Correct Answer: (c) परितारिका सिकुड़ कर पुतली को छोटा बना देती है जिससे आंख में कम प्रकाश प्रवेश कर पाता है।
Solution:- जब आप तेज रोशनी वाले कमरे से आते हैं
- तो आप मंद रोशनी वाले कमरे में वस्तुओं को नहीं देख पाते हैं
- क्योंकि आंख में उपस्थित परितारिका सिकुड़ कर पुतली को छोटा बना देती है
- जिससे आंख में कम प्रकाश प्रवेश कर पाता है।
- पुतली का कार्य
- आंख की पुतली (pupil) प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करने वाली परितारिका (iris) द्वारा संचालित होती है।
- तेज रोशनी में पुतली सिकुड़ जाती है
- ताकि आंख में अतिरिक्त प्रकाश न प्रवेश करे और रेटिना सुरक्षित रहे।
- मंद रोशनी में इसे फैलना पड़ता है
- अधिक प्रकाश ग्रहण करने के लिए
- लेकिन यह प्रक्रिया कुछ सेकंड से 30-45 सेकंड तक लग सकती है।
- प्रकाश अनुकूलन प्रक्रिया
- रेटिना पर प्रकाश संवेदी कोशिकाएं रॉड्स (कम रोशनी में संवेदनशील) और कोन्स (तेज रोशनी में रंग दृष्टि के लिए) होती हैं।
- तेज रोशनी से मंद में आने पर रॉड्स को सक्रिय होने में समय लगता है
- क्योंकि सिकुड़ी पुतली से कम प्रकाश पहुंचता है।
- यह "डार्क एडाप्टेशन" कहलाता है
- जो लगभग 20-30 मिनट में पूर्ण होता है।
- अन्य प्रभावित कारक
- रेटिना की संवेदनशीलता: तेज रोशनी रेटिना को अस्थायी रूप से संतृप्त कर देती है
- जिससे मंद प्रकाश में संकेत कमजोर पड़ते हैं।
- उम्र और स्वास्थ्य: बुजुर्गों में यह समय अधिक लगता है
- विटामिन ए की कमी या बीमारियां जैसे मोतियाबिंद इसे बढ़ा सकती हैं
- उल्टा प्रभाव: मंद से तेज रोशनी में जाना आसान होता है
- क्योंकि पुतली जल्दी सिकुड़ती है।