Correct Answer: (d) सिजविक और पॉवले
Solution:- 1940 के दशक में आणविक ज्यामिति और संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बीच संबंध का विचार सर्वप्रथम सिजविक और पॉवेल (Sidgwick and Powell) ने प्रस्तुत किया था।
- इस विचार को सब VSEPR (वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्सन) के नाम से जाना जाता है।
- नेविल सिडगविक और हर्बर्ट पॉवेल ने सबसे पहले प्रस्तुत किया यह विचार।
- उन्होंने 1940 में अपने कार्य में सुझाव दिया
- केंद्रीय परमाणु के आसपास इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या और व्यवस्था अणु के आकार को निर्धारित करती है
- जो इलेक्ट्रॉन युग्मों के आपसी प्रतिकर्षण पर आधारित था।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- इससे पहले, 1939 में जापानी रसायनशास्त्री रयुतारो त्सुचिडा (Ryutaro Tsuchida) ने भी आणविक ज्यामिति और संयोजक इलेक्ट्रॉन युग्मों के बीच सहसंबंध का सुझाव दिया था
- लेकिन सिडगविक-पॉवेल का योगदान 1940 के दशक में पश्चिमी रसायनशास्त्र में इसकी नींव माना जाता है।
- उनका मॉडल सरल था और मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉन जोड़ों की संख्या पर केंद्रित था
- बिना जटिल गणनाओं के। यह विचार बाद में वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पेयर रेपल्शन (VSEPR) सिद्धांत का आधार बना।
- VSEPR सिद्धांत का विकास
- 1957 में, रोनाल्ड जे. गिलेस्पी (Ronald J. Gillespie) और रोनाल्ड साइक्स न्योहोम (Ronald S. Nyholm) ने इस विचार को विस्तारित किया
- जिसे गिलेस्पी-न्योहोम मॉडल या VSEPR कहा जाता है।
- VSEPR मॉडल में, केंद्रीय परमाणु के संयोजकता कोश में बंध युग्म (bonding pairs) और एकाकी युग्म (lone pairs) के प्रतिकर्षण को क्रमबद्ध किया गया
- एकाकी-एकाकी > एकाकी-बंध > बंध-बंध।
- इससे अणुओं जैसे H2O (वक्र), NH3 (त्रिभुजाकार पिरामिड) और BF3 (त्रिभुजाकार समतल) की ज्यामिति की सटीक भविष्यवाणी संभव हुई।
- महत्वपूर्ण योगदान और प्रभाव
- सिडगविक-पॉवेल का 1940 का कार्य X-रे क्रिस्टलोग्राफी डेटा पर आधारित था
- जो दिखाता था कि इलेक्ट्रॉन संख्या ज्यामिति को नियंत्रित करती है।
- यह क्वांटम यांत्रिकी से पहले का सरल मॉडल था, जो छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी साबित हुआ।
- आज VSEPR रसायनशास्त्र की पाठ्यपुस्तकों में मूलभूत है
- जो 2 से 7 इलेक्ट्रॉन युग्मों तक की ज्यामितियों (रैखिक, त्रिभुजाकार, द्विपिरामिडीय आदि) की व्याख्या करता है।
- इसकी सरलता ने कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन में क्रांति ला दी।