रोग एवं उपचार (जीव विज्ञान)

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1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक विषाणु जनित रोग है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) चिकन पॉक्स
Solution:
  • चिकन पॉक्स वेरिसला जोस्टर वायरस (VZV) के कारण होता है। यह बेहद संक्रामक बीमारी है
  • जिसमें त्वचा पर खुजली, छाले जैसे चकत्ते हो जाते हैं।
  • चिकन पॉक्स का टीका इस बीमारी और इसके दौरान होने वाली अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने का एक सुरक्षित तरीका है।
  • विषाणु जनित रोगों की सूची
    • विषाणु मुख्य रूप से श्वसन तंत्र, यकृत, तंत्रिका तंत्र और त्वचा को प्रभावित करते हैं। निम्नलिखित प्रमुख उदाहरण हैं:
    • चेचक (Smallpox): वैरियोला वायरस से होता है, जो त्वचा पर चकत्ते और बुखार पैदा करता है।​
    • खसरा (Measles): पैरामिक्सोवायरस से, जिसमें बुखार, खांसी और आंखों में जलन के लक्षण होते हैं।​
    • पोलियो (Poliomyelitis): पोलियो वायरस से, जो बच्चों में लकवा का कारण बन सकता है।​
    • इन्फ्लुएंजा (Flu): इन्फ्लुएंजा वायरस से, जो सर्दी-जुकाम और बुखार उत्पन्न करता है।​
    • रेबीज (Rabies): रेबीज वायरस से, कुत्ते के काटने से फैलता है और मृत्यु का कारण बन सकता है।​
  • अन्य विषाणु जनित रोग
    • कुछ और महत्वपूर्ण रोग हैं जो विषाणुओं से उत्पन्न होते हैं:
    • कोविड-19 (SARS-CoV-2 से), हेपेटाइटिस-A (HAV से), डेंगू (डेंगू वायरस से), और एड्स (HIV से)।​
    • सामान्य जुकाम, चिकनपॉक्स, और इबोला भी विषाणु जनित हैं।​
  • जीवाणु जनित रोगों से अंतर
    • विषाणु जनित रोग एंटीबायोटिक्स से नहीं ठीक होते
    • जबकि जीवाणु जनित जैसे क्षय रोग, टाइफाइड, प्लेग और हैजा एंटीबायोटिक्स से नियंत्रित होते हैं।
    • विषाणु जीवाणुओं से छोटे होते हैं और केवल मेजबान कोशिका पर ही सक्रिय रहते हैं।​
  • रोकथाम के उपाय
    • टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीका है
    • जैसे पोलियो वैक्सीन, खसरा वैक्सीन, और इन्फ्लुएंजा वैक्सीन।
    • स्वच्छता, मास्क और संपर्क से बचाव भी महत्वपूर्ण हैं।​

2. निम्नलिखित में से कौन-सा, उच्च रक्तचाप (hypertension) के लिए जिम्मेदार नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) नमक का कम सेवन करना
Solution:
  • नमक का कम सेवन करना: नमक (सोडियम) का अधिक सेवन शरीर में तरल पदार्थ के प्रतिधारण को बढ़ाता है
  • इसलिए, नमक का कम सेवन करना वास्तव में रक्तचाप को कम करने या नियंत्रित करने में मदद करता है, न कि उच्च रक्तचाप के लिए जिम्मेदार होता है।
  • प्रमुख कारण
    • उच्च रक्तचाप के मुख्य कारणों में मोटापा, अत्यधिक नमक का सेवन, शराब का अधिक सेवन, धूम्रपान, तनाव, निष्क्रिय जीवनशैली और असंतुलित आहार शामिल हैं।
    • गुर्दे के विकार, हार्मोनल असंतुलन (जैसे थायरॉइड या कुशिंग सिंड्रोम) और कुछ दवाएं (जैसे स्टेरॉयड या गर्भनिरोधक गोलियां) भी माध्यमिक उच्च रक्तचाप का कारण बन सकती हैं।
    • स्लीप एप्निया और उम्र बढ़ना भी इसमें योगदान देते हैं।​
  • जिम्मेदार होने वाले कारक
    • आनुवंशिक कारक उच्च रक्तचाप के लिए जोखिम बढ़ाते हैं
    • लेकिन इन्हें बदला नहीं जा सकता, इसलिए ये परिवर्तनीय जोखिम कारक नहीं माने जाते।
    • इसी तरह, कम नमक का सेवन उच्च रक्तचाप का कारण नहीं, बल्कि रोकथाम का उपाय है
    • क्योंकि अधिक नमक ही रक्तचाप बढ़ाता है।
    • ये कारक अन्य सभी से अलग हैं जो जीवनशैली से नियंत्रित हो सकते हैं।​
  • रोकथाम के उपाय
    • वजन नियंत्रण, नियमित व्यायाम, कम नमक-कम वसा वाला आहार, धूम्रपान त्यागना और तनाव प्रबंधन से उच्च रक्तचाप को रोका जा सकता है।
    • फल, सब्जियां और पोटैशियम युक्त भोजन रक्तचाप को संतुलित रखते हैं।
    • चिकित्सकीय जांच और दवाओं से इसका प्रबंधन संभव है।​

3. चिकनगुनिया ....... मच्छर के कारण होने वाला एक संक्रमण है। [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) एडीज
Solution:
  • चिकनगुनिया विषाणुजनित रोग है, जो एडीज (Aedes) मच्छर के काटने से फैलता है।
  • इस रोग के लक्षणों में तीव्र बुखार, धड़ और फिर हाथ-पैर पर चकत्ते, शरीर के जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, आंखों में दर्द आदि शामिल हैं।
  • कारण और फैलाव
    • जो टोगाविरिडे परिवार के अल्फावायरस जीनस का सदस्य है।
    • यह वायरस संक्रमित व्यक्ति को काटने वाले मच्छर के माध्यम से स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंचता है
    • खासकर दिन के समय जब ये मच्छर सबसे सक्रिय होते हैं।
    • मानव मुख्य रूप से इस वायरस के प्राकृतिक संग्रहण स्थल हैं
    • यह मच्छरों के प्रजनन के लिए खड़े पानी (जैसे गमले, टायर आदि) मौजूद होने पर तेजी से फैलता है।​
  • लक्षण
    • संक्रमण के 2-12 दिनों के बाद अचानक तेज बुखार (102-105°F) शुरू होता है
    • जो 2-12 दिनों तक रह सकता है। जोड़ों में तेज दर्द (खासकर हाथ-पैर, कलाई, टखनों में) मुख्य लक्षण है
    • जो सूजन के साथ या बिना हो सकता है और महीनों तक बना रह सकता है।
    • अन्य लक्षणों में सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, त्वचा पर चकत्ते, मतली, उल्टी और कभी-कभी आंखों में दर्द शामिल हैं।​
  • निदान
    • डॉक्टर रक्त परीक्षण जैसे IgM ELISA, RT-PCR या NS1 एंटीजन टेस्ट से वायरस की पुष्टि करते हैं।
    • लक्षणों के आधार पर डेंगू या मलेरिया से अंतर किया जाता है
    • क्योंकि जोड़ों का दर्द चिकनगुनिया की प्रमुख विशेषता है।
    • गंभीर मामलों में निमोनिया, मेनिन्जाइटिस या हृदय संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं।​
  • उपचार
    • इसका कोई विशिष्ट इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए लक्षणों का प्रबंधन किया जाता है।
    • आराम, हाइड्रेशन, पेरासिटामोल दर्द-बुखार के लिए दिया जाता है
    • एस्पिरिन या ibuprofen से बचें क्योंकि ये रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकते हैं।
    • गंभीर दर्द के लिए फिजियोथेरेपी या दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं।
    • घरेलू उपचार में हल्दी दूध, तुलसी-अदरक चाय, नीम और पपीता पत्ता रस सहायक हो सकते हैं।​
  • रोकथाम
    • मच्छरों से बचाव मुख्य उपाय है: भगाओ मच्छरदानी, DEET युक्त रिपेलेंट लगाएं, पूर्ण बाजू के कपड़े पहनें।
    • घर के आसपास पानी जमा न होने दें, लार्वा नष्ट करने के लिए टेमेफोस का छिड़काव करें।
    • संक्रमित व्यक्ति को अलग रखें ताकि मच्छरों के माध्यम से फैलाव न हो।​
  • जटिलताएं और जोखिम
    • ज्यादातर लोग 1-2 हफ्तों में ठीक हो जाते हैं
    • लेकिन बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में जोड़ों का दर्द लंबे समय तक रह सकता है।
    • दुर्लभ मामलों में मृत्यु दर 1% से कम होती है, लेकिन पुरानी गठिया जैसी समस्या हो सकती है।
    • भारत में मानसून के दौरान यह अधिक फैलता है।​

4. एचआईवी (HIV) वायरस ....... को नष्ट करता है, जिससे किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा कमजोर होती है। [JE सिविल परीक्षा 23 मार्च, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) लिम्फोसाइट्स
Solution:
  • एड्स (AIDS-Acquired Immuno Deficiency Syndrome) रोग का कारक वायरस है।
  • एचआईवी (HIV) वायरस श्वेत रुधिर कणिकाओं अर्थात लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes) को नष्ट करता है
  • जिससे किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा क्षमता कमजोर हो जाती है।
  • HIV का लक्ष्य
    • ये सेल्स प्रतिरक्षा प्रणाली को निर्देशित करते हैं कि संक्रमण या कैंसर से कैसे लड़ा जाए।
    • वायरस इन सेल्स के अंदर प्रवेश कर अपनी प्रतियां बनाता है, जिससे मेजबान सेल नष्ट हो जाता है।​​
  • नष्ट करने की प्रक्रिया
    • HIV रक्त या अन्य तरल पदार्थों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है
    • CD4+ सेल्स की सतह पर CD4 रिसेप्टर से चिपक जाता है।
    • सेल के अंदर पहुंचकर, यह अपना RNA वायरल डीएनए में बदल देता है
    • मेजबान सेल के डीएनए में घुस जाता है।
    • फिर वायरस की नई प्रतियां बनती हैं, जो सेल को फोड़कर बाहर निकल आती हैं
    • अन्य CD4+ सेल्स को संक्रमित करती हैं।​​
    • यह चक्र निरंतर चलता रहता है, जिससे CD4+ कोशिकाओं की संख्या तेजी से घट जाती है।
    • सामान्यतः 500-1500 प्रति माइक्रोलीटर CD4 काउंट 200 से नीचे गिरने पर प्रतिरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित होती है।​
  • प्रतिरक्षा कमजोर होने के प्रभाव
    • CD4+ सेल्स के अभाव में, शरीर अन्य सफेद रक्त कोशिकाओं (जैसे बी सेल्स और साइटोटॉक्सिक टी सेल्स) को सक्रिय नहीं कर पाता।
    • इससे अवसरवादी संक्रमण जैसे निमोनोसिस्टिस जिरोवेसी निमोनिया, ट्यूबरकुलोसिस, कैंडिडा या कैंसर (कापोसी सरकोमा) आसानी से हो जाते हैं।
    • बिना उपचार के, यह AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) की अवस्था तक पहुंच जाता है।​
  • लक्षण और प्रगति
    • संक्रमण के शुरुआती चरण में फ्लू जैसे लक्षण (बुखार, थकान, लिम्फ नोड्स में सूजन) दिखते हैं
    • लेकिन उसके बाद वर्षों तक कोई लक्षण नहीं होते।
    • CD4 काउंट गिरने पर वजन घटना, दस्त, बुखार और गंभीर संक्रमण शुरू हो जाते हैं।
    • आधुनिक ART (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) से CD4 काउंट को सामान्य रखा जा सकता है और जीवन प्रत्याशा बढ़ाई जा सकती है।​
  • रोकथाम और उपचार
    • कंडोम उपयोग, साफ सुइयों का प्रयोग और PrEP जैसी दवाएं संक्रमण रोकती हैं।
    • एक बार संक्रमित होने पर ART जीवनरक्षक साबित होती है
    • जो वायरल लोड को undetectable स्तर तक लाती है।
    • नियमित जांच और समय पर उपचार से HIV से पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकते हैं।​

5. बैरी मार्शल (Barry Marshall) और रॉबिन वॉरेन (Robin Warren) ने किस बैक्टीरिया की खोज की थी, जो मानव पेट में निवास करता है और लंबे समय तक पेट के ऊपरी हिस्से में छाले (chronic superficial gastritis ulcers) का कारण बनता है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) हेलिकोबैक्टर पाइलोरी
Solution:
  • बैरी मार्शल और रॉबिन वॉरेन को 2005 में फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था
  • उनकी इस क्रांतिकारी खोज के लिए कि पेट के अल्सर (छाले) और गैस्ट्राइटिस (पेट की सूजन) मुख्य रूप से हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होते हैं।
  • इस खोज ने पेट के अल्सर के उपचार में क्रांति ला दी, जिससे एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इनका इलाज संभव हो गया।
  • खोज की पृष्ठभूमि
    • रॉबिन वॉरेन, एक ऑस्ट्रेलियाई पैथोलॉजिस्ट
    • 1970 के दशक के अंत में पर्थ के रॉयल पर्थ हॉस्पिटल में गैस्ट्राइटिस वाले मरीजों के पेट के ऊतकों की बायोप्सी में सर्पिल आकार के बैक्टीरिया देखे।
    • 1981 में उन्होंने युवा चिकित्सक बैरी मार्शल के साथ सहयोग शुरू किया।
    • उनकी 1982 की पहली रिसर्च पेपर में पाया गया
    • सक्रिय पुरानी गैस्ट्राइटिस के लगभग सभी मामलों में ये बैक्टीरिया मौजूद थे
    • जो उस समय प्रचलित धारणा को चुनौती देता था
    • अल्सर तनाव, मसालेदार भोजन या अधिक अम्लता से होते हैं।​
  • ऐतिहासिक प्रयोग
    • 1984 में, जानवरों पर प्रयोग असफल रहने के बाद, मार्शल ने स्वयं हेलिकोबैक्टर पाइलोरी का कल्चर युक्त ब्रोथ पी लिया।
    • कुछ दिनों में उन्हें मतली, दुर्गंधयुक्त सांस, उल्टी और गैस्ट्राइटिस हुई
    • जिसकी पुष्टि एंडोस्कोपी और बायोप्सी से हुई।
    • यह कोच के सिद्धांतों (Koch's postulates) को पूरा करने वाला प्रमाण था।
    • एंटीबायोटिक्स लेने के बाद वे ठीक हो गए और 1985 में इस आत्म-प्रयोग को प्रकाशित किया
    • जिसने दुनिया भर में ध्यान आकर्षित किया।​
  • बैक्टीरिया की विशेषताएं और प्रभाव
    • हेलिकोबैक्टर पाइलोरी एक सर्पिलाकार, ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया है
    • जो पेट के अम्लीय वातावरण में यूरेज एंजाइम (urease) उत्पन्न करके अमोनिया बनाता है और जीवित रहता है।
    • यह वैश्विक आबादी के आधे से अधिक लोगों को संक्रमित करता है
    • ज्यादातर बिना लक्षणों के, लेकिन 10-20% मामलों में ड्यूओडेनल या गैस्ट्रिक अल्सर, पुरानी गैस्ट्राइटिस
    • यहां तक कि पेट के कैंसर का खतरा बढ़ाता है।
    • निदान यूरिया ब्रीथ टेस्ट, मल एंटीजन टेस्ट या एंडोस्कोपी से होता है।
    • उपचार में अमोक्सिसिलिन, क्लैरिथ्रोमाइसिन जैसे एंटीबायोटिक्स और प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स (PPI) का संयोजन उपयोग होता है।​
  • सम्मान और प्रभाव
    • 2005 में बैरी मार्शल और रॉबिन वॉरेन को फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार मिला
    • जिसने अल्सर उपचार को लक्षण निवारण से बैक्टीरिया उन्मूलन की ओर बदल दिया।
    • इस खोज ने चिकित्सा विज्ञान में क्रांति ला दी और लाखों लोगों के इलाज को सरल बनाया।​

6. टाइफॉइड और टी.बी. किस प्रकार के रोग हैं? [MTS (T-I) 16 अगस्त, 2019 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) जीवाणु जनित
Solution:
  • टाइफॉइड (मोतीझरा): यह साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
  • टी.बी. (तपेदिक): यह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
  • दोनों ही रोग जीवाणुओं (Bacteria) द्वारा फैलते हैं।
  • टाइफॉइड का प्रकार
    • इसके प्रमुख प्रकार शामियानी टाइफॉइड (साल्मोनेला टायफी से)
    • पैराटाइफॉइड (साल्मोनेला पैराटायफी से, जो कम गंभीर होता है
    • डायरीयल टाइफॉइड (दस्त के साथ) और अब्डोमिनल टाइफॉइड (पेट दर्द प्रधान) हैं।
    • यह दूषित पानी या भोजन से फैलता है
    • लक्षणों में लगातार बुखार (104°F तक), कमजोरी, पेट दर्द, दस्त/कब्ज, सिरदर्द और गुलाबी दाने शामिल होते हैं।​
  • टी.बी. का प्रकार
    • टी.बी. (क्षय रोग) भी बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मुख्यतः फेफड़ों को निशाना बनाता है
    • लेकिन पूरे शरीर में फैल सकता है। इसके प्रकार हैं
    • फुफ्फुसीय टी.बी. (फेफड़े प्रभावित, सबसे आम), निष्क्रिय टी.बी. (बिना लक्षण, बाद में सक्रिय), सक्रिय टी.बी. (लक्षणयुक्त), मिलियरी टी.बी. (रक्तप्रवाह से पूरे शरीर में) और औषधि-प्रतिरोधी टी.बी. (दवाओं पर असर न करने वाला)।
    • यह हवा में ड्रॉपलेट्स (खांसी/छींक से) के माध्यम से फैलता है।​
  • कारण और फैलाव
    • टाइफॉइड दूषित भोजन-पानी या कैरियर व्यक्तियों के संपर्क से फैलता है
    • जबकि टी.बी. संक्रमित व्यक्ति की खांसी से हवा में फैलने वाले कणों से।
    • कमजोर प्रतिरक्षा (एचआईवी, मधुमेह) दोनों के जोखिम को बढ़ाती है।​
  • निदान उपचार
    • टाइफॉइड का निदान वाइडल टेस्ट या ब्लड कल्चर से, इलाज एंटीबायोटिक्स (सिप्रोफ्लॉक्सासिन) से होता है।
    • टी.बी. का निदान स्पुटम टेस्ट या एक्स-रे से, उपचार डॉट्स कार्यक्रम के तहत 6-9 महीने की एंटी-टीबी दवाओं से।
    • दोनों में रोकथाम स्वच्छता, टीका (टाइफॉइड के लिए) और मास्क से संभव है।​

7. निम्नलिखित में से कौन-सा एक जीवाणु जनित (बैक्टीरियल) रोग है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) कुष्ठ
Solution:
  • कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) नामक जीवाणु के संक्रमण से होता है।
  • यह मुख्यतः त्वचा का रोग है
  • जिसमें हाथ-पैर, चेहरे आदि के त्वचा के नीचे स्थित तंत्रिकाओं के घायल हो जाने से, स्पर्श एवं पीड़ा संवेदना समाप्त हो जाती है
  • प्रभावित भाग विकृत हो जाते हैं।
  • जीवाणु जनित रोग क्या हैं?
    • जीवाणु (बैक्टीरिया) एककोशिकीय सूक्ष्म जीव हैं जो विभिन्न रोग उत्पन्न करते हैं
    • जिनका उपचार एंटीबायोटिक्स से संभव होता है। कुष्ठ रोग Mycobacterium leprae जीवाणु से होता है
    • जो त्वचा, नसों, आँखों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।
    • यह धीमी गति से फैलता है और लंबे संपर्क से संक्रामक होता है, न कि हवा से।​
  • अन्य जीवाणु जनित रोगों की सूची
    • जीवाणु कई गंभीर रोग पैदा करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
    • टायफॉइड (Salmonella typhi) - उच्च बुखार और पेट दर्द।​
    • तपेदिक (टीबी, Mycobacterium tuberculosis) - फेफड़ों को प्रभावित।​​
    • हैजा (Vibrio cholerae) - दस्त और उल्टी।​​
    • टेटनस (Clostridium tetani) - मांसपेशियों में ऐंठन।​​
    • डिप्थीरिया (Corynebacterium diphtheriae) - गले में झिल्ली।​​
  • कुष्ठ रोग का महत्व प्रश्न में
    • प्रश्न के संदर्भ में, कुष्ठ रोग को जीवाणु जनित के रूप में पहचाना जाता है
    • क्योंकि अन्य विकल्प (जैसे डेंगू वायरस या इबोला) विषाणु जनित होते हैं।
    • यह पुराना रोग त्वचा पर घाव, सुन्नता और विकृति पैदा करता है
    • लेकिन बहु-दवा चिकित्सा (MDT) से पूर्ण इलाज योग्य है।
    • भारत में इसे राष्ट्रीय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नियंत्रित किया गया है।

8. निम्नलिखित में से कौन-सा एक जीवाणु रोग नहीं है? [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) जलांतक
Solution:
  • जलांतक (Rabies) एक वायरस जनित संक्रमण (रैब्डो विषाणु) है, जो संक्रमित जानवर (मुख्यतः कुत्ता) के काटने से फैलता है।
  • रेबीज के लक्षणों में अनियंत्रित उत्तेजना, पानी से डर, शरीर के अंगों को हिलने में असमर्थता, भ्रम, होश खो देना आदि शामिल हैं।
  • लेकिन सामान्यतः ऐसे बहुविकल्पीय प्रश्नों में रेबीज़, एड्स, मलेरिया या इन्फ्लुएंजा जैसे विकल्प आते हैं
  • जिनमें से अधिकांश वायरल या प्रोटोजोअन रोग होते हैं।​
  • जीवाणु रोग क्या हैं?
    • जीवाणु रोग बैक्टीरिया नामक एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों के कारण होते हैं
    • जो विभिन्न माध्यमों से फैलते हैं। उदाहरणों में टायफॉइड (साल्मोनेला टाइफी), तपेदिक (माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस), प्लेग (येर्सिनिया पेस्टिस) और हैजा (विभ्रियो कॉलेरा) शामिल हैं।
    • ये रोग एंटीबायोटिक्स से उपचार योग्य होते हैं, लेकिन दुरुपयोग से प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है।​​
  • सामान्य गैर-जीवाणु रोग उदाहरण
    • रेबीज़: यह वायरल रोग है जो कुत्ते या अन्य जानवरों के काटने से फैलता है
    • तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। टीकाकरण ही प्रभावी रोकथाम है।​
    • एड्स: HIV वायरस से होता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट करता है।​
    • मलेरिया: प्लास्मोडियम प्रोटोजोअन से, मच्छरों द्वारा फैलता है।​
    • इन्फ्लुएंजा: इन्फ्लुएंजा वायरस से श्वसन संबंधी रोग।

9. विशेष रूप से उमस भरी गर्मी के दौरान शरीर से निकलने वाली दुर्गंध पसीने पर ....... की क्रिया के कारण होती है। [CGL (T-I) 12 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) जीवाणुओं
Solution:
  • मानव शरीर स्वाभाविक रूप से गंधहीन पसीना छोड़ता है।
  • हालांकि, जब पसीना त्वचा की सतह पर मौजूद जीवाणुओं (Bacteria) के संपर्क में आता है
  • तो ये जीवाणु पसीने में मौजूद प्रोटीन और फैटी एसिड को तोड़ते हैं।
  • इस प्रक्रिया के उप-उत्पादों में वाष्पशील यौगिक होते हैं जो शरीर की दुर्गंध का कारण बनते हैं।
  • पसीने का निर्माण कैसे होता है
    • शरीर में दो प्रकार की पसीने ग्रंथियाँ मुख्य रूप से कार्य करती हैं
    • एक्राइन ग्रंथियाँ पूरे शरीर पर फैली होती हैं जो मुख्यतः पानी और नमक युक्त पसीना निकालती हैं
    • ताकि तापमान नियंत्रित रहे, जबकि एपोक्राइन ग्रंथियाँ बगल, कूल्हे और सिर जैसे क्षेत्रों में अधिक सक्रिय होती हैं
    • प्रोटीन, लिपिड तथा अन्य यौगिकों वाला गाढ़ा पसीना पैदा करती हैं ।
    • उमस भरी गर्मी में उच्च आर्द्रता के कारण पसीना त्वचा पर सूखने के बजाय नम रह जाता है
    • जो बैक्टीरिया के लिए आदर्श वातावरण बनाता है
    • यह नमी पसीने को चिपचिपा बनाए रखती है, जिससे दुर्गंध तेज होती है।​
  • जीवाणु की भूमिका
    • त्वचा पर स्वाभाविक रूप से मौजूद कोरिनेबैक्टीरियम जैसे जीवाणु एपोक्राइन पसीने के प्रोटीन और वसा को तोड़ते हैं
    • जिससे थायोअल्कोहल और अन्य गंधयुक्त यौगिक बनते हैं जो तेज दुर्गंध का कारण बनते हैं
    • एक्राइन पसीना स्वयं गंधरहित होता है, लेकिन नमी में ये जीवाणु तेजी से पनपते हैं
    • पसीने को खाद्य के रूप में उपयोग कर अपघटन प्रक्रिया शुरू करते हैं ।
    • उमस में यह प्रक्रिया तेज हो जाती है क्योंकि कम वाष्पीकरण से बैक्टीरिया की वृद्धि अनियंत्रित रहती है।​​
  • प्रभावित क्षेत्र और कारक
    • बगल और इंग्वाइनल क्षेत्र: यहाँ एपोक्राइन ग्रंथियाँ अधिक सक्रिय होती हैं
    • जिससे दुर्गंध सबसे ज्यादा महसूस होती है ।​
    • हार्मोनल प्रभाव: तनाव या यौवन में हार्मोन परिवर्तन से पसीना बढ़ता है, जो जीवाणु क्रिया को बढ़ावा देता है ।​
    • आहार: लहसुन, मसाले या रेड मीट जैसे भोजन पसीने में सल्फर यौगिक बढ़ाते हैं
    • जो बैक्टीरिया द्वारा दुर्गंध में बदल जाते हैं।
  • रोकथाम के उपाय
    • नियमित स्नान, एंटीबैक्टीरियल साबुन का उपयोग तथा ढीले कपड़े पहनना जीवाणु को कम करता है
    • नींबू, बेकिंग सोडा या पुदीने के तेल जैसे घरेलू नुस्खे pH संतुलित कर बैक्टीरिया वृद्धि रोकते हैं
    • जबकि डियोडरेंट जीवाणु मारने वाले एल्यूमिनियम यौगिक प्रदान करते हैं
    • उमस में एसी या पंखे का उपयोग पसीने को नियंत्रित रखता है।​

10. "गलगंड" निम्नलिखित में से किस ग्रंथि की एक बीमारी है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) थायरॉइड ग्रंथि
Solution:
  • गलगंड एक गले का रोग है, जिसे घेघा भी कहा जाता है। यह एक न्यूनता रोग है
  • जो शरीर में आयोडीन की कमी के कारण होता है। आयोडीन की कमी के कारण थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है।
  • आयोडीन की कमी की पूर्ति के लिए प्रायः आयोडीनयुक्त नमक का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
  • थायरॉइड ग्रंथि की भूमिका
    • थायरॉइड ग्रंथि हार्मोन थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) का उत्पादन करती है
    • जो चयापचय, हृदय गति, तापमान नियंत्रण और ऊर्जा उपयोग को नियंत्रित करते हैं।
    • आयोडीन इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक है, और इसकी कमी से ग्रंथि सूज जाती है।
    • गलगंड अक्सर दर्दरहित होता है लेकिन बड़ा होने पर सांस लेने या निगलने में समस्या पैदा कर सकता है।​
  • कारण
    • आयोडीन की कमी: सबसे प्रमुख कारण, खासकर आयोडीन-कमी वाले क्षेत्रों में, जहां ग्रंथि अधिक हार्मोन बनाने की कोशिश में बढ़ जाती है।​
    • स्व-प्रतिरक्षी विकार: जैसे हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस या ग्रेव्स रोग, जो सूजन पैदा करते हैं।​
    • अन्य: थायरॉइड नोड्यूल्स, संक्रमण, दवाएं, या गर्भावस्था।
    • गांठदार गलगंड (मल्टीनोडुलर गोइटर) लंबे समय तक उत्तेजना से होता है।​
  • लक्षण
    • गर्दन में सूजन मुख्य लक्षण है, जो छोटी गांठ से लेकर बड़ी सूजन तक हो सकती है।
    • अन्य लक्षणों में खांसी, सांस फूलना, निगलने में कठिनाई, स्वर परिवर्तन, थकान, वजन बढ़ना या हृदय संबंधी समस्याएं शामिल हैं।
    • कभी-कभी हाइपरथायरॉइडिज्म (अधिक हार्मोन) या हाइपोथायरॉइडिज्म (कमी) के लक्षण भी दिखते हैं।​
  • निदान और उपचार
    • निदान में अल्ट्रासाउंड, थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TSH, T3, T4), बायोप्सी या स्कैन शामिल हैं।
    • उपचार कारण पर निर्भर करता है
    • आयोडीन सप्लीमेंट, दवाएं (जैसे लेवोथायरोक्सिन), रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी, या सर्जरी बड़े गलगंड के लिए।
    • रोकथाम के लिए आयोडीन युक्त नमक उपयोगी है।​​