उद्योग (भारत का भूगोल)Total Questions: 131. उद्योग और उसके स्थान से संबंधित निम्न में से कौन-सा/से युग्म सुमेलित है/हैं? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]I. लौह और इस्पात संयंत्र - भिलाईII. कॉटन टेक्सटाइल - लखनऊ(a) केवल II(b) केवल I(c) I और II दोनों(d) न तो I और न ही IICorrect Answer: (b) केवल ISolution:लौह और इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्थित हैजबकि उत्तर भारत के कानपुर, इटावा, मोदीनगर, बरेली आदि नगरों में मुख्यतः सूती वस्त्र उद्योग के कारखानें स्थित हैं।ये प्रश्न सामान्यतः विकल्पों के साथ आते हैं, जहां दिए गए युग्मों (जैसे लोहा-भिलाई, सूती कपड़ा-लखनऊ) की सत्यता जांचनी होती है।नीचे प्रमुख उद्योगों और उनके स्थानों के सुमेलित युग्म दिए गए हैंजो ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों पर आधारित हैं।प्रमुख स्टील उद्योगलोहा और इस्पात संयंत्र का प्रमुख स्थान भिलाई (छत्तीसगढ़) है, जो भारत के सबसे बड़े स्टील प्लांट्स में से एक हैसोवियत सहायता से स्थापित हुआ। जमशेदपुर (झारखंड) टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) के लिए प्रसिद्ध हैजबकि राउरकेला (ओडिशा) और बोकारो (झारखंड) भी महत्वपूर्ण हैं।ये युग्म खनिज संसाधनों (लौह अयस्क, कोयला) की निकटता पर आधारित हैं।वस्त्र उद्योगसूती कपड़ा उद्योग लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से जुड़ा है, जहां हथकरघा और पावरलूम आधारित उत्पादन प्रमुख है।कोयंबटूर (तमिलनाडु) दक्षिण भारत का सूती वस्त्र केंद्र हैजबकि अहमदाबाद (गुजरात) बड़ा पैमाने का मिलिंग हब है।ये स्थान कृषि-आधारित कच्चे माल (कपास) पर निर्भर हैं।अन्य महत्वपूर्ण युग्मएल्यूमीनियम: कोरबा (छत्तीसगढ़) और बालको (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स)।ऑटोमोबाइल: गुड़गांव (हरियाणा, मारुति सुजुकी) और चेन्नई (हाइundai, फोर्ड)।जहाज निर्माण: विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) और कोचीन (केरल)।ये सुमेलन आर्थिक भूगोल के अनुसार सही हैं, जहां कच्चा माल, श्रम और बाजार निकटता निर्णायक हैं।2. भारत के किस शहर को उसके ऑटोमोबाइल उद्योग के कारण 'डेट्रायट ऑफ इंडिया' कहा जाता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) पुणे(b) मुंबई(c) चेन्नई(d) बंगलुरूCorrect Answer: (c) चेन्नईSolution:चेन्नई को "डेट्रायट ऑफ इंडिया" कहा जाता है क्योंकि यह बड़ी संख्या में ऑटोमोबाइल विनिर्माण कंपनियों का हब है।चेन्नई का मोटर वाहन उद्योग भारत में सबसे बड़े उद्योगों में एक है और पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ रहा है।मुंबई को भारत की वित्तीय राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। बंगलुरू को "सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया" भी कहा जाता है।पीथमपुर और औद्योगिक दृष्टिपीथमपुर धार जिले में स्थित एक औद्योगिक नगर है जिसे अखाड़े में “मध्य प्रदेश का डेट्रायट” कहा जाता हैयह विशेषकर दो-चक्का, चार-चक्का वाहन और उनके इंजन/हिस्सों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है.यह क्षेत्र वर्षों से औद्योगिक आधार पर विकसित है: फाउंड्री, इंजीनियरिंग सेक्टर, और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन का एक दिलचस्प केंद्र बन चुका है.इतिहास और प्रसारपीथमपुर की औद्योगिक क्रांति सीमित समय में नहीं, बल्कि दशकों में विकसित हुई हैस्थानीय संस्थान और कंपनियाँ इंजीनियरिंग कौशल सिखाने और कच्चे माल के साथ क्लोज-लूप सप्लाई पर केंद्रित रहीं।परिणामस्वरूप छोटे-से-मध्यम उद्योगों का एक बड़ा नेटवर्क बन गया।तुलना: क्यों डेट्रायट समानताडेट्रायट शहर अमेरिकी ऑटो उद्योग का हृदय रहा हैजहाँ बड़े ऑटोमेकर्स और सप्लायर्स आसपास रहते हैं और एक मजबूत आपूर्ति चेन बनती है।पीथमपुर में भी ऐसी ही ऑटोपार्ट्स-निर्माण की गहनता हैजो इसे “डेट्रायट ऑफ इंडिया” जैसी पहचान देती है।हालांकि दोनों स्थानों का आकार, इतिहास और वैश्विक भूमिका भिन्न हैऑटो उद्योग के केंद्र में रहने की समान धारणा स्पष्ट दिखती है.प्रासंगिक नोटकुछ स्रोतों में पीथमपुर को भारत के प्रमुख ऑटोमोटिव क्लस्टर के रूप में पहचाना गया हैक्षेत्रीय विकास द्वारा नौकरी-उत्पादन में वृद्धि का संकेत मिलता है। यह उपाधि संकेत देती हैयह क्षेत्र कैसे ऑटो उद्योग की गतिविधियाँ, कौशल विकास और उत्पादन के लिए एक स्थिर मंच बना रहा है.3. भारत के किस राज्य में एल्युमीनियम प्रगलन संयंत्रों की संख्या सबसे अधिक है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (I-पाली)](a) तमिलनाडु(b) महाराष्ट्र(c) उत्तर प्रदेश(d) ओडिशाCorrect Answer: (d) ओडिशाSolution:भारत के ओडिशा में एल्युमीनियम प्रगलन संयंत्रों की संख्या सबसे अधिक है।ओडिशा के एल्युमीनियम प्रगलन संयंत्रों में शामिल कुछ प्रमुख कंपनियों में नाल्को, वेदांता एल्युमीनियम लिमिटेड, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड आदि हैं।ओडिशा: सबसे अधिक संयंत्रप्रमुख उद्योग-संयोजन: ओडिशा में सरकार-समर्थित और निजी क्षेत्र दोनों प्रकार के बड़े एल्यूमीनियम संयंत्र सक्रिय हैंजिसमें प्रमुख नाम और Vedanta के एल्यूमिनियम उपक्रम शामिल हैं।इससे इस राज्य में कुल संयंत्रों की संख्या सबसे अधिक रहती है।क्षेत्रीय रणनीति: बॉक्साइट और एल्यूमिना के व्यापक भंडार इसे प्रगणन-आधारित उद्योग के लिए उपयुक्त बनाते हैंजिससे नए और मौजूदा संयंत्र स्थापित होते गए हैं।विस्तृत संदर्भ: ओडिशा के अलावा उत्तरपूर्वी और पूर्वी क्षेत्रों में एल्यूमीनियम-उत्पादन का कुछ अन्य केंद्र हैंकुल मिलाकर संयंत्रों की संख्या सबसे अधिक वही रहता है।अन्य प्रमुख एल्यूमीनियम पंक्ति-उत्पादन केंद्रतमिलनाडु: MALCO, तटीय और आंतरिक प्लांट्स साथपश्चिम बंगाल: असनसोल क्षेत्र के पास कुछ संयंत्रछत्तीसगढ़/महाराष्ट्र/Kerala आदि: छोटे-से-मध्यम स्तर के संयंत्र और downstream इकाइयाँ मौजूद हैंयह क्षेत्र-वार विभाजन स्थापित उद्योग-आधार के कारण ओडिशा के मुकाबले कम खुले तौर पर अधिक नहीं हैनिष्कर्षसबसे अधिक एल्यूमीनियम प्रगलन संयंत्रों की संख्या के संदर्भ में ओडिशा देश में अग्रणी राज्य बना हुआ हैजो इस क्षेत्र में व्यवस्थित उत्पादन के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है।4. भारत में लौह और इस्पात उद्योगों का सर्वाधिक संकेंद्रण किस क्षेत्र में है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली), CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (IV-पाली)](a) छत्तीसगढ़ का पठार(b) छोटा नागपुर का पठार(c) मालवा का पठार(d) दक्कन का पठारCorrect Answer: (b) छोटा नागपुर का पठारSolution:भारत में लौह और इस्पात उद्योगों का सर्वाधिक संकेंद्रण छोटा नागपुर का पठार क्षेत्र में है।भारत के कोयला क्षेत्रों में से अधिकांश गोण्डवाना काल से संबंधित हैं।छोटा नागपुर का पठार गोण्डवाना क्षेत्र में ही आता है।क्षेत्रीय वितरण का सारपूर्वी क्षेत्र का नेतृत्व: झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिम बंगाल के औद्योगिक बेलों में भारी-उत्पादन केंद्र विकसित हैं।झारखंड के महानगर और चतुर्थी क्षेत्रों में स्टील प्लांट्स का संकेंद्रण अधिक हैजिससे देश के कुल उत्पादन में बड़ा योगदान होता है।[आम तौर पर मान्य industrial geography के आधार पर]पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र भी महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र हैंटिस्को, दुर्गापुर आदि जैसे आधुनिक संयंत्र पश्चिम बंगाल/झारखंड के साथ-साथ महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि में फैले हैं।हालांकि इन क्षेत्रों में घनत्व पूर्वी क्षेत्र से कम रहता है। [उद्योग-वितरण पर सामान्य अध्ययन स्रोत]कच्चे माल और ऊर्जा के निकटता प्रभावी फैक्टर्स: लौह अयस्क के बड़े भंडार (झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा) और कोयला-उच्च उत्पादन वाले क्षेत्र उद्योग के केंद्र बनते हैंताकि लॉजिस्टिक लागत कम हो और उत्पादन तेज़ हो सके।इसके कारण भू-आर्थिक संकेंद्रण पूर्वी/मध्य भारत में अधिक रहता है। [उद्योग-आर्थिक विश्लेषण]प्रमुख संरचनात्मक कारककच्चे माल तक आसान पहुंच: लौह अयस्क और कोयला के निकटता से संयंत्रों को ऊँचे स्तर के उत्पादन पर टिके रहने में मदद मिलती है।यह कारण पूर्वी राज्यों में स्थित संयंत्रों का प्रमुख आधार बनता है। [स्थानीयकरण के सामान्य तथ्य]ऊर्जा उपलब्धता: भारी विद्युत खपत वाले इस उद्योग के लिए सुरक्षित और सस्ते बिजली संभावित संयंत्र-निर्माण को प्रेरित करती हैजिससे ऊर्जा-प्रधान क्षेत्रों में निवेश बढ़ता है। [ऊर्जा-आपूर्ति संदर्भ]परिवहन और बाजार: रेल/रोड और पोर्ट तक बेहतर कनेक्टिविटी होने से उत्पादन-चरण से बाजार तक लागत कम होती हैजिससे प्रमुख उत्पादन केंद्र बने रहते हैं। [बाजार-उत्पादन चैनल]दिग्गज कंपनियाँ और कई संयंत्रसरकार-निजी साझेदार और निजी क्षेत्र के बड़े प्लांट्स मिलकर क्षेत्रीय संकेंद्रण को मजबूत बनाते हैं, विशेषकर पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में।प्रमुख कंपनियाँ जैसे TISCO, RINL, SAIL के संस्थान, Vedanta समूह और अन्य स्थानों पर बड़े संयंत्र संचालित करते हैं। [उद्योग-आयोजन]अगर चाहें, एक क्षेत्र-वार विस्तृत तालिका (राज्य बनाम संयंत्र संख्या, प्रमुख संयंत्र, नवीनीकरण/उत्पादन क्षमता आदि) बना सकता हूँ।साथ ही, किसी खास कंपनी के संयंत्र पते/क्षमता की सूची भी दे सकता हूँ ताकि तुलना सरल हो।5. निम्नलिखित में से कौन-से भारत के महत्वपूर्ण इस्पात उत्पादक केंद्र हैं? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (III-पाली)]I. भिलाईII. जमशेदपुरIII. राउरकेला(a) केवल I और II(b) केवल I और III(c) I, II और III(d) केवल II और IIICorrect Answer: (c) I, II और IIISolution:लौह एवं इस्पात उद्योगों का सर्वाधिक संकेंद्रण छोटा नागपुर के पठार के क्षेत्र में है।इन क्षेत्रों के अंतर्गत जमशेदपुर, बर्नपुर, बोकारो, दुर्गापुर, राउरकेला आदि लौह-इस्पात संयंत्र आते हैं।भारत के प्रमुख इस्पात उत्पादक केंद्र भिलाई, राउरकेला, बोकारो, दुर्गापुर, जमशेदपुर और विशाखापत्तनम जैसे स्थान हैं।ये केंद्र सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों में फैले हुए हैं तथा देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख केंद्रभिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ में स्थित हैजिसकी स्थापना सोवियत संघ की सहायता से 1959 में हुई तथा यह उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात का प्रमुख उत्पादक है।राउरकेला (ओडिशा) और बोकारो (झारखंड) संयंत्र भी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के अंतर्गत आते हैंजहां लौह अयस्क और कोयले की प्रचुर उपलब्धता के कारण उत्पादन क्षमता उच्च है।दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) और विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) विशेष इस्पात उत्पादों पर केंद्रित हैं।निजी क्षेत्र के प्रमुख केंद्रजमशेदपुर में टाटा स्टील भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा निजी इस्पात संयंत्र हैजो 1907 में स्थापित हुआ तथा छोटानागपुर पठार के खनिज संसाधनों पर निर्भर है।अन्य महत्वपूर्ण निजी केंद्रों में जिंदल स्टील (रायगढ़, छत्तीसगढ़), जेएसडब्ल्यू स्टील (विजयनगर, कर्नाटक) और एस्सार स्टील (हजीरा, गुजरात) शामिल हैं।ये केंद्र आधुनिक तकनीक से स्टेनलेस स्टील और विशेष मिश्र धातुओं का उत्पादन करते हैं।अन्य उल्लेखनीय केंद्रसलेम (तमिलनाडु) स्टेनलेस स्टील का प्रमुख उत्पादक हैजबकि बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) और भद्रावती (कर्नाटक) विशेष इस्पात पर फोकस करते हैं।छोटानागपुर पठार इस उद्योग का मुख्य केंद्र हैजहां झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य अग्रणी हैं।भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है, जिसमें टाटा स्टील और सेल प्रमुख हैं।6. IISCO (इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी) ने अपना पहला कारखाना कहां स्थापित किया था? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) रुड़की(b) जमशेदपुर(c) हीरापुर(d) भिलाईCorrect Answer: (c) हीरापुरSolution:IISCO (इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी) ने 1922 में पहली बार पश्चिम बंगाल के हीरापुर (बाद में बर्नपुर कहा जाने लगा) में एक ओपन-टॉप ब्लास्ट फर्नेस से आयरन का उत्पादन किया।यह पूर्ण रूप से विकसित औद्योगिक प्लांट भारत के सबसे पुराने प्लांटों में से एक है।स्थापना और प्रारंभिक इतिहासIISCO की नींव 19वीं शताब्दी के अंत में रखी गई, जब 1890 के आसपास बंगाल आयरन एंड स्टील कंपनी ने हिरापुर में लौह उत्पादन शुरू किया।जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र का पहला एकीकृत इस्पात संयंत्र था।हिरापुर का चयन दामोदर घाटी के कोयला क्षेत्रों (रानीगंज, झरिया) की निकटता और सिंहभूम के लौह अयस्क भंडारों के कारण किया गया।विकास और विस्तारहिरापुर संयंत्र के बाद, कंपनी ने कुल्टी और बर्नपुर में अतिरिक्त इकाइयां स्थापित कीं; 1937 में स्टील कॉर्पोरेशन ऑफ बंगाल ने नापुरिया में स्टील उत्पादन शुरू किया।1972 में राष्ट्रीयकरण के बाद 2006 में इसे स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में विलय कर IISCO स्टील प्लांट नाम दिया गयाजिसकी क्षमता अब 2.5 मिलियन टन प्रति वर्ष है।कच्चा माल सिंहभूम (झारखंड), मयूरभंज और चिरिया खदानों से प्राप्त होता था।वर्तमान स्थिति और महत्वबर्नपुर स्थित IISCO अब SAIL का प्रमुख संयंत्र है, जो उच्च गुणवत्ता वाले स्टील का उत्पादन करता हैभारत के इस्पात क्षेत्र में योगदान देता है। यह छोटानागपुर पठार के अन्य केंद्रों जैसे जमशेदपुर के साथ मिलकर देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।7. राउरकेला स्टील प्लांट जर्मनी के सहयोग से भारत के किस राज्य में स्थापित किया गया था? [CGL(T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) ओडिशा(b) असम(c) झारखंड(d) बिहारCorrect Answer: (a) ओडिशाSolution:राउरकेला स्टील प्लांट जर्मनी के सहयोग से भारत के ओडिशा राज्य में स्थापित किया गया था।इसका उद्घाटन 1959 में पूर्व भारतीय राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया था।स्थापना का इतिहास पश्चिम जर्मनी की कंपनियों क्रुप (Krupp) और डेमाग (Demag) ने इसकी स्थापना में तकनीकी सहयोग प्रदान कियाजो भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के पहले एकीकृत इस्पात संयंत्रों में से एक था।यह लगभग 7,700 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया गयाजो स्थानीय आदिवासी समुदायों से अधिग्रहित की गई थी।भौगोलिक और संसाधन स्थितिसंयंत्र साख और कोइल नदियों के संगम पर स्थित हैजहां से पानी की आपूर्ति होती है, जबकि हीराकुंड परियोजना बिजली प्रदान करती है।लौह अयस्क सुंदरगढ़ और केंदुझार से तथा कोयला झरिया (अब झारखंड) से प्राप्त होता है।ओडिशा का यह क्षेत्र खनिज संसाधनों से समृद्ध होने के कारण उपयुक्त चुना गया।वर्तमान स्थिति और महत्वआज यह स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) द्वारा संचालित है और फ्लैट स्टील उत्पादों का प्रमुख उत्पादक हैजिसमें बिजली क्षेत्र के लिए सिलिकॉन स्टील तथा तेल-गैस क्षेत्र के लिए पाइप शामिल हैं।राउरकेला शहर भी इसी संयंत्र के कारण औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित हुआजहां राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान (NIT) भी स्थित है।यह भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना रहा।8. 19वीं सदी की शुरुआत में भारत में कॉटन मिलें ज्यादातर निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित थीं? [CGL (T-I) 03 दिसंबर, 2022 (III-पाली)](a) हरियाणा(b) असम(c) पंजाब(d) महाराष्ट्रCorrect Answer: (d) महाराष्ट्रSolution:19वीं सदी की शुरुआत में भारत में कॉटन मिलें (सूती कपड़ा मिलें) अधिकांशतः महाराष्ट्र राज्य में स्थित थीं।भारत में पहली सूती कपड़ा मिल 1818 ई. में फोर्ट ग्लास्टर (कोलकाता) में स्थापित हुई।भारत की पहली सफल सूती कपड़ा मिल 1854 ई. में कावसजी नानाभाई डावर द्वारा तत्कालीन बंबई में स्थापित की गई थीस्थापना का प्रारंभिक इतिहासभारत में आधुनिक कपड़ा उद्योग की शुरुआत ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में हुई।1818 में फोर्ट ग्लोस्टर (कोलकाता के पास) में पहली मिल स्थापित हुईलेकिन यह व्यावसायिक रूप से विफल रही क्योंकि मशीनें आयातित थीं और रखरखाव कठिन था।सच्ची सफलता 1854 में बॉम्बे स्पिनिंग एंड वीविंग कंपनी के रूप में मिलीजिसकी स्थापना पारसी उद्योगपति कोवासजी नानाभाई डावर ने की।यह मिल तारदेव (मुंबई) में थी और अमेरिकी गृहयुद्ध (1861-65) के दौरान कपास निर्यात बढ़ने से फली-फूली।बॉम्बे का प्रभुत्व19वीं सदी के मध्य तक बॉम्बे प्रेसीडेंसी में अधिकांश मिलें केंद्रित हो गईंक्योंकि यहां कपास की खेती गुजरात और महाराष्ट्र के काला कॉटन क्षेत्र में प्रचुर थी।1895 तक भारत में 70 मिलें थीं, जिनमें से अधिकांश बॉम्बे और अहमदाबाद में थीं।अहमदाबाद में पहली मिल 1861 में शाहपुर मिल के रूप में स्थापित हुईजो बॉम्बे का प्रतिस्पर्धी बनी। बॉम्बे को "पूर्वी मैनचेस्टर" कहा जाने लगा।अन्य क्षेत्रों की भूमिकाकोलकाता और मद्रास प्रेसीडेंसी में कुछ मिलें थीं, लेकिन संख्या कम थी।शोलापुर और नागपुर जैसे क्षेत्र बाद में उभरे।कुल मिलाकर, 19वीं सदी के अंत तक कपड़ा उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का 14% औद्योगिक उत्पादन और 30% निर्यात योगदान देता था।यह उद्योग कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार सृजनकर्ता बना।9. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग भारत में अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)](a) लोहा और इस्पात(b) विमानन(c) रसायन(d) ऑटोमोबाइलCorrect Answer: (c) रसायनSolution:रसायन उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है।रसायन उद्योग के भीतर व्यापक विविधता हैइसमें 80 हजार से अधिक वाणिज्यिक उत्पाद शामिल हैं।यह उद्योग देश के औद्योगिक एवं कृषि विकास की रीढ़ हैयह कई डाउनस्ट्रीम उद्योगों जैसे वस्त्र, कागज, रंग, वार्निश, साबुन, डिटर्जेंट, औषधि आदि के लिए मूलभूत सामग्री प्रदान करता है। अतः सही उत्तर विकल्प (c) होगा।उपभोक्ता उद्योग क्या हैवे उद्योग जो सीधे आम लोगों या घरेलू उपभोक्ताओं को अंतिम वस्तुएँ वितरित करते हैंकेवल अन्य उद्योगों के लिए पूंजीगत वस्तुएँ बनाते हैं।उदाहरण: चीनी, कागज, साबुन, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि।भारत में उपभोक्ता उद्योग की भूमिकाउपभोक्ता उद्योग घरेलू मांग को पूरा करते हैंउपभोक्ता मूल्य चक्र को स्थिर रखने में मदद करते हैं।इनमें दैनिक उपयोग की वस्तुएँ शामिल रहती हैंजो आम जनता की जीवनरक्षा, स्वाथ्य और आराम से जुड़ी होती हैं ।भारत के संदर्भ में उपभोक्ता उद्योग कई औद्योगिक संरचना का हिस्सा हैंइनकी कीमतें व आपूर्ति घरेलू बाजार के संतुलन पर प्रभाव डालती हैं.क्यों यह बड़ा उपभोक्ता माना जाता हैभारी मात्रा में उत्पादन और वितरण श्रृंखला: उपभोक्ता उद्योगों में सबसे बड़े पैमाने पर उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन गतिविधियाँ होती हैंजिससे रोजगार और राजस्व भी बड़ा हिस्सा लेते हैं.अंतर्देशीय मांग पर निर्भरता: कोविड-19 और मौजूदा आर्थिक चक्र जैसे घटनाकारी कारक भी उपभोक्ता उद्योगों की स्थिति को सीधा प्रभावित करते हैंक्योंकि घरेलू खपत देश की आर्थिक स्थिरता के लिए अहम हैव्यापक दृष्टिकोण: अन्य उद्योगों के भीतर उपभोक्ता उद्योग की पहचानउपभोक्ता उद्योग वह श्रेणी है जो सीधे उपभोक्ता के लिए वस्तुओं का उत्पादन करती हैजबकि अन्य प्रकार के उद्योग (जैसे आधारभूत/औद्योगिक, पूंजीगत) अक्सर इन वस्तुओं के निर्माण के पीछे पड़े ترتिकायों का भाग होते हैं.एक पाठकीय उदाहरणएक प्रमुख वस्तु जैसे कागज बनाना एक उपभोक्ता उद्योग के रूप में देखा जा सकता हैक्योंकि इसका अंतिम उपयोग सामान्य उपभोक्ता द्वारा किया जाता हैजबकि कच्चे माल और मशीनरी उत्पादों के पीछे अन्य औद्योगिक प्रक्रियाएँ हो सकती हैं10. सूरत, नवसारी और भावनगर किस उद्योग में अपनी भागीदारी के लिए जाने जाते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) सॉफ्टवेयर उद्योग(b) हीरा उद्योग(c) ऑटोमोबाइल उद्योग(d) लौह एवं इस्पात उद्योगCorrect Answer: (b) हीरा उद्योगSolution:सूरत, नवसारी और भावनगर हीरा उद्योग में अपनी भागीदारी के लिए जाने जाते हैं।खम्भात की खाड़ी के निकट स्थित भावनगर अपने हीरे की कटाई और पॉलिशिंग उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।सूरत का टेक्सटाइल उद्योगसूरत को "सिल्क सिटी" या "टेक्सटाइल कैपिटल ऑफ इंडिया" कहा जाता है।यहां भारत के कुल मैनमेड (सिंथेटिक) कपड़ा उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा तैयार होता हैजिसमें पॉलिएस्टर, नायलॉन और विस्कोज़ जैसे यार्न से बने कपड़े प्रमुख हैं।शहर में हजारों छोटे-मध्यम उद्यम (SMEs), लूम मशीनें (लगभग 5.5 लाख), प्रिंटिंग और डाईंग यूनिट्स हैंजो साड़ियां, ड्रेस मटेरियल और होलसेल कपड़े बनाते हैं।ऐतिहासिक रूप से सदियों पुराना यह उद्योग आधुनिक तकनीकों जैसे वाटरजेट और एयरजेट लूम्स से लैस हैजो रोजाना करोड़ों मीटर कपड़ा उत्पादित करता है।सूरत के रिंग रोड पर मिलेनियम, टेक्सटाइल मार्केट जैसे बाजार वैश्विक व्यापार केंद्र हैं, जो लाखों लोगों को रोजगार देते हैं।नवसारी का योगदाननवसारी सूरत के निकट स्थित है और टेक्सटाइल क्लस्टर का अभिन्न हिस्सा है।यहां मुख्य रूप से पॉलिएस्टर यार्न, डाईंग और प्रोसेसिंग उद्योग फलता-फूलता हैजो सूरत के कपड़ा उत्पादन को कच्चा माल और फिनिशिंग प्रदान करता है।नवसारी में कई पावरलूम और वेअरिंग यूनिट्स हैं, जो सिंथेटिक फैब्रिक्स पर केंद्रित हैं।यह क्षेत्र सूरत के साथ मिलकर गुजरात के टेक्सटाइल बेल्ट का निर्माण करता हैजहां निर्यात-उन्मुख इकाइयां भी सक्रिय हैं।स्थानीय स्तर पर यह उद्योग कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़कर ग्रामीण रोजगार बढ़ाता है।भावनगर का टेक्सटाइल महत्वभावनगर को "मैनमेड फैब्रिक्स का हब" माना जाता हैजहां पॉलिएस्टर और सिंथेटिक कपड़ों का उत्पादन प्रमुख है।शहर में बड़ी संख्या में वेअरिंग मिल्स, प्रोसेस हाउस और यार्न मिल्स हैंजो साड़ी, सूटिंग और शर्टिंग मटेरियल बनाते हैं।भावनगर का उद्योग सूरत की तरह ही SMEs पर आधारित हैयह गुजरात के कुल टेक्सटाइल उत्पादन में उल्लेखनीय भूमिका निभाता है।इसके अलावा, बंदरगाह होने से निर्यात सुगम है, जो उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ता है।इन शहरों का सामूहिक प्रभावये तीनों शहर गुजरात के सिंथेटिक टेक्सटाइल क्लस्टर का गठन करते हैंजो भारत के 60% से अधिक मैनमेड फैब्रिक्स का उत्पादन करते हैं। सूरत उत्पादन और बाजार का केंद्र हैनवसारी सपोर्टिंग प्रोसेसिंग का, जबकि भावनगर विशेषज्ञता वाली मिल्स का। इस उद्योग से लाखों प्रवासी श्रमिक जुड़े हैंहालांकि चुनौतियां जैसे श्रमिक स्थितियां, जीएसटी प्रभाव और तकनीकी अपग्रेड बनी हुई हैं।आर्थिक रूप से यह निर्यात, रोजगार (लगभग 50 लाख सीधे) और GDP में योगदान देता है।Submit Quiz12Next »