विविध (भारत का भूगोल)

Total Questions: 43

1. निम्नलिखित में से कौन-सा कृत्रिम पारितंत्र (Artificial ecosystem) का एक उदाहरण है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) जल जीवशाला / मत्स्यालय
Solution:
  • जल जीवशाला/मत्स्यालय कृत्रिम पारितंत्र का एक उदाहरण है। कृत्रिम पारितंत्र वे पारितंत्र होते हैं
  • जो मानव निर्मित होते हैं। मूंगा चट्टानें, घास के मैदान व रेगिस्तान प्राकृतिक पारितंत्र के उदाहरण हैं।
  • कृत्रिम पारितंत्र क्या है?
    • कृत्रिम पारितंत्र वे पर्यावरणीय तंत्र हैं जिन्हें मनुष्यों ने विशेष उद्देश्यों के लिए बनाया या नियंत्रित किया है।
    • इसमें जैविक और अजैविक घटक दोनों होते हैं, जिन्हें मनुष्यों द्वारा व्यवस्थित किया गया होता है
    • ताकि किसी निश्चित निष्कर्ष/उत्पादन (जैसे फसल, पार्क, आर्किटेक्चर, आवासीय लॉन आदि) की पूर्ति हो।
    • उदाहरण के तौर पर बगीचा, खेत, उद्यान, चिड़ियाघर, जलीय खेती (फिश फार्म, वेटनरी टैंक) आदि आते हैं।
    • यह स्पष्ट है कि प्राकृतिक आवासों से बने पारितंत्र की तरह स्वयं-संरक्षित नहीं होते, बल्कि मानव द्वारा बनाए और नियंत्रित रहते हैं [दृष्टांत स्रोत: विविध शैक्षणिक सामग्री]।
  • एकदम स्पष्ट उदाहरण
    • खेत का पारितंत्र: खेत एक ऐसा कृत्रिम पारितंत्र है जिसे मनुष्यों ने फसल उगाने के उद्देश्य से बनाया है।
    • यहाँ पौधों, मिट्टी, पानी, खनिज तत्व, कीट-प्रतिकारक आदि सभी घटक मानव-निर्धारित वातावरण में स्थापित होते हैं
    • इस सिस्टम के कार्य-प्रणाली (घडि़त पौधों का विकास, पोषण के स्रोत, जल आपूर्ति, सुरक्षा आदि) मानव नियंत्रण में रहते हैं
    • [उद्धरण- सामान्य पाठ्यपुस्तकियों/शिक्षकीय सामग्री]।
  • कृत्रिम पारितंत्र के अन्य प्रमुख उदाहरण
    • बगीचे और उद्यान: घरेलू या सामुदायिक बगीचे जिन्हें सजावट, स्वास्थ्यवर्धन या शौक के लिए तैयार किया जाता है
    • इसमें पौधे, मिट्टी, जल, खाद आदि मानव द्वारा नियंत्रित रहते हैं।
    • चिड़ियाघर: जानवर और उनसे जुड़ा पर्यावरण एक नियंत्रित वातावरण में प्रदर्शित होता है।
    • हाइड्रोपोनिक/जलीय कृषि इकाइयाँ: पानी-आधारित बढ़त प्रणाली जिसमें पौधे जल-घुलित पोषक तत्वों के साथ उगाये जाते हैं।
    • ग्रीनहाउस: एक नियंत्रित वातावरण जिसमें तापमान, नमी और रोशनी आदि नियंत्रित रहते हैं ताकि उच्च गुणवत्ता वाली खाद्य वस्तुएँ प्राप्त की जा सकें।
  • कृत्रिम बनाम प्राकृतिक पारितंत्र के बीच मुख्य अंतर
    • उत्पत्ति: कृत्रिम पारितंत्र मनुष्य द्वारा बनाये जाते हैं
    • प्राकृतिक पारितंत्र प्रकृति के नियमों के अनुसार विकसित होते हैं बिना मानव-निर्देशन के।
    • नियंत्रण: कृत्रिम में मानव का नियंत्रण अधिक होता है (उदा. जल, पोषक तत्व, पौध चयन आदि); प्राकृतिक पारितंत्र में नियंत्रण सीमित होता है
    • यह स्वयं-स्थिरता के माध्यम से कार्य करता है।
    • उद्देश्य: कृत्रिम पारितंत्र सामान्यतः उत्पादन, आनंद, शिक्षा या अनुसंधान के लिए बनाए जाते हैं
    • प्राकृतिक पारितंत्र का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा प्रवाह और जैव-चक्र का सम्मिलित संरक्षण होता है।
  • संक्षिप्त निष्कर्ष
    • कृत्रिम पारितंत्र का एक मजबूत और स्पष्ट उदाहरण खेत है
    • क्योंकि यह मानव द्वारा स्थापित किया गया है
    • फसल उत्पादन के लिए सभी जैविक और अजैविक घटकों के साथ नियंत्रित वातावरण प्रदान करता है [उल्लेख: सामान्य शिक्षण स्रोत]।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा आधुनिक भारतीय भाषाओं के वर्गीकरण में एक परिवार नहीं है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) भारतीय - अफ्रीकी
Solution:
  • भारत की भाषाओं को चार प्रमुख परिवारों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
  • द्रविड़, इंडो-आर्यन, चीन-तिब्बती तथा ऑस्ट्रो एशियाटिक।
  • संक्षिप्त उत्तर: आधुनिक भारतीय भाषाओं के वर्गीकरण में एक परिवार नहीं है वह है
  • भारोपीय भाषा परिवार” (Indo-European) का हिस्सा नहीं माना जाता।
  • आधुनिक भारतीय भाषाएँ मुख्यतः दो महत्वपूर्ण शाखाओं में आती हैं
  • आर्य भाषाएं (Hindi, Bengali, Marathi आदि) और द्रविड़ भाषाएं (Tamil, Telugu, Kannada, Malayalam आदि), साथ ही असमिया, ओड़िया आदि कुछ अन्य परिवारों के तत्व भी जुड़े होते हैं।
  • भारोपीय भाषा परिवार विश्व के अनेक भाषाओं को मिलाकर बना है, परन्तु यह भारतीय भाषाओं का परिवार नहीं है
  • भारतीय भाषाएँ its own internal विभाजन में आती हैं और भारोपीय से अलग हैं।
  • इस प्रश्न के साथ-साथ भारतीय भाषाओं के वर्गीकरण का विस्तार नीचे दिया गया है।
  • आधुनिक भारतीय भाषाओं का मुख्य वर्गीकरण
    • आर्य भाषाएँ (Indo-Aryan): हिन्दी, उर्दू, बँगला, मराठी, गुजराती, पंजाबी, असमिया आदि; ये भाषाएँ मुख्यतः उत्तर भारत, पूर्वी भारत और आसपास के क्षेत्रों में बोली जाती हैं।
    • यह समूह भारतीय उपमहाद्वीप के भीतर अधिकांश भाषाओं का प्रमुख हिस्सा है.​
    • द्रविड़ भाषाएँ (Dravidian): तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मल्यालम आदि; इन भाषाओं का प्रचलन दक्षिण भारत और कुछ क्षेत्रों में है.​
    • अन्य परिवार और उप-परिवार: तिब्बती-बर्मी (बर्मीयन-मीန်း), ऑस्ट्रो-एशियाई आदि कुछ छोटी भाषाएँ भी भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाती हैं
    • वे भारतीय उपमहाद्वीप के भीतर “भारतीय भाषाओं का एक स्वतंत्र परिवार” नहीं कहे जाते; ये भाषाएं क्षेत्रीय तौर पर पहचानी जाती हैं.​
  • भारोपीय भाषा परिवार क्या है?
    • भारोपीय (Indo-European) भाषा परिवार विश्व का एक विशाल भाषा परिवार है
    • जिसमें अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन, रूसी और विभिन्न ईरानी/आर्य भाषाएँ शामिल हैं।
    • इसे भारत की भाषाओं का एक परिवार नहीं माना जाता, बल्कि यह एक वैश्विक परिवार है
    • जिसमें भारतीय आर्य भाषाओं के कई उपशाखाएँ भी शामिल हैं
    • जैसे कि भारतीय आर्य भाषाओं की कुछ शाखाएँ (पूर्व-आर्य/पश्चिमी-उत्तर) भारोपीय परिवार के अंतर्गत दिखती हैं
    • परंतु आधुनिक भारतीय भाषाओं का मुख्य वर्गीकरण भारोपीय से स्वतंत्र और अलग संरचना के रूप में किया जाता है.​
  • क्यों भारोपीय परिवार एक भारतीय भाषाओं का परिवार नहीं कहलाता
    • कारण: भारोपीय परिवार विश्वव्यापी है और इसका इतिहास, विकास-यात्रा और संरचना पूरी तरह अलग है
    • जबकि भारतीय भाषाओं का मूल-विकास और विविधता उपमहाद्वीप के आंचल से जुड़ा है
    • इनकी प्रमुख शाखाएं आर्य (Indo-Aryan) और द्रविड़ (Dravidian) के रूप में स्वायत्त रूप से पहचानी जाती हैं.​
  • विविध स्रोतों से सामान्य उद्धरण
    • भारोपीय भाषा परिवार के अंदर पूर्वी/पश्चिमी शाखाओं के विभाजन और आर्य भाषाओं की भूमिका अक्सर शिक्षासामग्री में दिखाई देती है
    • परन्तु इसे भारतीय भाषाओं के “परिवार” के रूप में नहीं बल्कि एक वैश्विक परिवार के रूप में वर्णित किया जाता है.​
    • हिंदी-उर्दू- बँगला- मराठी आदि आर्य भाषाओं के भीतर विभाजन और उपशाखाओं का वर्णन भी उपलब्ध है
    • जो बताता है कि आधुनिक भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण भारोपीय से स्वतंत्र है.​
  • कौन-सा आधुनिक भारतीय भाषाओं के वर्गीकरण में एक परिवार नहीं है?
    • भारोपीय भाषा परिवार आधुनिक भारतीय भाषाओं के वर्गीकरण में एक “परिवार” के रूप में शामिल नहीं है
    • भारतीय भाषाओं के भीतर आर्य और द्रविड़ भाषाओं के अपने स्वतंत्र परिवार/शाखाओं होते हैं
    • जबकि भारोपीय एक अलग वैश्विक परिवार है
    • जिसका हिस्सा भारतीय भाषाओं के कुछ उप-प्रभाग के रूप में कभी-कभी संदर्भित किया जा सकता है
    • वह भारतीय भाषाओं का एक मौलिक परिवार नहीं है.​
  • यदि चाहें, मैं आपको एक साफ-साफ तुलनात्मक सारणी दे सकता/सकती हूँ जिसमें:
    • भारोपीय बनाम भारतीय भाषाओं के प्रमुख परिवार/शाखाओं के नाम
    • उत्पत्ति और क्षेत्रीय वितरण
    • प्रमुख उदाहरण भाषाएं
    • संरचनात्मक अंतर

3. 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan)' का मुख्य उद्देश्य क्या है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना
Solution:
  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लागू दिशा-निर्देशों और उपायों का एक सेट है
  • जिसमें दिल्ली और इसके आस-पास के क्षेत्र शामिल हैं।
  • यह एक उच्च-स्तरीय, कानूनी-आधारित नीति Framework है जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (MC Mehta vs India, 2016) के अनुसरण में adopt किया गया था
  • 2016-2017 के बीच अधिसूचित किया गया। GRAP के भीतर विभिन्न स्टेज़/चरण निर्धारित होते है
  • जिन्हें AQI के मान के अनुसार सक्रिय किया जाता है, ताकि प्रदूषण स्तर बढ़ने पर त्वरित और लक्षित कार्रवाइयां की जा सकें।
  • उद्देश्य: वायु गुणवत्ता में गिरावट के क्रमिक चरणों के अनुसार आवश्यक आपातकालीन उपाय लागू करना ताकि प्रदूषण नियंत्रणों की एक संरचित और तेज-गति प्रतिक्रिया हो सके.​
  • कानूनी पृष्ठभूमि: उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप GRAP को दिल्ली-एनसीआर सहित क्षेत्रीय प्रशासन ने अपनाया और मानकीकृत किया गया
  • ताकि प्रदूषण के क्रमिक स्तरों पर स्पष्ट कार्रवाइयां हों.​
  • AQI-आधारित चरण: GRAP में चरण-वार उपाय तय होते हैं
  • जो AQI के स्तर के अनुसार सक्रिय होते हैं
  • (उदा., चरण I से IV, जहाँ प्रत्येक चरण में ध्वस्तीकरण/प्रतिबंध, ट्रैफिक नियंत्रण, निर्माण/ध्वस्तीकरण पर रोक आदि शामिल हो सकते हैं).​
  • मुख्य उपायों के उदाहरण:
    • पुराने डीजल/पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध और सम/विषम योजना लागू करना।
    • निर्माण तथा ध्वस्तीकरण कार्यों मेंhalts/ रोकथाम।
    • भारी वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण; ट्रैफिक-योजनाओं का प्रयोग।
    • खुले स्थानों पर कूड़ा जलाने पर रोक और धुएँ के स्रोतों को नियंत्रित करना।
    • स्मॉग टावर/एयर क्वालिटी मैनेजमेंट योजनाओं के साथ निगरानी और तात्कालिक सुधार उपायों को लागू करना (चरण-विशिष्ट).​
  • GRAP के चरणों का सार
  • चरण I (AQI 201–300, खराब: कुछ नियंत्रण लागू)
    • पुराने डीजल/पेट्रोल वाहनों पर आदेश; सार्वजनिक सुरक्षा संदर्भ में जागरूकता व प्रवर्तन शुरू हो सकता है.​
  • चरण II (AQI 301–400, बहुत खराब)
    • निर्माण/ध्वस्तीकरण पर रोक; भारी वाहन प्रवेश पर निर्भरrestrictions; पीक-उत्पादन क्षेत्रों में नियंत्रण
    • निजी वाहनों के सहभागी नियम आदि (नीतिगत विवरण चरण के अनुसार बदलाव होते हैं).​
  • चरण III (AQI 401–500, गंभीर)
    • अधिक कठोर उपाय: व्यापक ट्रैफिक प्रतिबंध, डीजल जनरेटर का विनियमन, स्मॉग-टावरों की क्रियाशीलता आदि.​
  • चरण IV (AQI—बहुत गम्भीर/गंभीर प्लस)
    • अत्यंत कठोर नियंत्रण, पूर्ण ट्रैफिक प्रतिबंध, सार्वजनिक तथा व्यावसायिक गतिविधियों पर व्यापक रोक आदि
    • यह चरण सामान्यतः सबसे अधिक सख्त होता है.​
  • युद्ध-सम्बंधी नोट
    • GRAP एक एकीकृत प्रेक्षण-आधारित योजना है जिसे नीति-निर्देशन के साथ लागू किया जाता है
    • ताकि प्रदूषण की मौसमी/घरेलू/औद्योगिक घटनाओं के प्रति त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया हो सके.​
    • NCR क्षेत्र के लिए GRAP के संदर्भ में अदालतों के निर्देशों के अनुसार इसका विकास और समायोजन किया गया है
    • ताकि दिल्ली-एनसीआर में AQI के स्तर के अनुसार उपयुक्त कदम उठाए जा सकें.​
  • ध्यान दें
    • GRAP की प्रासंगिकताओं, चरणों और लागू उपायों का वर्णन क्षेत्र-विशिष्ट हो सकता है
    • दिल्ली-एनसीआर बनाम अन्य शहरों में कुछ चरणों के नाम और कार्रवाई के दायरे में भिन्नताएं हो सकती हैं.​
  • संदर्भ (नीचे प्रत्येक दावे के बाद संदर्भ दिए गए हैं)
    • GRAP की परिभाषा और चरणों के आधार पर कार्य योजना: “GRAP एक आपातकालीन उपायों का समूह है
    • जो AQI के कुछ मानों तक पहुँचने पर सक्रिय होता है”.​
    • GRAP के क्यों लागू किया गया: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2016-2017 में अधिसूचित/अनुमोदित किया गया था
    • दिल्ली-NCR में इसका परिचालन मुख्य संदर्भ है.​
    • GRAP के चरण और कार्यान्वयन के उदाहरण: चरण I से IV के अंतर्गत विभिन्न नियंत्रण और प्रशासनिक उपायों की सूची है
    • जैसे निर्माण/ध्वस्तीकरण पर रोक, ट्रैफिक प्रतिबंध, आदि.​

4. भारत किस पड़ोसी देश के साथ सुंदरबन वन साझा करता है? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) बांग्लादेश
Solution:
  • सुंदरबन का विस्तार भारत तथा बांग्लादेश दोनों देशों में है।
  • ये वन अपने सुंदरी नामक वृक्षों के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
  • साझा सीमा क्षेत्र: सुंदरबन डेल्टा अधिकतम हिस्सा बांग्लादेश में है
  • कुछ भाग भारत के पश्चिम बंगाल के दक्षिणी जिलों में फैला है।
  • यह द्विपक्षीय मैंग्रोव क्षेत्र है जो बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित है।​
  • नाम और गठन: नाम “सुंदरी” पेड़ से प्रेरित है
  • जिसे स्थानीय रूप से सुंदरवन कहा गया और इसी से क्षेत्र का नामकरण भी हुआ।
  • डेल्टा गंगा और ब्रह्मपुत्र (कभी-कभी पद्मा नाम से भी संदर्भित) नदियों के संयुक्त जलप्रवाह से बना है।​​
  • वैश्विक महत्व: सुंदरबन दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव डेल्टा माना जाता है
  • जो अद्वितीय चट्टानी-ज्वारीय पारिस्थितिकी systému का केंद्र है।
  • ये क्षेत्र यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी सूचीबद्ध है।​​
  • संरक्षण और प्रशासन: भारत और बांग्लादेश दोनों ने सुंदरबन के संरक्षण के लिए संयुक्त पहलें और समझौते स्थापित किए हैं
  • ताकि बाघ, डॉल्फिन, और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ पारिस्थितिकी स्थायित्व बनाए रखा जा सके।​
  • संभावित संदेह/व्याख्या
    • यदि पूछताछ “किस पड़ोसी देश के साथ साझा करता है” के नज़दीकी उत्तर चाहिए, तो सरल उत्तर है
    • बांग्लादेश, क्योंकि इसका सबसे बड़ा भाग उसी देश में है और भारत के पश्चिम बंगाल के भी हिस्से इसमें आते हैं।​
    • सुंदरबन के डेल्टा का आकार और भागीदारी समय-समय पर भौगोलिक स्तर पर बदला सकता है
    • पहचानी गई स्थिति भारत-बांग्लादेश सीमा के भीतर है।​​
  • नीचे संदर्भों के संकेत
    • सुंदरबन बांग्लादेश तक फैला है, और डेल्टा को बनने में गंगा-ब्रह्मपुत्र की भूमिका है.​
    • सुंदरबन क्षेत्र के बारे में सामान्य तथ्य: यह मैंग्रोव-घनी वनावलय है
    • विश्व धरोहर-सूची में शामिल है, और संरक्षण समझौते सक्रिय हैं.​​
  • यदि चाहें, एक विस्तृत विश्लेषण दे सकता हूँ जिसमें:
    • भारत-बांग्लादेश सीमा-रेखा का ऐतिहासिक विकास
    • सुंदरबन के प्रमुख इंडिकेटर जीव और वनस्पति (रॉयल बंगाल टाइगर, गंगा-डॉलफिन आदि)
    • संरक्षण परियोजनाओं के स्तर और विभाजन-प्रशासन की जानकारी
    • पर्यटन तथा जोखिम (डेल्टा-स्थानीय जीवन और सुरक्षा) पर विश्लेषण
    • क्या आप इनमें से किसी एक पक्ष पर अधिक गहराई से जानकारी चाहते हैं?

5. कच्छ का रण भारत के ....... क्षेत्र में पड़ता है। [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) थार के रेगिस्तानी
Solution:
  • कच्छ का रण भारत के थार के रेगिस्तानी क्षेत्र में पड़ता है।
  • कच्छ का रण मुख्यतः भारतीय राज्य गुजरात, विशेष रूप से कच्छ जिले में स्थित है।
  • इसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान के प्रांत सिंध तक फैला हुआ है। गुजराती में रण शब्द का अर्थ 'रेगिस्तान' होता है।
  • संक्षिप्त उत्तर (रिक्त स्थान)
    • प्रश्न “कच्छ का रण भारत के ....... क्षेत्र में पड़ता है।” का उत्तर प्रायः इस प्रकार दिया जाता है:
    • “कच्छ का रण भारत के गुजरात राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में, थार मरुस्थल क्षेत्र में पड़ता है।”​
    • कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे “थार मरुस्थल जैव-भौगोलिक क्षेत्र” या “पश्चिमी भारत (गुजरात)” लिखने के लिए पूछा जाता है।​
  • भौगोलिक स्थिति
    • कच्छ का रण, अरब सागर की कच्छ की खाड़ी और दक्षिणी पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र के बीच स्थित एक विशाल नमक का दलदली मैदान है।​
    • इसका अधिकांश हिस्सा भारत के गुजरात राज्य के कच्छ ज़िले में है
    • जबकि एक हिस्सा पाकिस्तान की सीमा के पार तक फैला हुआ है।​
  • क्षेत्रफल और प्रकार
    • महान कच्छ का रण” लगभग 23,300 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला नमकीन दलदल है
    • जिसे दुनिया के सबसे बड़े नमक रेगिस्तानों में गिना जाता है।​
    • यह एक मौसमी दलदली/आर्द्रभूमि क्षेत्र है
    • जो बरसात में जलमग्न और सर्दियों-गर्मियों में सूखकर सफेद नमक के रेगिस्तान जैसा दिखाई देता है।​
  • जलवायु और कर्क रेखा
    • कच्छ का रण उष्ण एवं शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र में है
    • जहाँ तापमान में अत्यधिक अंतर और कम वर्षा पाई जाती है।​
    • कर्क रेखा लगभग 23.5° उत्तरी अक्षांश पर इसी क्षेत्र (कच्छ के रण) के समीप से होकर गुजरती है
    • जिससे यह भौगोलिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनता है।​
  • रणनीतिक और सांस्कृतिक महत्व
    • कच्छ का रण भारत–पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट होने के कारण सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है
    • 1965 में यहीं की सीमा पर विवाद एवं संघर्ष हुआ था।​
    • यह क्षेत्र “रण उत्सव” जैसे पर्यटन आयोजनों के लिए प्रसिद्ध है
    • जहाँ कच्छ की लोक-संस्कृति, हस्तशिल्प और रेगिस्तानी/नमकीन मरुस्थलीय सौंदर्य को प्रदर्शित किया जाता है।​

6. गुआ (Gua) और नोआमुंडी (Noamundi) खदानें भारत के किस राज्य में स्थित हैं? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) झारखंड
Solution:
  • गुआ और नोआमुंडी खदानें भारत के झारखंड राज्य में स्थित हैं।
  • स्थान और जिला
    • नोआमुंडी खदान झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित है, जो एक प्रमुख लौह अयस्क खनन शहर है।
    • गुआ खदान भी इसी जिले में है और उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क भंडार के लिए जानी जाती है।
    • ये खदानें छोटानागपुर पठार का हिस्सा हैं
    • जो खनिज संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है।​
  • संचालन और इतिहास
    • नोआमुंडी खदान का प्रबंधन टाटा स्टील द्वारा किया जाता है, जो 1925 से यहां कार्यरत है
    • यह भारत की सबसे पुरानी खदानों में से एक है।
    • गुआ खदान स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) द्वारा संचालित है।
    • दोनों खदानें हेमेटाइट और मैग्नेटाइट जैसे उच्च आयरन युक्त अयस्क उत्पादन करती हैं।​
  • आर्थिक महत्व
    • झारखंड भारत के लौह अयस्क उत्पादन में प्रमुख योगदान देता है
    • ये खदानें राज्य को इस्पात उद्योग का केंद्र बनाती हैं।
    • राज्य के कुल खनिज संसाधनों का 40% से अधिक हिस्सा यहां है
    • जिसमें कोयला, यूरेनियम और अभ्रक भी शामिल हैं।
    • छोटानागपुर पठार को "भारत का खनिज हृदयस्थल" कहा जाता है।​
  • पर्यावरण और सततता
    • टाटा स्टील जैसी कंपनियां सतत खनन पद्धतियों का उपयोग करती हैं ताकि पर्यावरणीय प्रभाव कम हो।
    • ये खदानें स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती हैं
    • लेकिन खनन से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है।​

7. निम्नलिखित में से किस राज्य में दिन और रात के तापमान में लगभग कोई अंतर नहीं होता है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) केरल
Solution:
  • केरल राज्य में दिन और रात के तापमान में लगभग कोई अंतर नहीं होता है।
  • केरल की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसून है।
  •  यह अपनी उष्णकटिबंधीय जलवायु और अरब सागर की निकटता के कारण होता है
  • जहां समुद्री प्रभाव तापमान को स्थिर रखता है।​
  • जलवायु विशेषताएं
    • केरल भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित है और भूमध्य रेखा के निकट होने से यहां पूरे वर्ष तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है
    • आमतौर पर 25-35 डिग्री सेल्सियस के बीच। उच्च आर्द्रता और मानसून वर्षा के कारण दिन में गर्मी बढ़ने पर भी रात में तापमान बहुत कम नहीं गिरता
    • जिससे दैनिक तापांतर न्यूनतम (केवल 2-5 डिग्री) रहता है।
    • इसके विपरीत, थार मरुस्थल जैसे क्षेत्रों में दिन का तापमान 50°C तक पहुंच सकता है और रात में 15°C तक गिर जाता है।​
  • भौगोलिक कारण
    • समुद्र की निकटता "समुद्री प्रभाव" पैदा करती है
    • जो तापमान में उतार-चढ़ाव को रोकती है। केरल की पश्चिमी घाट की श्रृंखलाएं वर्षा लाती हैं
    • लेकिन तटीय मैदानों में उष्णकटिबंधीय monsoon जलवायु प्रमुख है।
    • अंडमान-निकोबार जैसे द्वीप क्षेत्रों में भी समान स्थिति देखी जाती है
    • लेकिन राज्यों में केरल सबसे प्रमुख उदाहरण है।​
  • अन्य उदाहरण
    • चेन्नई या तिरुवनंतपुरम जैसे तटीय स्थानों में भी कम अंतर होता है
    • लेकिन केरल पूरे राज्य स्तर पर इस विशेषता के लिए जाना जाता है।
    • यह जलवायु स्थिरता कृषि (चाय, नारियल) और पर्यटन को लाभ पहुंचाती है।​

8. भारत और बांग्लादेश के सुंदरबन में पाई जाने वाली मैंग्रोव वृक्ष की किस प्रजाति को वैज्ञानिक रूप से 'हैरिटिएरा फॉम्स' के रूप में जाना जाता है? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सुंदरी
Solution:
  • भारत और बांग्लादेश के सुंदरबन में पाई जाने वाली "हैरिटिएरा फॉम्स" मालवेसी परिवार की मैंग्रोव वृक्ष की प्रजाति है।
  • परिचय
    • सुंदरबन भारत-बांग्लादेश के डेल्टा क्षेत्र में स्थित विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है
    • जिसे इसकी प्रमुख वनस्पति से पहचाना जाता है. [citation]​
  • वैज्ञानिक नाम और निष्कर्ष
    • सुंदरी पेड़ की वैज्ञानिक पहचान Heritiera fomes है
    • जो मैंग्रोव वन की एक विशिष्ट प्रजाति है. [citation]​
    • यह प्रजाति मुख्यतः सुंदरबन में बहुतायत से पाई जाती है
    • इसी कारण वन के नामकरण में इसे प्रमुख भूमिका मिली है. [citation]​
  • निवास-आवास और पारिस्थितिकी
    • Heritiera fomes मैंग्रोव वन के उत्पन्न पर्यावरण के अनुरूप ढलानयुक्त, खारे/कम खारे पानी वाले तटीय क्षेत्रों में पनपती है
    • जलवायु-समायोजित विशेषताएं दिखाती है. [citation]​
    • सुंदरबन के अन्य प्रमुख मैंग्रो प्रजातियों में Excoecaria agallocha (गेवा) भी शामिल है
    • सुंदरी प्रजाति सबसे अधिक प्रसिद्ध है और वन के नामकरण को प्रेरित करती है. [citation]​
  • ऐतिहासिक, सामाजिक और संरक्षण संबंधी संदर्भ
    • सुंदरबन प्रकृति-सम्पन्नnetz, यूनेस्को विश्व धरोहर क्रम में भी सूचीबद्ध है
    • इसका नाम मुख्यतः Heritiera fomes (सुंदरी) के प्राकृतिक अस्तित्व से जुड़ा है. [citation]​
    • मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र कार्बन संरक्षित करने और तटीय क्षरण रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
    • सुंदरी वृक्ष इस तंत्र के एक केंद्रीय घटक के रूप में ज्ञात हैं. [citation][citation]​
  • पंक्तिबद्ध तथ्य (संक्षेप)
    • प्रमुख प्रजाति: Heritiera fomes (सुंदरी)
    • क्षेत्र: सुंदरबन (भारत-निर्मित बांग्लादेश डेल्टा)
    • पारिस्थितिकी: मैंग्रोव वन के भीतर उन्नत राइजोफोरेसी/जड़-आधारित अनुकूलन
    • संरक्षण संदर्भ: यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में एवं जैव विविधता के लिए महत्त्वपूर्ण

9. तापमान संवेदकों को प्रत्यक्ष या परावर्तित सूर्य के प्रकाश से प्रभावित होने से बचाने के लिए आर्द्र और शुष्क बल्ब तापमापी के लिए डिजाइन की गई इकाई का नाम बताइए। [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) स्टीवेंसन स्क्रीन
Solution:
  • स्टीवेंसन स्क्रीन या उपकरण आश्रय एक आश्रय या एक घेरा है
  • जिसका उपयोग मौसम संबंधी उपकरणों, विशेष रूप से आर्द्र और शुष्क बल्ब थर्मामीटर के लिए एक मानक आश्रय है
  • जिसका उपयोग आर्द्रता और हवा तापमान को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। अतः सही उत्तर विकल्प (d) होगा।
  • डिज़ाइन और संरचना
    • ऊपर की ओर ढलान वाली छत (gabled roof) वर्षा को बहा देती है और सूर्य प्रकाश को परावर्तित करती है।
    • तापमापी को स्क्रीन के अंदर 1.25 से 1.5 मीटर ऊंचाई पर रखा जाता है ताकि मिट्टी के तापमान से प्रभाव न पड़े।​
  • कार्यप्रणाली
    • यह स्क्रीन प्राकृतिक वेंटिलेशन पर आधारित होती है, जिसमें साइड्स पर लगे स्लैट्स (लकड़ी की पट्टियां) 45-60 डिग्री कोण पर लगी होतीं हैं।
    • इससे हवा ऊपर से नीचे की ओर बहती रहती है
    • जो तापमान संवेदकों को स्थिर रखती है। सूर्य प्रकाश से गर्म होने से बचाने के लिए सफेद रंग का उपयोग किया जाता है
    • जो 80-90% सूर्य ऊर्जा को परावर्तित कर देता है।
    • आर्द्र बल्ब पर मलमल का कपड़ा पानी सोखता रहता है
    • शुष्क बल्ब खुले रहते हैं, लेकिन दोनों सूर्य से सुरक्षित रहते हैं।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • स्थान: मानक मौसम स्टेशनों में उत्तर-दक्षिण दिशा में रखी जाती है, छाया में।
    • मानक आकार: विश्व मौसम संगठन (WMO) द्वारा निर्धारित 60x45x30 सेमी आकार।
    • लाभ: सटीक सापेक्ष आर्द्रता (RH) मापन, जो DBT - WBT अंतर से गणना होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि DBT 30°C और WBT 20°C है, तो RH ≈ 50%।
  • उपयोग और इतिहास
    • यह स्क्रीन विश्वभर के मौसम观测 स्टेशनों में मानक है, जैसे IMD (भारतीय मौसम विभाग) में।
    • आधुनिक संस्करणों में धातु या प्लास्टिक का उपयोग होता है, लेकिन मूल सिद्धांत वही रहता है।
    • यह न केवल तापमान बल्कि हवा की गति संवेदकों के लिए भी उपयुक्त है।​

10. दिल्ली और पटना के बीच चलने वाली गर्म, शुष्क विषादग्रस्त हवाओं का नाम बताइए। [Phase-XI 28 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) लू
Solution:
  • दिल्ली और पटना के बीच चलने वाली गर्म, शुष्क विषादग्रस्त हवाओं को 'लू' कहते हैं।
  • लू के समय तापमान 45° सेल्सियस से अधिक हो जाता है।
  • लू हवाएँ दिल्ली और पटना के बीच चलने वाली गर्म, शुष्क और विषादग्रस्त (दमनकारी) हवाओं का नाम है।
  • ये पवनें उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में ग्रीष्म ऋतु के दौरान प्रबल होती हैं।​
  • उत्पत्ति और कारण
    • लू हवाएँ मुख्य रूप से थार रेगिस्तान से उत्पन्न होती हैं, जहाँ उच्च दबाव प्रणाली बनती है।
    • ये उत्तर-पश्चिम दिशा से बहती हुई दिल्ली, पटना सहित गंगा के मैदानों तक पहुँचती हैं
    • जिससे तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है।
    • अप्रैल से जून तक, विशेषकर मई-जून में, ये दोपहर के समय तेज होती हैं
    • नमी की कमी के कारण वायु शुष्क हो जाती है।​
  • विशेषताएँ
    • गर्मी और शुष्कता: इनमें नमी बहुत कम होती है
    • जो पसीने के वाष्पीकरण को रोकती है और शरीर को असहज बनाती है।
    • धूलयुक्त: रेगिस्तानी इलाकों से गुजरते हुए ये धूल और रेत ले आती हैं, जिससे दृश्यता कम हो जाती है।
    • स्वास्थ्य प्रभाव: हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और श्वसन समस्याएँ बढ़ाती हैं; सूर्यास्त के बाद शांत हो जाती हैं।​
  • प्रभावित क्षेत्र
    • दिल्ली से पटना तक, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के मैदानी भाग प्रभावित होते हैं।
    • ये हवाएँ कृषि को नुकसान पहुँचाती हैं, फसलों को सूखा देती हैं।
    • मानसून की प्रतीक्षा में ये मौसम को और कष्टदायक बनाती हैं।​