तरंग एवं ध्वनि (भौतिक विज्ञान)

Total Questions: 9

1. दिए गए विकल्पों में से कौन-सा विकल्प प्रतिध्वनि उत्पन्न करता है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) जब ध्वनि परावर्तित होती है
Solution:
  • जब ध्वनि परावर्तित होती है तो प्रतिध्वनि उत्पन्न करती है।
  • प्रतिध्वनि का उपयोग समुद्र की गहराई तथा जल में स्थित वस्तुओं की स्थिति को ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
  • प्रतिध्वनि को 'echo' के रूप में भी जाना जाता है।
  • मुख्य अवधारणा
    • प्रतिध्वनि क्या है: ध्वनि तरंगें स्रोत से निकलकर किसी सतह से टकराकर वापस लौटती हैं
    • उसी वापस लौटती ध्वनि को प्रतिध्वनि कहते हैं.​
  • प्रतिध्वनि सुनने के लिए शर्तें
    • दूरी की condition: प्रतिध्वनि स्पष्ट सुनाई देने के लिए श्रोता और परावर्तक सतह के बीच न्यूनतम दूरी लगभग 17 मीटर होनी चाहिए (कुछ स्रोतों में 16.6–17.2 m के आसपास माना गया है) ताकि मूल ध्वनि और प्रतिध्वनि के बीच समय विलंब पर्याप्त हो सके.​
    • स्रोत-परावर्तक सतह के बीच दूरी: लगभग 17.2 m या उससे अधिक होने पर प्रतिध्वनि स्पष्ट सुनाई देती है
    • अगर दूरी कम हो तो ध्वनि आकर एक जैसी हो सकती है और प्रतिध्वनि नहीं सुनाई देती.​
    • सतह की प्रकृति: कठोर और चिकनी सतहें ध्वनि को बेहतर तरीके से परावर्तित करती हैं
    • जबकि सिरा/ मुलायम सतहें ध्वनि को अवशोषित कर सकती हैं और प्रतिध्वनि कम कर देती हैं.​
    • समय-निर्भरता: प्रतिध्वनि मूल ध्वनि के तुरंत बाद ही नहीं आती; इससे स्वर-प्रकृति में स्पष्ट फर्क बनता है
    • क्योंकि प्रतिध्वनि में ध्वनि ऊर्जा थोड़ा dissipate हो जाती है.​
  • उदाहरण और तुलना
    • प्रतिध्वनि बनाम गूंज: गूंज भी प्रतिध्वनि के समान एक प्रकार की ध्वनि है
    • जो सतह से टकराकर वापस लौटती है, लेकिन सामान्य भाषा में दोनों शब्द बार-बार मिलते हुए सकारत्मक प्रभाव का वर्णन करते हैं
    • तकनीकी परिभाषाओं में गूंज अक्सर समय-भिन्न परावर्तन के साथ जुड़ी होती है ।​
    • ध्वनि-अवशोषण का प्रभाव: यदि कमरे में ध्वनि-अवशोषक पदार्थ जैसे फोम या रिकॉर्डिंग बॉर्ड्स लगाकर सतहें मुलायम कर दी जाएँ तो प्रतिध्वनि कम हो जाती है
    • क्योंकि ध्वनि ऊर्जा गर्मी में परिवर्तित होकर कम वापस आती है ।​
  • वैज्ञानिक व्याख्या (सरल)
    • ध्वनि दो चरणों में फैलती है: (1) स्रोत-ध्वनि सतह तक पहुँचना; (2) सतह से परावर्तित होकर वापस श्रोता तक पहुँचना।
    • लौटती ध्वनि ही प्रतिध्वनि बनकर सुनी जाती है ।​
    • दूरी/समय का प्रभाव: स्रोत-परावर्तक सतह के बीच दूरी और लौटने वाले पलों का समय यह निर्धारित करता है
    • प्रतिध्वनि स्पष्ट है या नहीं; न्यूनतम दूरी मानक के रूप में 17 मीटर काफी सामान्य रूप से उद्धृत है ।​
  • नोट्स
    • प्रतिध्वनि के डिज़ाइन/उपयोगिता: सोनार और स्पेस/आर्किटेक्चर में प्रतिध्वनि का नियंत्रण महत्वपूर्ण रहता है
    • ताकि आवश्यक ध्वनि गुण प्राप्त हों (जैसे कॉन्सर्ट हॉल में उपयुक्त ध्वनि-गुण बनाए रखना) ।​

2. ध्वनि तरंगों के उत्पादन और प्रसार के अध्ययन को क्या कहा जाता है? [CGL (T-I) 18 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अकूस्टिक्स
Solution:
  • ध्वनि तरंगों के उत्पादन एवं प्रसार का अध्ययन ध्वनि विज्ञान (ध्वनिकी) (Acoustics) विषय के अंतर्गत किया जाता है।
  • ध्वनिकी का क्षेत्र
    • परिभाषा: ध्वनिकी वह विज्ञान है जो ध्वनि तरंगों के उत्पादन, प्रसार, नियंत्रण और प्रभावों का अध्ययन करता है।
    • यह ग्रीक मूल akoustikos (सुनना) से उत्पन्न माना जाता है।
    • यह विषय इनापूर्व भूगर्भिक, वायुमंडलीय, जल-निम्न और प्रभावी माध्यमों में ध्वनि के व्यवहार को समझाने के लिए उपकरण, गणितीय मॉडल और प्रयोगात्मक तरीकों का उपयोग करता है।
  • भौतिकी के साथ संबंध
    • माध्यम: ध्वनि यांत्रिक तरंग होती है जो द्रव्यों में संपीड़न और विरलन के क्रम से आगे बढ़ती है।
    • संदेश के अनुसार, सतही माध्यम (हवा, जल, ठोस) में यह तरंगें बनती और फैलती हैं
    • जबकि निर्वात में ध्वनि का प्रसार नहीं होता। [द्वारा स्पष्ट निर्देशित विवरण]
    • अनुदैर्ध्य तरंगें: ध्वनि तरंगें सामान्यतः अनुदैर्ध्य (Longitudinal) होती हैं
    • जिसमें दाब-घनत्व में परिवर्तन के साथ माध्यम में कंपन स्रोत से मौके तक विद्युतित होता है। [उद्धरण/सूत्रण]
    • आवृत्ति और दायरा: ध्वनि तरंगों की आवृत्ति, तरंगदैर्घ्य और गतिकी माध्यम के भिन्न-भिन्न गुणों (घनत्व, तापमान, दाब) पर निर्भर करते हैं।
    • उच्च तापमान और कम घनत्व वाले माध्यम में ध्वनि की गति और धारणा भिन्न हो सकती है। [प्रयोगात्मक/सन्निहित विज्ञान]
  • ध्वनि के उत्पादन और प्रसार के अनुप्रयोग
    • वास्तुकला और ध्वनि डिज़ाइन: कमरे/हॉलों की ध्वनि गुणवत्ता, ध्वनि इन्सुलेशन और स्नारित ध्वनि नियंत्रण के लिए ध्वनिकी का उपयोग होता है।
    • संगीत और उपकरण: ध्वनि स्रोतों के चयन, ध्वनि सामग्री के गुण और ध्वनि नियंत्रण की तकनीकें ध्वनिकी के अंतर्गत आती हैं।
    • परिवहन और sonar: जल और समुद्री परिवहन में सोनार जैसी ध्वनिक तकनीकें दूरी, दिशा और वस्तु पहचान के लिए ध्वनिकी के सिद्धांतों पर आधारित हैं।
    • चिकित्सा: कुछ ध्वनिक तकनीकें चिकित्सा इमेजिंग और उपचार में भी उपयोगी होती हैं
  • भिन्न पाठ्य-संदर्भ
    • पाठ्यपुस्तकों/सार संक्षेप में ध्वनिकी को ध्वनि उत्पादन, प्रसार और प्रभावों के अध्ययन के समेकित नाम के रूप में परिभाषित किया गया है।
    • यह क्षेत्र अक्सर भौतिकी, अभियांत्रिकी और कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग के साथ मिलकर पढ़ाया और उपयोग किया जाता है।
  • संक्षेप
    • ध्वनिकी वह शाखा है जो ध्वनि तरंगों के उत्पादन, प्रसार, ग्रहण और प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन करती है
    • इसका अनुप्रयोग वास्तुकला, संगीत, इंजीनियरिंग, समुद्री विज्ञान, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है।

3. जब किसी वस्तु की गति ध्वनि की गति से अधिक हो जाती है, तो कहा जाता है कि वह ....... की गति से यात्रा कर रहा है। [JE सिविल परीक्षा 23 मार्च, 2021 (II-पाली), MTS (T-I) 19 अगस्त, 2019 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) पराध्वनिक
Solution:
  • जब किसी वस्तु की गति ध्वनि की गति से अधिक हो जाती है, तो कहा जाता है
  • वह पराध्वनिक (Hypersonic) या सुपरसोनिक (Supersonic) गति से यात्रा कर रहा है।
  • पराध वनिक चाल की दशा में गतिमान वस्तु के लिए मैक संख्या 1 से अधिक होगी।
  • अवधारणा और परिभाषा
    • ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जो किसी माध्यम में संचरित होती है
    • इसकी गति माध्यम के घनत्व पर निर्भर करती है।
    • जब कोई वस्तु, जैसे विमान या रॉकेट, ध्वनि की गति को पार कर लेती है
    • तब वह पराध्वनिक गति में आ जाती है; इस स्थिति में उसकी गति ध्वनि की गति ( Mach 1 ) से अधिक होती है ।​
  • कितनी गति
    • ध्वनि की गति माध्यम के कारण बदलती है
    • ठोस में सबसे तेज, फिर liquids, फिर gases; निर्वात में ध्वनि गमन नहीं कर सकता क्योंकि कोई माध्यम नहीं होता ।​
    • मानक वायु में ध्वनि की गति लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड (20°C पर) है, जो तापमान के साथ slight बढ़ या घट सकती है ।​
  • प्राथमिक प्रभाव
    • पराध्वनिक गति में आने पर तेज शोर और sonic boom जैसी ध्वनि घटनाएं उत्पन्न होती हैं
    • क्योंकि वस्तु से निकलती ध्वनियाँ और उसकी वस्तु स्वयं एक-से-कई बार ध्वनि स्रोत बन जाते हैं ।​
  • उदाहरण
    • सैन्य या नागरिक उच्च-गति विमान जो Mach 1 से ऊपर जाते हैं
    • वे पराध्वनिक गति में माने जाते हैं; उनके निकलते हुए sonic booms चर्चा का प्रमुख भाग होते हैं ।​
  • स्पष्ट निष्कर्ष
    • यदि कोई वस्तु ध्वनि की गति से अधिक तेज चलती है
    • तो उसकी गति पराध्वनिक मानी जाएगी, और उसका व्यवहार ध्वनि से आगे निकलने वाले तरंगों के साथ जुड़ा रहता है ।​

4. नीचे सूचीबद्ध विकल्पों में से, ध्वनि की गति ....... में 25°C पर उच्चतम होती है। [MTS (T-I) 12 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) एल्युमीनियम
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में एल्युमीनियम में ध्वनि की गति 25°C पर उच्चतम होती है।
  • 25°C पर एल्युमीनियम में ध्वनि की गति 6420 मीटर/सेकंड, इथेनॉल में 1207 मीटर/सेकंड, हाइड्रोजन में 1284 मीटर/सेकंड और ऑक्सीजन में 316 मीटर/सेकंड होती है।
  • संक्षेप में:
    • ध्वनि की गति किसी माध्यम के लोच (समरूपता) और घनत्व पर निर्भर करती है।
    • काँडक्टर के तापमान के साथ ध्वनि की गति सामान्यतः बढ़ती है
    • 25°C के मानक तापमान पर ठोस माध्यमों में उच्चतम गति अक्सर द्रव/गैस से अधिक रहती है।
    • 25°C पर एल्युमिनियम में ध्वनि की गति लगभग 6420 मीटर/सेकंड के आसपास मापी जाती है
    • जो अन्य समान तापमान के ठोसों, द्रवों और गैसों से अधिक है ।​
  • ध्यान दें:
    • अगर आप चाहें तो मैं समान temperature पर अन्य विकल्पों (जैसे इस्पात, निकल, लोहा, पीतल आदि) की तुलनात्मक ध्वनि गति एक साफ तालिका में दे सकता हूँ ताकि आप प्रभावी तुलना कर सकें ।​
    • या अगर आपके प्रश्न में विकल्पों की सूची स्पष्ट हो तो उसी के अनुरूप एक विशिष्ट उत्तर दिया जा सकता है।

5. दो निकटवर्ती श्रृंगों या गर्त के बीच की क्षैतिज दूरी को ....... के रूप में जाना जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) तरंगदैर्ध्य
Solution:
  • दो निकटवर्ती श्रृंगों या गर्त के बीच की क्षैतिज दूरी को तरंगदैर्ध्य के रूप में परिभाषित किया जाता है। तरंगदैर्ध्य को ग्रीक अक्षर 'λ' से प्रदर्शित किया जाता है।
  • तरंगों में crest (Shirnga) और trough (गर्त) वे प्रमुख स्थिर अवयव हैं जो क्रमशः उच्चतम और निम्नतम बिंदु होते हैं।
  • Crest-crest के बीच की दूरी ही तरंग दैर्ध्य है.​
  • तरंग दैर्ध्य क्या है: यह एक पूर्ण चक्र के भीतर crest से अगला crest तक की दूरी है
  • trough से अगला trough तक की दूरी भीဖြ होती है.​
  • यदि प्रश्न specifically "दो क्रमिक श्रृंगों या क्रमिक गर्तों के बीच क्षैतिज दूरी" के बारे में है
  • तो यह भी तरंग दैर्ध्य के बराबर मापा जाता है; यह दूरी लहर की एक पूर्ण चक्र के समान होती है.​
  • नोट:
    • विभिन्न शैक्षिक स्रोतों में इसे “तरंग दैर्ध्य” या समानार्थी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है
    • इसलिए इस दूरी को सामान्यतः तरंग दैर्ध्य कहा जाता है.​
  • उदा
    • अगर तरंगदैर्ध्य λ मापा गया है और crest-crest दूरी जाननी हो, तो उसे λ मान लें.​
    • इसी प्रकार, एक विशेष तरंग के लिएcrest से अगले crest तक की दूरी वही लंबाई है
    • जिसे मौलिक रूप में तरंग दैर्ध्य कहा जाता है.​

6. माइक्रोवेव आवृत्ति संकेतों को दोलन और प्रवर्धित करने के लिए उपयोग की जाने वाली तापायनी इलेक्ट्रॉन नली (Thermionic electron tube) का नाम क्या है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) क्लाइस्ट्रॉन
Solution:
  • माइक्रोवेव आवृत्ति संकेतों को दोलन और प्रवर्धित करने के लिए उपयोग की जाने वाली तापायनी इलेक्ट्रॉन नली (Thermionic electron tube) का नाम क्लाइस्ट्रॉन (Klystron) है।
  • क्लाइस्ट्रॉन एक वैक्यूम ट्यूब है जो पल्स माड्यूलेटर द्वारा उत्पन्न पल्स उच्च वोल्टेज की ऊर्जा को उच्च शक्ति वाले माइक्रोवेव में परिवर्तित करता है।
  • पूरा विवरण (विस्तार):
    • पृष्ठभूमि: तापायनी तत्त्व का अर्थ होता है
    • तापीय excitation के द्वारा इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन, जिसे इलेक्ट्रॉन वेग और डोमिनेंट गुणधर्मों के आधार पर नियंत्रित किया जाता है।
    • माइक्रोवेव तकनीक में अत्यंत उच्च प्रतिक्रियाशीलता और कम विजय-यात्रा समय चाहिए होता है
    • ताकि संकेतों को तेज़ी से दोलन/प्रवर्धन किया जा सके।
    • टनल डायोड इस क्षेत्र में खास है क्योंकि यह बहुत ही उच्च dopant concentration और भारी junction के कारण टनल प्रभाव (quantum tunneling) से अवस्थित होता है
    • जिससे I–V विशेषताओं में नीचे की ओर चरित्रistik मिलती है।
    • संरचना और कार्य-प्रणाली: टनल डायोड p-n जंक्शन की अत्यधिक dopant concentration के साथ बना होता है
    • जिसकी वजह से वोल्टेज बढ़ने पर भी अंशदिशा (quantum tunneling) से करंट बढ़ सकता है
    • जिससे डिवाइस खाद्य संकेतों पर तेज़ गति से प्रतिक्रिया देता है।
    • माइक्रोवेव आवृत्तियों के लिए उच्च फ्रिक्वेंसी oscillators/amps में यह व्यवहारिक रूप से काम आता है।
  • प्रमुख अनुप्रयोग:
    • माइक्रोवेव ऑपरेशनल दोलन (oscillators) और प्रवर्धक (amplifiers) के रूप में।
    • उच्च-गति प्रवर्धन/स्विचिंग एप्लिकेशन, जहां बहुत जल्दी ISR (instantaneous switching response) चाहिए।
  • फायदे:
    • बहुत उच्च गति और डॉमिनेंट टनल-प्रभाव के कारण nonlinear characteristics जो oscillator design को सरल बनाते हैं।
    • अन्य माइक्रोवेव ट्यूबों की तुलना में संरचना सरल हो सकती है और कुछ विशिष्ट कामों में स्थिरता प्रदान कर सकती है।
  • सीमाएं/चुनौतियाँ:
    • गर्मी-निर्भरता और उपकरण डाइनेमिक रेंज सीमित होना।
    • सामान्यतः विशिष्ट आवृत्ति रेंज (GHz के अन्दर) के लिए डिज़ाइन/केलिब्रेशन की जरूरत होती है।
    • इतिहास और संदर्भ: टनल डायोड का खोज और विकास 1960s के दशक में हुआ था
    • जिसे माइक्रोवेव इंजीनियरिंग में तेज-गति oscillators/डिटेक्शन के लिए अपनाया गया।
    • आधुनिक डिज़ाइन में magnetron, klystron, traveling-wave tube (TWT) आदि भी उन्नत विकल्प हैं
    • कुछ विशिष्ट उच्च-फ्रिक्वेंसी और तेज़-रेस्पॉन्स वाले अनुप्रयोगों में टनल डायोड उपयोगी रहा है।
  • यदि चाहें तो नीचे दी गई चीज़ें भी विस्तार से समझा सकता हूँ:
    • टनल डायोड बनावट (doping levels, electrode geometry) और कैसे वे टनल प्रभाव को बढ़ाते हैं
    • I–V characteristic किस प्रकार oscillation या amplifier operation को प्रेरित करती है
    • माइक्रोवेव डिज़ाइन में टनल डायोड के बनाम अन्य ट्यूबों के फायदे/कमी
    • कुछ पाठ-स्तर के उदाहरण (उच्च-फ्रिक्वेंसी oscillators के लिए ठोस-उच्च-स्तर schematic विचार)

7. एक तरंग के लिए, आवर्तकाल द्वारा विभाजित तरंगदैर्ध्य ....... के बराबर होती है। [CGL (T-I) 13 अगस्त, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) तरंग वेग
Solution:
  • तरंग वेग (V), तरंग आवृत्ति (n) तथा तरंगदैर्घ्य (λ) में संबंध सूत्र V = nλ द्वारा व्यक्त किया जाता है।
  • हम जानते हैं कि आवृत्ति (n) = 1/आवर्तकाल (T)
  • अतः: V = λ/T, अर्थात एक तरंग के लिए, आवर्तकाल द्वारा विभाजित तरंगदैर्घ्य, तरंग वेग के बराबर होती है।
  • परिभाषाएँ
    • तरंगदैर्ध्य λ: दो क्रमान्तर शिराओं के बीच की दूरी। SI मात्रक मीटर (m) है.​
    • तरंग वेग v: एक तरंग कितनी दूरी प्रति समय तय करती है; SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) है.​
    • आवृत्ति f (या ν): इकाई समय में उत्पन्न पूर्ण कम्पनों की संख्या; SI मात्रक हर्ट्ज (Hz) है.​
    • आवर्तकाल T: एक पूर्ण कम्पन के लिए समय; SI मात्रक सेकेंड (s) है.​
  • संबंध (fundamental)
    • वेग = तरंगदैर्ध्य × आवृत्ति: v = λ f.​
    • आवृत्ति = 1 / आवर्तकाल: f = 1/T.​
    • अतः λ = v / f = v × T (जब T दिया हो).​
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • यदि ध्वनि तरंग की चाल लगभग 343 m/s हो और आवर्तकाल T = 0.005 s हो, तो λ = v × T = 343 × 0.005 ≈ 1.715 m.
    • यदि वेग पता हो लेकिन T न हो, तब λ = v / f = v / (1/T) = v × T नहीं तभी लागू होगा जब T ज्ञात हो।
  • नोट्स
    • किसी माध्यम में तरंग का वेग और उसका आवृत्ति अग्रिम रूप से ज्ञात हो तो λ तुरंत निकल आता है: λ = v / f.​
    • मीडिया के अनुसार तरंग की चाल बदल सकती है
    • इसलिए λ की गणना में सही v का चयन महत्वपूर्ण है.

8. किसी तरंग की आवृत्ति उसके ....... का व्युत्क्रम होती है। [JE इलेक्ट्रिकल परीक्षा 24 मार्च, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) आवर्तकाल
Solution:
  • दोलन करने वाली वस्तु एक सेकंड में जितने दोलन करती है, वह उसकी आवृत्ति (Frequency) कहलाती है।
  • इसे n से प्रदर्शित करते हैं। आवृत्ति का SI मात्रक हर्ट्ज या प्रति सेकंड होता है।
  • आवृत्ति (n) = 1 /आवर्तकाल (T)
  • अतः किसी तरंग की आवृत्ति, आवर्तकाल के व्युत्क्रम के बराबर होती है।
  • परिभाषाएँ
  • आवृत्ति (f या ν) इकाई समय में पूर्ण होने वाले चक्रों या दोलनों की संख्या को दर्शाती है
    • जिसका SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है, अर्थात् प्रति सेकंड चक्र.​
    • आवर्तकाल (T) एक पूर्ण चक्र या दोलन पूरा करने में लगा समय है, जिसका SI मात्रक सेकंड (s) है.​
    • उदाहरणस्वरूप, यदि कोई तरंग 1 सेकंड में 50 चक्र पूर्ण करती है, तो f = 50 Hz और T = 1/50 = 0.02 s होता है.​
  • गणितीय संबंध
    • आवृत्ति और आवर्तकाल के बीच मूल संबंध है:
    • यह व्युत्क्रम संबंध दर्शाता है—जब T बढ़ता है, f घटता है। यदि T = 0.01 s, तो f = 100 Hz; यदि T = 0.1 s, तो f = 10 Hz.​
  • व्युत्पत्ति
    • मान लीजिए एक तरंग की आवृत्ति f है।
    • f चक्र पूर्ण करने में 1 सेकंड लगता है।
    • 1 चक्र के लिए समय =  सेकंड।
    • अतः T = , इसलिए f = .​
  • तरंग संदर्भ में उपयोग
  • तरंग वेग (v) के साथ संयोजित: v = f λ = .​
    • ध्वनि तरंग में (v ≈ 340 m/s), यदि f = 440 Hz (A स्वर), तो T ≈ 0.00227 s.​
    • प्रकाश तरंग में (v = 3×10^8 m/s), T बहुत छोटा (फेम्टोसेकंड स्तर) होता है।
    • उच्च f (कम T) तेज़ कंपन दर्शाता है, जैसे ऊल्टी ध्वनि.​
  • अनुप्रयोग
    • संगीत वाद्ययंत्र: तार का तनाव बढ़ने से f बढ़ता है, T घटता है।
    • संचार: रेडियो तरंगों में f बैंड निर्धारित करता है।
    • चिकित्सा: अल्ट्रासाउंड में उच्च f बेहतर रिज़ॉल्यूशन देता है.​

9. किसी वस्तु की 'से और तक' (टू एंड फ्रो) या 'पीछे और आगे' (बैक एंड फोर्थ) गति को किस रूप में जाना जाता है? [MTS (T-I) 26 अक्टूबर, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) कंपन
Solution:
  • किसी वस्तु की 'से और तक' (to and fro) या 'पीछे और आगे' (Back and forth) आदि नामों से जानी जाने वाली गति को आवर्त गति को दोलन (Oscillatory motion) कहते हैं।
  • दोलन एवं कंपन में कोई मुख्य अंतर नहीं है। साधारणतः जब आवृति का मान कम होता है
  • तो हम गति को दोलनीय कहते हैं। इसके विपरित जब गति की आवृत्ति अधिक होती है
  • तो हम गति को कंपन कहते हैं। विकल्प में दोलन नहीं दिया है, अतः इसका निकटतम उत्तर विकल्प (b) होगा।
  • परिभाषा और मूल विचार
    • कम्पन (Vibration): किसी वस्तु या द्रव्य का संतुलन स्थिति से विस्थापित होकर पीछे-आगे, ऊपर-नीचे या किसी भी आयाम में आवधिक चाल चलना।
    • यह एक नियमित आवर्ती गति है जो एक संतुलन स्थिति के चारों ओर दोलन करती है।​
    • टू एंड फ्रो / बैक एंड फोर्थ: ऐसी गतियाँ जिनमें वस्तु एक निर्दिष्ट बिंदु या स्थिति के साथ आगे-पीछे, दायरे में या एक रेखा के  बनाती है।
    • यह शब्दावली अधिकतर दैनिक भाषा में प्रयुक्त होती है ताकि सरल शब्दों में दोलन को समझाया जा सके।​
    • आवृत्ति, अवधि और विस्थापन: कम्पन के विश्लेषण में तीन प्रमुख माप इकाइयाँ हैं —
    • विस्थापन (displacement): संतुलन स्थिति से वास्तविक स्थान तक की दूरी और दिशा।
    • आवृत्ति (frequency): इकाई समय में दोहराने की घटना की संख्या।
    • अवधि (period): एक पूरे चक्र को पूरा करने में लगा समय।​
  • भौतिक उदाहरण
    • एक स्प्रिंग-मैकेनिज़्म में वजन को धकेलकर संतुलन से बाहर निकालना और फिर स्प्रिंग की ताकत के कारण वापस लौटना
    • यह एक क्लासिक कम्पन का उदाहरण है।​
    • एक पिंड जो स्थिर संतुलन से थोड़ा प्रहार पाने पर आगे-पीछे दोलन करे
    • जैसे गाड़ी का सस्पेंशन डिटेचेंट्स का प्रभाव, भी कम्पन के उदाहरण हैं।​
  • गति के प्रकारों से संबंध
    • स्थिर गति बनाम गतिशील गति: कम्पन में गति समय-समय पर दिशा बदलते हुए लगातार दोलन करती है
    • जिसमें वेग और त्वरण बदलते रहते हैं।​
    • द्वार-उद्धरण और गतिकी: कम्पन की वजह से निर्माणों में शमन (damping) और लोच (elasticity) के प्रभाव दिखते हैं
    • आवृत्ति/अवधि इन गुणों पर निर्भर करती है।​
  • सावधानियाँ और गलतफहमियाँ
    • कई बार “गति” और “कम्पन” के शब्दों को समानार्थी मान लिया जाता है
    • जबकि गति सामान्य तौर पर किसी वस्तु की एक दिशा में स्थिर या परिवर्तित वेग को दर्शाती है
    • जबकि कम्पन एक संतुलन के चारों ओर आवधिक दोलन है।​
    • हिंदी शास्त्रीय पाठों में इसे “कम्पन” के रूप में अधिक स्पष्ट और वैज्ञानिक रूप से परिभाषित किया गया है
    • जबकि आम बोलचाल में टू एंड फ्रो/बैक एंड फोर्थ शब्ध भी चलता है।​
  • तुलना (संक्षेप)
    • कम्पन: वस्तु का संतुलन स्थिति से पीछे-आगे दोलन; आवृत्ति, अवधि और विस्थापन से मापा जाता है; लोचदार प्रणालियों में सामान्य।​
    • टू एंड फ्रो / बैक एंड फोर्थ गति: दैनिक भाषा में कम्पन के समानार्थी उपयोग; विशेष रूप से दोलन के सरल क्रम के लिए प्रयुक्त।​