अधातुएं (रसायन विज्ञान)

Total Questions: 24

1. पीट कोयले में ....... कार्बन और ....... नमी की मात्रा होती है। [CGL (T-I) 13 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) निम्न, उच्च
Solution:
  • पीट कोयले में निम्न कार्बन और उच्च नमी की मात्रा होती है। इसमें कार्बन का अंश 40 प्रतिशत से कम होता है।
  • पीट कोयला क्या है
    • पीट कोयला आंशिक रूप से विघटित वनस्पति पदार्थों से बनता है
    • जो दलदली क्षेत्रों में लाखों वर्षों की प्रक्रिया से विकसित होता है।
    • इसमें रेशेदार संरचना रह जाती है और यह अन्य कोयलों
    • जैसे लिग्नाइट, बिटुमिनस या ऐन्थ्रासाइट से कम परिपक्व होता है।
    • नमी की उच्च मात्रा के कारण इसकी ऊष्मीय क्षमता सबसे कम होती है
    • जिससे यह सीधे ईंधन के रूप में कम उपयोगी माना जाता है।
  • कार्बन की मात्रा
    • पीट में कार्बन सामग्री सामान्यतः 40-60% तक पाई जाती है
    • हालांकि कुछ स्रोतों में इसे 45% से कम या 50-60% के बीच बताया गया है।
    • यह कोयला श्रृंखला में सबसे निचला स्तर है
    • जहां कार्बन की न्यूनतम मात्रा के कारण इसकी ऊर्जा उत्पादन क्षमता सीमित रहती है।
    • तुलना के लिए, उच्च कोयलों जैसे ऐन्थ्रासाइट में कार्बन 86-98% तक होता है।
  • नमी की मात्रा
    • इसमें नमी का प्रतिशत बहुत अधिक होता है, जो 60-70% तक पहुंच सकता है
    • जिससे इसे सुखाना आवश्यक हो जाता है उपयोग से पहले। उच्च आर्द्रता के कारण पीट का वजन अधिक रहता है
    • परिवहन तथा भंडारण में कठिनाई होती है। यह नमी ही इसे अन्य कोयलों से अलग करती है
    • क्योंकि लिग्नाइट में भी नमी अधिक होती है लेकिन कार्बन थोड़ा ज्यादा (25-35%) पाया जाता है

2. निम्नलिखित में से कौन-सा एल्कीनों में एक वैध आबंध है, जो कार्बन परमाणुओं को जोड़ता है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) द्वि-आबंध
Solution:
  • द्वि-आबंध एल्कीनों में एक वैध आबंध है, जो कार्बन परमाणुओं को जोड़ता है
  • द्विआबंध दो परमाणुओं के बीच एक सहसंयोजी आबंध होता है
  • जिसमें चार इलेक्ट्रॉन भाग लेते हैं, जबकि एकल आबंध में केवल दो इलेक्ट्रॉन भाग लेते हैं।
  • एल्कीनों में कार्बन परमाणुओं को जोड़ने वाला वैध आबंध द्वि आबंध (C=C डबल बंध) है।
  • यह σ (सिग्मा) और एक π (पाई) बंध से मिलकर बनता है, जो एल्कीनों की विशेषता होती है।
  • एल्कीनों की संरचना
    • एल्कीन हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें कम से कम एक कार्बन-कार्बन द्वि आबंध मौजूद होता है।
    • सामान्य सूत्र CnH2n होता है, जैसे इथीन (C2H4) में CH2=CH2 संरचना।
    • द्वि आबंध वाले दोनों कार्बन परमाणु sp² संकरित होते हैं
    • जिससे तीन σ बंध बनते हैं और चौथा p कक्षक π बंध गठित करता है।
    • यह आबंध घूर्णन प्रतिबंधित रखता है, जिससे एल्कीनों में सीस और ट्रांस समावयव संभव होते हैं।
  • आबंध प्रकार
    • सिग्मा बंध (σ): सिर-से-सिर ओवरलैप से बनता है, मजबूत और अक्षीय होता है।
    • पाई बंध (π): पैरलल p कक्षकों के पार्श्विक ओवरलैप से, कमजोर और ऊपर-नीचे स्थित।
    • एल्कीनों में C=C द्वि आबंध ही कार्बन श्रृंखला को जोड़ने का मुख्य वैध आबंध है
    • जबकि एकल बंध एल्केनों में और त्रि आबंध एल्काइनों में पाया जाता है।
  • रासायनिक गुण
    • द्वि आबंध इलेक्ट्रॉन समृद्ध होने से इलेक्ट्रोफिलिक अतिरिक्त अभिक्रियाओं (जैसे हाइड्रोजनेशन, हेलोजनेशन) के लिए सक्रिय होता है।
    • उदाहरण: CH2=CH2 + Br2 → CH2Br-CH2Br।
    • यह आबंध π इलेक्ट्रॉनों के कारण रंग परीक्षण (ब्रोमीन जल से सफेद अवक्षेप) भी देता है।
    • उच्च प्रतिक्रियाशीलता के कारण एल्कीन प्लास्टिक, सिंथेटिक रबर जैसे औद्योगिक उत्पादों में महत्वपूर्ण हैं।
  • उपयोग और महत्व
    • एल्कीन पॉलीमराइजेशन से पॉलीथीन, रबर बनाते हैं।
    • द्वि आबंध की ज्यामिति (120° बंध कोण) अणु को प्लानर बनाती है।
    • पर्यावरणीय रूप से, अपूर्ण दहन से प्रदूषण बढ़ता है, लेकिन जैव ईंधन में उपयोगी।

3. निम्नलिखित में से कौन-सी अधातु है, जो विभिन्न रूपों में पाई जाती है? [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कार्बन
Solution:
  • कार्बन एक ऐसी अधातु है, जो विभिन्न रूपों में पाई जाती है।
  • प्रकृति में कार्बन तत्व अनेक विभिन्न भौतिक गुणों के साथ विविध रूपों में पाया जाता है।
  • हीरा व ग्रेफाइट दोनों ही कार्बन के परमाणुओं से बने हैं
  • कार्बन के परमाणुओं के परस्पर आबंधन के तरीकों के आधार पर ही इनमें अंतर होता है।
  • कार्बन के अपरूप
    • जहाँ परमाणुओं की क्रमबद्धता भिन्न होती है।
    • हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है
    • जिसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य परमाणुओं से मजबूती से जुड़ा होता है।
    • ग्रेफाइट नरम और चिकना होता है
    • विद्युत का अच्छा चालक है, क्योंकि इसकी परतें आसानी से सरक सकती हैं।
  • अन्य अधातुओं की तुलना
    • अधातुएँ सामान्यतः ठोस, द्रव या गैस रूप में पाई जाती हैं
    • लेकिन कार्बन जैसी बहुआपरूपी अधातु दुर्लभ है।
    • ब्रोमीन एकमात्र अधातु है जो कमरे के तापमान पर द्रव रूप में रहती है
    • परंतु इसके विभिन्न ठोस अपरूप नहीं होते।
    • आयोडीन या सल्फर भी कुछ रूप दिखाते हैं
    • लेकिन कार्बन के तीन प्रमुख अपरूप (हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन) सबसे स्पष्ट उदाहरण हैं।
  • अपरूपों के गुण और उपयोग
    • हीरा आभूषणों और काटने के औजारों में उपयोग होता है
    • जबकि ग्रेफाइट पेंसिल की लीड और लुब्रिकेंट के रूप में काम आता है।
    • फुलरीन बक्यबॉल संरचना वाली होती है और नैनोटेक्नोलॉजी में अनुप्रयोग रखती है।
    • ये सभी रूप कार्बन के परमाणु क्रमांक 6 होने के बावजूद भिन्न गुण प्रदर्शित करते हैं, जो अपरूपता का प्रमाण है।

4. कार्बन काल-निर्धारण (डेटिंग) का क्या अर्थ है? [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) बहुत पुरानी वस्तुओं में कार्बन के विभिन्न रूपों की मात्रा को मापकर उनकी आयु की गणना करने की विधि
Solution:
  • कार्बन डेटिंग कार्बनिक पदार्थों की आयु को ज्ञात करने के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली विधि है।
  • कार्बन डेटिंग पद्धति इस तथ्य पर आधारित है कि कार्बन-14 (C-14) रेडियोधर्मी है
  • उचित दर पर इसका क्षय होता है।
  • इसी कारण इसे रेडियो कार्बन डेटिंग से भी परिभाषित किया जाता है।
  • C-14 कार्बन का समस्थानिक है, जिसका परमाणु द्रव्यमान 14 है।
  • कार्य सिद्धांत
    • जीवित जीव लगातार वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं
    • जिसमें स्थिर कार्बन-12 (C-12) के साथ रेडियोधर्मी कार्बन-14 भी शामिल होता है।
    • C-14 का अर्ध-आयु काल लगभग 5730 वर्ष है
    • अर्थात इस अवधि में इसकी आधी मात्रा नाइट्रोजन-14 में विघटित हो जाती है।
    • मृत्यु के बाद जीव कार्बन ग्रहण करना बंद कर देता है
    • C-14 का विघटन शुरू हो जाता है।
    • नमूने में शेष C-14 की मात्रा को मापकर, वैज्ञानिक जीव की मृत्यु के समय का अनुमान लगाते हैं।
  • प्रक्रिया के चरण
    • नमूना संग्रह: छोटा कार्बनिक नमूना लिया जाता है, जैसे 1-5 ग्राम।
    • रासायनिक सफाई: नमूने को अशुद्धियों से मुक्त किया जाता है।
    • C-14 मापन: आधुनिक विधियों में त्वरित द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमीटर (AMS) का उपयोग होता है
    • जो पारंपरिक बीटा गणना से अधिक सटीक है।
    • गणना: विघटन दर के आधार पर आयु की गणना, जैसे t=ln⁡(N0/N)λ, जहां λ क्षय स्थिरांक है।
  • सीमाएं और सटीकता
    • यह विधि 500 से 50,000 वर्ष पुराने नमूनों के लिए प्रभावी है
    • लेकिन 50,000 वर्ष से पुरानी वस्तुओं में C-14 इतना कम हो जाता है
    • मापन कठिन होता है। जलवायु परिवर्तन, संदूषण या समुद्री प्रभाव आयु को प्रभावित कर सकते हैं
    • इसलिए कैलिब्रेशन कर्व्स का उपयोग आवश्यक है।
    • यह केवल जैविक पदार्थों के लिए लागू होती है, चट्टानों या धातुओं के लिए नहीं।
  • उपयोग और महत्व
    • पुरातत्व में यह हड़प्पा सभ्यता, मिस्र के ममी या हिमयुग के अंत का निर्धारण करने में सहायक रही।
    • यह "रेडियोकार्बन क्रांति" कहलाती है
    • जिसने प्रागैतिहासिक घटाओं को सटीक तिथियों से जोड़ा।
    • आधुनिक प्रयोगशालाओं में यह पर्यावरण अध्ययन और जलवायु परिवर्तन अनुसंधान में भी प्रयुक्त होती है।

5. आणविक सूत्र C₃H₄O वाले उस रासायनिक यौगिक का नाम क्या है, जिसका उपयोग मुख्यतः ऐक्रेलिक अम्ल और ऐक्रिलेट एस्टर के उत्पादन के लिए किया जाता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) ऐक्रोलीन
Solution:
  • आण्विक सूत्र C₃H₄O वाले रासायनिक यौगिक का नाम ऐक्रोलीन है
  • जिसका उपयोग मुख्यतः एक्रेलिक अम्ल और एक्रिलेट एस्टर के उत्पादन के लिए किया जाता है।
  • यह अति असंतृप्त एल्डिहाइड है। यह एक रंगहीन या हल्का पीलापन वाला तरल है।
  • यह एक असंतृप्त एल्डिहाइड है, जो रासायनिक उद्योग में महत्वपूर्ण मध्यवर्ती (intermediate) के रूप में कार्य करता है।
  • इसकी संरचना CH₂=CH-CHO होती है, जो इसे उच्च प्रतिक्रियाशील बनाती है।
  • रासायनिक गुण और संरचना
    • ऐक्रेलिन एक रंगहीन से हल्के पीले रंग का तरल है
    • जिसकी तेज़, जलन पैदा करने वाली गंध होती है।
    • इसका आणविक भार 56.06 g/mol है, उबलने का तापमान 52.7°C और जमने का तापमान -88°C।
    • यह पानी में अच्छी घुलनशीलता रखता है
    • हवा में जल्दी ऑक्सीकरण होकर पॉलीमर बनाता है
    • इसलिए इसे स्थिर करने के लिए हाइड्रोक्विनोन जैसे अवरोधक मिलाए जाते हैं।
    • इसकी दोहरी बंध वाली संरचना (विनाइल ग्रुप) इसे इलेक्ट्रोफिलिक अतिरिक्त अभिक्रियाओं के लिए उपयुक्त बनाती है।
  • उत्पादन विधियाँ
    • ऐक्रेलिन का प्रमुख उत्पादन प्रोपिलीन (propylene) के आक्सीकरण से होता है
    • जिसे बाइऑक्सीजनेशन प्रक्रिया कहते हैं।
    • इसमें चांदी या मल्टीमेटल ऑक्साइड उत्प्रेरक
    • (जैसे Bi/Mo ऑक्साइड) पर 300-400°C तापमान और हवा के साथ गैसीय प्रोपिलीन को ऑक्सीकृत किया जाता है:
    • CH₃-CH=CH₂ + O₂ → CH₂=CH-CHO + H₂O।
    • पुरानी विधि ग्लिसरॉल के डिहाइड्रेशन से थी
    • लेकिन आधुनिक उत्पादन (~80% ऐक्रेलिक अम्ल उत्पादन के लिए) प्रोपिलीन आधारित है।
    • वैश्विक उत्पादन क्षमता लाखों टन सालाना है।
  • मुख्य उपयोग
    • ऐक्रेलिन का 70-80% उपयोग ऐक्रेलिक अम्ल के उत्पादन में होता है
    • जो इसे ऑक्सीकरण करके प्राप्त करते हैं (CH₂=CH-CHO + ½O₂ → CH₂=CH-COOH)।
    • ऐक्रिलेट एस्टर (जैसे मिथाइल ऐक्रिलेट) ऐक्रेलिक अम्ल से बनते हैं
    • जो पेंट्स, कोटिंग्स, चिपकने वाले पदार्थ, और पॉलीमर्स (जैसे PMMA) में प्रयुक्त होते हैं।
    • अन्य उपयोग: कीटनाशक, फार्मास्यूटिकल्स, और प्लास्टिसाइज़र। यह बायोडीजल उत्पादन में भी मध्यवर्ती है।
  • स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव
    • ऐक्रेलिन अत्यधिक विषैला है, जो त्वचा, आँखों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुँचाता है।
    • यह कैंसरजन्य (carcinogenic) माना जाता है
    • (IARC ग्रुप 2A) और धूम्रपान, जलने वाली लकड़ी या वाहन उत्सर्जन से उत्पन्न होता है।
    • OSHA सीमा 0.1 ppm है। पर्यावरण में यह मछलियों के लिए घातक है
    • इसलिए उत्पादन में सख्त नियंत्रण आवश्यक।

6. वेल्डिंग (Welding) के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली ऐसीटिलीन (acetylene) नामक हल्की, ईथरीय गंध (ethereal odour) वाली रंगहीन गैस का प्रणालीगत (systematic) नाम क्या है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) एथीन
Solution:
  • वेल्डिंग (Welding) के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली ऐसीटिलीन (Acetylene) नामक हल्की, ईथरीय गंध (ethereal odour) वाली रंगहीन गैस का प्रणालीगत (systematic) नाम एथीन (Ethyne) है। एथीन की संरचना H-C=C-H है।
  • रासायनिक संरचना
    • ऐसीटिलीन का रासायनिक सूत्र C₂H₂ है, जो सबसे सरल अल्काइन हाइड्रोकार्बन है
    • जिसमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच ट्रिपल बॉन्ड (C≡C) मौजूद होता है।
    • इसका IUPAC नाम "ethyne" इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें दो कार्बन और दो हाइड्रोजन होते हैं
    • जो एथेन (ethane) से व्युत्पन्न है लेकिन ट्रिपल बॉन्ड के कारण "yne" प्रत्यय लगाया जाता है।
    • यह गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है
    • ऑक्सीजन के साथ मिलकर 3,000°C से अधिक ताप वाला ज्वाला उत्पन्न करती है
    • जो वेल्डिंग, कटिंग और ब्रेजिंग के लिए आदर्श है ।
  • वेल्डिंग में उपयोग
    • ऑक्सी-ऐसीटिलीन वेल्डिंग (oxy-acetylene welding) में यह गैस ऑक्सीजन के साथ 1:2.5 अनुपात में मिलाई जाती है
    • जिससे न्यूट्रल फ्लेम बनता है जो धातुओं को बिना ऑक्सीडाइज किए जोड़ता है।
    • भारत में गैस वेल्डिंग के कारखानों में कैल्शियम कार्बाइड (CaC₂) और पानी के मिश्रण से इसे उत्पन्न किया जाता है
    • CaC₂ + 2H₂O → C₂H₂ + Ca(OH)₂। सिलेंडर में इसे ऐसीटोन में घोलकर रखा जाता है
    • ताकि विस्फोट का खतरा न रहे, क्योंकि शुद्ध ऐसीटिलीन 15-50 psi दबाव पर विघटित हो सकती है ।
  • गुण और सावधानियां
    • यह हल्की गैस (वायु से हल्की) ईथरीय गंध वाली होती है
    • लेकिन अशुद्ध ऐसीटिलीन में फॉस्फीन (PH₃) या आर्साइन जैसी गंध आती है।
    • वेल्डिंग के दौरान लाल रंग की नली ऐसीटिलीन के लिए और हरी/काली ऑक्सीजन के लिए उपयोग होती है।
    • खतरे: ज्वलनशीलता अधिक होने से कभी ऑक्सीजन नली से न जोड़ें, तथा 0.2-1.5 bar दबाव पर उपयोग करें
    • यह PVC, रबर और प्लास्टिक उद्योग में भी कच्चा माल है।

7. कोयले का जलना ....... का एक उदाहरण है। [CGL (T-I) 01 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) संयोजन अभिक्रिया
Solution:
  • कोयले का जलना संयोजन अभिक्रिया का एक उदाहरण है।
  • संयोजन (combination) अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया होती है
  • जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं।
  • रासायनिक समीकरण
    • कोयला मुख्यतः कार्बन (C) से बना होता है
    • इसलिए इसकी दहन अभिक्रिया का सरल समीकरण इस प्रकार है:
    • \ceC+O2−>CO2
    • यह अभिक्रिया एक्सोथर्मिक होती है
    • अर्थात् यह बड़ी मात्रा में ऊष्मा मुक्त करती है।
    • पूर्ण दहन पर पानी (H₂O) भी बन सकता है यदि कोयले में हाइड्रोजन मौजूद हो।
  • अभिक्रिया का प्रकार
    • कोयले का जलना संयोजन अभिक्रिया (combination reaction) है
    • जहाँ दो पदार्थ (कार्बन और ऑक्सीजन) मिलकर एक नया यौगिक (कार्बन डाइऑक्साइड) बनाते हैं।
    • यह दहन अभिक्रिया भी है
    • जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में ईंधन के जलने से होती है
    • CO₂, H₂O तथा ऊष्मा उत्पन्न करती है।
    • अपूर्ण दहन पर कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी विषैली गैस भी निकल सकती है।
  • ऊर्जा रूपांतरण
    • जलते कोयले में रासायनिक ऊर्जा ऊष्मा ऊर्जा और प्रकाश ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
    • यह प्रक्रिया थर्मल पावर प्लांटों में विद्युत ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोगी है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव
    • CO₂ उत्सर्जन से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है।
    • SO₂ और NOₓ जैसी गैसें अम्ल वर्षा का कारण बनती हैं।
    • राख प्रदूषण फैलाती है।

8. निम्नलिखित में से कौन-सा एक कठोर, संरंध्र और काला पदार्थ है। यह कार्बन का लगभग शुद्ध रूप है? [MTS (T-I) 11 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) कोक
Solution:
  • कोक एक कठोर, संरंध्र और काला पदार्थ है।
  • इसे वायु की अनुपस्थिति में कोयले को गर्म करके बनाया जाता है।
  • यह कार्बन का लगभग शुद्ध रूप है।
  • इसका उपयोग ईंधन के रूप में तथा धातुकर्म में एक अपचायक कारक के रूप में किया जाता है।
  • कोक की विशेषताएँ
    • यह अत्यधिक कठोर, हल्का और छिद्रपूर्ण होता है
    • जिससे इसमें उच्च तापमान पर जलने की क्षमता रहती है।
    • इसका रंग गहरा काला या धूसर-काला होता है।
  • निर्माण प्रक्रिया
    • कोक का उत्पादन कोयले को हवा की अनुपस्थिति में लगभग 1000-1100 डिग्री सेल्सियस पर गर्म करके किया जाता है।
    • इस प्रक्रिया में कोयले से वाष्पशील पदार्थ जैसे कोल तार, अमोनिया और कोयला गैस निकल जाती है
    • शेष रह जाता है कार्बन का यह शुद्ध रूप।
    • यह प्रक्रिया कोक ओवन में बड़े पैमाने पर होती है।
  • उपयोग
    • कोक का मुख्य उपयोग इस्पात उद्योग में लौह अयस्क को कम करने के लिए किया जाता है
    • जहाँ यह रिड्यूसिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है।
    • यह धातु निष्कर्षण (जैसे लोहा, जस्ता) और इलेक्ट्रोड निर्माण में भी प्रयुक्त होता है।
    • इसके उच्च कैलोरी मूल्य के कारण यह औद्योगिक ईंधन के रूप में आदर्श है।
  • कार्बन के अन्य रूपों से अंतर
    • कार्बन के शुद्धतम अपरूप हीरा (100% कार्बन, सबसे कठोर) और ग्रेफाइट (नरम, चिकना) हैं
    • लेकिन कोक "लगभग शुद्ध" होने के कारण औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण है।
    • यह अपरूप नहीं बल्कि कोयला से व्युत्पन्न उत्पाद है।

9. निम्नलिखित में से क्या हाइड्रोजन का रेडियो समस्थानिक है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) ट्राइटियम
Solution:
  • हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं, जिनके नाम क्रमशः प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम हैं।
  • इन तीन समस्थानिकों के नाभिक में एक प्रोटॉन और न्यूटॉन की संख्या क्रमशः 0,1 और 2 होती है।
  • इन तीनों समस्थानिकों में ट्राइटियम हाइड्रोजन का रेडियो समस्थानिक है
  • जो निम्न ऊर्जा के बीटा (β) कणों का उत्सर्जन करता है।
  • हाइड्रोजन के समस्थानिक
    • हाइड्रोजन के तीन प्राकृतिक समस्थानिक हैं: प्रोटियम (11H), ड्यूटेरियम (12H) और ट्राइटियम (13H)।
    • प्रोटियम में 1 प्रोटॉन और 0 न्यूट्रॉन होते हैं
    • जबकि ड्यूटेरियम में 1 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन तथा ट्राइटियम में 1 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन मौजूद होते हैं।
    • ट्राइटियम की अस्थिर संरचना के कारण यह बीटा क्षय द्वारा विघटित होता है।
  • ट्राइटियम की विशेषताएँ
    • ट्राइटियम की अर्ध-आयु 12.32 वर्ष है
    • जिसमें यह कम ऊर्जा वाले बीटा कण उत्सर्जित कर 23He (हीलियम-3) में परिवर्तित हो जाता है।
    • प्रकृति में इसकी मात्रा अत्यंत कम (प्रोटियम के 1018 परमाणुओं में 1 ट्राइटियम परमाणु) होती है
    • जो ब्रह्मांडीय किरणों से उत्पन्न होता है। यह रंगहीन, गंधहीन गैस के रूप में विद्यमान रहता है।
  • उत्पादन और उपयोग
    • ट्राइटियम को मुख्य रूप से लिथियम-6 को न्यूट्रॉन से बम्बार्ड करके उत्पादित किया जाता है।
    • इसका उपयोग थर्मोन्यूक्लियर हथियारों, परमाणु संलयन रिएक्टरों (जैसे ITER प्रोजेक्ट) और जैविक ट्रेसर के रूप में होता है।
    • चिकित्सा में इसे रेडियोइमेजिंग और ड्रग मेटाबॉलिज्म अध्ययन में प्रयुक्त किया जाता है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • ट्राइटियम पर्यावरण में जैविक चक्रों से जुड़ जाता है
    • इसलिए इसके उत्सर्जन पर नियंत्रण आवश्यक है। परमाणु परीक्षणों से वायुमंडल में इसकी सांद्रता बढ़ी थी
    • लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय संधियों से नियंत्रित है। अन्य हाइड्रोजन समस्थानिक स्थिर होते हैं
    • इसलिए रासायनिक गुणों में समानता रहती है लेकिन भौतिक गुण भिन्न होते हैं।

10. वह यौगिक जिसमें एक हाइड्रॉक्सिल समूह –OH, एक संतृप्त - कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है, जिसमें दो अन्य कार्बन परमाणु भी जुड़े होते हैं, इसे क्या कहा जाता है? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) द्वितीयक ऐल्कोहॉल
Solution:
  • वह यौगिक, जिसमें एक हाइड्रॉक्सिल समूह-OH एक संतृप्त कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है
  • जिसमें दो अन्य कार्बन परमाणु भी जुड़े होते हैं, इसे द्वितीयक एल्कोहॉल कहा जाता है।
  • इसका सामान्य सूत्र R₂CHOH है। 2-प्रोपेनॉल, द्वितीयक एल्कोहॉल का उदाहरण है।
  • इस प्रकार के अल्कोहल में -OH वाला कार्बन द्वितीयक (secondary) कहलाता है
  • क्योंकि उसके पास दो एल्काइल समूह (कार्बन श्रृंखलाएँ) मौजूद होती हैं।
  • परिभाषा और वर्गीकरण
    • अल्कोहल कार्बनिक यौगिक होते हैं जिनमें -OH समूह होता है
    • इन्हें कार्बन पर जुड़े एल्काइल समूहों की संख्या के आधार पर प्राथमिक (primary), द्वितीयक (secondary) और तृतीयक (tertiary) में वर्गीकृत किया जाता है।
    • प्राथमिक अल्कोहल में -OH वाला कार्बन केवल एक अन्य कार्बन से जुड़ा होता है
    • द्वितीयक में दो से, तथा तृतीयक में तीन अन्य कार्बनों से। संतृप्त होने का अर्थ है
    • सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (single) होते हैं, कोई द्वि- या त्रि-बंध नहीं
  • उदाहरण:
    • 2-प्रोपेनॉल (Isopropanol): (CH₃)₂CHOH – सबसे सरल द्वितीयक अल्कोहल।
    • 2-ब्यूटेनॉल: CH₃CH(OH)CH₂CH₃।
    • 3-पेंटेनॉल: CH₃CH₂CH(OH)CH₂CH₃।
    • ये यौगिक रंगहीन तरल होते हैं, जल में घुलनशील, और मीठी गंध वाले।
  • गुण और अभिक्रियाएँ
    • द्वितीयक अल्कोहल ऑक्सीकरण पर कीटोन (ketone) बनाते हैं
    • जैसे isopropyl alcohol ऑक्सीकरण से acetone (CH₃COCH₃) प्राप्त होता है।
    • वे ल्यूसास टेस्ट में हल्का अवक्षेप देते हैं और क्रोमिक अम्ल से हरा रंग बनाते हैं।
    • भौतिक गुणों में उबलने का तापमान श्रृंखला लंबाई पर निर्भर करता है
    • छोटी श्रृंखलाएँ अधिक घुलनशील। रासायनिक रूप से ये अम्लीय या क्षारीय अभिक्रियाओं में सक्रिय रहते हैं।