Correct Answer: (c) यह आर्थिक विकास और उत्पादकता की अधिक सटीक माप करने में सहायता करता है।
Solution:- किसी भी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का कुल मूल्य राष्ट्रीय आय कहलाता है।
- इसके लेखांकन में अंतिम और मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं के बीच अंतर करना इसलिए महत्वपूर्ण होता है
- क्योंकि यह आर्थिक विकास और उत्पादकता की अधिक सटीक माप करने में सहायता करता है।
- अंतिम और मध्यवर्ती वस्तुओं की परिभाषा
- अंतिम वस्तुएं या सेवाएं वे होती हैं जो सीधे उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय या निर्यात के लिए उपयोग की जाती हैं
- इन्हें अन्य वस्तुओं के उत्पादन में इनपुट के रूप में नहीं इस्तेमाल किया जाता।
- उदाहरणस्वरूप, एक ब्रेड उपभोक्ता द्वारा खरीदी गई अंतिम वस्तु है
- जबकि आटा जो बेकरी में ब्रेड बनाने के लिए उपयोग होता है, मध्यवर्ती वस्तु है।
- मध्यवर्ती वस्तुएं उत्पादन प्रक्रिया के दौरान अन्य वस्तुओं के निर्माण में खपत हो जाती हैं।
- दोहरी गणना की समस्या
- यदि मध्यवर्ती वस्तुओं को भी राष्ट्रीय आय में शामिल कर लिया जाए
- तो एक ही आर्थिक मूल्य को बार-बार गिना जाएगा, जिससे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का मूल्यांकन गलत हो जाता है।
- मान लीजिए किसान गेहूं (₹100) बेचता है, मिलर आटा (₹150) बनाकर बेकर को बेचता है
- बेकर ब्रेड (₹200) उपभोक्ता को बेचता है; यदि सभी को जोड़ा जाए तो कुल ₹450 हो जाएगा
- लेकिन वास्तविक मूल्य संवर्धन केवल ₹100 है। इसलिए केवल अंतिम वस्तु (ब्रेड) का मूल्य ही गिना जाता है।
- सटीक आर्थिक मापन
- केवल अंतिम वस्तुओं को शामिल करके राष्ट्रीय आय लेखांकन देश के वास्तविक उत्पादन, उत्पादकता
- आर्थिक विकास की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है।
- यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP), सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) और निवल राष्ट्रीय आय (NNI) जैसे प्रमुख संकेतकों की सही गणना सुनिश्चित करता है।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (System of National Accounts - SNA) में यह एक मूलभूत सिद्धांत है।
- नीति निर्माण में भूमिका
- यह भेदभाव नीति निर्माताओं को आर्थिक वृद्धि, क्षेत्रीय योगदान और उत्पादकता का सही आकलन करने में मदद करता है
- जिससे बेहतर नियोजन संभव होता है।
- उदाहरण के लिए, विभिन्न क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) के बीच मूल्य संवर्धन को ट्रैक करने से संसाधन आवंटन सुधरता है।
- साथ ही, यह उपभोक्ता मांग और बाजार परिवर्तनों को समझने में सहायक होता है।
- मूल्य संवर्धन का तरीका
- दोहरी गणना से बचने का वैकल्पिक तरीका मूल्य संवर्धन (value added) की गणना है
- जहां प्रत्येक उत्पादन चरण में जुड़े मूल्य को जोड़ा जाता है।
- हालांकि, अंतिम वस्तु विधि सरल और मानक है, जो वैश्विक तुलना को आसान बनाती है।
- भारत जैसे देशों में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) इस सिद्धांत का पालन करता है।