राजकोषीय नीति एवं राजस्व (अर्थव्यवस्था)

Total Questions: 49

1. रेपो रेट के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) यह वह दर है, जिस पर बैंक अपना धन आरबीआई के पास रखते हैं और संपार्श्विक प्राप्त करते हैं।
Solution:
  • रेपो दर वह दर है, जिस पर एक बैंक, RBI से कम अवधि पर ऋण प्राप्त करती है।
  • अर्थात जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से धन उधार लेते हैं।
  • मूल्य स्थिरता के साथ विकास के वृहद आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति के स्वरूप को इंगित करने के लिए यह एकल नीति दर है।
  • जबकि रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है, जिस पर RBI, बैकों से कम अवधि पर ऋण प्राप्त करती है।
  • रेपो रेट की परिभाषा
    • जब बैंकों के पास नकदी की कमी होती है, वे RBI से रेपो समझौते के तहत उधार लेते हैं
    • RBI को प्रतिभूतियां संपार्श्विक के रूप में रखी जाती हैं।
    • यह दर मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में तय की जाती है।
  • गलत कथन की पहचान
    • सबसे सामान्य गलत कथन यह है: "रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक RBI के साथ अपने धन रखते हैं
    • संपार्श्व्विक प्राप्त करते हैं।" यह वर्णन वास्तव में रिवर्स रेपो रेट का है
    • जहां बैंकों के पास अतिरिक्त नकदी होने पर वे RBI को उधार देते हैं
    • RBI संपार्श्विक प्रदान करता है। रेपो रेट में उधार लेने वाला RBI नहीं, बल्कि बैंक होते हैं।
  • अन्य संभावित गलत कथन
    • कुछ प्रश्नों में अन्य विकल्प जैसे "रेपो रेट CRR या SLR जैसी जमा दर है
    • भी गलत माने जाते हैं, क्योंकि CRR/SLR अनिवार्य जमा हैं, जबकि रेपो स्वैच्छिक उधार सुविधा है।
    • एक और भ्रांति: "रेपो रेट केवल रात्रिकालीन ऋण पर लागू होती है"—यह आंशिक रूप से सही है
    • लेकिन पूर्ण नहीं, क्योंकि यह विभिन्न अवधियों के लिए हो सकती है।
  • प्रभाव और महत्व
    • रेपो रेट बढ़ाने पर उधार महंगा होता है, जिससे बैंकों के ऋण ब्याज बढ़ते हैं
    • मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है, लेकिन आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), हालिया नीतियों में इसे 5.5% तक कम किया गया था
    • विकास को बढ़ावा मिले। रिवर्स रेपो (वर्तमान में रेपो से 0.5-1% कम) के साथ यह दरें तरलता कॉरिडोर बनाती हैं।
  • अन्य संबंधित दरें
    • रिवर्स रेपो रेट: RBI बैंकों से धन लेने की दर।​
    • स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): बिना संपार्श्विक के जमा।​
    • मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): आपातकालीन उधार, रेपो से ऊंची।​

2. 1991 में नई आर्थिक नीतियों (NEP) के तहत आर्थिक नीतियों के उदारीकरण के बाद निम्नलिखित में से क्या नहीं हुआ है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि की हिस्सेदारी में भारी वृद्धि
Solution:
  • वर्ष 1991 में नई आर्थिक नीतियों के तहत आर्थिक नीतियों के बाद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से अंतर्वाह में वृद्धि तथा विश्व व्यापार में निर्यात में भारत की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई तथा मुद्रा अवमूल्यन किया गया
  • जिससे विदेशी मुद्रा प्रवाह में वृद्धि हुई, जबकि उदारीकरण के बाद जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी में वृद्धि नहीं हुई।
  • NEP 1991 का पृष्ठभूमि
    • 1991 में भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था
    • जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार घटकर मात्र दो सप्ताह के आयात के बराबर रह गया था।
    • तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 24 जुलाई 1991 को प्रस्तुत बजट के माध्यम से NEP की घोषणा की
    • जो औद्योगिक लाइसेंसिंग कम करने, आयात शुल्क घटाने, विदेशी निवेश को प्रोत्साहन और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका सीमित करने पर केंद्रित थी।
    • इससे अर्थव्यवस्था बाजार-उन्मुख हो गई और निजी क्षेत्र को बढ़ावा मिला।
  • उदारीकरण के प्रमुख परिणाम
    • विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि: 1991 में संकट के समय भंडार न्यूनतम स्तर पर था
    • लेकिन सुधारों के बाद यह तेजी से बढ़ा, जो बाहरी झटकों से सुरक्षा प्रदान करने लगा।​
    • विश्व व्यापार में निर्यात वृद्धि: उदारीकरण ने व्यापार बाधाओं को कम किया
    • जिससे भारत का वैश्विक व्यापार में हिस्सा 0.5% से बढ़कर बाद के वर्षों में काफी ऊपर पहुंचा। माल और सेवाओं का निर्यात विविधीकृत हुआ।
    • FDI प्रवाह में वृद्धि: विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर प्रतिबंध ढीले पड़े; 51% तक स्वचालित अनुमोदन मिला, जिससे विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और सेवाओं में निवेश बढ़ा।
    • ये सभी परिवर्तन NEP के प्रत्यक्ष परिणाम थे, जिन्होंने औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों को गति दी।​
  • जो नहीं हुआ: कृषि हिस्सेदारी में कमी
    • उदारीकरण के बाद GDP में कृषि का योगदान घटता गया, न कि बढ़ा।
    • 1990 के दशक में यह लगभग 30% था, जो हाल के वर्षों में 15-20% तक सिमट गया।
    • NEP ने मुख्य रूप से पूंजी-गहन क्षेत्रों (जैसे प्रौद्योगिकी, विनिर्माण) को बढ़ावा दिया
    • जबकि श्रम-गहन कृषि और लघु उद्योग पीछे रह गए।
    • समावेशी विकास सुनिश्चित नहीं हुआ, क्योंकि असमानता बढ़ी और कृषि को लक्षित नीतियों की कमी रही।
  • अन्य प्रभाव और आलोचनाएं
    • निजीकरण से सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार कम हुए—आरक्षित उद्योगों की संख्या घटकर केवल 2 रह गई।
    • हालांकि, रोजगार पैटर्न प्रभावित हुए, सार्वजनिक नौकरियां घटीं लेकिन निजी क्षेत्र में नई संभावनाएं बनीं।
    • आलोचक असमान विकास और आय असमानता पर जोर देते हैं, क्योंकि कृषि जैसे क्षेत्र उपेक्षित रहे।

3. निम्नलिखित में से किस स्थिति में राजस्व घाटा होता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) जब सरकार का कुल राजस्व इस के व्यय से कम होता है।
Solution:
  • राजकोषीय घाटा वह राशि है, जिससे सरकार का कुल व्यय उसकी कुल प्राप्तियों से अधिक होता है।
  • अर्थात जब सरकार का कुल राजस्व इसके व्यय से कम होता है।
  • राजस्व घाटे की परिभाषा
    • राजस्व घाटा सरकारी बजट में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो दर्शाता है
    • सरकार अपने दैनिक संचालन खर्चों (जैसे वेतन, पेंशन, सब्सिडी, ब्याज भुगतान) को अपनी राजस्व आय से पूरा नहीं कर पा रही है।
    • यह कुल राजस्व व्यय से कुल राजस्व प्राप्तियों को घटाने पर प्राप्त होता है।
    • लगातार ऐसा घाटा सरकार को उधार लेने के लिए मजबूर करता है, जो आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करता है।
  • राजस्व घाटा कब होता है?
    • मुख्य रूप से तब जब सरकार की कुल राजस्व प्राप्तियाँ उसके कुल राजस्व व्यय से कम होती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि बजट में अनुमानित आय 10 लाख करोड़ रुपये है
    • लेकिन व्यय 12 लाख करोड़ रुपये हो जाता है, तो 2 लाख करोड़ का राजस्व घाटा हो जाता है।​
    • यह पूंजीगत व्यय (जैसे सड़कें या भवन निर्माण) से अलग है
    • जो विकासोन्मुख होता है; राजस्व व्यय रोजमर्रा के रखरखाव पर केंद्रित रहता है।​
  • राजस्व घाटे के प्रभाव
    • यह घाटा केवल वित्तीय असंतुलन नहीं लाता, बल्कि व्यापक आर्थिक चुनौतियाँ पैदा करता है।​
    • सरकार को उधार लेना पड़ता है, जिससे सार्वजनिक ऋण बढ़ता है और ब्याज का बोझ भारी हो जाता है।
    • निजी निवेश पर दबाव (क्राउडिंग आउट प्रभाव), मुद्रास्फीति का खतरा, और आर्थिक विकास में बाधा।
    • दीर्घकालिक रूप से विदेशी निवेशकों का विश्वास कम होता है, जो मुद्रा अवमूल्यन का कारण बन सकता है।​
  • इसे कम करने के उपाय
    • राजस्व घाटे पर नियंत्रण के लिए वित्तीय अनुशासन आवश्यक है।​
    • कर संग्रह दक्षता बढ़ाना, कर आधार विस्तार और चोरी रोकना।
    • अनावश्यक सब्सिडी घटाना, प्रशासनिक व्यय पर नियंत्रण और सरकारी संपत्तियों का निजीकरण।
    • राजस्व अधिशेष उत्पन्न करने वाली योजनाएँ, जैसे गैर-कर आय में वृद्धि।
    • भारत में वित्त आयोग लक्ष्य निर्धारित करता है कि राजस्व घाटा जीडीपी के 2-3% से नीचे रहे।

4. निम्नलिखित मदों में से कौन-सा सरकार के बजट के अनुसार राजस्व व्यय का भाग नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) अवसंरचनात्मक विकास व्यय
Solution:
  • राजस्व व्यय सरकार के वैसे व्यय होते हैं, जिनसे किसी भी प्रकार की संपत्ति का निर्माण नहीं होता है।
  • जैसे-राज्यों को दिया गया अनुदान, ब्याज भुगतान, रक्षा व्यय, कल्याणकारी योजनाएं, सब्सिडी, वेतन और पेंशन आदि, जबकि अवसंरचनात्मक विकास व्यय पूंजी के अंतर्गत आता है।
  • राजस्व व्यय की मुख्य विशेषताएं
    • ऋणों पर ब्याज भुगतान (सबसे बड़ा हिस्सा, लगभग 24% कुल राजस्व व्यय का)।
    • सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन।
    • सब्सिडी (खाद्य, उर्वरक आदि)।
    • रक्षा सेवाएं और प्रशासनिक खर्च।
    • ये सभी आवर्ती प्रकृति के होते हैं और कोई स्थायी संपत्ति नहीं बनाते।
  • पूंजीगत व्यय से अंतर
    • पूंजीगत व्यय संपत्ति सृजन करता है, जैसे बुनियादी ढांचा विकास, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का खर्च।
    • यह राजस्व बजट का भाग नहीं, बल्कि पूंजी बजट में आता है।
    • उदाहरणस्वरूप, केंद्रीय बजट 2022-23 में सड़क परिवहन पूंजीगत व्यय के अंतर्गत था। योजना पूंजीगत व्यय भी इसी श्रेणी में आता है।
  • सामान्य प्रश्नों के उदाहरण
    • प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाने वाले विकल्पों में से पूंजीगत मदें (जैसे बुनियादी ढांचा विकास या सड़कें) राजस्व व्यय का हिस्सा नहीं होतीं।
    • संग्रह तो प्राप्ति है, व्यय ही नहीं। विनिवेश आय राजस्व प्राप्ति है। ब्याज भुगतान, वेतन आदि राजस्व व्यय हैं।
  • बजट 2025-26 का संदर्भ
    • हालिया बजट दस्तावेजों के अनुसार, राजस्व व्यय कुल व्यय का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है
    • जिसमें ब्याज भुगतान प्रमुख है। पूंजीगत खर्च विकास पर केंद्रित रहता है।

5. एलईआरएमएस (LERMS) की नीति की घोषणा किस बजट में की गई थी? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 1992-93
Solution:
  • उदारीकृत विनिमय दर प्रबंधन प्रणाली (LERMS) भारत में एक दोहरी विनिमय दर प्रणाली है
  • जो विदेशी मुद्रा बाजार के उदारीकरण को बढ़ावा देती है।
  • रंगराजन समिति की सिफारिशों के बाद मार्च, 1992 में इसे लागू किया गया। इसकी घोषणा बजट 1992-93 में की गई थी।
  • घोषणा का संदर्भ
    • यह नीति तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा प्रस्तुत 1992-93 के बजट भाषण में पहली बार उल्लेखित हुई
    • जो भारत की आर्थिक उदारीकरण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
    • मार्च 1992 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इसे औपचारिक रूप से लागू किया
    • जो सी. रंगराजन समिति की सिफारिशों पर आधारित था। इससे पहले भारत में निश्चित विनिमय दर प्रणाली प्रचलित थी
    • LERMS ने द्वैध विनिमय दर (dual exchange rate) की शुरुआत की।
  • LERMS की मुख्य विशेषताएं
    • LERMS के तहत निर्यातकों और प्राप्त करने वालों को अपनी विदेशी मुद्रा आय का 40% हिस्सा आधिकारिक विनिमय दर (official exchange rate) पर RBI को सौंपना पड़ता था
    • जबकि शेष 60% बाजार-निर्धारित दर (market-determined rate) पर बेचा जा सकता था।
    • यह सिस्टम रुपये की आंशिक परिवर्तनीयता (partial convertibility) प्रदान करता था
    • जो व्यापार को सुगम बनाने, निर्यात प्रोत्साहन बढ़ाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का उद्देश्य रखता था।
  • पृष्ठभूमि और उद्देश्य
    • 1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत ने न्यू इंडस्ट्रियल पॉलिसी और Liberalization, Privatization, Globalization (LPG) सुधारों की शुरुआत की।
    • LERMS इन सुधारों का पहला चरण था, जो बाजार-आधारित विनिमय दर प्रणाली की ओर संक्रमण को संभव बनाता था।
    • इससे पहले, विदेशी मुद्रा का प्रबंधन पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था, जो अर्थव्यवस्था को अक्षम बना रहा था।
    • RBI इस योजना के तहत आधिकारिक उपयोग के लिए निर्यात आय का 40% खरीदता था।
  • कार्यान्वयन और प्रभाव
    • कार्यान्वयन: बजट 1992-93 में घोषणा के बाद, मार्च 1992 के प्रारंभ में RBI ने इसे opérational बनाया।
    • प्रभाव: इसने निर्यातकों को बाजार दर पर 60% आय रखने की छूट दी
    • जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी। यह fixed rate से dual rate सिस्टम में बदलाव था
    • जो बाद में एकified market-determined exchange rate (1993 में) की ओर ले गया।
    • महत्व: LERMS ने विदेशी मुद्रा बाजार को उदारीकृत किया
    • व्यापार घाटे को कम करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद की। यह 1991 सुधारों की निरंतरता थी।​
  • बाद के विकास
    • LERMS को बाद में संशोधित कर Modified LERMS (MLERMS) बनाया गया
    • 1993 तक पूर्ण रूप से बाजार-निर्धारित विनिमय दर प्रणाली लागू हो गई।
    • यह नीति भारत के विदेशी मुद्रा प्रबंधन में ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई।

6. निम्नलिखित में से कौन-सी अवधारणा केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की इक्विटी के निपटान (विक्रय) से संबंधित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) विनिवेश
Solution:
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया विनिवेश कहलाती है।
  • विनिवेश की अवधारणा केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की इक्विटी के निपटान /विक्रय से संबंधित है।
  • विनिवेश (Disinvestment) केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs) की इक्विटी के निपटान या विक्रय से सीधे जुड़ी अवधारणा है।
  • विनिवेश क्या है?
    • विनिवेश सरकार द्वारा अपनी PSUs में रखी पूंजीगत हिस्सेदारी (इक्विटी) को स्टॉक मार्केट या निजी निवेशकों को बेचने की प्रक्रिया है।
    • यह राजकोषीय घाटे—जो कुल व्यय और उधार-रहित प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है—को भरने का एक प्रमुख साधन है
    • क्योंकि इससे अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता है। उदाहरणस्वरूप, सरकार PSU शेयरों के IPO या OFS (Offer for Sale) के माध्यम से अरबों रुपये जुटाती है
    • जो सीधे बजट घाटे को कम करने में लगाए जाते हैं।
  • राजकोषीय घाटे से संबंध
    • राजकोषीय घाटा तब उत्पन्न होता है जब सरकार का व्यय (जैसे सब्सिडी, पेंशन, पूंजीगत खर्च) राजस्व प्राप्तियों (कर, गैर-कर) से अधिक होता है।
    • विनिवेश इस घाटे को पूरा करने का गैर-कर राजस्व स्रोत है, जो उधार लेने पर निर्भरता घटाता है।
    • वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घाटा GDP का 4.8% रहा, जहां विनिवेश ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • प्रक्रिया और प्रकार
    • माइनर डिसइन्वेस्टमेंट: स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप या मामूली हिस्सेदारी बिक्री।
    • मेजर डिसइन्वेस्टमेंट: नियंत्रण वाली हिस्सेदारी (51%+) का हस्तांतरण, जो निजीकरण के समान है।
      विभाग ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) इसकी देखरेख करता है।
    • प्रक्रिया में SEBI-अनुमोदित स्टॉक एक्सचेंजों पर बोली या ब्लॉक डील शामिल होती है।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ और प्रभाव
    • 1991 के उदारीकरण के बाद विनिवेश नीति मजबूत हुई।
    • हाल के वर्षों में, सरकार ने ₹2.1 लाख करोड़+ जुटाए।
    • सकारात्मक प्रभाव: घाटा नियंत्रण, PSU दक्षता वृद्धि; नकारात्मक: यदि रणनीतिक क्षेत्र प्रभावित हों।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026), FY26 लक्ष्य 4.4% घाटे के लिए विनिवेश महत्वपूर्ण है।

7. यदि ब्याज दर बढ़ती है, तो धन की मांग ....... I [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) घटेगी
Solution:
  • जब ब्याज दर में वृद्धि होती है, तो ऋण लेना अधिक महंगा हो जाता है।
  • इससे बचने के लिए लोग अधिक बचत पर ध्यान देते हैं जिससे बाजार में धन की मांग कम हो जाती है।
  • ब्याज दर और धन की मांग का संबंध
    • ब्याज दर बढ़ने पर उधार लेना महंगा हो जाता है, जिससे लोग और व्यवसाय कम ऋण लेते हैं।
    • इससे नकदी या धन की आवश्यकता कम हो जाती है, क्योंकि बचत अधिक आकर्षक लगने लगती है।
    • उच्च ब्याज दरें धन को बांड या जमा खातों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
  • कारणों की व्याख्या
    • उधार की लागत में वृद्धि: ब्याज दरें ऊंची होने पर लोन महंगे पड़ते हैं, इसलिए उपभोक्ता बड़े खरीदारी जैसे घर या कार से बचते हैं।
    • बचत को बढ़ावा: बैंक में पैसा रखने से अधिक ब्याज मिलता है, इसलिए लोग नकदी धारण करने के बजाय बचत बढ़ाते हैं।
    • निवेश में कमी: कंपनियां पूंजीगत व्यय (जैसे मशीनरी खरीद) कम करती हैं, क्योंकि उधार महंगा होता है।​
  • तरलता वरीयता सिद्धांत
    • जॉन मेनार्ड केन्स के अनुसार, धन की मांग तीन कारणों से होती है: लेन-देन, सावधानी और सट्टा मांग।
    • ब्याज दरें मुख्य रूप से सट्टा मांग को प्रभावित करती हैं। उच्च ब्याज पर बांड खरीदना लाभदायक लगता है
    • इसलिए नकदी मांग घटती है। धन मांग वक्र (Money Demand Curve) नीचे की ओर ढलान वाला होता है।​
  • अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
    • ब्याज दर वृद्धि से कुल मांग (Aggregate Demand) घटती है, जो मुद्रास्फीति नियंत्रित करने में मदद करती है।
    • आरबीआई जैसी केंद्रीय बैंक इसे मौद्रिक नीति के जरिए करती हैं। हालांकि, यह आर्थिक विकास को धीमा कर सकती है।
  • वास्तविक उदाहरण
    • 2022-2024 में जब आरबीआई ने रेपो दर बढ़ाई (4% से 6.5% तक), तो लोन महंगे हुए और उपभोक्ता खर्च घटा।
    • इससे धन मांग कम हुई, लेकिन स्टॉक मार्केट पर दबाव पड़ा। जनवरी 2026 तक दरें स्थिर हैं, पर मुद्रास्फीति नियंत्रण में है।​
    • यह प्रभाव अन्य कारकों जैसे आय स्तर, मुद्रास्फीति और अपेक्षाओं पर भी निर्भर करता है।
    • कुल मिलाकर, ब्याज दर और धन मांग में व्युत्क्रमानुपाती संबंध रहता है।

8. जी.डी.पी. अपस्फीतिकारक (GDP डिफ्लेटर) = ________ [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) [सांकेतिक जी. डी. पी. (GDP) / वास्तविक जी. डी. पी. (GDP)] × 100
Solution:
  • परिभाषा और महत्व (Definition and Importance)
    • जी.डी.पी. अपस्फीतिकारक मुद्रास्फीति (Inflation) या अपस्फीति (Deflation) का एक व्यापक माप है
    • जो देश में उत्पादित सभी वस्तुओं व सेवाओं के मूल्यों में बदलाव को ट्रैक करता है।
    • नाममात्र जीडीपी वर्तमान वर्ष की कीमतों पर आधारित होती है, जबकि वास्तविक जीडीपी आधार वर्ष की स्थिर कीमतों पर।
    • इसकी सहायता से हम समझ सकते हैं कि जीडीपी वृद्धि उत्पादन वृद्धि से है या केवल मूल्य वृद्धि से।
    • यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से भिन्न है, क्योंकि CPI एक निश्चित उपभोक्ता टोकरी पर आधारित होता है
    • जबकि जी.डी.पी. अपस्फीतिकारक पूरी अर्थव्यवस्था को कवर करता है और उपभोग पैटर्न में बदलाव को स्वतः समायोजित कर लेता है।
  • गणना उदाहरण (Calculation Example)
    • मान लीजिए, आधार वर्ष (2020) में वास्तविक जीडीपी ₹100 करोड़ और नाममात्र जीडीपी भी ₹100 करोड़ है।
    • अगले वर्ष (2025) में नाममात्र जीडीपी ₹120 करोड़ हो जाती है, जबकि वास्तविक जीडीपी ₹110 करोड़।
    • यह दर्शाता है कि मूल्य स्तर में 9.09% की वृद्धि हुई है।
    • यदि सूचकांक 100 से अधिक हो तो मुद्रास्फीति, और 100 से कम हो तो अपस्फीति का संकेत मिलता है।
  • सीमाएं और फायदे (Advantages and Limitations)
  • फायदे
    • व्यापक कवरेज: CPI या WPI की तुलना में सभी क्षेत्रों (उपभोक्ता, उत्पादक, निर्यात आदि) को शामिल करता है।​
    • गतिशील: नई वस्तुओं या सेवाओं को स्वतः शामिल कर लेता है।​
    • नीति निर्माण में उपयोगी: सरकारें और केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति ट्रेंड्स का आकलन करने के लिए इसका प्रयोग करते हैं।​
  • सीमाएं
    • आयातित वस्तुओं को शामिल नहीं करता, इसलिए वैश्विक मूल्य प्रभाव सीमित रहता है।
    • क्षेत्रीय भिन्नताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता।
    • छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव में कम सटीक।
  • भारत संदर्भ में उपयोग (Use in India)
    • भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (MoSPI) जी.डी.पी. डेटा के साथ अपस्फीतिकारक प्रकाशित करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, 2024-25 में भारत का जी.डी.पी. अपस्फीतिकारक मुद्रास्फीति दबाव को मापने में सहायक रहा। यह वास्तविक आर्थिक वृद्धि को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

9. अचल पूंजी के उपभोग को ....... के रूप में भी जाना जाता है। [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) मूल्यह्रास
Solution:
  • अचल पूंजी के उपभोग को मूल्यह्रास के रूप में भी जाना जाता है। अचल पूंजी का तात्पर्य दीर्घकालिक संपत्तियों में निवेश से है।
  • अचल पूंजी में ऐसी परिसंपत्तियां शामिल होती हैं
  • जिनका किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन में उपभोग नहीं किया जा सकता है, जबकि इनका कई बार उपयोग अवश्य किया जा सकता है।
  • कारण और प्रकार
    • अचल पूंजी का उपभोग मुख्य रूप से तीन कारणों से होता है:
    • भौतिक टूट-फूट: निरंतर उपयोग से संपत्ति खराब हो जाती है।
    • अप्रचलन: नई तकनीक आने से पुरानी संपत्ति अप्रासंगिक हो जाती है।
    • समय बीतना: कुछ संपत्तियां समय के साथ स्वाभाविक रूप से मूल्य खो देती हैं।
    • इसकी गणना विभिन्न विधियों से की जाती है
    • जैसे सीधी रेखा विधि (straight-line method), घटती शेष विधि (declining balance method) या वर्षों के अंकों का योग विधि।​
  • आर्थिक महत्व
    • राष्ट्रीय आय लेखांकन में अचल पूंजी का उपभोग सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से घटाकर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP) निकालने के लिए उपयोग किया जाता है।
    • सकल निवेश (gross investment) से मूल्यह्रास घटाने पर शुद्ध निवेश (net investment) प्राप्त होता है
    • जो पूंजी स्टॉक में वास्तविक वृद्धि दर्शाता है। यह निवेश निर्णयों और कर नीतियों को प्रभावित करता है।​

10. ....... व्यय और ....... प्राप्तियां सरकारी [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुमानित; अनुमानित
Solution:
  • सरकारी बजट एक वार्षिक वित्तीय विवरण है, जो एक वित्तीय वर्ष में सरकार के अनुमानित व्यय और अनुमानित प्राप्तियों को दर्शाता है।
  • प्राप्तियां के प्रकार
    • प्राप्तियां मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित होती हैं: राजस्व प्राप्तियां और पूंजीगत प्राप्तियां।
    • राजस्व प्राप्तियां कर (जैसे आयकर, GST), गैर-कर राजस्व (शुल्क, जुर्माना) और उधार के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से आती हैं
    • 2025-26 में शुद्ध कर प्राप्तियां 28.37 लाख करोड़ रुपये हैं।
    • पूंजीगत प्राप्तियां ऋण वसूली, संपत्ति बिक्री या छोटे बचत योजनाओं से प्राप्त होती हैं, जो संपत्ति सृजन से जुड़ी होती हैं।​
  • व्यय के प्रकार
    • व्यय को राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय में बांटा जाता है।
    • राजस्व व्यय वेतन, ब्याज भुगतान, सब्सिडी, रक्षा और प्रशासन पर होता है, जो दैनिक संचालन के लिए आवश्यक है।
    • पूंजीगत व्यय बुनियादी ढांचे (सड़कें, रेल), संपत्ति सृजन पर केंद्रित है
    • 2025-26 में कुल पूंजीगत व्यय 11.21 लाख करोड़ रुपये और प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है।​
  • वित्तीय घाटा और प्रबंधन
    • जब व्यय प्राप्तियों से अधिक होता है, तो वित्तीय घाटा उत्पन्न होता है
    • 2026 में यह जीडीपी का 4.4% अनुमानित है (पिछले वर्ष 4.8% से कम)।
    • सरकार उधार, बाजार स्रोतों से घाटा पूरा करती है
    • लेकिन पूंजीगत व्यय पर जोर देकर विकास को बढ़ावा देती है।
    • सब्सिडी व्यय 2022 के 1.9% से घटकर 2026 में 1.1% हो गया है।​
  • महत्वपूर्ण निहितार्थ
    • अनुमानित बनाम वास्तविक: बजट अनुमानित होते हैं; वास्तविक प्राप्तियां/व्यय में अंतर रणनीति की दक्षता दर्शाता है।​
    • आर्थिक प्रभाव: उच्च पूंजीगत व्यय रोजगार और विकास बढ़ाता है, जबकि राजस्व व्यय स्थिरता सुनिश्चित करता है।​
    • हालिया अपडेट: जनवरी 2026 तक, बजट 2026 की अपेक्षाएं किसानों, युवाओं और कर सुधारों पर केंद्रित हैं।​​