वन (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 4

1. आर्द्र शीतोष्ण कटिबंधीय (wet temperate) प्रकार के वन [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 1000 और 2000
Solution:
  • आर्द्र शीतोष्ण कटिबंधीय प्रकार के वन 1000 मीटर से 2000 मीटर की ऊंचाई के बीच पाए जाते हैं।
  • इनमें चौड़ी पत्ती वाले ओक तथा चेस्टनट जैसे वृक्षों की प्रधानता है। वनों से हमें भवन निर्माण सामग्री प्राप्त होती है।
  • जलवायु विशेषताएं
    •  जो पर्णपाती और सदाबहार वृक्षों का मिश्रण पैदा करती है।
    • इन क्षेत्रों में कोहरा और धुंध आम है, जो नमी बनाए रखती है।​
  • वनस्पति और प्रजातियां
    • ओक, चेस्टनट, बीच, मैपल और रोडोडेंड्रॉन जैसे वृक्ष प्रमुख हैं
    • जिनकी ऊंचाई 20-30 मीटर तक होती है। घनी छत्री और मध्य स्तर की झाड़ियां जैव विविधता बढ़ाती हैं
    • जिसमें लाइकेन, कवक और विभिन्न जड़ी-बूटियां शामिल हैं।
    • ये वन उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों और शुष्क शीतोष्ण वनों के बीच संक्रमणकालीन होते हैं।​
  • भारत में वितरण
    • हिमालय के पूर्वी भाग जैसे पूर्वी नेपाल से अरुणाचल प्रदेश तक 1800-3000 मीटर ऊंचाई पर ये वन फैले हैं।
    • उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों और पूर्वोत्तर भारत में भी पाए जाते हैं।
    • कुल वन क्षेत्र का लगभग 3-4% हिस्सा इन्हें कवर करता है।​
  • पारिस्थितिक महत्व
    • ये वन मिट्टी संरक्षण, जल संग्रह और वन्यजीवों के लिए आश्रय प्रदान करते हैं।
    • लकड़ी, औषधियां और पर्यटन के स्रोत हैं, लेकिन अवैध कटाई और जलवायु परिवर्तन से खतरा है।
    • संरक्षण प्रयास जैसे राष्ट्रीय उद्यान इन्हें बचाते हैं।

2. मध्य अक्षांश के तटीय प्रदेशों में ....... प्रकार के वन पाए जाते हैं। [CGL (T-I) 02 दिसंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) शीतोष्ण सदाबहार वन
Solution:
  • मध्य अक्षांश के तटीय प्रदेशों में शीतोष्ण सदाबहार वन पाए जाते हैं।
  • ये सामान्यतः महाद्वीपों के पूर्वी किनारे पर पाए जाते हैं
  • जैसे-दक्षिण-पूर्व अमेरिका, दक्षिण चीन एवं दक्षिण-पूर्वी ब्राजील।
  • इस प्रकार के वनों में ओक, लॉरेल, मैग्नोलिया, यूकेलिप्टस आदि के वृक्ष पाए जाते हैं।
  • विस्तृत विवरण
    • प्रायः महाद्वीपों के पूर्वी किनारों पर दिखते हैं। यह प्रकार गोचर तापमान में गर्मी और ठंड दोनों के बीच संतुलन बनाये रखता है
    • जो इन क्षेत्रीय जलवायु की खासियत है ।​
    • आर्द्रता और जलवायु: इन वनों में साल भर पर्याप्त वर्षा या दृढ़ आर्द्रता रहती है
    • जिससे पत्ते सालभर नहीं गिरते और पेड़ सलिला रहते हैं। इस कारण इन्हें समशीतोष्ण सदाबहार वन कहा जाता है
    • ताकि वर्षाकाल के साथ शुष्क ऋतु का दबाव कम रहता है ।​
    • प्रमुख वितरण: ये वनों का वितरण खास तौर पर पूर्वी तटरेखा के तटीय भागों में देखा जाता है
    • जहाँ समुद्री प्रभाव से तापमान में अधिक स्थायित्व बना रहता है।
    • उदाहरण के तौर पर उत्तर अमेरिका, चीन और दक्षिण अमेरिका के कुछ तटीय भागों में इन वनास्थियों के संकेत मिलते हैं ।​
    • पेड़-पौधे और संरचना: इन वनों में ओक, देवदार, नीलगिरि जैसे पेड़ आमतौर पर पाए जाते हैं
    • वे उच्च घनत्व के साथ बहु-स्तरीय संरचना दिखाते हैं।
    • यह संरचना जीवविविधता को बढ़ावा देती है और जल-विष्ठापन को नियंत्रित करती है ।​
  • समात्त तुलना (यदि चाहें तो)
  • समशीतोष्ण बनाम उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन:
    • जलवायु: समशीतोष्ण वार्म-फ्रेम के साथ ठंडी सर्दियाँ; उष्णकटिबंधीय सदाबहार में गर्म वर्षा-परिसर अधिक रहता है ।​
    • वितरण: समशीतोष्ण तटीय क्षेत्र अधिकतर मध्य अक्षांशीय क्षेत्र में; उष्णकटिबंधीय में भूमध्यरेखा के करीब अधिक सामान्य ।​
    • पत्ते गिरना: समशीतोष्ण सदाबहार में पत्ते पूरी तरह नहीं गिरते; उष्णकटिबंधीय में कुछ साल्रघ तुलनात्मक रूप से अधिक पतझड़-झड़ाव हो सकता है ।​
  • नोट्स और उद्धरण
    • यह जानकारी मुख्य रूप से पाठ्य-पत्र और परीक्षा-स्रोतों से मिली है
    • जो मध्य अक्षांशीय तटीय क्षेत्र के वन प्रकारों को समशीतोष्ण सदाबहार वन के रूप में दर्शाते हैं ।​

3. काई और लाइकेन किस प्रकार के वनों में पाए जाते हैं? [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) टुंड्रा वन
Solution:काई और लाइकेन टुंड्रा वनों में पाए जाते हैं। टुंड्रा जलवायु क्षेत्र को 'अनंत बर्फ की भूमि' के रूप में भी जाना जाता है। टुंड्रा जलवायु की विशेषता बहुत ठंडा तापमान है। काई एवं लाइकेन इन चरम स्थितियों में जीवित रह सकते हैं, क्योंकि वे ठंडी जलवायु के लिए अनुकूलित होते हैं।

4. उत्तरी गोलार्द्ध के उच्च अक्षांशों (50°-70°) में शानदार शंकुधारी वन पाए जाते हैं। इन्हें ....... भी कहा जाता है। [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) टुंड्रा
Solution:उत्तरी गोलार्द्ध के उच्च अक्षांशों (50°-70°) में शानदार शंकुधारी वन पाए जाते हैं। इन्हें टुंड्रा भी कहा जाता है। समुद्रतल से 1500-2500 मीटर की ऊंचाई के बीच इन वृक्षों का आकार शंक्वाकार होता है। इन वनों के प्रमुख वृक्ष चीड़, पाइन तथा देवदार हैं।