वर्गिकी (जीव विज्ञान) (भाग-II)

Total Questions: 27

1. निम्नलिखित में से कौन-से पुष्पी और बीज धारण करने वाले पौधे अर्थात फैनरोगैम (पुष्पोद्भिद) हैं? [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) जिम्नोस्पर्म
Solution:
  • फैनरोगैम (पुष्पोद्भिद्) उन पौधों को कहते हैं, जिसमें पुष्पी व बीज धारण करने की क्षमता होती है।
  • फैनरोगैम (पुष्पोद्भिद) को दो भागों में बांटा गया है, जिम्नोस्पर्म एवं एंजियोस्पर्म।
  • क्रिप्टोगैम उन पौधों को कहते हैं जिसमें पादप पुष्प व बीजरहित होते हैं।
  • इसको तीन भागों में विभाजित किया गया है-थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा एवं टेरिडोफाइटा।
  • फैनरोगैम की परिभाषा
    •  इनमें बीज निर्माण की प्रक्रिया गर्भाधान के बाद होती है, जिसमें युग्मक (स्पर्म और अंडा) का संलयन भ्रूण बनाता है।
    • बीज कवच से ढका होता है और अंकुरण पर नया पौधा उत्पन्न करता है।​
  • मुख्य वर्गीकरण
    • फैनरोगैम दो प्रमुख समूहों में विभाजित हैं:
    • जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms): नग्न बीज वाले पौधे, जिनमें बीज फल से आच्छादित नहीं होते।
    • उदाहरण: पाइन (शंकुधारी), साइकस, जिन्कगो। ये शंकुओं (कोन) में बीज उत्पन्न करते हैं।​
    • एंजियोस्पर्म (Angiosperms): आवृतबीजी या फूल वाले पौधे, जिनके बीज फल में बंद रहते हैं।
    • ये सबसे विकसित समूह हैं और बहुसंख्यक पौधे इन्हीं के हैं।​
  • विशेषताएँ
    • फैनरोगैम अन्य पौधों (जैसे थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा) से भिन्न होते हैं क्योंकि:
    • जड़, तना, पत्ती तथा संवहनी ऊतक पूर्ण विकसित।
    • अप्रत्यक्ष जननांग के बजाय प्रत्यक्ष फूल या शंकु।
    • बीजाणु नहीं, बल्कि बीज द्वारा प्रजनन।
    • भ्रूणपोषक ऊतक (एंडोस्पर्म) मौजूद।​
  • उदाहरण
    • जिम्नोस्पर्म: चीड़ (Pinus), देवदार (Cedrus)।
    • एंजियोस्पर्म: गेहूँ, चावल, सूर्यमुखी, गुलाब, आम। ये सभी पुष्पी और बीजधारक हैं।​
  • महत्व
    • फैनरोगैम कृषि, वानिकी और अर्थव्यवस्था के आधार हैं
    • क्योंकि ये अनाज, फल, काष्ठ प्रदान करते हैं। इनकी विविधता पादप जगत का 90% हिस्सा है।​

2. विभिन्न स्तरों पर विभिन्न प्रजातियों के ऊर्ध्वाधर वितरण (Vertical distribution) को ....... कहते हैं। [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) स्तर विन्यास
Solution:
  • विभिन्न स्तरों पर विभिन्न प्रजातियों के ऊर्ध्वाधर वितरण (Vertical distribution) को स्तर विन्यास (Stratification) कहते हैं।
  • उदाहरण के रूप में एक जंगल में वृक्ष सर्वोपरि ऊर्ध्वाधर स्तर, झाड़ियां द्वितीयक स्तर तथा जड़ी-बूटियां एवं घास निचले (धरातलीय) स्तर पर निवास करते हैं।
  • स्तरीकरण क्या है?
    • स्तरीकरण जैविक समुदायों में विभिन्न ऊँचाइयों या स्तरों पर प्रजातियों के वितरण की वह व्यवस्था है
    • जहाँ पौधे, जंतु और अन्य जीव अलग-अलग ऊर्ध्वाधर परतों में रहते हैं।
    • यह स्थानिक पैटर्न का एक रूप है
    • जो प्रकाश, तापमान, नमी और प्रतिस्पर्धा जैसे पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, एक उष्णकटिबंधीय वर्षावन में वृक्ष उच्च स्तर पर होते हैं जबकि घास निचले स्तर पर।​
  • वन पारिस्थितिकी तंत्र में स्तर
    • वन जैसे पारिस्थितिकी तंत्रों में स्तरीकरण स्पष्ट रूप से दिखता है:
    • शीर्ष स्तर (Emergent layer): सबसे ऊँचे वृक्ष, जो सूर्यप्रकाश अधिक प्राप्त करते हैं।
    • कैनोपी स्तर (Canopy): घने पत्तों वाली ऊपरी शाखाएँ, जहाँ अधिकांश प्रकाश अवशोषित होता है।
    • उप-कैनोपी स्तर (Understory): झाड़ियाँ और छोटे पेड़, जो छायादार रहते हैं।
    • झाड़ी स्तर (Shrub layer): छोटी झाड़ियाँ और युवा पेड़।
    • जमीनी स्तर (Forest floor): घास, जड़ी-बूटियाँ, कवक और अपघटक।​
  • महत्व और कारण
    • स्तरीकरण जैव विविधता को बढ़ाता है क्योंकि प्रत्येक स्तर पर अलग-अलग संसाधन उपलब्ध होते हैं
    • जिससे प्रजातियाँ प्रतिस्पर्धा कम करती हैं।
    • यह प्रकाश की उपलब्धता, मिट्टी की नमी और हवा के प्रवाह पर निर्भर करता है।
    • जल पारिस्थितिक तंत्रों में भी यह देखा जाता है, जैसे तालाबों में सतही, मध्य और तलीय स्तर।​
  • उदाहरण
    • एक उष्णकटिबंधीय वर्षावन में 50% से अधिक प्रजातियाँ कैनोपी स्तर पर पाई जाती हैं
    • जबकि मरुस्थलीय क्षेत्रों में स्तरीकरण कम होता है।
    • यह संरचना खाद्य श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह को प्रभावित करती है।​

3. फूल के अंतरतम भाग को ....... कहा जाता है। [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) स्त्रीकेसर
Solution:
  • फूल के अंतरतम भाग को स्त्रीकेसर कहा जाता है।
  • स्त्रीकेसर या फूल के मादा वाले भाग, फूल के अंतरतम भागों के कुंडली को बनाते हैं।
  • कर्णिका सामान्यतया छोटे, हरे लेफ्लिक सेपल्स से बने होते हैं
  • यह बाह्यदल फूल की कली के नाजुक एवं अंतरंग भाग की सुरक्षा करती है।
  • फूल की संरचना
    • जो बाहर से अंदर की ओर इस प्रकार व्यवस्थित होती हैं
    • सबसे बाहरी बाह्यदल (calyx), फिर दल (corolla)
    • उसके बाद पुंकेसर (androecium) और सबसे भीतर स्त्रीकेसर।
    • स्त्रीकेसर फूल का केंद्र बिंदु होता है जहाँ बीजांडनु (ovules) विकसित होते हैं।​
  • स्त्रीकेसर के भाग
    • स्त्रीकेसर तीन मुख्य भागों से मिलकर बनता है:
    • कलंक (Stigma): सबसे ऊपरी चिपचिपा भाग जो परागकणों को ग्रहण करता है।
    • स्तंभ (Style): कलंक को जोड़ने वाला लंबा ट्यूब जैसा भाग जो पराग को अंडाशय तक ले जाता है।
    • अंडाशय (Ovary): सबसे निचला भाग जिसमें बीजांडनु होते हैं, जो निषेचन के बाद बीज बनते हैं।​
  • कार्य और महत्व
    • स्त्रीकेसर फूल का मादा प्रजनन भाग है जो परागण और निषेचन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • यहाँ परागकण पहुँचने पर नर gametes मादा gametes से मिलते हैं
    • जिससे बीज और फल बनते हैं। कुछ फूलों में स्त्रीकेसर एकाधिक हो सकते हैं (बहुस्त्रीकेसर)।

4. ....... प्रजातियां पौधों और जानवरों की वे प्रजातियां है, जो विशेष रूप से किसी विशेष क्षेत्र में पाई जाती है। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) स्थानिक
Solution:
  • 'स्थानिक' प्रजातियां पौधों और जानवरों की वे प्रजातियां हैं, जो विशेष रूप से किसी विशेष क्षेत्र में पाई जाती हैं।
  • पारिस्थितिकी में स्थानिक प्रजाति वह है, जो उस क्षेत्र हेतु अद्वितीय है जिसमें यह पाया जाता है।
  • परिभाषा और विशेषताएँ
    • उदाहरणस्वरूप, पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में साल के पेड़, जंगली आम और विशालकाय गिलहरी जैसी प्रजातियाँ स्थानिक हैं।
    • ये प्रजातियाँ अक्सर अपने मूल निवास के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं
    • जैसे परागण, बीज प्रसार या खाद्य श्रृंखला का हिस्सा। हालांकि, पर्यावरणीय परिवर्तनों
    • जैसे वनों की कटाई या जलवायु परिवर्तन के प्रति ये अत्यधिक संवेदनशील होती हैं, जिससे इन्हें विलुप्ति का खतरा रहता है।​
  • कारण और विकास
    • स्थानिकता भौगोलिक अलगाव से उत्पन्न होती है, जैसे महाद्वीपों का विभाजन, द्वीपों का निर्माण या पहाड़ों द्वारा बाधा।
    • समय के साथ ये प्रजातियाँ अलग-अलग पर्यावरण में अनुकूलित हो जाती हैं।
    • ऑस्ट्रेलिया में कंगारू या भारत के पश्चिमी घाट में कई उभयचर प्रजातियाँ इसके उदाहरण हैं।
    • निकोबार द्वीप समूह में पाई जाने वाली कुछ प्रजातियाँ भी इसी श्रेणी में आती हैं।​
  • महत्व और संरक्षण
    • ये प्रजातियाँ जैव विविधता को दर्शाती हैं
    • जो किसी क्षेत्र की वनस्पतिजात (फ्लोरा) और प्राणिजात (फौना) का प्रतिनिधित्व करती हैं।
    • संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और रेड डाटा बुक जैसी पहलें महत्वपूर्ण हैं
    • क्योंकि ये प्रजातियाँ लुप्तप्राय होती हैं।
    • भारत में प्रोजेक्ट टाइगर या जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों के माध्यम से इनकी रक्षा की जाती है।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा थैलोफाइटा का एक उदाहरण नहीं है? [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) मारकेंशिया
Solution:
  • मारकेंशिया (Marchantia): यह ब्रायोफाइटा समूह का एक लिवरवर्ट है।
  • ब्रायोफाइटा थैलोफाइटा से थोड़ा अधिक विकसित होते हैं
  • हालांकि उनमें भी जड़ें, तने और पत्तियां वास्तविक रूप से विभेदित नहीं होतीं
  • लेकिन उनके शरीर में कुछ हद तक भिन्नता देखी जाती है।
  • थैलोफाइटा की विशेषताएँ
    • थैलोफाइटा के पौधों का शरीर थैलस (thallus) नामक सरल संरचना के रूप में होता है
    • जो जलीय या नम स्थानों में पाया जाता है। इनमें संवहनी ऊतक (xylem और phloem) का अभाव होता है
    • इसलिए पोषक तत्वों का परिवहन विसरण द्वारा होता है। ये मुख्यतः स्वपोषी (autotrophic) होते हैं
    • क्लोरोफिल की उपस्थिति से प्रकाश संश्लेषण करते हैं।​
  • सामान्य उदाहरण
    • थैलोफाइटा के प्रमुख उदाहरणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
    • स्पाइरोगायरा (Spirogyra): एक हरा शैवाल, जो ताजे पानी में पाया जाता है।​
    • यूलोथ्रिक्स (Ulothrix): फिलामेंटस शैवाल।​
    • चारा (Chara): जलीय शैवाल, जिसे कभी-कभी स्टोनवॉर्ट कहा जाता है।​
    • उल्वा (Ulva): समुद्री शैवाल।​
    • क्लैडोफोरा (Cladophora): बहुकोशिकीय शैवाल।​
  • गैर-उदाहरण
    • थैलोफाइटा का उदाहरण न होने वाले सामान्य विकल्प ब्रायोफाइटा या टेरिडोफाइटा से संबंधित होते हैं:
    • मर्चेंटिया (Marchantia): यह ब्रायोफाइटा (मॉस समूह) का लिवरवॉर्ट है
    • जिसमें थैलस जैसी संरचना तो है लेकिन जड़-तना-पत्ती का प्रारंभिक विभाजन होता है।​
    • काई (Moss): ब्रायोफाइटा का उदाहरण।​
    • फर्न (Fern): टेरिडोफाइटा समूह का, जिसमें वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ होती हैं।​
    • म्यूकर (Mucor): कवक (fungi) का उदाहरण, जो आधुनिक वर्गीकरण में थैलोफाइटा से अलग किया जाता है।​
  • वर्गीकरण का महत्व
    • पुरानी पादप जगत वर्गीकरण (जैसे ए.डब्ल्यू. एचचिंगसन प्रणाली) में थैलोफाइटा को अपुष्पक पौधों (cryptogams) का प्रथम समूह माना जाता था
    • लेकिन आधुनिक वर्गीकरण (ICBN) में कवक को पादप जगत से अलग कर राज्य (kingdom) फंगी में रखा गया है।
    • इसलिए प्रश्नों में अक्सर मर्चेंटिया, फर्न या काई जैसे विकल्प दिए जाते हैं जो थैलोफाइटा नहीं हैं।
    • थैलोफाइटा का अध्ययन पारिस्थितिकी और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है
    • क्योंकि ये जल स्रोतों के प्राथमिक उत्पादक होते हैं।​

6. बैलेनोग्लोसस (Balanoglossus) प्राणी जगत के निम्नलिखित में से किस संघ से संबंधित है? [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) हेमीकॉर्डेटा
Solution:
  • बैलेनोग्लोसस (Balanoglossus) प्राणी जगत के हेमीकॉर्डेटा संघ से संबंधित है।
  • यह अकशेरुकी और कशेरुकी जंतुओं के बीच विकासवादी संबंध को दर्शाता है।
  • इसके शरीर के ऊपरी भाग में नॉटोकार्ड होता है तथा कोई तंत्रिका रज्जु नहीं होती है
  • परंतु स्टोमोकार्ड पाया जाता है। यह प्रायः समुद्र में पाया जाता है।
  • वर्गीकरण (Classification)
    • संघ (Phylum): हेमिकॉर्डेटा (Hemichordata) – द्विपार्श्व सममित, त्रिश्लेमी (triploblastic), एंटरोकोलमेट (enterocoelomate) जंतु जिनमें गिल स्लिट्स (cloacal slits) पाई जाती हैं।​
    • वर्ग (Class): एंटेरोन्यूस्टा (Enteropneusta) – बिलकारी, एकाकी जंतु जिनका शरीर प्रोबोसिस, कॉलर और ट्रंक में विभाजित होता है।​
    • कुल (Family): प्टाइकोडेरिडी (Ptychoderidae)।
    • वंश (Genus): बैलेनोग्लोसस (Balanoglossus) – लगभग 20 ज्ञात प्रजातियाँ
    • जैसे Balanoglossus gigas जो 1.5-2 मीटर लंबी होती है।​
  • शारीरिक विशेषताएँ
    • बैलेनोग्लोसस का शरीर तीन भागों में बँटा होता है: प्रोबोसिस (शुंडिका), कॉलर और लंबा ट्रंक।
    • इसमें सच्ची एंटरोकोलस कोलम (enterocoelous coelom) पाई जाती है
    • जो मेसोडर्म से आस्तरित होती है और भ्रूणीय आंत्र से उत्पन्न होती है।
    • ट्रंक में गिल स्लिट्स होती हैं जो श्वसन और जल प्रवाह में सहायक हैं
    • कोलमिक द्रव में अमीबॉइड कोलमोसाइट्स मौजूद रहते हैं।​
  • आवास और जीवन चक्र

    • यह गर्म और समशीतोष्ण समुद्रों के तटवर्ती क्षेत्रों में रेत या कीचड़ में बिल बनाकर रहता है।
    • यह फिल्टर फीडर है जो समुद्री जल से सूक्ष्म जीवों को ग्रसित करता है।
    • भ्रूणीय विकास ड्यूटेरोस्टोम प्रकार का होता है
    • जो इकाइनोडर्मेटा और कॉर्डेटा से समानता दर्शाता है।​

7. फर्न किस पादप वर्ग का उदाहरण है? [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) टेरिडोफाइट
Solution:
  • फर्न, टेरिडोफाइटा पादप वर्ग का उदाहरण है। फर्न की पत्तियां बड़ी एवं विभाजित होती हैं
  • यह एक संवहनी पौधा है। दूसरे शब्दों
  • उनके पास जल और पोषक तत्वों के परिवहन हेतु विशेष ऊतक जाइलम एवं फ्लोएम पाया पाया जाता है।
  • ये बीजाणुओं के माध्यम से प्रजनन करते हैं।
  • टेरिडोफाइटा की परिभाषा
    • टेरिडोफाइटा पादप जगत का वह प्रभाग है
    • जिसमें फर्न (फ़र्न), हॉर्सटेल (अश्वपुच्छी या Equisetum), क्लबमॉस (लाइकोपोडियम) और स्पाइकमॉस जैसे पौधे शामिल हैं।
    • ये पौधे संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) से युक्त होते हैं
    • जो पानी और पोषक तत्वों का संचालन करते हैं, लेकिन इनमें बीज या फूल नहीं बनते।
    • विश्व में फर्न की लगभग 10,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो मुख्य रूप से नम और छायादार स्थानों में उगती हैं।​
  • फर्न की संरचना
    • फर्न का शरीर जड़, तना और पत्ती (फ्रॉन्ड) में विभाजित होता है।
    • पत्तियाँ बड़ी, विभाजित और हरी होती हैं, जिनके नीचे बीजाणुधानी (सोरस) स्थित होते हैं।
    • तना अक्सर भूमिगत राइज़ोम के रूप में होता है, जो नए पौधों को अलैंगिक रूप से उत्पन्न करता है।
    • ये पौधे अपुष्पक होते हैं और नग्न बीजाणुओं द्वारा प्रजनन करते हैं।​
  • प्रजनन प्रक्रिया
    • फर्न में स्पोरोफाइट (मुख्य पौधा, द्विगुणित 2n) और गैमेटोफाइट (प्रोटालस, एकलगुणित n) पीढ़ियों का एकांतर होता है।
    • स्पोरोफाइट बीजाणु उत्पन्न करता है, जो पानी में फैलकर गैमेटोफाइट बनाते हैं।
    • गैमेटोफाइट पर नर (एंथरोज़ॉइड) और मादा (आर्किगोनियम) अंग बनते हैं
    • जहाँ जल की उपस्थिति में निषेचन होता है। यह प्रक्रिया इन्हें जल-निर्भर बनाती है।

8. कवक निम्नलिखित में से किस वस्तु पर उग सकता है? [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (I-पाली)]

I. ब्रेड

II. आचार

III. चमड़ा

IV. कपड़े

सही विकल्प का चयन करें।

Correct Answer: (d) I, II, III और IV
Solution:
  • कवक प्रायः आचार, ब्रेड मुरब्बे, चमड़े, कपड़े व अन्य सड़े-गले कार्बनिक स्थानों पर पाए जाते हैं।
  • यह उष्ण व नमी वाले स्थानों पर अधिक उगते हैं। कवक के लिए वर्षा ऋतु अधिक उपयुक्त वातावरण होता है।
  • यह वर्षा के दिनों में चमड़े से बनी वस्तुओं पर भी उग आते हैं। इस प्रकार विकल्प (d) सही उत्तर है।
  • कवक की वृद्धि के लिए आदर्श स्थितियाँ
    • कवक को कम नमी, कम pH (अम्लीय वातावरण) और 20-30°C तापमान पसंद होता है।
    • वर्षा ऋतु या ऊष्ण-नम स्थानों में ये तेजी से बढ़ते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, रोटी पर राइजोपस (ब्रेड मोल्ड) सफेद-भूरे धब्बों के रूप में दिखता है।​
  • घरेलू वस्तुओं पर कवक
    • कवक रोटी, अचार, चमड़े और कपड़ों जैसी वस्तुओं पर आसानी से उग जाते हैं।
    • रोटी: राइजोपस स्टिग्नाटिकस नामक कवक बीजाणुओं से फैलता है।
    • अचार/मुरब्बा: नमी वाली बोतलों में सफेद या हरी परत बनती है।
    • चमड़ा: जूतों या बैग्स पर भूरी-हरी फफूंदी।
    • कपड़े: नम कपड़ों पर मिल्ड्यू।​
  • प्राकृतिक और अन्य सतहें
    • कवक मिट्टी, मृत पौधों, लकड़ी, फलों और पेड़ों पर भी उगते हैं।
    • कुछ कीटों या पौधों पर परजीवी रूप में हमला करते हैं
    • जैसे गेहूँ का रतुआ। लाइकेन के रूप में चट्टानों पर भी जीवित रहते हैं।​
  • कवक के प्रकार और प्रभाव
    • कवक एककोशिकीय (यीस्ट), बहुकोशिकीय फिलामेंटस या मशरूम जैसे होते हैं।
    • ये अपघटक के रूप में उपयोगी हैं, लेकिन फसल रोग या त्वचा संक्रमण (जैसे दाद) भी पैदा करते हैं।
    • रोकथाम के लिए सूखा वातावरण और अच्छी वेंटिलेशन जरूरी।​

9. शैवाल के किस वर्ग को प्रायः हरा शैवाल कहा जाता है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) क्लोरोफाइसी
Solution:
  • क्लोरोफाइसी हरे शैवालों का एक बड़ा एवं महत्वपूर्ण समूह है।
  • इसमें क्लोरोफिल a एवं b प्रमुख वर्णक उपस्थित होते हैं
  • जिसके कारण इनका रंग 'हरा' होता है।
  • इस समूह के सामान्य सदस्य क्लेमाइडोमोनास, वॉलवाक्स, यूलोथ्रिक्स, स्पाइरोगायरा आदि हैं।
  • क्लोरोफाइसी की विशेषताएँ
    • जो इन्हें हरा रंग प्रदान करते हैं। इनका आरक्षित खाद्य पदार्थ स्टार्च होता है
    • ये मुख्य रूप से मीठे पानी, मिट्टी या नम स्थानों पर पाए जाते हैं।
    • इस वर्ग में लगभग 7,000 से 12,000 प्रजातियाँ हैं
    • जो एककोशिकीय से लेकर कॉलोनियल या फिलामेंटस थैलस तक विविध रूप दिखाते हैं।​
  • प्रजनन विधियाँ
    • क्लोरोफाइसी वानस्पतिक, अलैंगिक और लैंगिक प्रजनन करते हैं।
    • अलैंगिक प्रजनन जाइगोटोस्पोर, अकॉस्पोर या कनजाइडिया द्वारा होता है
    • जबकि लैंगिक प्रजनन आइसोगैमी, एनीसोगैमी या ओगैमी रूप में।
    • अधिकांश सदस्यों में 2 से 8 शिखर कशाभिकाएँ होती हैं, जो गतिशीलता प्रदान करती हैं।​
  • प्रमुख उदाहरण
    • क्लैमाइडोमोनस: एककोशिकीय कशाभिका वाला शैवाल।
    • क्लोरेला: एककोशिकीय, जल शुद्धिकरण में उपयोगी।
    • स्पाइरोगाइरा: फिलामेंटस, मीठे पानी में सामान्य।
    • वॉल्वॉक्स: कॉलोनियल रूप।
    • चारा: जटिल थैलस वाला।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा पादप जगत द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री में विभक्त होता है? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) एंजियोस्पर्म (आवृतबीजी)
Solution:
  • एंजियोस्पर्म (आवृतबीजी) पादप जगत द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री में विभक्त होता है।
  • एंजियोस्पर्म संवहनी पौधे हैं, जिनमें तने, जड़ें व पत्तियां होती हैं। इसके बीज एक फूल में पाए जाते हैं।
  • ये पृथ्वी पर उपस्थित सभी पौधों में से विकसित हैं। बीज पौधों के अंगों के भीतर विकसित होते हैं
  • फल बनाते हैं, इसलिए इन्हें फूल वाले पौधे भी कहा जाता है।
  • आवृतबीजी की परिभाषा
    • आवृतबीजी (Angiosperms) वे फूल वाले पौधे हैं जिनके बीज फल या अंडाशय से आवृत रहते हैं।
    • ये पादप जगत का सबसे बड़ा और विविध समूह हैं जो पृथ्वी के विभिन्न आवासों में पाए जाते हैं।
    • इन्हें मुख्य रूप से दो वर्गों में बांटा जाता है: एकबीजपत्री (Monocotyledonae) और द्विबीजपत्री (Dicotyledonae)।
  • द्विबीजपत्री पादपों की विशेषताएँ
    • द्विबीजपत्री पौधों के बीजों में दो बीजपत्र (cotyledons) होते हैं। इनकी जड़ें मूसला (tap root) प्रकार की होती हैं
    • पत्तियों में जालिका शिराविन्यास (reticulate venation) पाया जाता है
    • फूलों के पुंकेसर और दल 4 या 5 के गुणक में होते हैं। उदाहरण: सरसों, मटर, सूरजमुखी।
  • एकबीजपत्री पादपों की विशेषताएँ
    • एकबीजपत्री पौधों के बीजों में एक ही बीजपत्र होता है। इनकी जड़ें गुच्छेदार (fibrous root) होती हैं
    • पत्तियों में समानांतर शिराविन्यास (parallel venation) होता है
    • फूलों के भाग 3 या 6 के गुणक में व्यवस्थित रहते हैं। उदाहरण: गेहूं, चावल, बांस।