भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप (अर्थव्यवस्था)Total Questions: 281. निम्नलिखित में से कौन-सी आर्थिक प्रणालियां आमतौर पर आर्थिक नीतियां बनाने की योजना बनाने को प्राथमिकता देती हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली)](a) समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्थाएं दोनों(b) केवल पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाएं(c) मिश्रित और पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाएं(d) पूंजीवादी और समाजवादी अर्थव्यवस्थाएं दोनोंCorrect Answer: (a) समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्थाएं दोनोंSolution:आर्थिक प्रणाली एक ऐसा साधन है, जिसके द्वारा समाज या सरकारें किसी भौगोलिक क्षेत्र या देश में उपलब्ध संसाधनों, सेवाओं और वस्तुओं को व्यवस्थित और वितरित करती हैं।इसमें आमतौर पर आर्थिक नीतियां बनाने की योजना बनाने को प्राथमिकता समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्थाएं दोनों देती हैं।नियोजित अर्थव्यवस्थानियोजित अर्थव्यवस्था में सरकार केंद्रीय योजना आयोग के जरिए पंचवर्षीय योजनाएं बनाती हैजो उत्पादन लक्ष्य, वितरण और निवेश तय करती हैं। सोवियत संघ, क्यूबा और उत्तर कोरिया इसके उदाहरण हैंजहां निजी क्षेत्र की बजाय राज्य सभी प्रमुख निर्णय लेता है।इसका उद्देश्य सामाजिक कल्याण, असमानता कम करना और तेज विकास सुनिश्चित करना होता है।समाजवादी अर्थव्यवस्थासमाजवादी प्रणाली में उत्पादन के साधन राज्य के स्वामित्व में होते हैंकेंद्रीय प्राधिकरण आर्थिक नीतियों की रूपरेखा तैयार करता है।यहां नियोजन सामूहिक हित को प्राथमिकता देता है, न कि लाभ को।भारत ने स्वतंत्रता के बाद समाजवादी-प्रेरित नियोजन अपनाया, जैसे पंचवर्षीय योजनाएं।पूंजीवादी बनाम नियोजितपूंजीवादी अर्थव्यवस्था (जैसे अमेरिका) में मूल्य संकेत और निजी पहल नीति निर्माण को निर्देशित करते हैंनियोजन न्यूनतम होता है। नियोजित प्रणालियों में विपरीत रूप से सरकार हस्तक्षेप करती हैबाजार विफलताओं को रोका जा सके। मिश्रित अर्थव्यवस्थाएं (जैसे चीन आजकल) दोनों का मिश्रण अपनाती हैं।ऐतिहासिक उदाहरणभारत में 1951 से 2014 तक योजना आयोग ने नियोजित विकास को बढ़ावा दियाजो समाजवादी मॉडल से प्रेरित था। अब नीति आयोग सहकारी संघवाद पर जोर देता है।सोवियत संघ की पंचवर्षीय योजनाओं ने वैश्विक स्तर पर नियोजन का मॉडल स्थापित किया।2. मांग का नियम कहता है कि, ....... के बीच एक विपरीत संबंध है। [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (IV-पाली)](a) किसी वस्तु की मांग और उसकी आपूर्ति(b) किसी वस्तु की मांग और उसकी कीमत(c) किसी वस्तु की आपूर्ति और उसकी कीमत(d) किसी वस्तु पर कर और उसकी कीमतCorrect Answer: (b) किसी वस्तु की मांग और उसकी कीमतSolution:मांग का नियम कहता है कि यदि मांग के अन्य निर्धारक तत्व अपरिवर्तित रहेंतो किसी वस्तु की मांग और उसकी कीमत के बीच एक विपरीत संबंध पाया जाता है।अर्थात मांग के नियमानुसार, किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर उसकी मांग में कमी तथा कीमत में कमी होने पर मांग में वृद्धि होगी।मांग का नियम क्या है?उदाहरणस्वरूप, यदि चाय की कीमत 10 रुपये प्रति कप से बढ़कर 20 रुपये हो जाती हैतो उपभोक्ता कम चाय खरीदेंगे, क्योंकि वे विकल्पों की ओर आकर्षित हो जाते हैं।यह नियम अन्य बातें अपरिवर्तित (ceteris paribus) मानने पर लागू होता हैजैसे आय, स्वाद या अन्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहें।विपरीत संबंध का कारणयह विपरीत संबंध कई कारकों से उत्पन्न होता है:प्रतिस्थापन प्रभाव: कीमत बढ़ने पर सस्ते विकल्पों की ओर रुझान।आय प्रभाव: ऊंची कीमत से उपभोक्ता की क्रय शक्ति घटती हैजिससे मांग कम हो जाती है।ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम: प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से संतुष्टि घटती जाती हैइसलिए अधिक कीमत पर कम मात्रा मांगी जाती है।मांग वक्र (demand curve) हमेशा बाएं से दाएं नीचे की ओर झुका होता है, जो इस संबंध को चित्रित करता है।अपवाद और सीमाएंहालांकि सामान्य रूप से विपरीत संबंध रहता है, कुछ अपवाद मौजूद हैं:गिफेन वस्तुएं: गरीबों के लिए आवश्यक वस्तुएं (जैसे कम गुणवत्ता वाली रोटी), जहां कीमत बढ़ने पर मांग बढ़ जाती हैक्योंकि आय प्रभाव प्रतिस्थापन प्रभाव पर हावी हो जाता है।वेब्लेन वस्तुएं: विलासिता की वस्तुएं (जैसे हीरे), जहां ऊंची कीमत स्थिति का प्रतीक बनती है और मांग बढ़ाती है।अज्ञानता या अटकलें: उपभोक्ता कीमत वृद्धि को गुणवत्ता से जोड़ सकते हैं।ये अपवाद दुर्लभ हैं और सामान्य बाजार में नियम लागू होता है।व्यावहारिक महत्वयह नियम मूल्य निर्धारण, नीति निर्माण और बाजार पूर्वानुमान में सहायक है।व्यवसाय कीमतें कम कर बिक्री बढ़ा सकते हैंजबकि सरकारें सब्सिडी देकर आवश्यक वस्तुओं की मांग सुनिश्चित करती हैं।वर्तमान समय (जनवरी 2026) में, मुद्रास्फीति या कर नीतियां इस नियम को प्रभावित करती रहती हैं।3. मांग के नियम के अनुसार, किसी वस्तु के लिए उपभोक्ता की मांग ....... होनी चाहिए। [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (I-पाली)](a) वस्तु की आपूर्ति से प्रतिलोमतः संबद्ध(b) वस्तु की कीमत से प्रत्यक्षतः संबद्ध(c) वस्तु की आपूर्ति से प्रत्यक्षतः संबद्ध(d) वस्तु की कीमत से प्रतिलोमतः संबद्धCorrect Answer: (d) वस्तु की कीमत से प्रतिलोमतः संबद्धSolution:मांग का नियम बताता हैयदि मांग के अन्य निर्धारक तत्व (जैसे-आय, रुचि, फैशन आदि) अपरिवर्तित रहेंतो किसी वस्तु की मांग तथा उसकी कीमत में विपरीत संबंध होता है।अथवा "वस्तु की कीमत गिरने पर वस्तु की मांग बढ़ती हैवस्तु की कीमत बढ़ने पर, वस्तु की मांग घटती है।अतः विकल्प (d) सही उत्तर है।मांग का नियम क्या है?वस्तु की कीमत और उसकी मांग के बीच व्युत्क्रम संबंध होता है।सरल शब्दों में, "कीमत जितनी अधिक होगी, मांग उतनी ही कम होगीकीमत जितनी कम होगी, मांग उतनी ही अधिक होगी।यह नियम उपभोक्ता व्यवहार को दर्शाता हैजहां उपभोक्ता सीमित आय में अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।कारण क्यों लागू होता है?इस नियम के पीछे मुख्यतः तीन कारण कार्य करते हैं:घटती सीमांत उपयोगिता: वस्तु की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई की उपयोगिता क्रमशः घटती जाती हैइसलिए उपभोक्ता कम कीमत पर अधिक मात्रा खरीदना चाहते हैं।आय प्रभाव: कीमत घटने पर उपभोक्ता की वास्तविक आय बढ़ जाती हैजिससे वे अधिक मात्रा खरीद पाते हैं। उदाहरणस्वरूप, यदि चीनी की कीमत ₹40 से घटकर ₹30 हो जाएतो उपभोक्ता की बचत से अतिरिक्त मात्रा खरीदी जा सकती है।प्रतिस्थापन प्रभाव: कीमत घटने पर सस्ती वस्तु अन्य महंगी विकल्पों की जगह ले लेती है।मान्यताएं (अपवादों को छोड़कर)नियम तभी लागू होता है जब:उपभोक्ता की आय स्थिर रहे।स्वाद, आदतें और फैशन अपरिवर्तित रहें।संबंधित वस्तुओं (पूर्णक या प्रतिस्थापन) की कीमतें न बदलें।कोई अपेक्षा परिवर्तन न हो।अपवाद और सीमाएंकुछ मामलों में नियम विफल हो जाता हैजैसे गिफेन वस्तुएं (आवश्यकता प्रधान गरीबों की वस्तुएं, जहां कीमत बढ़ने पर भी मांग बढ़ती हैवीब्लेन वस्तुएं (लक्जरी आइटम, जहां ऊंची कीमत स्टेटस बढ़ाती है।हालांकि, सामान्य वस्तुओं के लिए यह नियम मजबूती से लागू होता है।4. सरकारी बजट आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकारी प्राप्तियों और सरकारी व्यय के अनुमानों का विवरण है। भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि होती है- [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) 1 फरवरी से 31 जनवरी(b) 1 अप्रैल से 31 मार्च(c) 1 अक्टूबर से 31 अगस्त(d) 1 जनवरी से 31 दिसंबरCorrect Answer: (b) 1 अप्रैल से 31 मार्चSolution:भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च होती है।यह सरकारी बजट में आगामी वित्तीय वर्ष हेतु सरकारी प्राप्तियों और सरकारी व्यय के अनुमानों का विवरण होता है।वित्तीय वर्ष का अर्थवित्तीय वर्ष (FY) एक 12 माह की निश्चित अवधि हैजिसका उपयोग सरकार, कंपनियां और व्यक्ति लेखा-जोखा, कराधान तथा आर्थिक नियोजन के लिए करते हैं।भारत में यह कैलेंडर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसंबर) से अलग है और अप्रैल-मार्च चक्र पर आधारित है।यह व्यवस्था ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जब 1867 में इसे 1 अप्रैल से 31 मार्च कर निर्धारित किया गया था ।ऐतिहासिक पृष्ठभूमिभारत में वित्तीय वर्ष की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुईजब पहले यह 1 मई से 31 मार्च तक थालेकिन कृषि चक्र (फसल कटाई मार्च-अप्रैल में) और मानसून (जून-जुलाई) को ध्यान में रखते हुए इसे अप्रैल से शुरू किया गया।इससे कर संग्रह और लेखा-परीक्षा में आसानी होती है।स्वतंत्र भारत में भी यही प्रथा बरकरार रहीक्योंकि यह त्योहारी मौसम (दिवाली-अक्टूबर-नवंबर) के बाद आर्थिक गतिविधियों का आकलन करने का सही समय देता है ।बजट की भूमिकासरकारी बजट अनुच्छेद 112 के तहत संवैधानिक रूप से अनिवार्य हैदो भागों में विभाजित होता है: राजस्व बजट (कर, गैर-कर आय और रोजाना व्यय) तथा पूंजीगत बजट (पूंजीगत व्यय, ऋण आदि)।यह आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्राप्तियों (टैक्स, उधार) और व्यय (रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य) के अनुमान प्रस्तुत करता है।उदाहरणस्वरूप, वर्तमान में (जनवरी 2026) बजट 2026-27 वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027) के लिए होगा ।महत्वपूर्ण तथ्यबजट प्रस्तुति: केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश होता है, जिससे अप्रैल से पहले नीतियां लागू हो सकें।आयकर संबंध: वित्तीय वर्ष के बाद मूल्यांकन वर्ष (AY) आता है, जैसे FY 2025-26 का AY 2026-27।लाभ: एकसमान लेखा अवधि से आर्थिक आंकड़ों का सटीक विश्लेषण संभव होता है, जो नीति-निर्माण में सहायक है5. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में बेरोजगारी को मापने की एक पद्धति नहीं है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) दैनिक स्थिति पद्धति(b) मासिक स्थिति पद्धति(c) सामान्य स्थिति पद्धति(d) साप्ताहिक स्थिति पद्धतिCorrect Answer: (b) मासिक स्थिति पद्धतिSolution:भारत में बेरोजगारी को मापने में दैनिक, सामान्य और साप्ताहिक स्थिति पद्धति की विधियां अपनाई जाती हैंजबकि इसको मापने में मासिक स्थिति पद्धति की विधि नहीं अपनाई जाती।बेरोजगारी मापन की मानक पद्धतियाँभारत में बेरोजगारी मुख्य रूप से तीन विधियों से मापी जाती है:सामान्य स्थिति और सहायक स्थिति: पिछले एक वर्ष की प्रमुख गतिविधि पर आधारितजहाँ व्यक्ति को यदि 6 माह से अधिक समय नियोजित रहा तो रोजगार में गिना जाता है ।वर्तमान साप्ताहिक स्थिति : पिछले 7 दिनों में कम से कम एक दिन एक घंटे का काम करने पर नियोजित माना जाता है ।वर्तमान दैनिक स्थिति (Current Daily Status - CDS): पिछले दिन के 1/2 घंटे या अधिक काम पर आधारितजो सबसे विस्तृत है ।ये सभी NSSO/NSO के PLFS (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) के तहत आते हैं, जो 2017 से वार्षिक आधार पर जारी होते हैं।गैर-मानक विकल्प: NSE क्यों नहीं?राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) शेयर बाजार लेन-देन और वित्तीय बाजारों से जुड़ा हैबेरोजगारी सर्वेक्षण से। यह रोजगार डेटा एकत्र या विश्लेषण नहीं करता।इसी प्रकार, RBI बैंकिंग डेटा प्रकाशित करता है लेकिन NSSO मुख्य एजेंसी है।अन्य गैर-पद्धतियाँ जैसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज या श्रम मंत्रालय के विभाग बेरोजगारी मापने के लिए मानक नहीं हैं ।बेरोजगारी दर की गणनाबेरोजगारी दर = (बेरोजगार व्यक्तियों की संख्या / कुल श्रम शक्ति) × 100।श्रम शक्ति में नियोजित और सक्रिय रूप से नौकरी तलाशने वाले बेरोजगार शामिल हैं।2022-23 PLFS के अनुसार शहरी बेरोजगारी दर ~6.5% रही ।6. कारक लागत (Factor cost) को ....... नाम से भी जाना जाता है। [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) निवेश लागत(b) पूर्व-कारखाना लागत(c) बाजार लागत(d) निर्गत लागतCorrect Answer: (a) निवेश लागतSolution:कारक लागत को निवेश लागत (Factor or Input Cost) के नाम से भी जाना जाता है।कारक लागत का अर्थ है- उत्पादन के सभी कारकों पर आने वाली कुल लागतजिसका उपयोग वस्तु एवं सेवा के उत्पादन के लिए होता हैअर्थात किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन में उपयोग किए गए उत्पादन के सभी कारकों की कुल लागत है।कारक लागत की परिभाषाक्योंकि बाजार मूल्य में कर और सब्सिडी के प्रभाव जुड़ जाते हैं।उदाहरणस्वरूप, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को कारक लागत पर मापा जाता हैजब हम केवल उत्पादन कारकों की आय पर ध्यान केंद्रित करते हैं।अन्य नाम और समानार्थी शब्दकारक लागत को निम्नलिखित नामों से भी संबोधित किया जाता है:मूल्य वर्धन (Value Added): उत्पादन में सृजित नया मूल्य।उत्पादन कारकों की आय : भूमि का किराया, श्रम की मजदूरी, पूँजी का ब्याज और उद्यमी का लाभ।राष्ट्रीय आय लेखांकन में NNP at Factor Cost या राष्ट्रीय आय के रूप में जाना जाता हैजो GNP से मूल्यह्रास घटाकर प्राप्त होता है।महत्व और उपयोगकारक लागत आर्थिक नीति निर्माण में उपयोगी हैक्योंकि यह सरकार को उत्पादन की वास्तविक लागत समझने में मदद करती है।भारत जैसे देशों में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) GDP को कारक लागत पर ही पहले मापता थाहालांकि अब बाजार मूल्य पर संक्रमण हो चुका है।यह अवमूल्यन, शुद्ध कारक आय आदि की गणना में आधार प्रदान करती है।गणना सूत्रकारक लागत पर NNP = GNP (बाजार मूल्य पर) - मूल्यह्रास - अप्रत्यक्ष कर + सब्सिडी।यह राष्ट्रीय आय के बराबर होता है।7. निजीकरण की प्रक्रिया में उपायों के तीन समुच्चय शामिल हैं। निम्नलिखित में से कौन उनमें से एक नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)](a) स्वामित्व उपाय(b) लेखा उपाय(c) परिचालन उपाय(d) संगठनात्मक उपायCorrect Answer: (b) लेखा उपायSolution:निजीकरण के उपायों का उद्देश्य सरकारी नियंत्रण को कम करते हुए निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ाना है।निजीकरण उपायों की प्रक्रिया में दिए गए विकल्पों में से स्वामित्व उपाय, संगठनात्मक उपाय तथा परिचालन उपाय शामिल हैंजबकि लेखा उपाय इसमें शामिल नहीं है।निजीकरण के तीन मुख्य उपायजैसे इक्विटी को निजी संस्थाओं को बेचना, जिससे सरकार का वित्तीय बोझ कम होता है।संचालन संबंधी उपाय दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित होते हैंजिसमें नई तकनीकें अपनाना, बेहतर प्रबंधन पद्धतियाँ और कर्मचारी प्रशिक्षण आते हैं।संगठनात्मक उपाय उद्यम के पुनर्गठन से जुड़े होते हैंजैसे विकेंद्रीकरण, प्रबंधन परतों को कम करना और लचीली संरचना बनाना।जो उपाय शामिल नहीं हैइन तीनों में से "लेखांकन संबंधी उपाय" उनमें से एक नहीं है।यह प्रश्न सामान्यतः प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC या अन्य) में पूछा जाता हैजहाँ विकल्पों में स्वामित्व, संचालन, संगठनात्मक के साथ लेखांकन को गलत विकल्प के रूप में रखा जाता हैलेखांकन संबंधी उपाय निजीकरण की मूल प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माने जातेक्योंकि निजीकरण मुख्य रूप से स्वामित्व हस्तांतरण, संचालन सुधार और संगठनात्मक बदलाव पर जोर देता हैकेवल लेखा-परीक्षा या वित्तीय रिकॉर्डिंग पर।निजीकरण की व्यापक प्रक्रियाभारतीय संदर्भ में निजीकरण 1991 के उदारीकरण के बाद तेज़ हुआजहाँ सार्वजनिक क्षेत्र के घाटे वाले उद्यमों को निजीकरण के माध्यम से दक्ष बनाया गया।इसके उद्देश्य सरकारी बोझ कम करना, प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और दक्षता सुधारना हैं।हालांकि, विभिन्न स्रोतों में निजीकरण के रूप थोड़े भिन्न हो सकते हैंaजैसे पूर्ण बिक्री, PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) या फ्रैंचाइज़िंगलेकिन प्रश्न के संदर्भ में तीन विशिष्ट समुच्चय ही मान्य हैं।8. निजीकरण के उद्देश्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)](i) यह वित्तीय अनुशासन में सुधार करता है।(ii) यह आधुनिकीकरण की सुविधा प्रदान करता है।(iii) यह पी.एस.यू. (PSU) के कार्य-निष्पादन को बेहतर बनाने में मदद करता है।सही उत्तर का चयन करें।(a) केवल (ii) सत्य है(b) केवल (iii) सत्य है(c) (i), (ii) और (iii) सभी सत्य हैं(d) केवल (i) सत्य हैCorrect Answer: (c) (i), (ii) और (iii) सभी सत्य हैंSolution:निजीकरण का अर्थ सरकारी सेवा या परिसंपत्तियों को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित करना है।इसका उद्देश्य वित्तीय अनुशासन में सुधार, आधुनिकीकरण की सुविधा प्रदान करना और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कार्य-निष्पादन को बेहतर बनाने में मदद करना है।इसके अलावा निजीकरण के माध्यम से बेहतर दक्षता, बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा बाजार की गतिशीलता आदि को बढ़ावा मिलता है।प्रमुख उद्देश्यक्योंकि इससे घाटे वाले सार्वजनिक उद्यमों पर निर्भरता कम होती है और विनिवेश से राजस्व प्राप्त होता है।यह लोक क्षेत्र की कंपनियों के कार्यभार को घटाता हैनिजी प्रबंधन द्वारा बेहतर संचालन सुनिश्चित करता है।इसके अलावा, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित कर आर्थिक विकास को गति मिलती है।दक्षता और प्रतिस्पर्धानिजीकरण से सरकारी संगठनों में दक्षता बढ़ती है, क्योंकि निजी क्षेत्र लाभ-उन्मुख होता हैसंसाधनों का इष्टतम उपयोग करता है। यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करता हैजिससे उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं और सेवाएं सस्ते दामों पर मिलती हैं।नौकरशाही तथा राजनीतिक हस्तक्षेप कम होने से निर्णय प्रक्रिया तेज और व्यावसायिक बनती है।वित्तीय लाभसरकार को निजीकरण से धन प्राप्ति होती है, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य या बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में लगाया जा सकता है।यह राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करता है और सार्वजनिक ऋण पर निर्भरता घटाता है।भारत जैसे विकासशील देशों में यह आर्थिक सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।अन्य प्रभावनिजीकरण बाजार में एकाधिकार तोड़ता है तथा नवाचार को प्रोत्साहित करता है।हालांकि, इसके कुछ नुकसान जैसे रोजगार हानि भी हो सकते हैंलेकिन समग्र उद्देश्य आर्थिक प्रगति है। भारत में 1991 के उदारीकरण के बाद यह नीति प्रमुख रही।9. पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (IV-पाली)](I) बाजार में बड़ी संख्या में क्रेता और विक्रेता होते हैं।(II) जानकारी पूर्ण होती है।(a) I और II दोनों(b) केवल II(c) केवल I(d) न तो I और न ही IICorrect Answer: (a) I और II दोनोंSolution:पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार की विशेषता के रूप में दोनों कथन सही हैं।एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में बड़ी संख्या में क्रेता और विक्रेता मौजूद होते हैं।किसी एक क्रेता या विक्रेता के पास बाजार में उत्पाद की कीमत को प्रभावित करने की शक्ति नहीं होती है।सभी फर्म समरूप वस्तुओं का विक्रय करती हैं।क्रेता या विक्रेता को बाजार में प्रवेश अथवा बहिर्गमन की पूर्ण स्वतंत्रता होती है तथा बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है।मुख्य विशेषताएँपूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:बड़ी संख्या में खरीदार और विक्रेता: बाजार में असंख्य क्रेता और विक्रेता होते हैंजिससे कोई एक व्यक्ति या फर्म बाजार कीमत को प्रभावित नहीं कर पाता।प्रत्येक फर्म का बाजार हिस्सा इतना छोटा होता हैवह कीमत निर्माता (Price Maker) नहीं, बल्कि कीमत स्वीकारकर्ता (Price Taker) होता है।समरूप या एकसमान उत्पाद: सभी फर्में एक ही प्रकार की होमोजीनियस (समान) वस्तु या सेवा बेचती हैं।उत्पादों में कोई अंतर नहीं होता, इसलिए उपभोक्ता किसी एक फर्म के उत्पाद को दूसरे से बेहतर नहीं मानते।पूर्ण जानकारी: खरीदारों और विक्रेताओं को बाजार कीमत, उत्पाद की गुणवत्ता और उपलब्धता के बारे में पूर्ण ज्ञान होता है।इससे तर्कसंगत निर्णय लेना संभव होता है और कोई छिपी जानकारी नहीं रहती।स्वतंत्र प्रवेश और निकास: फर्मों को उद्योग में प्रवेश या बाहर निकलने में कोई बाधा नहीं होती।लंबी अवधि में, यदि लाभ हो तो नई फर्में आती हैंयदि हानि हो तो फर्में बाहर चली जाती हैं, जिससे सामान्य लाभ की स्थिति बनी रहती है।अन्य महत्वपूर्ण लक्षणइस बाजार में कुछ अतिरिक्त विशेषताएँ भी पाई जाती हैं जो इसे पूर्ण रूप से कुशल बनाती हैं:परिवहन लागत का अभाव: सभी फर्में एक ही स्थान पर मानी जाती हैं या परिवहन लागत शून्य होती हैजिससे उत्पाद की कीमत हर जगह समान रहती है।पूर्ण गतिशीलता: उत्पादन के साधन (जैसे श्रम, पूँजी) एक फर्म से दूसरी में स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित हो सकते हैं।कोई बिक्री लागत नहीं: चूँकि उत्पाद समान होते हैं और जानकारी पूर्ण होती हैफर्मों को विज्ञापन या ब्रांडिंग पर खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।विशेषताओं का आर्थिक महत्वये विशेषताएँ पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार को सामाजिक रूप से इष्टतम बनाती हैंजहाँ संसाधनों का कुशल आवंटन होता है। उदाहरण के लिएकृषि बाजार (जैसे गेहूँ या चावल का बाजार) कभी-कभी इसकी निकटतम मिसाल होते हैंहालाँकि वास्तविक दुनिया में शुद्ध रूप से पूर्ण प्रतिस्पर्धा दुर्लभ है।अपूर्ण प्रतिस्पर्धा (जैसे एकाधिकार) में ये विशेषताएँ अनुपस्थित होती हैं, जहाँ फर्में कीमतें निर्धारित कर सकती हैं।10. निम्नलिखित में से किसने सबसे पहले यह तर्क दिया कि उच्च घाटे की स्थिति में लोग अधिक बचत करते हैं? [CGL (T-I) 12 अप्रैल, 2022 (I-पाली)](a) अमर्त्य सेन(b) एस्तेर डुफ्लो(c) डेविड रिकार्डो(d) एडम स्मिथCorrect Answer: (c) डेविड रिकार्डोSolution:सर्वप्रथम डेविड रिकार्डो ने यह तर्क दिया कि उच्च घाटे की स्थिति में लोग अधिक बचत करते हैं।रिकार्डो समतुल्यता का सिद्धांतडेविड रिकार्डो, 19वीं शताब्दी के प्रमुख ब्रिटिश अर्थशास्त्री, ने 1817 में अपनी पुस्तक "राजनीतिक अर्थशास्त्र और कराधान के सिद्धांत" में सरकारी घाटे के प्रभाव पर चर्चा की।उन्होंने प्रस्तावित किया कि जब सरकार बड़े पैमाने पर उधार लेती हैतो निजी व्यक्ति भविष्य में कर वृद्धि की आशंका से अधिक बचत करने लगते हैंजिससे घाटे का वित्तपोषण स्वतः हो जाता है। यह "रिकार्डो समतुल्यता के नाम से जाना जाता हैजहां कर वृद्धि या उधार दोनों ही उपभोक्ता व्यवहार को समान रूप से प्रभावित करते हैं।रिकार्डो का तर्क था कि तर्कसंगत उपभोक्ता वर्तमान खपत घटाकर बचत बढ़ाते हैंक्योंकि वे जानते हैं कि सरकारी ऋण अंततः करों के माध्यम से चुकाया जाएगा।सिद्धांत का आधार और तर्कउच्च बजट घाटे में सरकार या तो कर बढ़ाती है या बांड जारी कर उधार लेती है।रिकार्डो के अनुसार, उधार लेने पर लोग इसे भविष्य के कर बोझ के रूप में देखते हैंइसलिए वे वर्तमान में अधिक बचत करते हैं ताकि भविष्य में कर चुकाने लायक धन जमा हो।उदाहरणस्वरूप, यदि सरकार 100 इकाई उधार लेती हैतो व्यक्ति अपनी खपत 100 इकाई कम कर बचत बढ़ा देंगे, जिससे अर्थव्यवस्था पर कुल प्रभाव शून्य रहता है।यह सिद्धांत पूर्ण रोजगार वाली अर्थव्यवस्था मानता है और परफेक्ट कैपिटल मार्केट्स की धारणा पर टिका है।ऐतिहासिक संदर्भ और आलोचनारिकार्डो ने नेपोलियन युद्धों के दौरान ब्रिटेन के उच्च घाटों के संदर्भ में यह विचार रखा, जब सरकारी उधार चरम पर था।हालांकि, रॉबर्ट बारो और अन्य आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने इसे पुनर्जीवित किया।आलोचनाएं हैं कि वास्तविक दुनिया में लोग मिथ्या धारणाओं (fiscal illusion) के शिकार होते हैंअमर नहीं होते, और उधार सीमित होता है, इसलिए बचत हमेशा समतुल्य नहीं बढ़ती।कीन्सियन अर्थशास्त्री इसे अस्वीकार करते हैं, क्योंकि यह मांग को नजरअंदाज करता है।Submit Quiz123Next »