  • जनसंख्या घनत्व के कारण
    • कृषि उत्पादकता, सिंचाई सुविधाएँ और औद्योगिक विकास ने यहाँ सघन बस्तियाँ विकसित की हैं।
    • 2011 जनगणना के अनुसार, बिहार (1102), पश्चिम बंगाल (1029) और उत्तर प्रदेश (828) जैसे राज्य उच्च घनत्व वाले हैं।
    • जलवायु और संसाधनों की अनुकूलता ने इसे भारत का सबसे अधिक आबादी वाला भौतिक क्षेत्र बनाया।​​

2. निम्नलिखित में से 'हिमालय-विशेषता' का कौन-सा युग्म सही है। [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (I-पाली)]

I. कुमाऊं हिमालय- सतलुज और काली नदियों के बीच स्थित है

II. नेपाल हिमालय-तीस्ता और दिहांग नदियों के बीच स्थित है

Correct Answer: (c) केवल I
Solution:
  • कुमाऊं हिमालय सतलुज और काली नदियों के बीच स्थित है। ध्यातव्य है
  • नेपाल हिमालय काली तथा तीस्ता नदियों के बीच स्थित है न कि तीस्ता और दिहांग नदियों के बीच।
  • हिमालय पर्वत की विशेषताओं से संबंधित प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC में अक्सर आते है
  • जहाँ विकल्पों वाले युग्म दिए जाते हैं। बिना विकल्पों के सटीक उत्तर देना कठिन है
  • लेकिन सामान्यतः 'महान हिमालय - धौलाधार शृंखला' वाला युग्म गलत माना जाता है
  • क्योंकि धौलाधार निम्न हिमालय (हिमाचल) की शृंखला है।​
  • हिमालय की संरचनात्मक विशेषताएँ
    • हिमालय तीन मुख्य समानांतर शृंखलाओं से बना है
    • महान हिमालय (हिमाद्री, औसत ऊँचाई 6000 मीटर), निम्न हिमालय (हिमाचल, ऊँचाई 3700-4500 मीटर) और शिवालिक (सबसे निचली, 900-1500 मीटर)।
    • महान हिमालय में एवरेस्ट जैसी ऊँची चोटियाँ हैं
    • जबकि धौलाधार, पीर पंजाल जैसी शृंखलाएँ निम्न हिमालय में आती हैं।​
  • प्रादेशिक विभाजन
    • हिमालय को नदी घाटियों के आधार पर पंजाब (सिंधु-सतलुज), कुमाऊँ (सतलुज-काली), नेपाल (काली-तीस्ता) और असम (तीस्ता-ब्रह्मपुत्र) हिमालय में बाँटा जाता है।
    • पंजाब हिमालय में धौलाधार आती है, न कि महान हिमालय।​​
  • सही युग्म के उदाहरण
    • महान हिमालय: हिमाद्री, केंद्रीय क्रिस्टलीय अक्ष।​
    • निम्न हिमालय: धौलाधार, पीर पंजाल।​
    • शिवालिक: चूरिया, दून घाटियाँ।​
    • यदि विकल्प उपलब्ध हों, तो धौलाधार को महान हिमालय से जोड़ने वाला युग्म असंगत है।
    • हिमालय की चापाकार आकृति और जलवायु नियंत्रण इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।​

3. हिमालय की सबसे बाहरी श्रृंखला को ....... कहा जाता है। [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) शिवालिक
Solution:
  • हिमालय की सबसे बाहरी पर्वत श्रेणी शिवालिक है।
  • यह हिमालय का सबसे नवीनतम भाग है।
  • इसका निर्माण प्लायोसीन युग में हुआ है।
  • सही उत्तर
    • हिमालय पर्वत प्रणाली की जो सबसे दक्षिणी तथा सबसे बाहरी (Outer / External) श्रृंखला है
    • उसे शिवालिक श्रेणी के नाम से जाना जाता है।
    • इसे ही बाह्य हिमालय या Outer Himalaya भी कहा जाता है
    • वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में इसी नाम से पूछा जाता है।​
  • स्थान और प्रसार
    • शिवालिक पहाड़ियाँ भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में पश्चिम में सिंधु नदी से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी तक लगभग 2400 किलोमीटर तक फैली हुई हैं।
    • ये महान मैदान (Indo-Gangetic Plain) और मध्य/लघु हिमालय (हिमाचल) के बीच स्थित एक संकीर्ण पट्टी के रूप में दिखती हैं।​
  • ऊँचाई, चौड़ाई संरचना
    • शिवालिक श्रेणी की औसत ऊँचाई लगभग 900–1500/2000 मीटर के बीच मानी जाती है
    • जो इसे हिमालय की अन्य दो मुख्य श्रेणियों (मध्य और महान हिमालय) की तुलना में अपेक्षाकृत कम ऊँचा बनाती है।
    • इनकी चौड़ाई सामान्यतः लगभग 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है
    • ये मुख्यतः ढीली तलछटी चट्टानों (कंकड़, बजरी, बलुआ पत्थर, जलोढ़) से निर्मित हैं
    • इस कारण यहाँ भूस्खलन व अपरदन अपेक्षाकृत अधिक होता है।​
  • अन्य नाम और विशेष बिंदु
    • शिवालिक को कई स्रोतों में मनक पर्वत के नाम से भी उल्लेखित किया गया है
    • जो इसी बाह्य हिमालयी पट्टी का अन्य स्थानीय नाम है।
    • हिमालय के विभाजन में सामान्यतः क्रम यह माना जाता है:​
    • शिवालिक या बाह्य हिमालय (सबसे बाहरी)
    • लघु/मध्य हिमालय (हिमाचल)
    • महान या भीतरी हिमालय (हिमाद्रि)
    • पार-हिमालय या तिब्बती हिमालय।​

4. निम्नलिखित में से हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी की पहचान कीजिए। [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) शिवालिक श्रेणी
Solution:
  • हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी शिवालिक श्रेणी है
  • जिसे बाह्य हिमालय भी कहा जाता है।
  • यह हिमालय पर्वत का सबसे दक्षिणी तथा भौगोलिक रूप से युवा भाग है जो पश्चिम से पूर्व दिशा में फैला हुआ है।
  • शिवालिक की विशेषताएँ
    • शिवालिक श्रेणी, जिसे बाहरी हिमालय भी कहा जाता है
    • गंगा-यमुना के मैदानों के उत्तर में और लघु हिमालय के दक्षिण में स्थित है।
    • इसकी ऊँचाई 600 से 1500 मीटर तक होती है
    • यह असंगठित तलछट से बनी होने के कारण भूगर्भीय रूप से सबसे नई है।
    • पश्चिम में पोटवार पठार से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र घाटी तक लगभग 2400 किमी लंबी यह श्रेणी दक्षिणी ढलानों पर खड़ी और उत्तरी ढलानों पर कोमल है।​
  • हिमालय की अन्य श्रेणियों से तुलना
    • हिमालय को उत्तर से दक्षिण की ओर चार मुख्य समानांतर श्रेणियों में विभाजित किया जाता है
    • ट्रांस-हिमालय (कराकोरम, लद्दाख), महान हिमालय (हिमाद्री, जिसमें एवरेस्ट जैसी चोटियाँ हैं)
    • लघु हिमालय (हिमाचल, जैसे पीर पंजाल) और सबसे दक्षिणी शिवालिक।
    • शिवालिक अन्य श्रेणियों की तुलना में कम ऊँची और चौड़ाई में भिन्न (हिमाचल प्रदेश में 50 किमी से अरुणाचल में 15 किमी तक) है।
    • यह गिरीपद श्रेणी के रूप में जानी जाती है और तिस्ता-रैदक नदियों द्वारा कुछ स्थानों पर विभाजित है।​
  • भौगोलिक विस्तार और महत्व
    • शिवालिक उत्तर-पूर्व भारत से नेपाल तक घने जंगलों से आच्छादित है
    • लेकिन पश्चिम की ओर वनावरण कम होता जाता है।
    • यह भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु को प्रभावित करने वाली हिमालय की बाधा प्रणाली का दक्षिणी द्वार है
    • जो ठंडी मध्य एशियाई हवाओं को रोकती है।
    • विभिन्न क्षेत्रों में इसे चुरिया, दून या जौनसर जैसी स्थानीय नामों से जाना जाता है।​

5. निम्नलिखित में से हिमालय के किस उप-खंड में कंचनजंगा पर्वत स्थित है? [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय
Solution:
  • कंचनजंगा हिमालय पर्वत श्रृंखला में स्थित विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है।
  • यह पूर्व में तीस्ता नदी और पश्चिम में तामुर नदी के बीच स्थित है।
  • यह सिक्किम राज्य और नेपाल के बीच की सीमा पर पूर्वी हिमालय में दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय उप-खंड में स्थित है।
  • यह पर्वत ग्रेट हिमालय रेंज का हिस्सा है। अतः सही उत्तर विकल्प (c) होगा।
  • हिमालय के उप-खंडों का वर्गीकरण
    • हिमालय को पश्चिम से पूर्व की ओर चार मुख्य उप-खंडों में विभाजित किया जाता है
    • कश्मीर हिमालय (पंजाब हिमालय), हिमाचल-उत्तराखंड हिमालय, दार्जिलिंग-सिक्किम हिमालय तथा पूर्वोत्तर हिमालय (असम-आरुणाचल)।
    • कंचनजंगा विशेष रूप से दार्जिलिंग-सिक्किम हिमालय में आता है
    • जो बंगाल हिमालय के नाम से भी जाना जाता है
    • महान हिमालय (हिमाद्री) श्रेणी का भाग है।
    • यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता, घने जंगलों और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।​
  • कंचनजंगा की भौगोलिक विशेषताएँ
    • कंचनजंगा का आकार विशालकाय सलीब जैसा है, जिसमें पाँच मुख्य शिखर हैं
    • मुख्य कंचनजंगा (8,586 मीटर), कंचनजंगा साउथ (8,476 मीटर), कंचनजंगा वेस्ट (8,422 मीटर), कंचनजंगा सेंट्रल (8,482 मीटर) और कांगबाचेन (7,903 मीटर)।
    • चार प्रमुख हिमनद इससे निकलते हैं - जेमु (पूर्वोत्तर), तालुंग (दक्षिण-पूर्व), यालुंग (दक्षिण-पश्चिम) तथा कंचनजंगा (पश्चिमोत्तर)
    • जो तिब्बत और भारत की जल विभाजक रेखा का हिस्सा हैं।
    • इसका नाम तिब्बती भाषा से आया है
    • जिसका अर्थ 'हिमानियों के पाँच खजाने' है।​
  • महत्व और आरोहण इतिहास
    • यह पर्वत सिक्किम के स्थानीय निवासियों के लिए पवित्र है
    • जहाँ आरोहण के दौरान शिखर को न छूने की परंपरा रही।
    • पहला सफल आरोहण 1955 में ब्रिटिश टीम ने किया
    • लेकिन हाल ही में 2024 में दो पर्वतारोहियों की दुर्घटना ने सुर्खियाँ बटोरीं।
    • दार्जिलिंग-सिक्किम क्षेत्र ट्रेकिंग, जैव विविधता और चाय बागानों के लिए पर्यटन केंद्र है।​

6. पश्चिमी हिमालय में जल संचयन प्रणाली की पहचान करें। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) गुल
Solution:
  • पश्चिमी हिमालय में सबसे आम जल संरक्षण प्रणाली गुल है। जिसे कुल भी कहा जाता है।
  • पश्चिमी हिमालय के पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों ने गुल/कुल जैसी वाहिकाएं, नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई के लिए बनाई हैं।
  • गुल प्रणाली का विवरण
    • गुल पश्चिमी हिमालय, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों में प्रचलित हैं।
    • ये पहाड़ियों की ढलानों पर पत्थर, मिट्टी या प्लास्टिक से लाइन की गई नहरें होती हैं जो कई किलोमीटर लंबी हो सकती हैं।
    • इनकी शाखाएं पानी को विन्नभि खेतों में वितरित करती हैं, और रिसाव रोकने के लिए विशेष तकनीकें अपनाई जाती हैं।​
  • निर्माण और कार्यप्रणाली
    • गुल का निर्माण नदियों या झरनों से पानी को मोड़कर किया जाता है
    • जहां ढलान का उपयोग कर पानी को स्वाभाविक रूप से बहाया जाता है।
    • इनकी चौड़ाई 0.1-0.2 वर्ग मीटर होती है, और ये प्रति सेकंड 15-100 लीटर पानी ले जा सकती हैं।
    • कभी-कभी बरसाती और ग्लेशियर पिघलने का पानी भी इकट्ठा होता है।​
  • अन्य संबंधित प्रणालियां
    • कुहल (Kuhls): गुल का ही एक रूप, जो हिमालयी क्षेत्रों में 1-15 किमी लंबी निजी नहरें हैं। ये समुदाय द्वारा प्रबंधित होती हैं।
    • नौले और तालाब: पेयजल के लिए रिसावदार तालाब और छोटे जलाशय, जो भूजल संचय करते हैं।​
    • पानी बंटवारे के लिए पत्थरों का उपयोग कर समानता सुनिश्चित की जाती है, जैसे ऊपरी गांवों को दिन का और निचले को रात का पानी।​
  • महत्व और चुनौतियां
    • ये प्रणालियां 4,50,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई करती हैं
    • जो आधुनिक सिंचाई से सस्ती और टिकाऊ हैं।
    • हालांकि, रखरखाव की कमी, भूस्खलन और जलवायु परिवर्तन से खतरा है।​

7. उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत कौन-सा है? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 15 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) कामेट
Solution:
  • उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में कामेट दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत शिखर है।
  • उत्तराखंड का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर नंदा देवी है।
  •  दूसरी सबसे ऊँची चोटी कामेट (7,756 मीटर) है।
  • यह जास्कर हिमालय श्रेणी का हिस्सा है और चमोली जिले में स्थित है।​
  • स्थान और भौगोलिक विशेषताएँ
    • कामेट गढ़वाल हिमालय के उत्तर भाग में स्थित है, जो तिब्बत सीमा के निकट है।
    • यह दूधा धौली गंगा नदी घाटी के पास खड़ा है
    • आसपास अबी गमिन (7,355 मीटर) जैसी अन्य चोटियों से घिरा हुआ है।
    • इसकी चट्टानी संरचना और बर्फीली ढलानें इसे चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।​
  • इतिहास और आरोहण
    • कामेट का पहला सफल आरोहण 1931 में एक ब्रिटिश अभियान ने किया था
    • जिसमें फ्रैंक स्मिथ, एरिक शिप्टन और अन्य शामिल थे।
    • यह भारत की तीसरी सबसे ऊँची चोटी है
    • लेकिन गढ़वाल में नंदा देवी के बाद दूसरी।
    • आरोहण के लिए आधार शिविर जोशीमठ या नंदा देवी क्षेत्र से शुरू होता है।​
  • महत्व और पर्यावरण
    • यह चोटी जैव विविधता का केंद्र है, जहाँ नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के निकट होने से दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं।
    • जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियर पिघलाव इसका खतरा बढ़ा रहा है।
    • पर्यटक ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए आकर्षित होते हैं।​
  • अन्य प्रमुख चोटियाँ
    • चौखम्बा I (7,138 मीटर): गंगोत्री ग्लेशियर पर बहु-शिखरी।
    • नीलकंठ (6,596 मीटर): शिव से जुड़ा पवित्र पर्वत।
    • ये गढ़वाल की ऊँची चोटियाँ हैं, लेकिन कामेट अपनी ऊँचाई से दूसरा स्थान रखता है।​

8. पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट का मिलन स्थल क्या है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (II-पाली), CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) नीलगिरि पहाड़ियां
Solution:
  • नीलगिरि पहाड़ियां पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट का मिलन स्थल हैं।
  • नीलगिरि पहाड़ियां तमिलनाडु, कर्नाटक तथा केरल में विस्तृत हैं। इसकी सर्वोच्च चोटी दोद्दाबेट्टा है।
  •  जो भारत के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक महत्वपूर्ण भौगोलिक बिंदु है।
  • ये पहाड़ियाँ तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल राज्यों के त्रिकोण क्षेत्र में फैली हुई हैं और पश्चिमी घाट के सह्याद्रि भाग का हिस्सा मानी जाती हैं।​
  • भौगोलिक स्थिति
    • नीलगिरि पहाड़ियाँ लगभग 20° से 13° उत्तरी अक्षांश और 76° से 77° पूर्वी देशांतर के बीच स्थित हैं
    • जिनकी औसत ऊँचाई 1,500 से 2,600 मीटर तक है। पश्चिमी घाट, जो अरब सागर के समानांतर चलते हैं
    • पूर्वी घाट, जो बंगाल की खाड़ी की ओर असमान रूप से विस्तृत हैं, यहीं पर मिलते हैं।
    • इस मिलन बिंदु को नीलगिरि पठार भी कहा जाता है
    • जहाँ नोयर नदी उत्तर में और पालघाट घाटी दक्षिण में सीमांकन करती हैं।​
  • प्रमुख चोटियाँ और विशेषताएँ
    • नीलगिरि की सर्वोच्च चोटी डोडा बेटा (Doda Betta) है, जो 2,637 मीटर ऊँची है
    • इसके बाद मकरूत मलाई (2,554 मीटर) आती है। ये पहाड़ियाँ अपनी नीली छटा के कारण 'ब्लू माउंटेंस' के नाम से प्रसिद्ध हैं
    • जो यूकेलिप्टस और चाय के बागानों से उत्पन्न होती है। यहाँ घने जंगल, चाय-कॉफी बागान, वन्यजीव अभयारण्य जैसे मुदुमलाई, वेम्बनाडु और साइलेंट वैली स्थित हैं।​
  • जैव विविधता और महत्व
    • नीलगिरि UNESCO विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा हैं और पश्चिमी घाट जैव विविधता हॉटस्पॉट का केंद्र हैं
    • जहाँ नीलगिरि तहर, एशियाई हाथी, बाघ और सैकड़ों पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
    • यह क्षेत्र वर्षा वन, शोल जंगल और घासभूमियों से भरपूर है, जो मानसून वर्षा को रोककर पूर्वी घाट की नदियों को जल प्रदान करता है। प
    • र्यटन के लिए ऊटी (उधागमंडलम) प्रमुख केंद्र है, जो पहाड़ियों के बीच 2,240 मीटर की ऊँचाई पर बसा है।​
  • ऐतिहासिक और आर्थिक भूमिका
    • ब्रिटिश काल में नीलगिरि ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित हुआ
    • जहाँ चाय, कॉफी, चंदन और औषधीय पौधों की खेती प्रमुख है।
    • पश्चिमी और पूर्वी घाट का यह संगम प्रायद्वीपीय पठार को पश्चिमी तट से अलग करता है
    • जिससे कावेरी जैसी नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं।​

9. पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में प्रायः औसत तापमान कितना होता है? [Phase-XI 30 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 25°C से नीचे
Solution:
  • पश्चिमी घाट में सर्दियों में शुष्क जलवायु होती है और सर्दियों में औसत तापमान लगभग 14 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है।
  • साथ ही पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में प्रायः औसत तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है।
  • औसत तापमान की सामान्य सीमा
    • पश्चिमी घाट की ऊँची पहाड़ियों और पठारी क्षेत्रों में औसत वार्षिक तापमान लगभग 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास माना जाता है
    • यानी साल भर मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और नम रहता है।
    • कई स्थानों पर सामान्यत: तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे ही रहता है
    • इसलिए इसे ठंडी पहाड़ी जलवायु की श्रेणी में रखा जाता है।​
  • उत्तरदक्षिण के अनुसार तापमान
    • अध्ययनों के अनुसार पश्चिमी घाट में औसत तापमान दक्षिणी भागों में लगभग 20 डिग्री सेल्सियस से लेकर उत्तरी भागों में लगभग 24 डिग्री सेल्सियस तक पाया जाता है।
    • अर्थात दक्षिण के ऊँचे, अधिक आर्द्र क्षेत्रों में तापमान थोड़ा कम और उत्तर के अपेक्षाकृत कम ऊँचाई वाले भागों में कुछ अधिक रहता है
    • लेकिन सामान्यतः फिर भी 25 डिग्री से नीचे ही बना रहता है।​
  • ऋतु के अनुसार परिवर्तन
    • सर्दियों में ऊँचाई वाले भागों में तापमान कई बार शून्य डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है
    • हल्का पाला पड़ना सामान्य बात मानी जाती है।
    • गर्मियों में भी यहाँ मैदानी इलाकों जैसी तेज गर्मी नहीं पड़ती, बल्कि मानसूनी हवाओं
    • घने वनों के कारण तापमान नियंत्रित रहकर प्रायः 20–24 डिग्री सेल्सियस के भीतर ही बना रहता है।​
  • जलवायु और ऊँचाई का प्रभाव
    • पश्चिमी घाट की औसत ऊँचाई लगभग 1,200–1,500 मीटर बताई जाती है
    • जो ऊँचाई–जनित ठंडक के कारण तापमान को नीचे रखने में प्रमुख भूमिका निभाती है।
    • यही कारण है कि यह क्षेत्र शीतल और आर्द्र माना जाता है
    • यहाँ की वनस्पति, घने जंगल तथा जैव विविधता इसी मध्यम, नम जलवायु पर निर्भर करती है।​
  • जैव विविधता और तापमान का संबंध
    • लगातार मध्यम और अधिक न बदलने वाला तापमान पश्चिमी घाट को विश्व के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक बनाए रखता है।
    • यहाँ की वनस्पति और जीव–जंतु प्रजातियाँ ऐसे ही ठंडे–नम वातावरण के अनुकूलित हैं
    • जिनके लिए 15–24 डिग्री सेल्सियस की औसत तापमान-सीमा अत्यंत अनुकूल मानी जाती है।​

10. निम्नलिखित में से कौन-सा शिखर दक्षिण भारत का सबसे ऊंचा शिखर है? [Phase-XI 27 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) अनाईमुडी
Solution:
  • दक्षिण भारत का सबसे ऊंचा शिखर अनाईमुडी है।
  • यह केरल राज्य में स्थित है। यह चोटी पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला का भाग है।
  • पश्चिमी घाट एक पर्वत श्रृंखला है, जो पश्चिमी तट के समानांतर है।
  • सही उत्तर और स्थिति
    • अनाइमुडी दक्षिण भारत की तथा पूरे पश्चिमी घाट (Western Ghats) की सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है।​
    • यह शिखर केरल राज्य में स्थित है, विशेष रूप से इडुक्की और एर्नाकुलम जिलों के बीच आने वाले क्षेत्र में।​
  • ऊंचाई और भौगोलिक विशेषताएं
    • अनाइमुडी की ऊंचाई लगभग 2695–2696 मीटर (लगभग 8842–8843 फीट) के आसपास मानी जाती है
    • जिसे अधिकांश स्रोत दक्षिण भारत की सर्वोच्च ऊंचाई के रूप में स्वीकार करते हैं।​
    • यह चोटी वेस्टर्न घाट्स की पर्वतमाला का हिस्सा है
    • नीलगिरि तथा अन्य दक्षिण भारतीय पहाड़ियों की तुलना में अधिक ऊंची है।​
  • उपनाम और महत्व
    • अनाइमुडी को अक्सर “केरल का गौरव” और “दक्षिण भारत का एवरेस्ट” कहा जाता है
    • क्योंकि यह दक्षिणी भारत की सबसे ऊंची और प्रमुख चोटी है।​
    • यह शिखर एराविकुलम नेशनल पार्क क्षेत्र में आता है
    • जो जैव-विविधता, नीलगिरि ताहर जैसे दुर्लभ वन्यजीवों और घास के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है।​
  • अन्य विकल्पों से तुलना (यदि प्रश्न वस्तुनिष्ठ हो)
    • अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न इसी प्रकार आता है:
    • निम्नलिखित में से कौन-सा दक्षिण भारत का सर्वोच्च शिखर है
    • विकल्पों में प्रायः डोड्डाबेट्टा, मुल्लायनगिरि, कलसुबाई आदि के साथ अनाइमुडी दिया जाता है।​