Correct Answer: (b) तिब्बत का पठार
Solution:- विश्व का सबसे ऊंचा पठार तिब्बत का पठार है।
- इसका विस्तार मुख्यतः हिमालय के उत्तर तथा कुनलुन शान के दक्षिण में स्थित है।
- तफ्तीश और विस्तृत विवरण
- स्थान और आकार: तिब्बती पठार दक्षिण-पश्चिमी चीन में स्थित है
- लगभग 2.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैला है।
- यह उच्च-ऊंचाई वाला एक विशाल पठार है, जिसे लगभग 4,000 से 5,000 मीटर ऊपर समुद्र तल के स्तर पर मापा जाता है.
- ऊंचाई का ताम-झाम: पठार की औसत ऊंचाई करीब 4,500 मीटर (लगभग 14,800 फीट) के आस-पास मानी जाती है
- जबकि इसके कुछ भाग इससे अधिक ऊँचाई पर हैं और हिमालय-काराकोरम श्रृंखलाओं के आसपास स्थित ऊँचे शिखर भी इसे स्पर्श करते हैं.
- भौगोलिक संदर्भ: यह पठार एशिया महाद्वीप के केंद्र में स्थित है और तिब्बत, चीन का क्षेत्र है
- इसके उत्तर-पूर्वी हिस्से में कुनलुन पर्वतों की चोटीें और हिमालय-काराकोरम रेंजें मिलती हैं, जिसने इस इलाके को विशिष्ट भू-आकृति दी है.
- गठन की पृष्ठभूमि: लाखों साल पहले प्लेट टेक्टोनिक्स की गति के कारण यह क्षेत्र ऊपर उठा और हिमालय के गठन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
- यह पठार tectonic uplift का एक प्रमुख उदाहरण है जो आधुनिक भू-विज्ञान में “roof of the world” के नाम से प्रसिद्ध है.
- नाम और वैकल्पिक नाम: इसे का तिब्बती पठार, और कभी-कभी Tibetan Highland भी कहा जाता है
- कई स्रोत इसे विश्व की छत के रूप में वर्णित करते हैं.
- महत्व: जल विज्ञान, तापमान, जैव विविधता और मानव-आवास के लिहाज से तिब्बती पठार एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
- यहाँ के ऊँचे क्षेत्रीय तापमान-आधारित ऊष्मीय आवरण, ग्लेशियरों का इतिहास और सांसारिक जल-ग्रहण (river basins) गहन अध्ययन के विषय हैं.
- यदि चाहें, इस विषय पर निम्न जैसे उप-विषय गहराई से भी समझाए जा सकते हैं:
- तिब्बत पठार बनाम डेरिवेटिव पठार: क्या-क्या अंतर हैं और क्यों यह पठार इतना ऊंचा है
- हिमालय-काराकोरम श्रृंखला से जुड़ी भू-आकृतियाँ कैसे बनती हैं
- पठार का पर्यावरणीय प्रभाव: जलवायु, जैव विविधता और स्थानीय आबादियाँ