मापक यंत्र एवं पैमाने (भौतिक विज्ञान)

Total Questions: 4

1. उस उपकरण का नाम बताइए जिसका इस्तेमाल मौसम विज्ञानियों द्वारा सौर विकिरण को समतल सतह पर आपतन के गोलार्द्ध के क्षेत्र से मापने के लिए किया जाता है? [Phase-XI 27 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पाइरोमीटर
Solution:
  • मौसम विज्ञानियों द्वारा सौर विकिरण को समतल सतह पर आपतन के गोलार्द्ध के क्षेत्र से मापने के लिए पायरोनोमीटर नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है।
  • वार विस्तार
    • उपकरण का प्रकार क्या है: पायरानोमीटर एक प्रकार का सेंसर है
    • जो क्षैतिज सतह पर आने वाले कुल अर्धगोलाकार विकिरण-बीम प्लस डिफ्यूज़ विकिरण को मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    • यह सौर विकिरण प्रवाह घनत्व को विद्युत संकेत में बदल देता है
    • जिसे W/m² में व्यक्त किया जाता है [source: सामान्य विज्ञान/उपकरण विवरण].​
    • कब और क्यों प्रयोग किया जाता है
    • जब सतह-उपयोग के लिए एकदम साफ एकीकृत माप चाहिए
    • जिसमें सीधे बीम विकिरण और फैलाव—दोनों शामिल हों—तथा पूर्ण आकाशीय विकिरण का आकलन आवश्यक हो
    • तब पायरानोमीटर सबसे उपयुक्त होता है.​
    • तुलना: बीम-विकिरण के लिए सीधे-बीम मापन हेतु Pyrheliometer का उपयोग किया जाता है
    • जबकि पायरानोमीटर से पूर्ण आकाशीय विकिरण (global horizontal irradiation, GHI) और कभी-कभी कुल आकाशीय विकिरण का आकलन संभव होता है.​
  • विस्तार से समझाते हुए
    • Pyranometer बनावट और कार्य: Pyranometer में एक क्षैतिज विकिरण-संवेदी सतह होती है
    • जो आकाश से आने वाले विकिरण को अवशोषित कर उसे गर्मी/तापीय संकेत में बदल देता है
    • यह संकेत सामान्यतः इलेक्ट्रिकल आउटपुट के रूप में निकलता है
    • सतह पर आने वाली कुल सौर विकिरण से संबंधित होता है.​
    • Pyranometer बनाम Pyrheliometer: Pyrheliometer सीधे सूरज से आने वाले बीम विकिरण को मापता है
    • जिसका उपयोग आकाशीय गतिकी/कठोर धूप के विश्लेषण के लिए होता है
    • वहीं pyranometer पूरे दिन के दौरान एक क्षैतिज सतह पर पड़े हुए कुल विकिरण को मापता है
    • जिसमें बीम विकिरण और डिफ्यूज़ विकिरण दोनों शामिल होते हैं.​
    • व्यावहारिक उपयोग: मौसम विज्ञान संस्थान, सौर ऊर्जा परियोजनाओं, और जलवायु अध्ययन में पायरानोमीटर केंद्रित रूप से ग्लोबल रेडिएशन (GHI) को मापने के लिए एक मानक उपकरण के रूप में प्रयुक्त होता है
    • जिसे बाद में डेटा विश्लेषण के लिए अन्य मापों के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता है.​
  • संक्षिप्त निष्कर्ष
    • प्रमुख उपकरण: पायरानोमीटर
    • वर्डी उपयोग: समतल सतह पर$saur$ विकिरण का कुल आकलन (ग्लोबल क्षैतिज विकिरण) और मौजूदा विकिरण प्रवाह घनत्व (W/m²) मापन.​
    • वैकल्पिक/संबंधी उपकरण: Pyrheliometer (सिर्फ बीम विकिरण) के साथ मिलकर आकाशीय विकिरण का पूरा विश्लेषण किया जा सकता है

2. वह कौन-सा उपकरण है जो वर्षा का पता लगाने, उसकी गति और तीव्रता का निर्धारण करने और वर्षा, बर्फ या ओलों जैसे वर्षा प्रकारों की पहचान करने के लिए विद्युत चुंबकीय ऊर्जा के स्पंदनों को वायुमंडल में भेजता है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) डॉपलर वेदर रडार
Solution:
  • डॉपलर वेदर रडार, वर्षा का पता लगाने, उसकी गति और तीव्रता का निर्धारण करने
  • वर्षा, बर्फ या ओलों जैसे वर्षा प्रकारों की पहचान करने के लिए विद्युत चुंबकीय ऊर्जा के स्पंदनों को वायुमंडल में भेजता है।
  • रडार डेटा का उपयोग तूफानों की संरचना निर्धारित करने और तूफानों की गंभीरता की भविष्यवाणी करने में मदद के लिए किया जा सकता है।
  • वर्षा गेज (Rain gauge)
    • कार्य: भूमि-स्तरीय वर्षा की मात्रा को मापता है, यानी कितनी वर्षा बरसी।
    • परिचय: यह एक सरल यंत्र है जिसमें बूंदों का वजन या ऊर्ध्वीय रिसाव किया जाता है
    • बड़े पैमाने पर जलवर्षा की मात्रा निर्धारित होती है.​
  • इवेंट-आधारित रडार वर्षा डिटेक्टर
    • कार्य: बड़े क्षेत्र में वर्षा का अवलोकन और प्रकार पहचान (वर्षा, बर्फ, ओला) के लिए डॉपलर रडार तकनीक का प्रयोग करता है।
    • 24 GHz डॉपलर संकेतों के माध्यम से बूंदों के आकार, गिरने की गति और घनत्व का आकलन करके वर्षा के प्रकार और तीव्रता निर्धारित करता है.​
  • पीजो-इलेक्ट्रिक वर्षा डिटेक्टर (कम दूरी) बनाम रडार-आधारित डिटेक्शन
    • कार्य: पास के इलाके में वर्षा की तीव्रता मापने के लिए बूंदों के प्रभाव से उत्पन्न परिवर्तनशील विद्युत संकेतों को पढ़ता है
    • तकनीक में बूंदों के प्रहार से उत्पन्न वोल्टेज प्रतिक्रिया शामिल हो सकती है.​
  • मौसम विज्ञान में अन्य उपकरण
    • विमेक्षण/सेंसर नेटवर्क: पृथ्वी के वायुमंडल में माइक्रो-फ्लैक, तापमान, आर्द्रता आदि के साथ वर्षा का डेटा मिलाकर मॉडल बनाते हैं।
    • वहन योग्य या दूरस्थ पन्ने: कुछ आधुनिक पैनलों पर रडार-आधारित मॉड्यूल और उपग्रह-आधारित अवलोकन भी उपयोग होते हैं
    • ताकि बड़े क्षेत्र में वर्षा की मात्रा, तेज़ी और मौसमी परिवर्तन समझे जा सकें.​
  • वर्षा प्रकार की पहचान कैसे होती है
  • वर्षा (Rain) बनाम बर्फ/ओला
    • डॉपलर रडार: बूंदों के आकार, गिरने की गति और घनत्व से बरसात के प्रकार को वर्गीकृत करता है।
    • बड़े और गर्म बूंदों के साथ तेज गिरने की दर अधिक होती है
    • जबकि ओलों में विशिष्ट डॉपलर पैटर्न होते हैं।
    • पीजो-इलेक्ट्रिक/अन्य सेंसर: नज़दीकी निरीक्षण में बूंदों के प्रभाव से संकेत प्राप्त कर सकता है
    • बड़े क्षेत्र के लिए रडार सिस्टम अधिक प्रचलित है.​
  • तीव्रता (Intensity)
    • रडार: प्रतिबिंबित संकेतों की शक्ति और बूंदों की संख्या से भारी से हल्के वर्षा तक सूचित करता है।
    • जमाव/भारी वर्षा में प्रवाह और बूंदों का आवृत्ति वितरण बदलता है, जिसे मॉडलिंग से निकाला जाता है.​
  • क्यों यह महत्वपूर्ण है
    • निगरानी और चेतावनी: तेज तूफान, बाढ़ और असमय बर्सात को समय पर पहचान कर चेतावनी जारी की जा सकती है।
    • जल संसाधन प्रबंधन: क्षेत्रीय जलवर्षा के संकलन और कृषि/वन विभागों में पानी प्रबंधन के लिए डेटा उपयोगी रहता है।
    • मौसम पूर्वानुमान: उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा से मॉडलिंग अधिक सटीक बनती है।
  • संक्षेप में
    • वर्षा का पता लगाने और वर्षा की गतिकी तथा प्रकार पहचानने के लिए आधुनिक रडार-आधारित प्रणालियाँ सबसे व्यापक और सटीक साधन हैं
    • इनमें 24 GHz डॉपलर रडार तकनीक खासकर गहरी जानकारी दे सकती है.​
    • नज़दीकी मापन के लिए वर्षा गेज और पीजो-इलेक्ट्रिक डिटेक्टर जैसे यंत्र також उपयोगी हो सकते हैं
    • क्षेत्रीय और प्रकार पहचान के लिए रडार सिस्टम अहम है.​
  • उद्धरण
    • वर्षा मापन के लिए राडार आधारित डिटेक्शन के विवरण के लिए देखें
    • वर्षा डिटेक्टर पृष्ठ और संबंधित टेक्निकल विवरण.​
    • वर्षा गेज और उसके मापन पर सामान्य जानकारी के लिए देखें:

3. 0.05800 में सार्थक अंकों की संख्या ....... है। [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) चार
Solution:
  • 0.05800 में सार्थक अंकों की संख्या 4 है।
  • किसी राशि के मापन में प्रयुक्त वे अंक जो मापक यंत्र की यथार्थ के अंतर्गत उस राशि के मान को व्यक्त करते हैं
  • वे सार्थक अंक के रूप में परिभाषित होते हैं।
  • सार्वभौम नियम:
    • सभी non-zero अंकों सार्थक होते हैं।
    • दशमलव बिंदु के बाद आने वाले शून्य भी सार्थक हो सकते हैं यदि वे मापन की परिशुद्धता को दर्शाते हैं।
    • अग्रशून्य (leading zeros) सार्थक नहीं होते; trailing zeros दशमलव के बाद होने पर सार्थकता दर्शाते हैं।
  • विस्तारपूर्ण समझ:
    • प्रारम्भिक अग्रशून्य शून्य नहीं माने जाते और वे संख्या के अर्थ को नहीं बदलते।
    • शुरुआती शून्यों के कारण 0.05800 का लिखित रूप ही मापन सीमा को दर्शाता है
    • इस संख्या में उपस्थित सभी non-zero अंकों (5 और 8) सार्थक हैं।
    • दशमलव के बाद आने वाले शून्य भी सार्थक हो जाते हैं
    • जब वे पंक्ति के मापन की परिशुद्धता को संकेत करते हैं
  • नोट्स:
    • सार्थक अंक की गिनती दशमलव स्थानों की संख्या पर निर्भर नहीं करती; यह उन अंकों पर निर्भर है
    • जो मापन की जानकारी को एकदम स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं।
    • इस उदाहरण में कुल चार सार्थक अंकों के लिए 5, 8, 0, और 0 (दशमलव के बाद के trailing zeros) गिने जाते हैं

4. विंड वेन (Wind vane) यंत्र ....... निर्धारित करता है। [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) पवन की दिशा
Solution:
  • विंड वेन (Wind Vane) यंत्र पवन की दिशा को निर्धारित करता है। विंड वेन को वेदर (Weather) वेन भी कहा जाता है।
  • विंड वेन (पवन फलक) का सूचक अग्र सिरा हमेशा उस दिशा की ओर इंगित करता है, जहां से हवा आ रही है
  • संरचना और भाग
    • सामान्यतः विंड वेन में एक लंबा धातु या प्लास्टिक का ध्वज-जैसा शरीर (फ्लैग) और एक उन्नत आधार/स्टैन्ड होता है
    • ताकि इसे ऊँचाई पर स्थापित किया जा सके और हवा का प्रवाह स्वतंत्र रूप से मापा जा सके.​
    • कुछ डिजाइनों में एक संरेखक/तार के साथ एक pointer भी होता है जो wind direction के अनुसार स्वतः दिशा पकड़ लेता है.​
  • कैसे काम करता है
    • हवा की दिशा जैसे ही वेन के फ्लैग से टकराती है, फ्लैग leeward की तरफ पलटता है
    • केंद्र दबाव उन दिशाों के विपरीत बनाते हुए वेन को उस दिशा में मोड़ देता है
    • जिस तरफ हवा आ रही होती है; इस प्रकार वेन वही दिशा दिखाता है।
    • इसी कारण इसे मौसम स्टेशन या मौसम वेधशाला के साथ जोड़ा जाता है
    • ताकि पवन दिशा के साथ-साथ पवन की गति (एनीमोमेटर) भी मापा जा सके.​
    • पवन दिशा मापन के मुख्य उपयोग:
    • मौसम पूर्वानुमान: मौसमी प्रणालियों की गति और मार्ग निर्धारित करने में मदद मिलती है.​
    • विमानन: उड़ान पथ और नियंत्रण निर्णयों में दिशा मानक के रूप में उपयोगी.​
    • maritime/navigation: जहाजों के मार्ग निर्धारण में आवश्यक मानक देता है.​
  • अन्य विवरण और संबद्ध उपकरण
    • विंड वेन अक्सर एनीमोमीटर के साथ एक ही स्टेशन पर स्थापित होते हैं
    • ताकि पवन दिशा और पवन वेग दोनों एक साथ रिकॉर्ड किये जा सकें.​
    • कुछ शिक्षा/शोध संदर्भों में विंड वेन का उपयोग सरल यंत्र के रूप में किया जाता है
    • ताकि हवा की दिशा का दृश्य प्रदर्शन किया जा सके.​
  • इतिहास और महत्व
    • विंड वेन के रूपांतरण आधुनिक मौसम स्टेशनों में भी एक स्थिर और सरल तरीका रहा है
    • यह एक प्राचीन और अधिक सरलInstrumentation है जिसका महत्व मौसम विज्ञान में आज भी बना हुआ है.​
  • उद्धरण/संदर्भ
    • विंड वेन के कार्य और उपयोग पर जानकारी: वेदर वेन पवन दिशा मापता है
    • मौसम स्टेशन में एनीमोमीटर के साथ प्रयोग होता है.​​
    • विंड वेन की संरचना और कार्यात्मक विवरण: संरचना और दिशा-संरेखण के उदाहरण.​
    • पवन दिशा के कारणों का भूमिकात्मक महत्व: मौसम, авиа, समुद्री नौवहन में उपयोगिता.​
    • शिक्षा/आधिकारिक विवरण: विंड वेन यंत्र का सरल शिक्षण संदर्भ.​