सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-III

Total Questions: 50

1. 'माटी-अखोरा' भारत के निम्नलिखित में से किस शास्त्रीय नृत्य से संबंधित है? [CHSL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सत्रिया
Solution:
  • 'माटी-अखोरा' सत्रिया शास्त्रीय नृत्य शैली से जुड़ा है।
  • महान असमिया सुधारक और वैष्णव संत महापुरुष शंकरदेव ने 15वीं शताब्दी में वैष्णव धर्म के प्रसार के एक शक्तिशाली साधन के रूप में सत्रिया नृत्य शैली की स्थापना की।
  • सत्त्रिया नृत्य का परिचय
    • सत्त्रिया नृत्य की स्थापना 15वीं शताब्दी में वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव ने की, मुख्य रूप से असम के सत्रों (मठों) में भक्ति प्रदर्शन के लिए।
    • यह मूलतः पुरुष भिक्षुओं द्वारा भगवान कृष्ण की कथाओं पर आधारित था और 2000 में शास्त्रीय मान्यता प्राप्त हुई।
    • सत्त्रिया में नृत्य, अभिनय, हस्तमुद्राएं और संगीत का समन्वय है, जो भक्ति रस प्रधान है।
  • माटी-अखोरा क्या है?
    • माटी-अखोरा सत्त्रिया के बुनियादी शारीरिक व्यायाम हैं, जिन्हें 'माटी-अखाड़ा' भी कहा जाता है
    • असमिया में 'माटी' का अर्थ जमीन और 'अखोरा' व्यायाम स्थल। ये नर्तक को जटिल मुद्राओं, पैरों की चाल, घुमावों, कूदों और लचीलापन सिखाते हैं।
    • कुल 64 माटी-अखोरा होते हैं, जो नृत्य की व्याकरण हैं और उन्नत प्रदर्शनों की नींव रखते हैं।
  • माटी-अखोरा के प्रकार
    • शुद्ध व्यायाम: थियो-लॉन (खड़े होकर), अथु-लॉन (झुकना), तमल-मुसुरा (अक्रोबेटिक मुद्राएं)।
    • बुनियादी नृत्य इकाइयां: उठा (ऊपर उठना), बोहा (蹲), चालना (चलना), पक (घुमाव), जप (कूद), उलहा (तरंगीन गति)।
    • ये पूरे शरीर को कवर करते हैं—हस्त (हाथ), शिर-भेद (सिर), ग्रीवा-भेद (गर्दन), दृष्टि-भेद (आंखें), भंगी (मुद्राएं)।​
  • महत्व और प्रशिक्षण
    • माटी-अखोरा नर्तक में शक्ति, संतुलन, लय और भक्ति विकसित करते हैं
    • बिना इनके उन्नत नृत्य जैसे ओजापाली या अंकीय नाट संभव नहीं। प्रशिक्षण जमीन पर शुरू होता है
    • जो विनम्रता और समर्पण सिखाता है। आधुनिक समय में महिलाएं भी इसमें भाग लेती हैं।​​

2. भारत के शास्त्रीय नृत्य रूपों में से एक से रूप में मान्यता प्राप्त 'रास-लीला' निम्नलिखित में से किस राज्य से संबंधित है? [CHSL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) मणिपुर
Solution:
  • 'रास-लीला' (मणिपुरी रास) मणिपुर का एक पारंपरिक नृत्य रूप है।
  • यह नृत्य पारंपरिक मणिपुरी पोशाक पहने हुए पुरुष और महिला दोनों नर्तकों द्वारा किया जाता है। रास-लीला में राधा, कृष्ण और गोपियां मुख्य पात्र होते हैं।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • मणिपुर का रास-लीला नृत्य वैष्णव परंपरा से गहराई से जुड़ा है
    • जहां यह भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम की कथा को चित्रित करता है।
    • इसकी शुरुआत 1779 में राजा भग्य चंद्र द्वारा की गई थी, जो मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य का अभिन्न अंग है।
    • यह नृत्य भागवत पुराण की रास पंचाध्यायी पर आधारित है
    • इसमें लड़कियां या लड़के-लड़कियां मिलकर प्रदर्शन करती हैं, जिसमें डंडी (स्टिक्स) का उपयोग होता है।
  • विशेषताएं
    • रास-लीला में कोमल और प्रवाही भंगिमाएं होती हैं, जो श्रृंगार रस प्रधान हैं।
    • यह मणिपुरी नृत्य शैली की परिष्कृत रूप है, जिसमें लोक गीतों और भक्ति संगीत की संगति रहती है।
    • प्रदर्शन आमतौर पर कृष्ण जन्माष्टमी पर होता है और इसमें राधा-कृष्ण की लीला को जीवंत रूप से दर्शाया जाता है।
  • भ्रम की स्थिति
    • ब्रज क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) में भी रासलीला नामक लोक नाट्य-नृत्य प्रचलित है
    • जो भक्ति काल में वल्लभाचार्य और हितहरिवंश जैसे संतों द्वारा विकसित हुआ।
    • हालांकि, शास्त्रीय नृत्य के रूप में मान्यता प्राप्त रास-लीला विशेष रूप से मणिपुर से है
    • जबकि ब्रज की रासलीला लोक नृत्य श्रेणी में आती है।
  • महत्व
    • भारत सरकार ने मणिपुरी नृत्य को शास्त्रीय मान्यता दी है
    • जिसमें रास-लीला प्रमुख है। यह नृत्य आध्यात्मिकता और कलात्मकता का अनूठा संगम है।

3. गुरु विपिन सिंह निम्न में से किस नृत्य शैली से संबंधित हैं? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 14 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) मणिपुरी
Solution:
  • गुरु बिपिन सिंह 'मणिपुरी' शास्त्रीय नृत्य के निर्देशक, कोरियोग्राफर और प्रशिक्षक थे।
  • मध्य प्रदेश सरकार ने इन्हें वर्ष 1989-90 के लिए कालिदास सम्मान से सम्मानित किया था।
  • मणिपुरी नृत्य की विशेषताएँ
    • मणिपुरी एक शास्त्रीय भारतीय नृत्य शैली है, जो उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर से उत्पन्न हुई है।
    • यह अपनी सुंदर चाल, अनूठी वेशभूषा, झांझ, बांसुरी और ड्रम जैसे वाद्यों के उपयोग के लिए प्रसिद्ध है।
    • भक्ति विषयों पर आधारित यह नृत्य गीतात्मक गतिविधियों और जीवंत प्रस्तुति के लिए जाना जाता है।
  • गुरु विपिन सिंह का योगदान
    • गुरु विपिन सिंह मणिपुरी नृत्य के अग्रदूत थे
    • जिन्होंने इस शैली को आधुनिक रूप प्रदान किया और भारत व विदेशों में लोकप्रिय बनाया।
    • वे नृत्य निर्देशक, कोरियोग्राफर और प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत रहे।
    • 1966 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा कालिदास सम्मान प्राप्त हुआ।

4. ....... एक प्राचीन मार्शल आर्ट है, जिसकी उत्पत्ति प्रायद्वीपीय भारत में योद्धाओं के सैन्य प्रशिक्षण के एक भाग के रूप में हुई थी [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) कलरिपयड्डु
Solution:
  • 'कलरिपयड' या कलारीपयडू भारतीय राज्य केरल में प्रचलित प्राचीन मार्शल आर्ट है
  • जिसकी उत्पत्ति प्रायद्वीपीय भारत में योद्धाओं के सैन्य प्रशिक्षण के एक भाग के रूप में हुई थी
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • यह केरल राज्य में विकसित हुई, जहां दक्षिण भारतीय राजवंशों ने इसे युद्ध संहिता के रूप में अपनाया था।
    • परंपरा के अनुसार, इसे भगवान विष्णु या पारशुराम जैसे पौराणिक चरित्रों से जोड़ा जाता है
    • यह योद्धाओं को स्ट्राइक्स, किक्स, ग्रैपलिंग तथा हथियारों की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होती थी।​
  • तकनीकें और प्रशिक्षण
    • इस मार्शल आर्ट को मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया जाता है
    • पहले शरीर नियंत्रण और व्यायाम (मैदन क्षेत्र), फिर उन्नत मुद्राएं और चालें (कोलथारी), तथा अंत में हथियार प्रशिक्षण (अंगम)। इसमें निहत्थे लड़ाई के साथ-साथ तलवार, ढाल, भाला, डंडा जैसे 18 प्रकार के हथियार शामिल हैं। प्रशिक्षण गुरुकुल शैली में होता है
    • जहां शिष्य गुरु के मार्गदर्शन में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास करते हैं।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • कलारीपयट्टू को आधुनिक कुंग-फू और कराटे का पूर्वज माना जाता है
    • क्योंकि यह एशियाई मार्शल आर्ट्स की जड़ है।
    • केरल और तमिलनाडु में आज भी प्रचलित
    • यह न केवल युद्धकला बल्कि चिकित्सा पद्धति मरमाशत्रम (दबाव बिंदु चिकित्सा) से जुड़ी है।
    • यूनेस्को ने इसे अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है।
  • आधुनिक स्थिति
    • आजकल कलारीपयट्टू को फिल्मों (जैसे बाजीराव मस्तानी) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है
    • लेकिन पारंपरिक कलारी (प्रशिक्षण स्थल) कम हो गए हैं। भारतीय सेना में भी इसका प्रशिक्षण दिया जाता है।
    • यह निहत्थे और हथियार दोनों रूपों में वैज्ञानिक रूप से सबसे उन्नत मानी जाती है।​

5. मीता अपने स्कूल के वार्षिक समारोह में "घूमर" प्रस्तुत करती हैं। इस नृत्य शैली की उत्पत्ति किस राज्य से हुई है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) राजस्थान
Solution:
  • घूमर नृत्य एक पारंपरिक राजस्थानी लोक नृत्य है, जो मूल रूप से राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र से आया है।
  • इसका विकास भील जनजाति ने मां सरस्वती की आराधना करने के लिए किया था।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • बाद में राजपूत राजघरानों ने इसे अपनाया और दरबारी नृत्य के रूप में परिष्कृत किया
    • जिससे यह शादियों, त्योहारों और उत्सवों का अभिन्न अंग बन गया।
    • इसका नाम "घूमना" से पड़ा है, जो नृत्य के दौरान घाघरे की घुमावदार गति को दर्शाता है।
  • पोशाक और प्रदर्शन शैली
    • नर्तकियां रंग-बिरंगे घाघरा-चोली, ओढ़नी और भारी गहनों से सजकर नृत्य करती हैं
    • जो घूमते समय आकर्षक भंवर बनाते हैं। महिलाएं एक वृत्ताकार घेरे में अंदर-बाहर घूमती हैं
    • ताल के साथ कदम मिलाती हैं और कभी-कभी दो समूहों में विभाजित होकर संवाद करती प्रतीत होती हैं।
    • यह नृत्य घंटों तक चल सकता है और इसमें हाथों की मुद्राएं, सिर की हल्की झुकाव वाली गतियां प्रमुख हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • राजस्थान में घूमर को लोक नृत्यों का "सिरमौर" कहा जाता है
    • जो नवरात्रि, गणगौर और विवाह जैसे अवसरों पर विशेष रूप से किया जाता है।
    • यह नृत्य जनजातीय परंपराओं से राजसी वैभव तक की यात्रा दर्शाता है
    • आज भी बॉलीवुड फिल्मों (जैसे पद्मावत) में वैश्विक पहचान दिला चुका है।
    • अन्य राज्यों में इसके प्रभाव दिखते हैं, लेकिन मूल राजस्थान ही है।

6. निम्नलिखित शख्सियतों में से कौन एक पेशेवर कुचिपुड़ी नर्तकी है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) कौशल्या रेड्डी
Solution:
  • कौशल्या रेड्डी एक प्रसिद्ध पेशेवर कुचिपुड़ी नृत्यांगना हैं।
  • इन्हें मॉरीशस सरकार द्वारा युवा रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  • कौशल्या रेड्डी एक पेशेवर कुचिपुड़ी नर्तकी हैं।
    • वे कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य की प्रसिद्ध हस्ती हैं
    • जिन्होंने प्रदर्शनों और शिक्षण के माध्यम से इस कला को समृद्ध किया है।
  • अन्य शख्सियतें
    • राधा श्रीधर: भरतनाट्यम नृत्यांगना, जिन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।​
    • सुरूपा सेन: ओडिसी नृत्यांगना और कोरियोग्राफर, नृत्यग्राम से जुड़ी।​
    • अनुपमा होस्केरे: कठपुतली कलाकार, धातु कठपुतली थिएटर की संस्थापक।​
  • कुचिपुड़ी का संक्षिप्त परिचय
    • यह आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी गाँव से उत्पन्न शास्त्रीय नृत्य-नाट्य शैली है, जो नाट्यशास्त्र पर आधारित है।​

7. पखावज शब्दांश मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस भारतीय शास्त्रीय नृत्य को पूरा करने के लिए उपयोग किए जाते हैं? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) ओडिसी
Solution:
  • पखावज शब्दांश मुख्य रूप से भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली ओडिसी को पूरा करने के लिए किया जाता है।
  • पखावज एक बैरल के आकार का दो-सिर वाला ड्रम है, जो भारतीय उपमहाद्वीप से उत्पन्न हुआ है।
  • पखावज क्या है?
    • दोनों सिरों पर चर्मपत्र चढ़ाया जाता है। दाहिने सिरे पर काला लेप लगाया जाता है
    • जबकि बाएं सिरे पर प्रदर्शन से पहले गेहूँ का आटा लगाकर बजाया जाता है।
    • यह उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेषकर ध्रुपद और धमार शैलियों में प्रमुख है
    • लेकिन नृत्य में इसके शब्दांश (बोल जैसे ता, थुन, तीरा आदि) ओडिसी के समापन के लिए विशेष रूप से प्रयुक्त होते हैं।
  • ओडिसी नृत्य में भूमिका
    • ओडिसी नृत्य ओडिशा का शास्त्रीय नृत्य रूप है, जो धीमी लय से शुरू होकर तीव्र गति तक बढ़ता है
    • चरमोत्कर्ष पर पहुँचता है। इस चरम पर पखावज के शब्दांशों का लयबद्ध उच्चारण होता है
    • जो नर्तक को अंतिम मुद्रा (समापन) प्रदान करने में सहायक होता है।
    • ओडिसी समूह में पखावज वादक (अक्सर गुरु), गायक, बांसुरी, सितार या वायलिन और मंजीरा वादक शामिल होते हैं, जो नृत्य को पूर्णता देते हैं।
  • अन्य संबंध और अंतर
    • पखावज मुख्यतः ध्रुपद संगीत से जुड़ा है, लेकिन नृत्य में ओडिसी के अलावा कथक या अन्य में सीमित उपयोग होता है।
    • ओडिसी में यह मृदंगम के समान भूमिका निभाता है, परंतु इसके बोल नृत्य के नाट्य और भक्ति आख्यानों को समर्थन देते हैं।
    • नर्तकी की साड़ी, चांदी के आभूषण और केश विन्यास के साथ पखावज की ध्वनि आध्यात्मिक मोक्ष की खोज को रेखांकित करती है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • पखावज मृदंगम से विकसित हुआ, जो प्राचीन काल से भारतीय संगीत में प्रचलित है।
    • उत्तर भारत में यह पखावज, दक्षिण में मृदंगम और पूर्वी क्षेत्रों में मर्दल या खोल कहलाता है।
    • विभिन्न घराने जैसे नाना पांसे, नाथद्वारा और कुदई सिंह इसके वादन शैलियाँ सिखाते हैं, जहाँ बोलों की श्रृंखला ताल को स्मृति चिन्ह बनाती है।

8. पढ़यनि (Padayani) किस राज्य का लोकनृत्य है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) केरल
Solution:
  • पढ्यनि (Padayani) एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति 'केरल' के मध्य त्रावणकोर क्षेत्र में हुई थी। यह देवी भद्रकाली की पूजा से जुड़ा है।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • पढ़यनि की जड़ें केरल के मध्य त्रावणकोर क्षेत्र में हैं, विशेष रूप से पठानमथिट्टा, अलप्पुझा, कोट्टायम और कोल्लम जिलों में।
    • शब्द "पढ़यनि" का अर्थ "योद्धाओं की पंक्तियां" होता है, जो 'पद' (सैनिकों का समूह) और 'आनी' (पंक्तियां) से मिलकर बना है।​
    • यह कालीपायट्टू मार्शल आर्ट से जुड़ा माना जाता है
    • जहां योद्धा अपनी शक्ति दिखाने के लिए नृत्य करते थे
    • फिर देवी काली के दारिकासुर पर विजय के प्रतीक के रूप में विकसित हुआ।
  • प्रदर्शन का समय और स्थान
    • यह नृत्य मुख्य रूप से मीनम और मेदम (मार्च-अप्रैल) मास के दौरान पंबा नदी के किनारे काली मंदिरों में सप्ताह भर चलने वाले उत्सवों में होता है।​
    • प्रसिद्ध स्थान कडम्मनित्ता, कडलीमंगलम, ओथारा (पठानमथिट्टा जिला) हैं, साथ ही ओणम और महाशिवरात्रि जैसे त्योहारों पर भी।
    • रात्रि में मंदिर परिसर में रंगीन मास्क पहनकर किया जाता है, जो देवी भद्रकाली को प्रसन्न करने का प्रतीक है।​
  • वेशभूषा और सामग्री
    • नर्तक विशाल रंगीन मुखौटे (कोलम थेरडी) पहनते हैं, जो हाथ से बनाए जाते हैं और देवताओं व पौराणिक चरित्रों को दर्शाते हैं।
    • वस्त्र केले के पत्तों से बनी भारी टोपियां, घुंघरू, और सजी हुई लाठियां या तलवारें होती हैं।​
    • मुखौटे और वेशभूषा स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है, जो नृत्य को जीवंत बनाती है।​
  • संगीत और नृत्य शैली
    • लय पढ़यनि थप्पु (ढोल), झांझ और अन्य पारंपरिक वाद्यों पर आधारित होती है।​
    • नृत्य में ऊर्जावान कदम, मार्शल आर्ट जैसी मुद्राएं, और अच्छाई-बुराई के युद्ध का चित्रण होता है।
    • यह संगीत, नृत्य, नाटक, व्यंग्य और चित्रकला का मिश्रण है, जहां गानक लोग गीत रचते हैं।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • पढ़यनि केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पूजा का माध्यम है जो समृद्धि, स्वास्थ्य और बुरी शक्तियों से रक्षा की प्रार्थना करता है।​
    • यह समुदाय को एकजुट करता है, सांस्कृतिक विरासत संरक्षित करता है, और नायर व कनियर समुदायों की जिम्मेदारी है।​
    • आज यह केरल पर्यटन का आकर्षण है, जो लोक कला को जीवित रखता है।

9. रजनी गबरा (Rajini Gabra) और हरनी गबरा (Harni Gabra) निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य का सांस्कृतिक उत्सव है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) असम
Solution:
  • रजनी गबरा (Rajini Gabra) और हरनी गबरा (Harni Gabra) भारतीय राज्य असम में मनाया जाने वाला एक सांस्कृतिक उत्सव है।
  • उत्पत्ति और महत्व
    • ये दोनों वार्षिक सामाजिक-धार्मिक त्योहार नई फसल की बुआई से ठीक पहले आयोजित होते हैं।
    • दिमासा समुदाय इन्हें कुल देवता और ग्राम देवता की पूजा के लिए समर्पित करता है
    • लोगों की भलाई, सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित हो। राजनी गबरा दिन के समय होता है, जबकि हरनी गबरा उसी रात मनाया जाता है।
  • अनुष्ठान प्रक्रिया
    • गांव का मुखिया, जिसे 'कुनांग' कहा जाता है, पूजा के दिन गांव के द्वार बंद कर कुल देवता की आराधना करता है।
    • रात में 'हरनी गबरा' समारोह आयोजित होता है, जहां पीठासीन देवता की पूजा समुदाय की रक्षा के लिए की जाती है।
    • एक रोचक परंपरा यह है कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति बंद द्वार देखकर भी गांव में प्रवेश कर ले, तो पूरा उत्सव खराब माना जाता है
    • घुसपैठिए को नए सिरे से आयोजन का पूरा खर्च वहन करना पड़ता है।
  • सांस्कृतिक संदर्भ
    • ये त्योहार असम की समृद्ध आदिवासी परंपराओं का प्रतीक हैं, जो कृषि-आधारित जीवनशैली से जुड़े हैं।
    • दिमासा जनजाति, जो डिमा हासाओ जिले सहित असम के विभिन्न भागों में रहती है
    • इन्हें अपनी पहचान का अभिन्न अंग मानती है।
    • अन्य स्रोतों में कभी-कभी बोडो समुदाय से जोड़ा जाता है, लेकिन मुख्य रूप से दिमासा से संबंधित हैं।

10. जगोई और चोलोम ....... नृत्य की दो मुख्य शैलियां सौम्य हैं। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) मणिपुरी
Solution:
  • जगोई और चोलोम 'मणिपुरी' नृत्य की दो मुख्य शैलियां/भाग हैं-एक 'सौम्य' और दूसरा 'ओजपूर्ण'।
  • मणिपुरी नृत्य का परिचय
    • मणिपुरी नृत्य भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से उत्पन्न एक प्राचीन शास्त्रीय नृत्य शैली है
    • जो अपनी नाजुक गतियों, अभिव्यंजक हस्तमुद्राओं और जीवंत वेशभूषा के लिए प्रसिद्ध है।
    • इसकी जड़ें वैष्णव भक्ति परंपरा में हैं, विशेषकर रासलीला प्रदर्शनों से जुड़ी हुईं
    • यह मणिपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
    • जगोई और चोलोम इस नृत्य के दो प्रमुख विभाग हैं, जो प्रदर्शन की शैली को विभाजित करते हैं।
  • जगोई शैली: सौम्यता का प्रतीक
    • जगोई मणिपुरी नृत्य की सौम्य शैली है, जो धीमी, मनमोहक और लयबद्ध चालों से युक्त होती है
    • मुख्यतः महिला नर्तकों द्वारा प्रस्तुत की जाती है। इसमें अभिव्यंजक चेहरे के भाव, नाजुक हाथों के इशारे और कहानी कहने वाले तत्व प्रमुख हैं
    • जो रासलीला जैसे भक्ति प्रदर्शनों में जगोई तत्व को प्रधान बनाते हैं। मैतेई समुदाय में नृत्य को सामान्यतः 'जागोई' ही कहा जाता है
    • यह लाई हरोबा जैसे पारंपरिक उत्सवों में सिल्वन देवताओं की पूजा के लिए किया जाता है।
    • इसके मूल रूपों में लेइसेम जगोई, लेइताई, नोंगडाई आदि शामिल हैं, जो प्राचीन मणिपुरी संस्कृति का हिस्सा हैं।
  • चोलोम शैली: ओजपूर्ण अभिव्यक्ति
    • चोलोम मणिपुरी नृत्य की दूसरी मुख्य शैली है, जो जोरदार, तीव्र और तांडव-प्रधान होती है
    • पुरुष नर्तकों द्वारा की जाती है। यह शास्त्रीय नृत्य के तांडव रूप का प्रतिनिधित्व करती है
    • जिसमें तेज़ कदम, शक्तिशाली घुमाव और ऊर्जावान लयबद्धता होती है।
    • चोलोम अक्सर मणिपुरी नाट्य प्रदर्शनों या उत्सवों में जगोई के साथ संयोजन में प्रस्तुत होता है, जो नृत्य की विविधता को दर्शाता है।
  • ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
    • मणिपुरी नृत्य की उत्पत्ति 18वीं शताब्दी के राजा भग्य चंद्र कीर्ति सिंह से जुड़ी है, जिन्होंने रासलीला को विकसित किया
    • लेकिन इसकी जड़ें और प्राचीन हैं। जगोई और चोलोम लाई हरोबा (देवताओं का उत्सव) जैसे उत्सवों में ब्रह्मांड सृष्टि की कथा को चित्रित करते हैं।
    • आज यह नृत्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शित होता है, तथा सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयास जारी हैं।
    • मणिपुरी नृत्य की ये शैलियाँ न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि भक्ति, आध्यात्मिकता और सामुदायिक एकता का प्रतीक भी हैं।