पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (भारत का भूगोल) (भाग-II)

Total Questions: 30

1. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में स्थापित प्रथम राष्ट्रीय उद्यान है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
Solution:
  • वर्ष 1936 में भारत में पहला राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की स्थापना की गई थी।
  • पहले इसका नाम हैली नेशनल पार्क था। यह उत्तराखंड के नैनीताल तथा पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित है।
  • बाघ परियोजना पहल के तहत आने वाला यह पहला राष्ट्रीय पार्क था।
  • यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले के पास स्थित है और भारत के प्रोजेक्ट टाइगर पहल के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है।
  • विस्तृत विवरण
    • स्थापना वर्ष और_origin_: 1936 में हैली National Park के रूप में स्थापित, जिसे बाद में जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के रूप में नामित किया गया.
    • स्थान: उत्तराखंड, नैनीताल जिले के पास स्थित है
    • इसे भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान माना जाता है.​
    • नाम परिवर्तन कारण: मूल नाम हैली राष्ट्रीय उद्यान था
    • नाम जिम कॉर्बेट के सम्मान में बदला गया
    • जिन्होंने उद्यान के संरक्षण और प्रोजेक्ट टाइगर जैसी पहल के विकास में योगदान दिया.​
    • महत्व: यह पार्क बाघों समेत कई प्रमुख प्रजातियों का अभयारण्य है
    • टाइगर काउंटिंग/संरक्षण के लिए ऐतिहासिक संदर्भ बनाता है
    • 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरूआत भी यहीं से जुड़ी है.​
    • क्या आप चाहेंगे कि इस विषय पर और अधिक विशिष्ट स्रोत-उद्धरण, तिथि-रेफरंस, या अन्य प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों के स्थापना वर्ष के साथ एक तुलनात्मक सूची भी दी जाए?

2. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत के कुछ प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों जैसे नागरहोल और बांदीपुर में संरक्षित घरेलू मवेशियों का निकटतम जंगली रिश्तेदार है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) गौर
Solution:
  • भारतीय बाइसन या गौर भारत में पाए जाने वाले जंगली मवेशियों की प्रजाति है।
  • यह प्रजाति संरक्षित है और भारत के कई राष्ट्रीय उद्यानों में पाई जाती है
  • जिनमें कर्नाटक में नागरहोल और बांदीपुर भी शामिल हैं।
  • गौर की विशेषताएं
    • गौर दुनिया का सबसे बड़ा जंगली बैल है, जिसका वजन नरों में 700-1000 किलोग्राम तक हो सकता है।
    • इसका शरीर काला-भूरा, सिर बड़ा और सींग मजबूत होते हैं
    • जो घरेलू मवेशियों से आकार में कहीं अधिक विशाल हैं।
    • ये घने जंगलों में रहते हैं और घास, पत्तियां तथा फल खाते हैं।​
  • नागरहोल और बांदीपुर में उपस्थिति
    • नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (643 वर्ग किमी) में गौर के बड़े झुंड हाथियों और बाघों के साथ घूमते दिखाई देते हैं
    • खासकर कबिनी नदी के किनारे। बांदीपुर टाइगर रिजर्व (880 वर्ग किमी) में भी ये प्रचुर मात्रा में हैं
    • जहां ये सांभर, चीतल जैसे शाकाहारियों के साथ पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं।
    • दोनों पार्क प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत हैं और गौर की रक्षा यहां प्रमुख है।​
  • घरेलू मवेशियों से संबंध
    • गौर को घरेलू गायों का जंगली पूर्वज माना जाता है, क्योंकि आनुवंशिक अध्ययनों से पता चलता है
    • भारतीय घरेलू पशु गौर की जंगली आबादी से विकसित हुए।
    • विकल्पों में लाल अंगस (घरेलू नस्ल), एशियाई भैंस (अलग प्रजाति Bubalus) और नीलगाय (मेमोरहा ट्रागोकैमेलस, एंटीलोप) फिट नहीं होते।
    • गौर का संरक्षण इन पार्कों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी मदद करता है।​
  • संरक्षण स्थिति
    • गौर IUCN रेड लिस्ट में 'vulnerable' है, और भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत शेड्यूल I में आता है।
    • नागरहोल-बांदीपुर क्षेत्र में अवैध शिकार और आवास हानि मुख्य खतरे हैं
    • लेकिन सैफारी और निगरानी से इनकी संख्या बढ़ रही है।​

3. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता सही नहीं है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) इन वनों में वर्ष में लगभग 100 सेमी. वर्षा होती है।
Solution:
  • उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों को उष्णकटिबंधीय वर्षा वन भी कहते हैं।
  • ये घने वन भूमध्य रेखा एवं उष्णकटिबंध के पास पाए जाते हैं।
  • इन वनों में वर्ष में सामान्यतः 200 सेमी. से अधिक वर्षा होती है।
  • अन्य तीनों विकल्प उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों के संबंध में सही हैं।
  • इन वनों में मुख्यतः रोजवुड, आबनूस, महोगनी आदि के वृक्ष पाए जाते हैं।
  • उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन क्या हैं
    • यह वे वन हैं जिनमें वर्षभर पत्ते रहते हैं और वर्षाकाल के साथ सूखा-season का प्रभाव कम या नहीं होता.
    • इन वनों का सामान्य विस्तार दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका तथा अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है.
    • इन वनस्पतियों में बहुस्तरीय संरचना होती है और पेड़-झाड़ियाँ तथा लताएं मिलकर घना वितान बनाती हैं.
  • वर्षा और तापमान की सामान्य विशेषताएं
    • उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में वार्षिक वर्षा वैश्विक मानकों के अनुसार 200 cm से अधिक भी हो सकती है
    • कुछ स्थानों पर यह 250–400 cm या उससे भी अधिक तक पहुँचती है
    • जो वनउत्पादन और जैव विविधता के लिए आवश्यक शर्त मानी जाती है
    • इस कारण 100 cm वार्षिक वर्षा वाला कथन गलत हो जाता है.​
    • तापमान स्थिर रहता है और गर्म रहता है; औसत तापमान 25°C के पास या उससे ऊपर रहता है, जिससे वर्षभर पेड़ पत्ते बनाए रखते हैं.​
  • क्वायरी में दिए गए कथनों पर विश्लेषण
    • कथन: “कथित रूप से वर्षा लगभग 100 cm होती है
    • यह गलत है, क्योंकि अधिकांश उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में वर्षा 200 cm से अधिक होती है.​
    • कथन: “वन बहुत घना होता है, वितान सूर्य की रोशनी को भूमि तक नहीं पहुँचने देता है
    • यह सामान्यतः सही है क्योंकि घने पेड़ों की शाखाओं और पत्तों का घना वितान प्रकाश को नीचे नहीं आने देता.​
    • कथन: “यह क्षेत्र भूमध्यरेखा के पास और उष्णकटिबंध के भीतर होते हैं
    • मौसम गर्म और वर्षा अधिक होती है; कभी शुष्क नहीं होता” यह लगभग सही है
    • क्षेत्रीय विविधता के साथ, कुछ क्षेत्रों में हल्की मौसमी कमी हो सकती है
    • अधिकांश भाग के उष्णकटिबंधीय सदाबहार जंगल में शुष्क मौसम बहुत कम या अपर्याप्त होता है और पत्ते वर्ष भर रहते हैं.​
    • कथन: “यहाँ वृक्ष दृढ़ काष्ठ के होते हैं जैसे रोजवुड, आबनूस, महोगनी आदि” यह सामान्यतः सही संकेत है
    • क्योंकि सदाबहार वनों में अक्सर मजबूत लकड़ी वाले प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जैसे रोजवुड, महोगनी आदि.​
  • निरपेक्ष निष्कर्ष
    • सही है कि उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन वर्षभर हरे रहते हैं
    • बहुस्तरीय संरचना में पौधों-जानवरों का विविध समुदाय होता है
    • वर्षा की मात्रा 100 cm नहीं, बल्कि लगभग 200 cm या अधिक हो सकती है, इस आधार पर यह कथन गलत है.​
    • उपरोक्त विश्लेषण के अनुसार, विकल्प जिसमें वर्षा लगभग 100 cm बताई गई हो, वही गलत विकल्प है.

4. भारत में चीतों की पुनःस्थापना के लिए कार्य योजना' (Action plan for introduction of the Cheetah in India) के पहले चरण में, सितंबर 2022 में, मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ....... छोड़े गए हैं। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 8 चीते
Solution:
  • सितंबर, 2022 में मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 8 चीतों को छोड़ा गया था।
  • इसके पश्चात फरवरी, 2023 में 12 अन्य चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया।
  • पथ-प्रदर्शक विवरण (पूरा विस्तार)
    • चीतों के स्रोत: ये 8 चीते Namibiya से लाए गए थे और भारत में चीता विलुप्त घोषित होने के बाद पुनः ला कर रखे गए थे।​
    • उद्देश्य: यह कदम एक बहु-आयामी संरक्षण परियोजना Project Cheetah का हिस्सा था
    • जिसका लक्ष्य भारत में चीते की पुनःस्थापना और दीर्घकालिक მოსახლता स्थापना था।​
    • आगे के चरण: शुरूआती चरण के बाद, 2023 में दक्षिण अफ्रीका से अतिरिक्त चीते लाए गए
    • 2025 तक अन्य स्रोतों से भी चीतों के आगमन की सूचनाएँ सार्वजनिक रूप से सामने आईं।
    • यह परियोजना National Tiger Conservation Authority (NTCA) और पर्यावरण मंत्रालय के नेतृत्व में जारी है।​
    • महत्व और संदर्भ: यह चीन/अफ्रीका महाद्वीप के बाहर भारत में चीते को पुन
    • आबाद करने की वैश्विक मिसाल बन गई, और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा गया।​
  • ध्यान देने योग्य बिंदु
    • चीतों की पहली टोली (8 चीतों) September 2022 में कूनो में छोड़ी गई थी
    • जिसे 1952 में भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। यह पुनर्वास का ऐतिहासिक क्षण था।​
    • इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से और 2025 में बोत्सवाना/अन्य स्रोतों से और चीते भारत लाने की घोषणाएँ/उद्धृत घटनाक्रम देखे गए हैं
    • जिससे चरणबद्ध पुनर्वास का क्रम चला।​
  • संभावित स्रोत और संदर्भ
    • Project Cheetah और कूनो के घटनाक्रमों के लिए प्रमुख सरकारी/समाचार सार: NTCA, PMO घोषणाएँ, और Chronicles/News portals पर विस्तृत कवरेज मिलते हैं।​
    • YouTube/वीडियो प्रसारण भी इस चरण के ऐतिहासिक लॉन्च का दृश्य प्रस्तुत करते हैं
    • जिसमें 8 चीतों को कूनो में छोड़े जाने की जानकारी है।​

5. गोरूमारा राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में स्थित है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) पश्चिम बंगाल
Solution:
  • गोरूमारा राष्ट्रीय उद्यान भारत के पश्चिम बंगाल प्रांत के जलपाईगुड़ी जिले में स्थित है।
  • विस्तृत जानकारी:
    • स्थान और सीमा: गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल प्रांत के जलपाईगुरी जिले के तराई क्षेत्र में स्थित है।
    • यह हिमालयी तलहटी और डুয়ার्स (Duars) क्षेत्र की एक प्रमुख संरक्षित साइट है, जहां ऊंचे-नीचे जलवायु का मिश्रण मिलते हैं।​
    • क्षेत्रफल और स्थापना: यह उद्यान लगभग 78–80 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है और 1992 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था।​
    • वन्यजीव और पक्षी: यहाँ भारतीय गैंडों, हाथी, तेंदुआ, हिरणों समेत कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं; साथ ही प्रवासी पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ भी देखी जाती हैं।​
    • विशेषताएं: गोरुमारा डुवार्स क्षेत्र का हिस्सा है और इसे स्थानीयভাবে टाइगर रिजर्व के रूप में भी पहचाना गया है
    • यह क्षेत्रीय पर्यटन और बायोसाइबर साइटों के लिए महत्वपूर्ण है।​
  • राज्य: पश्चिम बंगाल
    • जिला/क्षेत्र: जलपाईगुड़ी जिले, तराई/डुवार्स क्षेत्र
    • प्रकृति: राष्ट्रीय उद्यान (protected area)
    • प्रमुख जीव-जंतु: एक सींग वाला गैंडा (भारतीय गैंडा) के साथ अन्य स्तनधारियों सहित विविधता
    • पक्षी जीवन: लगभग 200+ प्रजातियाँ
  • उद्धरण और स्रोत:
    • गोरुमारा के स्थान, क्षेत्र और जानकारी के लिए स्रोतों में Testbook पृष्ठ और विकिपीडिया आदि का संदर्भ मिलता है
    • जो पश्चिम बंगाल में स्थित होने की पुष्टि करते हैं ।​

6. प्रसिद्ध नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) आंध्र प्रदेश
Solution:
  • नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य भारत के आंध्र प्रदेश में नेलापट्टू गांव के पास स्थित है।
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 458.92 हेक्टेयर है।
  • पूर्ण विवरण
    • स्थिति और भूगोल: नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में स्थित है
    • यह क्षेत्र डोरावरी मंडल के अंतर्गत आता है और बंदरगाह-समतुल्य ब्रेकिश जलाशयों के पास फैला है.​
    • स्थापना और क्षेत्रफल: यह अभयारण्य 1976 में स्थापित किया गया था और इसका क्षेत्रफल लगभग 458 हेक्टेयर है
    • जो इसे क्षेत्रफल के हिसाब से मध्यम आकार का स्थल बनाता है.​
    • जैव विविधता: यहाँ 200 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं
    • जिनमें पेलिकन, पेंटेड स्टॉर्क, स्पूनबिल और इबिस प्रमुख उदाहरण हैं
    • यह जगह प्रवासी और स्थानीय पक्षियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना है.​
    • पर्यटन और गतिविधियाँ: पक्षी अवलोकन के अलावा नाव-विहार, प्रकृति-चर्चा/वॉकिंग, और फोटोग्राफी जैसी गतिविधियाँ यहां आम हैं
    • जिससे पर्यटकों को स्थानीय जैव विविधता को करीब से देखने का अवसर मिलता है.​
    • मिथ्या/अपुष्ट जानकारी से बचना: कई ऑनलाइन स्रोतों में भ्रमित जानकारी मिल सकती है
    • (उदा. तमिलनाडु, कर्नाटक आदि को लेकर गलत उल्लेख), इसलिए नेलापट्टू अभयारण्य की सही राज्य-स्थिति आंध्र प्रदेश के भीतर और नेल्लोर जिले के संदर्भ से पुष्ट होती है.​
  • अतिरिक्त संदर्भ
    • एक आधिकारिक दस्तावेज़ में भी नेल्लोर जिले के क्षेत्र-परिधि के साथ नेलापट्टू अभयारण्य का विस्तृत वर्णन मिलता है
    • जिसमें इसकी सीमा, भूगोलिक स्थितियाँ और संरक्षित क्षेत्र की जानकारी दी गई है.​

7. निम्नलिखित में से किसे वन्य घुड़खर अभयारण्य (Wild Ass Sanctuary) घोषित किया गया है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) कच्छ का रण
Solution:
  • कच्छ का रण अभयारण्य को वन्य घुड़खर अभयारण्य घोषित किया गया है।
  • यह अभयारण्य गुजरात राज्य में स्थित है।
  • पूरा परिचय और विवरण:
    • परिभाषा और स्थान: वन्य घुड़खर अभयारण्य जिसे Wild Ass Wildlife Sanctuary भी कहा जाता है
    • गुजरात राज्य के Little Rann of Kutch क्षेत्र में स्थित है
    • यह क्षेत्र भारतीय जंगली घोड़े के उप-स्पष्ठ “Indian Wild Ass के संरक्षण के लिए संक्रमित रूप से important माना जाता है
    • स्थापना और कानूनी आधार: यह अभयारण्य 1972 के Wildlife Protection Act के अंतर्गत स्थापित किया गया
    • भारत में जंगली घोड़े के संरक्षण के लिए एक प्रमुख केंद्र बना रहा
    • गुजरात के उत्तरी हिस्सों जैसे कच्छ जिले के आसपास यह क्षेत्र बड़े भू-भाग में फैला है
    • जहां-जहां घुड़खर मौजूद होते हैं, वहां संरक्षण कदम मजबूत किये गए हैं
    • क्षेत्रफल और संरचना: सामान्य तौर पर यह अभयारण्य Little Rann के क्षेत्रों को घेरता है
    • इसे गुजरात के बीजण, राजकोट, पाटन, Banaskantha और Kutch जिलों के आस-पास देखा जा सकता है
    • अनुमानित क्षेत्रफल विभिन्न स्रोतों में लगभग 4954 वर्ग किलोमीटर (लगभग 5000 वर्ग किलोमीटर) के आसपास दिया गया है.​
    • महत्व और संरक्षण: यह अभयारण्य भारतीय घुड़खर (Indian Wild Ass) को संरक्षण देने के लिए एक एकमात्र प्रमुख क्षेत्र है
    • इसे जंगली घोड़ों के लिए एक अंतिम संरक्षित ठिकाना माना जाता है.​
    • अन्य संदर्भ: गुजरात के अलावा इस अभयारण्य के बारे में राजस्थान जैसे राज्यों में भी संरक्षण प्रयासों के बारे में समाचार और रिपोर्टें आती रही हैं
    • प्रभावी रूप से इसकी पहचान Gujarat के Little Rann of Kutch से जुड़ी है

8. पारितंत्र में विभिन्न स्तरों पर रहने वाली विभिन्न प्रजातियों के ऊर्ध्वाधर वितरण को ....... कहा जाता है। [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) स्तर-विन्यास
Solution:
  • पारितंत्र में विभिन्न स्तरों पर विभिन्न प्रजातियों के ऊर्ध्वाधर वितरण को स्तर-विन्यास कहते हैं।
  • उदाहरणार्थ-एक जंगल में वृक्ष सर्वोपरि ऊर्ध्वाधर स्तर, झाड़ियां द्वितीयक स्तर तथा जड़ी-बूटियां एवं घास निचले (धरातलीय) स्तर पर निवास करती हैं।
  • स्तरविन्यास की परिभाषा
    • स्तरविन्यास पारितंत्र की संरचना का वह पहलू है जिसमें पौधे, जंतु और अन्य जीव विभिन्न ऊंचाई स्तरों पर व्यवस्थित होते हैं
    • जैसे वृक्ष सबसे ऊपर, झाड़ियां बीच में और घास निचले स्तर पर।
    • यह व्यवस्था प्रकाश, आर्द्रता और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
    • उदाहरण के लिए, एक उष्णकटिबंधीय वर्षावन में ऊपरी छतरी (canopy) से लेकर जमीनी स्तर तक कई परतें होती हैं।​
  • स्तरविन्यास के प्रकार
    • वन पारितंत्र में: वृक्ष (उच्च स्तर), झाड़ियां (मध्य स्तर), जड़ी-बूटियां और घास (निम्न स्तर)।
    • जलीय पारितंत्र में: सतही पौधे (उपरी), उभयचर पौधे (मध्य) और तलीय जीव (निचला)।
    • क्षैतिज बनाम ऊर्ध्वाधर: क्षैतिज वितरण क्षेत्रीय होता है, जबकि ऊर्ध्वाधर ऊंचाई-आधारित होता है।​
  • महत्व और कार्य
    • स्तरविन्यास जैव विविधता को बढ़ाता है क्योंकि प्रत्येक स्तर पर अलग-अलग प्रजातियां निवास करती हैं
    • जो खाद्य श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह को संतुलित रखता है।
    • यह पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करता है और मानव हस्तक्षेप से प्रभावित होता है।​

9. पारिस्थितिकी में ....... को जैवभार प्रति इकाई क्षेत्रफल को वन पारिस्थितिकी तंत्र की आयु से विभाजित करके निर्धारित किया जाता है। [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जैवभार उत्पादकता
Solution:
  • पारिस्थितिकी में 'जैवभार उत्पादकता' को जैवभार प्रति इकाई क्षेत्रफल को वन पारिस्थितिकी तंत्र की आयु से विभाजित करके निर्धारित किया जाता है।
  • पूरा विवरण
    • जैव भार (Biomass) में एकत्रित कार्बनिक पदार्थों की मात्रा होती है
    • जो पौधों, सूक्ष्मजीवों और अन्य जीवों में मौजूद रहती है। एक वन पारिस्थितिकी तंत्र के संदर्भ में यह उपस्थिति विविध है
    • उम्र, पर्यावरणीय स्थितियाँ, प्रकाश उपलब्धता, जल और पोषक तत्वों के स्तर पर निर्भर करती है ।​
    • उत्पादकता (Productivity) या प्राथमिक उत्पादन वह दर है जिस पर वन प्रणाली जैव भार बनाती है
    • जिसे ऊर्जा या सूक्ष्म इकाइयों (जैसे कैलोरी, g/m2/yr) में मापा जाता है; यह GPP या NPP के रूप में व्यक्त किया जाता है ।​
    • वन पारिस्थितिकी में आयु वर्गीकरण और उम्र सीढ़ी (aging forest dynamics) जैव विविधता, संरचना, और संरक्षित पदार्थों के क्रमिक परिवर्तन को प्रभावित करते हैं
    • परंतु प्रश्न में पूछी इकाई के लिए यह “आयु से विभाजित जैव भार प्रति इकाई क्षेत्रफल” एक सामान्य उपसम्मुख माप देता है
    • जो बायोमास-आधारित प्रतिफल के विभाजन को दर्शाता है ।​
  • उपयोगी निष्कर्ष और स्पष्टता
    • यदि उद्देश्य जैव भार प्रति क्षेत्रफल प्रति वर्ष के साथ उम्र का अनुपात समझना है
    • तो इसे एक वन क्षेत्र की वास्तविक आयु (या उम्र संरचना) के साथ जैव भार के स्तर और संभावित परिवर्तन दर से जोड़ा जाना चाहिए
    • इससे यह समझ आता है कि कितने वर्षों में कौन सा भाग जैव भार बढ़ता है या घटता है, और किस अनुपात में पोषक तत्व उपलब्ध हैं ।​
    • पारिस्थितिकी में “जैव भार प्रति इकाई क्षेत्रफल” सामान्यतः g/m2 या kg/ha के हिसाब से दी जाती है
    • “आयु” से विभाजित करना संभव है ताकि उम्र-आधारित मापन मिल सके
    • जैसे कि युवा बनाम वयस्क जंगलों में बायोमैस संरचना में अंतर. यह प्रकार का विश्लेषण अक्सर दीर्घकालिक वन निगरानी में किया जाता है ।​
  • यदि चाहें तो निम्न कदम मदद करेंगे
    • स्पष्ट परिभाषा प्राप्त करें: क्या प्रश्न जैव भार/बायोमैस, या प्राकृतिक उत्पादन (NPP/GPP) के किसी विशेष प्रकार की परिभाषा पूछ रहा है?
    • उपयुक्त इकाई चुनें: g/m2 या kg/ha और आयु वर्ग के हिसाब से समूह बनाएं (जैसे 0-10 वर्ष, 11-50 वर्ष, आदि).
    • आँकड़ों की उपलब्धता: यदि किसी विशिष्ट वन ईकोसिस्टम के आयु-आधारित बायोमैस डेटा चाहिए
    • तो संबंधित अध्ययन/डेटाबेस से आयु-समूह के साथ बायोमैस मान जुटाने होंगे.
  • उद्धरण
    • जैव भार और प्राथमिक उत्पादन की परिभाषा तथा इकाइयाँ उत्पादकता के संदर्भ में स्पष्ट हैं ।​
    • वन पारिस्थितिकी में आयु, संरचना और जैव भार के बीच संबंधों के संदर्भ उपलब्ध हैं ।​
    • वैश्विक और क्षेत्रीय वन-आयु संरचना पर डेटा और विश्लेषण भी उपलब्ध होते हैं
    • जो आयु-आधारित बायोमैस को समझाते हैं ।​

10. संपारिस्थितिकी को निम्नलिखित में से किस रूप में परिभाषित किया जा सकता है? [CGL (T-I) 13 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) पारिस्थितिकी की एक शाखा, जो पारिस्थितिक समुदायों की संरचना, विकास और वितरण से संबंधित है।
Solution:
  • पारिस्थितिकी की वह शाखा, जो पारिस्थितिक समुदायों की संरचना, विकास और वितरण से संबंधित होती है, संपारिस्थितिकी कहलाती है।
  • मूल परिभाषा
    • संपारिस्थितिकी (synecology) वह अध्ययन क्षेत्र है
    • जिसमें विभिन्न प्रजातियों के समुदायों की संरचना, उनके बीच अंतःक्रियाएं और उनके पर्यावरण के साथ उनके संबंधों का विश्लेषण किया जाता है।
    • यह स्वपारिस्थितिकी (autoecology) से भिन्न है
    • स्वपारिस्थितिकी एक ही प्रजाति की पर्यावरण-प्रतिक्रियाओं के अध्ययन पर केंद्रित होती है
    • जबकि संपारिस्थितिकी समुदाय-आधारित दृष्टिकोण है।
  • प्रमुख उप-अवधारणा
    • पारिस्थितिक चक्र और नेटवर्क: खाद्य जाल, ऊर्जा प्रवाह, पदार्थ चक्र, प्रदूषण प्रभाव इत्यादि की भूमिका।
    • संरचना और संरचनात्मक गुण: espécies विविधता (richness), प्रजातियों का समानुपात (evenness), समूहों के आकार-आकार, वितरण का पैटर्न।
    • जनसंख्या-स्तर और समुदाय-स्तर क्रिया-कलाप: सह-अस्तित्व, प्रतिस्पर्धा, सहयोग, पर्ण-ग्रहण आदि जैव-आर्थिक इंटरैक्शन।
    • स्थायित्व और अस्थिरता: चक्रीय बदलाव, स्थिरता बनाम प्रवृत्ति परिवर्तन, विविधता का संरक्षण।
  • सन्दर्भ/दायरा
    • भूमि-आधारित और जल-आधारित पारिस्थितिकी दोनों में लागू; पेड़-झाड़ी-खेत-घास-स्थल आदि विविध पारिस्थितिकीगत संदर्भों में प्रभावी।
    • सामाजिक-समाज-आधार: मानवीय गतिविधियाँ जैसे कृषि, शहरीकरण, प्रदूषण, आवास परिवर्तन आदि से पारिस्थितिकी पर प्रभावों के अध्ययन भी इस दायरे में आते हैं।
  • संपारिस्थितिकी बनाम स्वपारिस्थितिकी
    • संपारिस्थितिकी: समुदाय स्तर पर संरचना, क्रिया-कलाप, और पर्यावरण के साथ समन्वय का विश्लेषण।
    • स्वपारिस्थितिकी: एकल प्रजाति के पर्यावरण-प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित।
  • क्यों महत्वपूर्ण है
    • जैव विविधता के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, जलवायु-सम्बन्धी बदलाव के प्रभावों के आकलन और पुनर्स्थापन (recovery) के लिए मानक ढांचा देता है।
    • प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, कृषि-परिस्थितिकी, और वन्यजीव प्रबंधन योजनाओं के लिए नीति-निर्माण में आधार बनती है।
  • अपेक्षित अध्ययन के गुण
    • वितरण और समावेशन के पैटर्न: किस प्रजाति की कितनी संख्या कहाँ पाई जाती है और यह किन कारकों से प्रभावित है।
    • इन्टरैक्शन मोडेल: खाद्य चक्र, सह-अस्तित्व, पारिस्थितिक सेवाओं (जैसे pollination, nutrient cycling) की उपलब्धता के अनुमान।
    • डेटा-आधारित विश्लेषण: क्रमिक सर्वेक्षण, मल्टी-डायमेंशनल एनालिसिस, मॉडलिंग और पूर्वानुमानित प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन।