जैव विकास (जीव विज्ञान)Total Questions: 41. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)](1) जीवीय और अजीवीय घटक वाली प्रणाली को पारितंत्र के रूप में जाना जाता है।(2) पारितंत्र के सभी घटक परस्पर संबंधित हैं।(3) पारितंत्र की हमेशा स्पष्ट सीमाएं होती हैं। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?(a) (1) और (3) दोनों कथन सही हैं।(b) (1) और (2) दोनों कथन सही हैं।(c) सभी कथन सही हैं।(d) (2) और (3) दोनों कथन सही हैं।Correct Answer: (b) (1) और (2) दोनों कथन सही हैं।Solution:पारितंत्र वह घटक है, जो जीवीय (उदाहरण-उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक) और अजीवीय घटक (उदाहरण- प्रकाश, ताप, हवा, जल आदि) वाली प्रणाली के रूप में जाना जाता है।पारितंत्र के सभी घटक परस्पर संबंधित होते हैंलेकिन पारितंत्र की सीमाएं सदैव स्पष्ट नहीं होती और यह देखना मुश्किल हो सकता हैएक पारितंत्र कहां समाप्त होता है और दूसरा पारितंत्र कहां शुरू होता है। अतः कथन (1) और (2) सही हैं।प्रश्न प्रारूपयह प्रश्न तर्कशक्ति, विज्ञान, Polity या अर्थव्यवस्था पर आधारित होते हैं। विकल्प इस प्रकार होते हैं:केवल कथन 1 सही है।केवल कथन 2 सही है।दोनों सही हैं।दोनों गलत हैं।हिंदी में हल करने की विधिप्रत्येक कथन को अलग-अलग जांचें - नियम/तथ्य से मिलाएं।आंशिक सत्य को गलत मानें।कारण-प्रभाव वाले में देखें कि R, A की व्याख्या करता है या नहीं।अभ्यास उदाहरण (Assertion-Reason)कथन (A): गर्म पानी में कपड़े ठीक नहीं धुलते।कारण (R): कठोर जल में खनिज होते हैं।उत्तर: A और R दोनों सत्य, पर R, A की व्याख्या नहीं।2. ऐनिमेलिया जगत के किस समूह में अखंडित, द्विपार्श्विक रूप में सममित, कोमल शरीर होते हैं, जिनमें एक त्रिकोरकी संरचना (कोशिकाओं की तीन परतें होती हैं) और यह किसी प्रगुहा, कंकाल और गुदा से रहित होती है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) चपटे कृमि(b) पॉरिफेरा(c) टिनोफोरा(d) नाइडेरियाCorrect Answer: (a) चपटे कृमिSolution:ऐनिमेलिया जगत के चपटे कृमि (फ्लैट वर्म) में अखंडित द्विपार्श्विक रूप में सममित, कोमल शरीर होते हैंजिनमें एक त्रिकोरकी संरचना (कोशिकाओं की तीन परतें) होती हैंयह किसी प्रगुहा, कंकाल और गुदा से रहित होती है। फ्लैटवर्म का पाचन तंत्र अधूरा होता हैएवं शरीर में केवल एक ही द्वार होता है। ये प्रायः परजीवी होते हैं। इस प्रकार विकल्प (a) सही उत्तर है।मुख्य लक्षणये जीव मुख्य रूप से चपटे कृमि (flatworms) होते हैंजिनका शरीर डोर्सो-वेंट्रली चपटा (dorso-ventrally flattened) होता हैजो उन्हें पतले ऊतकों के माध्यम से ऑक्सीजन अवशोषण की सुविधा देता है।इनकी त्रिकोरकी संरचना उन्नत होती है क्योंकि तीनों जनन परतें अंगों का निर्माण करती हैंलेकिन कोएलॉम की कमी के कारण ये एकोएलोमेट (acoelomate) कहलाते हैंशरीर की गुहा केवल पैरेंकीमा ऊतक से भरी रहती है।गुदा न होने से एकमुखी (single opening) पाचन तंत्र होता हैजो मुख के रूप में कार्य करता है, भोजन ग्रहण और अपशिष्ट उत्सर्जन दोनों के लिए।शरीर रचना की विशेषताएँसममिति और आकार: द्विपक्षीय सममिति के कारण दायाँ और बायाँ भाग समान होते हैंजो गतिशीलता और दिशा-निर्देश में सहायक है। शरीर अखंडित होता है, कोई खंडीकरण नहीं।कोमल शरीर: कंकाल की अनुपस्थिति से ये नरम और लचीले रहते हैं, मुख्यतः मुक्त जीवित या परजीवी।जनन परतें: त्रिकोरकी—एंडोडर्म से पाचन तंत्र, मेसोडर्म से पेशियाँ और परिसंचरण तंत्र जैसी संरचनाएँ बनती हैं।अन्य अभाव: संलग्न कंकाल या प्रगुहा न होने से सरल संगठनफिर भी जटिल ऊतक और अंग प्रणाली (जैसे तंत्रिका तंत्र) विकसित।वर्गीकरण और उदाहरणप्लेटीहेल्मिन्थेस को तीन मुख्य वर्गों में बाँटा जाता है:टर्बेलैरिया (Turbellaria): मुक्त जीवित, समुद्री या मीठे जल में पाए जाते हैंजैसे प्लानारिया (Planaria)—पुनरुत्पादन क्षमता उच्च।ट्रेमाटोडा (Trematoda): परजीवी, चूषकों वाले, जैसे फ्लूक (Fasciola hepatica)—यकृत परजीवी।सेस्टोडा (Cestoda): पट्टाकार टेपवर्म, आंत परजीवी, स्कोलेक्स से दीवारें चिपकाते हैंजैसे टीनिया सोलियम (Taenia solium)। ये सभी लक्षणों से मेल खाते हैं।पारिस्थितिक और जैविक महत्वये समूह विकासवादी रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये प्रथम त्रिकोरकी जंतु हैंजो उच्चतर समूहों (जैसे ऐनेलिडा) की ओर संक्रमण दर्शाते हैं।परजीवी प्रजातियाँ मानव रोग उत्पन्न करती हैं, जैसे स्किस्टोसोमियासिस।इनकी पुनर्रचना क्षमता (रिजनरेशन) अनुसंधान में उपयोगी। पर्यावरण में ये अपघटक की भूमिका निभाते हैं।3. प्राणियों में पाए जाने वाले अंतः परजीवी की पहचान कीजिए। [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (I-पाली)](a) पार्श्वक्लोम(b) ऐडैम्सिया(c) चपटे कृमि(d) टीनोप्लानाCorrect Answer: (c) चपटे कृमिSolution:प्राणियों में पाए जाने जाने वाले अंतःपरजीवी प्रायः प्राणियों के शरीर के अंदर रहते हैंउदाहरण के लिए आंत, फेफड़े तथा रक्त वाहिकाओं में पाए जाने वाले परजीवी।ये अपना पोषण इन्हीं से प्राप्त करते हैं और गंभीर बीमारी के कारण बन सकते हैं।अंतःपरजीवी के उदाहरण हैं-चपटे कृमि (फ्लैटवॉर्म), टेपवॉर्म, राउंडवॉर्म आदि।मुख्य प्रकारप्राणियों में अंतःपरजीवी मुख्यतः तीन समूहों में वर्गीकृत होते हैंप्लेटीहेल्मिन्थ्स (चपटा कृमि), नेमाटोडा (गोलकृमि) तथा प्रोटोजोआ।चपटे कृमि जैसे फीताकृमि (टेपवर्म) आंतों में चिपककर पोषक तत्व सोखते हैंजबकि गोलकृमि जैसे ऐस्कैरिस फेफड़ों से आंत तक प्रवास करते हैं।प्रोटोजोआ जैसे प्लास्मोडियम मलेरिया रक्त कोशिकाओं में रहते हैं।पहचान के तरीकेइनकी पहचान मल, रक्त या ऊतक नमूनों की सूक्ष्मदर्शी जांच से होती है।फीताकृमि के खंड मल में दिखते हैं, जो चपटे, सफेद रिबन जैसे होते हैंगोलकृमि लंबे, गोलाकार पनिपंखी होते हैं।रक्त परीक्षण में प्रोटोजोआ के स्पोरोजोइट या ट्रॉफोजोइट दृश्यमान होते हैंएंटीबॉडी टेस्ट संक्रमण की पुष्टि करते हैं। जीवन चक्र का अध्ययनजैसे मध्यस्थ मेजबान (सूअर में टीनिया सोलियम), भी सहायक होता है।प्रमुख उदाहरणफीताकृमि (Taenia spp.): मनुष्यों और पशुओं की आंतों में, अंडे दूषित भोजन से प्रवेश करते हैं।पत्तीकृमि (Fasciola hepatica): लीवर में, जलकुंभी से संक्रमित।गोलकृमि (Ascaris lumbricoides): पशुओं और मनुष्यों में सामान्य, पोषण असंतुलन पैदा करते हैं।ट्राइकोमोनास: प्रोटोजोआ, योनि या आंत संक्रमण।प्रभाव और नियंत्रणये एनीमिया, कुपोषण, अंग क्षति तथा मृत्यु का कारण बनते हैंविशेषकर पशुओं में दूध उत्पादन घटाते हैं।नियंत्रण के लिए स्वच्छता, कृमिनाशक दवाएं (अल्बेंडाजोल), मध्यस्थ मेजबान नष्ट करना तथा नियमित जांच आवश्यक है।4. ....... ने जैव विकास की अवधारणा को अपनी पुस्तक 'दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज' (The origin of species) में दिया। [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (II-पाली), CGL (T-I) 06 सितंबर, 2016 (II-पाली)](a) एडवर्ड जेनर(b) अरस्तू(c) चार्ल्स डार्विन(d) रॉबर्ट ब्राउनCorrect Answer: (c) चार्ल्स डार्विनSolution:चार्ल्स डार्विन ने जैव विकास की अवधारणा को अपनी पुस्तक 'दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज' (The origin of species) में दिया।चार्ल्स डार्विन एक प्रकृतिवादी, जीवविज्ञानी एवं भू-विज्ञानी थेउन्होंने प्राकृतिक वातावरण का अध्ययन किया था, जिसका उल्लेख इन्होंने अपनी पुस्तक में किया है।प्राकृतिक चयन का सिद्धांतपर्यावरण के अनुकूल गुण वाले जीव जीवित रहते हैं और अपनी संतानों को वे गुण हस्तांतरित करते हैंजबकि कम अनुकूलित जीव नष्ट हो जाते हैं ।यह "सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट" के रूप में जाना जाता है, हालांकि यह शब्द हर्बर्ट स्पेंसर ने गढ़ा ।पुस्तक का ऐतिहासिक संदर्भडार्विन ने गैलापागोस द्वीपों की यात्रा से प्रेरणा ली, जहाँ उन्होंने समान लेकिन भिन्न प्रजातियों का अध्ययन किया।पुस्तक में उन्होंने प्रमाण दिए कि सभी जीव एक या कुछ सामान्य पूर्वजों से विकसित हुएयह सिद्धांत धार्मिक सृष्टिवाद को चुनौती देता था और वैज्ञानिक क्रांति लाया ।मुख्य अध्याय और तर्कपुस्तक के अध्यायों में प्राकृतिक विविधता, कृत्रिम चयन से तुलना, और भौगोलिक वितरण शामिल हैं।डार्विन ने चित्रों से दिखाया कि विविधताएँ नई प्रजातियों का निर्माण करती हैंजैसे पक्षियों के चोंच के आकार में परिवर्तन । उन्होंने आपत्तियों का उत्तर दियाजैसे जीवाश्म रिकॉर्ड, और निष्कर्ष में सामान्य पूर्वज की अवधारणा दोहराई ।प्रभाव और महत्व'ऑरिजिन ऑफ स्पीशीज़' ने आधुनिक जीवविज्ञान की आधारशिला रखी, जिसमें मानव विकास भी शामिल है।अल्फ्रेड रसेल वालेस के साथ संयुक्त कार्य से प्रेरितयह 1250 पृष्ठों से अधिक के संस्करणों में विस्तारित हुई । आज यह विकासवाद का मूल ग्रंथ है ।Submit Quiz