सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-V

Total Questions: 59

1. उत्तर-पश्चिम भारत के उस नृत्य का नाम बताइए, जिसमें नर्तक सांपों की गति का अनुकरण करते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कालबेलिया
Solution:
  • कालबेलिया नृत्य, राजस्थान का एक लोक नृत्य है, जो उत्सव के रूप में किया जाता है।
  • यह नृत्य कालबेलिया समुदाय की संस्कृति का अभिन्न अंग है। इस नृत्य में नर्तक सांपों की गति का अनुकरण करते हैं।
  • पुरुष प्रतिभागी संगीत वाद्ययंत्र बजाते हैं, जिससे नर्तकियों के प्रदर्शन के लिए लय बनाई जा सके।
  • उत्पत्ति और क्षेत्र
    • यह कालबेलिया समुदाय की परंपरागत जीवनशैली का प्रतिबिंब है
    • जहां सांप पकड़ना, विष निकालना और सांप काटने का इलाज उनका पारंपरिक व्यवसाय रहा है।
    • यूनेस्को ने 2010 में इसे विश्व अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया, जो इसकी वैश्विक मान्यता दर्शाता है।​
  • नृत्य शैली और विशेषताएं
    • नर्तकियां काले घूमने वाले घाघरे, जटिल कढ़ाई वाले ब्लाउज और चांदी के आभूषण पहनती हैं, जो सांप की आकृति और रंगों से प्रेरित होते हैं।
    • नृत्य में तरल गतियां, कमर की लचक, हाथों की लहरें और तेज घुमाव सांप की सुली गति को जीवंत बनाते हैं, जबकि पुरुष खंजरी और पोंगी जैसे वाद्यों पर संगीत देते हैं।
    • यह नृत्य लोकगीतों के साथ प्रस्तुत होता है, जो प्रकृति, प्रेम और जनजातीय जीवन की कहानियां सुनाते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • कालबेलिया नृत्य सांपों के साथ समुदाय के गहरे संबंध को दर्शाता है, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है।
    • यह हिंदू-मुस्लिम एकता और लोक आस्था का भी प्रतीक है, जैसा कि गोगाजी मेलों में सांपों संग नृत्य से दिखता है।​
    • आजकल यह पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकप्रिय है, लेकिन समुदाय अपनी परंपराओं को जीवित रखने के लिए संघर्षरत है।
  • प्रदर्शन के अवसर
    • यह नृत्य तेजा दशमी जैसे मेले, विवाह और सांस्कृतिक उत्सवों में देखा जाता है, खासकर चूरू और जोधपुर क्षेत्रों में।​
    • महिलाओं का घाघरा घूमना सांप की कुंडलिनी जैसी शक्ति का प्रतीक है, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।​

2. वीरनाट्यम निम्न में से किस राज्य के नृत्य की एक प्राचीन शैली है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) आंध्र प्रदेश
Solution:
  • वीरनाट्यम या बहादुरों का नृत्य आंध्र प्रदेश राज्य का एक प्राचीन नृत्य रूप है।
  • वीरनाट्यम की शुरुआत एक अनुष्ठान के रूप में हुई, जो शिव के सम्मान में शिव (शैव) मंदिरों में किया जाता था।
  • वीरभद्र के अनुयायी नृत्य की इस शैली को प्रदर्शित करने के लिए जाने जाते हैं
  • जिसमें विशेष रूप से आंध्र प्रदेश राज्य में वीरमुस्ती समुदाय के लोग शामिल हैं।
  • उत्पत्ति और राज्य
    • यह नृत्य मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के मंदिरों में प्रदर्शित होता है
    • वीरभद्र (भगवान शिव के उग्र रूप) की पूजा से जुड़ा है।
    • यह तांडव शैली का प्रतीक है, जो सृजन, संरक्षण और विनाश के चक्र को दर्शाता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • यह नृत्य वेद-पुराण की कहानियों पर आधारित है, विशेष रूप से दक्ष प्रजापति के यज्ञ की कथा जहां भगवान शिव का अपमान होता है।
    • पार्वती के आत्मदाह के बाद शिव वीरभद्र को भेजते हैं, जिसकी अभिव्यक्ति इस नृत्य में होती है।
    • प्राचीन काल से शिव मंदिरों में अनुष्ठानिक रूप से किया जाता रहा है, खासकर वीरमुस्ति समुदाय द्वारा।
  • प्रदर्शन विशेषताएं
    • नृत्य में जोरदार और गतिशील मुद्राएं होती हैं, जो योद्धा भाव को चित्रित करती हैं।
    • पारंपरिक वाद्य जैसे ताल वाद्य (ढोलक जैसा) का उपयोग होता है।
    • कलाकार धोती, आभूषण और शिव योद्धा की भेषभूषा धारण करते हैं।
    • यह महाशिवरात्रि जैसे त्योहारों पर मंदिर उत्सवों में आम है, जो आंध्र की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करता है।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • वीरनाट्यम केवल नृत्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भेंट है जो कला और धर्म के मेल को दिखाता है।
    • आंध्र प्रदेश कुचिपुड़ी (शास्त्रीय) जैसे अन्य नृत्यों का भी घर है
    • लेकिन वीरनाट्यम लोक अनुष्ठानिक शैली के लिए जाना जाता है। यह राज्य की जीवंत परंपराओं को जीवित रखता है।

3. डांसर युगल धनंजयन को किस भारतीय नृत्य शैली में उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय कालिदास सम्मान पुरस्कार (2019-2020) से सम्मानित किया गया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) भरतनाट्यम
Solution:
  • मध्य प्रदेश सरकार ने चेन्नई के प्रसिद्ध भरतनाट्यम डांसर युगल धनंजयन (श्री वी.पी. धनंजयन और शांता धनंजयन) को वर्ष 2019-2020 के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से सम्मानित किया।
  • राष्ट्रीय कालिदास सम्मान पहली बार वर्ष 1980 में दिया गया था।
  • इसे प्रति वर्ष शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य और रंगकर्म के क्षेत्र में प्रदान किया जाता है।
  • धनंजयन युगल कौन हैं?
    • वी.पी. धनंजयन (जन्म: 17 अप्रैल 1939) और शांता धनंजयन (जन्म: 12 अगस्त 1943) एक प्रसिद्ध भारतीय नृत्य दंपति हैं
    • जिन्हें भरतनाट्यम में उनके असाधारण योगदान के लिए जाना जाता है।
    • 1960 के दशक में कलाक्षेत्र से अलग होने के बाद उन्होंने 1968 में चेन्नई में अपना नृत्य विद्यालय 'भारत कलान्जली' स्थापित किया।
    • उन्होंने भरतनाट्यम को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें नृत्य, अभिनय और संगीत का समन्वय शामिल है।
  • राष्ट्रीय कालिदास सम्मान पुरस्कार क्या है?
    • यह पुरस्कार मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्राचीन कवि कालिदास के नाम पर दिया जाता है
    • जो शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच और प्लास्टिक कला के क्षेत्रों में आजीवन समर्पण को सम्मानित करता है।
    • पुरस्कार में नकद राशि, प्रशस्ति पत्र और ताम्रपत्र शामिल होता है।
    • 2019-2020 के लिए शास्त्रीय नृत्य श्रेणी में धनंजयनों को चयनित किया गया, जबकि 2019 में सुश्री सुनयना हजारीलाल को यह सम्मान मिला।
  • भरतनाट्यम में उनका योगदान
    • भरतनाट्यम भारत का सबसे प्राचीन और प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूप है
    • जो तमिलनाडु से उत्पन्न हुआ और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र पर आधारित है।
    • धनंजयनों ने इस नृत्य को भक्ति समर्पण से परिपूर्ण बनाते हुए वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत किया, जिसमें जटिल मुद्राएं, भाव अभिनय और तालबद्ध पैरकर्म शामिल हैं।
    • उनके प्रयासों से भरतनाट्यम ने मंदिर नृत्य से आधुनिक प्रदर्शन कला का रूप धारण किया, और वे इसके प्रचार-प्रसार के लिए गुरुकुल पद्धति अपनाते रहे।
  • अन्य प्रमुख सम्मान
    • धनंजयनों को 2009 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
    • वे नृत्य रत्नाकर (2009, USA) और अन्य पुरस्कारों से भी अलंकृत हैं।
    • उनकी विरासत भारत कलान्जली के माध्यम से जारी है, जो नई पीढ़ी को भरतनाट्यम सिखाता है।

4. नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए और भारतीय लोक तथा जनजातीय नृत्य शैलियों के संबंध में सही विकल्प का चयन कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

(i) मटकी असम का लोक नृत्य है।

(ii) थांग-ता (Thang-Ta) मणिपुर का लोक नृत्य है।

(iii) फुगड़ी (Fugdi) गोवा का लोक नृत्य है।

Correct Answer: (c) (ii) और (iii) दोनों सही हैं।
Solution:
  • मटकी मध्य प्रदेश का लोक नृत्य है। मटकी नृत्य रूप मध्य प्रदेश में खानाबदोश जनजातियों द्वारा विकसित किया गया है।
  • इसमें एक छोटे घड़े का उपयोग करके प्रदर्शन किया जाता है। थांग-ता मणिपुर का विशेष मार्शल आर्ट नृत्य है।
  • थांग-ता प्रदर्शन हमले और बचाव के कौशल का प्रदर्शन है। फुगड़ी एक लोक नृत्य है
  • जो गोवा और महाराष्ट्र राज्यों के कोंकण तटीय क्षेत्र में महिलाओं द्वारा गणेश चतुर्थी के अवसर पर किया जाता है। अतः विकल्प (c) सही उत्तर है।
  • दिए गए कथनों का विश्लेषण
    • प्रश्न में संभवतः ये कथन दिए गए हैं (प्रतियोगी परीक्षाओं के सामान्य पैटर्न के आधार पर):
    • चैलम, मिजोरम का लोक नृत्य है।
    • होजागिरी, गुजरात का लोक नृत्य है।
    • बिदेसिया, बिहार का लोक नृत्य है।​
    • इनमें से (i) और (iii) दोनों सही हैं। चैलम मिजोरम का प्रसिद्ध लोक नृत्य है
    • जो चपचार कुट त्योहार के दौरान प्रस्तुत किया जाता है, जबकि बिदेसिया बिहार का लोकप्रिय नृत्य-नाटक है।
    • होजागिरी गुजरात का नहीं, बल्कि त्रिपुरा के रियांग जनजाति का नृत्य है
    • जिसमें नर्तकियाँ मिट्टी के घड़ों पर संतुलन बनाकर नृत्य करती हैं।
  • प्रमुख लोक नृत्य शैलियाँ
    • भारतीय लोक नृत्य राज्यवार विविध हैं
    • इन्हें जनजातीय परंपराओं से जोड़ा जाता है।
    • ये नृत्य फसल उत्सव, विवाह, युद्ध या धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े होते हैं।​
  • जनजातीय नृत्यों की विशेषताएँ
    • जनजातीय नृत्य अक्सर प्रकृति पूजा, शिकार या युद्ध से प्रेरित होते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, नागालैंड का चोंग नृत्य योद्धाओं का है, जबकि झारखंड के संथाली नृत्य सामूहिक होते हैं।
    • ये नृत्य वाद्ययंत्रों जैसे मांदल, ढोल, बांसुरी और शहनाई पर आधारित होते हैं।
    • महिलाएँ आमतौर पर रंग-बिरंगे वस्त्र और आभूषण पहनती हैं, जबकि पुरुष पंख या शस्त्रों से सजते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • ये नृत्य स्थानीय लोककथाओं, सामाजिक संदेशों और मौसमी उत्सवों को जीवंत करते हैं।
    • UNESCO ने कालबेलिया (राजस्थान) को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया है।
    • आधुनिक समय में ये नृत्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं और पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
  • शास्त्रीय बनाम लोक नृत्य
    • शास्त्रीय नृत्य (जैसे भरतनाट्यम, कत्थक - कुल 8) नाट्यशास्त्र पर आधारित होते हैं
    • जबकि लोक/जनजातीय सहज और क्षेत्रीय होते हैं। लोक नृत्यों की संख्या असंख्य है, प्रत्येक राज्य में 10-20 प्रमुख शैलियाँ।
    • यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, UPSC) के लिए उपयोगी है, जहाँ राज्यवार नृत्यों पर प्रश्न आम हैं।​​

5. प्राचीन कोणार्क सूर्य मंदिर की मूर्तियों में कौन-सा भारतीय शास्त्रीय नृत्य दर्शाया गया है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) ओडिसी
Solution:
  • प्राचीन कोणार्क के सूर्य मंदिर के केंद्रीय कक्ष में ओडिसी नृत्य की मूर्तियों का उल्लेख मिलता है।
  • मंदिर का संक्षिप्त परिचय
    • कोणार्क सूर्य मंदिर 13वीं शतक में पूर्व गंग वंश के राजा नरसिंह देव प्रथम द्वारा निर्मित एक भव्य सूर्य मंदिर है
    • जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। यह सूर्य देव के रथ के रूप में डिज़ाइन किया गया है
    • जिसमें 24 पहिए और 7 घोड़े नक्काशीदार हैं।
    • मंदिर की दीवारें और स्तंभ जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे नृत्य, संगीत, प्रेम और दैनिक क्रियाओं को चित्रित करते हैं।
  • दर्शाया गया नृत्य: ओडिसी
    • मंदिर के नाट्य मंडप (नृत्य भवन) में लगभग 277 मूर्तियाँ हैं, जो ओडिसी नृत्य की मुद्राओं को दर्शाती हैं।
    • ये मूर्तियाँ नर्तक-नर्तकियों, गायकों, वादकों और देवदासियों को विभिन्न भाव-भंगिमाओं में दिखाती हैं
    • जो नाट्यशास्त्र से प्रेरित हैं। ओडिसी ओडिशा की उत्पत्ति वाला सबसे प्राचीन जीवित शास्त्रीय नृत्य है, जिसमें मृदु गतियाँ, जटिल पदचाप और भावपूर्ण हाव-भाव प्रमुख हैं।
  • ओडिसी की विशेषताएँ मूर्तियों में
    • मुद्राएँ और भाव: मूर्तियाँ त्रिभंग (तीन वक्र रेखाएँ), आलापद (पैरों की विशेष स्थिति) और अभिनय की 108 करण (लयबद्ध गतियाँ) जैसी ओडिसी मुद्राएँ प्रदर्शित करती हैं।
    • देवदासियाँ: ये नर्तकियाँ मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान नृत्य करती थीं
    • विशेषकर भगवान जगन्नाथ से जुड़े भक्ति विषयों पर। मूर्तियाँ उन्हें नृत्य, गायन और वादन में चित्रित करती हैं।
    • नाट्यशास्त्र प्रभाव: भरत मुनि के नाट्यशास्त्र पर आधारित ये मूर्तियाँ हस्तमुद्राएँ, नेत्राभिनय और शरीर की लचक को जीवंत बनाती हैं, जो ओडिसी की मूल विशेषता है।
  • नाट्य मंडप का महत्व
    • नाट्य मंडप मंदिर का प्रवेश द्वार है, जहाँ स्तंभों पर नृत्यांगनाएँ उत्कीर्ण हैं। ये मूर्तियाँ इतनी जीवंत हैं
    • प्राचीन काल की सांस्कृतिक जीवंतता का अहसास कराती हैं। कोणार्क नृत्य महोत्सव आज भी इसी परंपरा को जीवित रखता है।
  • अन्य नृत्य तत्व
    • हालाँकि ओडिसी प्रमुख है, कुछ स्रोत सामान्य नृत्य-नाटक मुद्राओं का उल्लेख करते हैं
    • लेकिन विशेषज्ञ ओडिसी से ही जोड़ते हैं। मंदिर की कामुक मूर्तियाँ भी जीवन चक्र का प्रतीक हैं।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • ओडिसी का विकास ओडिशा के महादेवी, जैन और बौद्ध मंदिरों से हुआ
    • कोणार्क इसकी कला का चरमोत्कर्ष है। 15वीं शतक के आक्रमणों के बावजूद ये मूर्तियाँ सुरक्षित हैं।

6. राजस्थान के उस नृत्य का नाम बताएं जिसमें टेक के रूप में नकली घोड़े की सवारी का उपयोग किया जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) कच्छी घोड़ी
Solution:
  • कच्छी घोड़ी नृत्य राजस्थान राज्य का एक लोक नृत्य है। यह नृत्य राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र से आरंभ हुआ है।
  • यह केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य भागों जैसे-महाराष्ट्र, गुजरात आदि में प्रसिद्ध है।
  • इसमें नर्तक नकली घोड़ों पर सवारी करते हैं। राजस्थान में यह कुम्हार, कामधोली, सरघरा और भावी समुदायों द्वारा किया जाता है।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • इसका मूल डाकुओं और व्यापारियों के बीच होने वाली नकली लड़ाइयों को दर्शाता है
    • जहां नर्तक घुड़सवार योद्धाओं की तरह नकली घोड़ों पर सवार होकर तलवारबाजी का प्रदर्शन करते हैं।​​
    • यह नृत्य पुरानी परंपरा का प्रतीक है, जो राजस्थान की वीरता, युद्ध कौशल और रेगिस्तानी जीवनशैली को जीवंत करता है।​
  • प्रदर्शन शैली
    • नृत्य केवल पुरुष कलाकारों द्वारा किया जाता है, जो लकड़ी, बांस या कपड़े से बने हल्के नकली घोड़े (टेक) को कमर पर बांधते हैं।
    • वे रंग-बिरंगी पोशाक पहनते हैं—लाल पगड़ी, धोती-कुर्ता, आईने और शीशे से सजी हुई वेशभूषा, पैरों में घुंघरू, हाथों में नकली तलवारें।
    • ढोल, नगाड़ा, बांसुरी और शहनाई की तेज लय पर नर्तक घोड़े की सवारी का अभिनय करते हुए कूदते-फांदते हैं, नकली हमले-प्रहार दिखाते हैं।​​
  • अवसर और महत्व
    • यह विवाह समारोहों में दूल्हे की बारात का हिस्सा होता है, जहां बारातियों का मनोरंजन करता है।
    • खुशी के अन्य अवसरों जैसे उत्सवों, मेलों या व्यावसायिक शो में भी प्रस्तुत किया जाता है।
    • गायक लोकगीत गाता है, जो शेखावाटी के डाकुओं के कारनामों या व्यापारिक कारवां पर हमलों की कहानियां सुनाता है।​
  • अन्य विशेषताएं
    • नृत्य महाराष्ट्र, गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में भी लोकप्रिय हो गया है।
    • यह राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है, जो UNESCO स्तर पर भी पहचाना जाता है।​
    • आजकल स्टेज शो और पर्यटन के लिए आधुनिक रूप में किया जाता है, लेकिन मूल स्वरूप वीर रस से भरपूर रहता है।​

7. कलामंडलम गोपी को किस प्रकार के नृत्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) कथकली
Solution:
  • वडक्के मनालथ गोविंदन नायर, जिन्हें कलामंडलम गोपी के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय नर्तक हैं
  • जो कथकली शास्त्रीय नृत्य-नाटक शैली से संबंधित हैं। भारत सरकार ने इन्हें वर्ष 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया।
  • पद्मश्री और कथकली
    • कलामंडलम गोपी का असली नाम वडक्के मनालथ गोविंदन नायर है, वे केरल के प्रसिद्ध कथकली नर्तक हैं।​
    • कथकली केरल की एक शास्त्रीय नृत्य-नाट्य शैली है, जिसमें नृत्य, अभिनय, संगीत और समृद्ध मुखाभिनय के माध्यम से पौराणिक कथाएँ प्रस्तुत की जाती हैं।
    • कथकली को भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की मान्यता प्राप्त प्रमुख शैलियों में गिना जाता है और यह मुख्यतः केरल राज्य से सम्बंधित है।
  • कलामंडलम गोपी की विशेष पहचान
    • गोपी जी को कथकली के ‘पच्चा’ (सात्विक/वीर-नायक) चरित्रों जैसे नल, कर्ण, अर्जुन, भीम, धर्मपुत्र (युधिष्ठिर) आदि के भावपूर्ण और रोमांटिक अभिनय के लिए विशेष रूप से सराहा जाता है।
    • उन्होंने कथकली की परंपरागत शैली में रहते हुए उसमें मानवीय संवेदना और सूक्ष्म भावों को और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने का काम किया
    • जिससे वे आधुनिक समय में कथकली का चेहरा माने जाते हैं।
  • पद्मश्री सम्मान का महत्व
    • भारत सरकार ने वर्ष 2009 में कलामंडलम गोपी को पद्मश्री से सम्मानित किया
    • यह सम्मान विशेष रूप से कथकली नृत्य-नाट्य के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान और दीर्घकालीन साधना के लिए दिया गया।
    • पद्मश्री भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक है, जो कला, साहित्य, विज्ञान, सामाजिक कार्य आदि क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है
    • गोपी जी के मामले में यह सम्मान शास्त्रीय नृत्य-नाट्य कथकली के लिए था।
  • भारतीय शास्त्रीय नृत्य में उनका स्थान
    • कलामंडलम गोपी को राष्ट्रीय स्तर पर कथकली का आइकॉन माना जाता है
    • वे अक्सर इस कला के “चेहरे” के रूप में वर्णित किए जाते हैं, विशेषकर उनके मंचीय व्यक्तित्व और सशक्त अभिव्यक्ति के कारण।
    • उनकी प्रस्तुतियाँ न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कथकली की पहचान और लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण रही हैं
    • इसी सतत योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया गया।

8. उत्तर-पूर्वी भारत का मणिपुरी नृत्य भगवान ....... की अनुष्ठानिक पूजा से विकसित हुआ है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कृष्ण
Solution:
  • उत्तर-पूर्वी भारत का मणिपुरी नृत्य, जिसे मणिपुरी रासलीला भी कहा जाता है, मणिपुर राज्य से उत्पन्न होने वाले प्रमुख भारतीय शास्त्रीय नृत्य रूपों में से एक है।
  • राजा भाग्यचंद्र के शासनकाल में मणिपुर के प्रसिद्ध रासलीला नृत्य की उत्पत्ति हुई, जिसमें हिंदू देवता 'कृष्ण' की पूजा को सर्वोच्च आध्यात्मिक अभिव्यक्ति माना जाता है।
  • यह नृत्य शैली वैष्णव धर्म के हिंदू धर्मग्रंथों पर आधारित है और विशेष रूप से राधा और कृष्ण की पूजा से जुड़ी है।
  • उत्पत्ति और विकास
    • मणिपुरी नृत्य, जिसे जगोई या रासलीला के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन काल से मणिपुर की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में निहित है।
    • यह भगवान कृष्ण की लीला, विशेषकर राधा-कृष्ण की प्रेम कथाओं और रासलीला के माध्यम से विकसित हुआ
    • जो वैष्णव संप्रदाय की भक्ति पूजा का अभिन्न अंग है। 18वीं शताब्दी में राजा भाग्यचंद्र ने इसे संगठित रूप प्रदान किया
    • जब उन्होंने स्वप्न में कृष्ण की प्रेरणा से रासलीला को नृत्य रूप दिया।
    • लोक मान्यताओं में इसे कृष्ण और राधा द्वारा ही प्रारंभ किया गया माना जाता है, जबकि कुछ कथाएं शिव-पार्वती से भी जोड़ती हैं।
  • विशेषताएं
    • यह नृत्य अपनी कोमल, तरल और प्रवाहमय गतियों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें ऊर्ध्व भाग (मुख, नेत्र, हस्त) स्थिर रहते हैं
    • जबकि अधो भाग (पाद) लयबद्ध होते हैं। प्रदर्शन में एकल, दंपती या समूह नृत्य शामिल होते हैं
    • जो प्रकृति, भक्ति और आध्यात्मिकता को दर्शाते हैं।
    • वेशभूषा में महिलाएं कुमिल (कठोर घाघरा जैसी स्कर्ट), फानेक और हल्के आभूषण पहनती हैं, जबकि पुरुष धोती-कुर्ता में नजर आते हैं।
  • प्रकार और प्रदर्शन
    • रासलीला: कृष्ण-राधा की प्रेम लीला पर आधारित मुख्य रूप, पूर्णिमा रात्रि में प्रस्तुत।
    • संकृताय: शास्त्रीय शैली, पौराणिक कथाओं पर।
    • नाट्य: नाटकीय अभिनय वाली।
    • तल्ली: लोक-जनजातीय प्रभाव वाली।​
    • थंग-ता जैसे मार्शल आर्ट तत्व भी कृष्ण की वीर कथाओं के लिए एकीकृत होते हैं।​
  • संगीत और वाद्य
    • संगीत में पेंगा (ढोल), मृदंग, बांसुरी, मंजीरा और कर्ताल प्रमुख हैं
    • जो भक्ति रसपूर्ण धुनें उत्पन्न करते हैं।
    • गायन में मणिपुरी भाषा के भजन कृष्ण भक्ति पर केंद्रित होते हैं।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • मणिपुर की भौगोलिक अलगाव के कारण यह बाहरी प्रभाव से मुक्त रहा, लेकिन वैष्णव आंदोलन ने इसे कृष्ण-केंद्रित बनाया।
    • यह भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में शामिल है और गुरु सिंहजित सिंह, डॉ. ए. शारदा देवी जैसे कलाकारों ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई।
    • त्योहारों जैसे लाई हराओबा में अनुष्ठानिक रूप से प्रस्तुत होता है, जो सृष्टि रचना और देव पूजा से जुड़ा है।​

9. शिगमो उत्सव के दौरान गोवा का कौन-सा पारंपरिक नृत्य किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) मोरुलेम
Solution:
  • मोरुलेम गोवा में पिछड़े समुदाय द्वारा शिगमो त्योहार के दौरान किया जाने वाला एक पारंपरिक लोक नृत्य है।
  • इसका नाम मोर से लिया गया है, जिसे कोंकणी में 'मोर' भी कहा जाता है।
  • मोरुलेम नृत्य दर्शकों की बड़ी भीड़ को आकर्षित करता है, क्योंकि यह एक नृत्य शैली है, जिसमें मोर के बारे में लोकगीत गाए जाते हैं।
  • शिगमो उत्सव का परिचय
    • शिगमो या शिशिरोत्सव गोवा में मार्च महीने में हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाया जाने वाला रंगीन त्योहार है
    • जो वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है।
    • यह कोंकणी समुदाय द्वारा होली के साथ जोड़कर साजरा होता है
    • ग्रामीण क्षेत्रों में 15 दिनों तक चलता है।
    • धाकतो शिगमो (छोटा) किसान और ग्रामीणों द्वारा तथा व्हाडलो शिगमो (बड़ा) सामूहिक रूप से आयोजित किया जाता है।
  • मोरुलेम नृत्य का महत्व
    • शिगमो के दौरान गोवा का प्रमुख पारंपरिक नृत्य मोरुलेम है, जो उत्सव का अभिन्न अंग माना जाता है।
    • यह नृत्य विशेष रूप से ग्रामीण भागों में प्रस्तुत होता है और त्योहार की मुख्य विशेषता है।
    • दिल्ली पुलिस कांस्टेबल परीक्षा जैसे स्रोतों में इसे स्पष्ट रूप से शिगमो से जोड़ा गया है।
  • अन्य प्रमुख नृत्य
    • शिगमो में मोरुलेम के अलावा कई लोक नृत्य सजाए जाते हैं:
    • घोडेमोडनी: घोड़ों पर सवार नर्तकों द्वारा किया जाने वाला जोशीला नृत्य।
    • फुगड़ी: महिलाओं द्वारा तालियों के साथ गोल घेरे में गाए-बजाए जाने वाले लोकगीतों पर आधारित।
    • कांजा: रस्सियों के साथ युवक-युवतियों द्वारा बेलों की तरह गूंथते-सुलझते नृत्य।
    • समाई, दशावतार, रणमाले: ढोल-ताशे की धुन पर पौराणिक कथाओं को दर्शाते नृत्य।​
  • उत्सव की विशेषताएं
    • उत्सव में रंग-बिरंगी झांकियां, जुलूस, लोक संगीत (घुमट, झांझ, शहनाई) और पारंपरिक वेशभूषा प्रमुख हैं।
    • 2025 में यह 15 मार्च से 29 मार्च तक चला, जिसमें गोवा की सांस्कृतिक विरासत झलकती है।
    • नर्तक फूलों की मालाएं पहनते हैं और पौराणिक कथाओं को जीवंत करते हैं।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य भिक्षुओं और लामाओं द्वारा मठों में बुरी आत्माओं को दूर करने के लिए किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) छम
Solution:
  • छम मुख्यतः हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और सिक्किम का एक लोक नृत्य है
  • जो बौद्ध भिक्षुओं (लामाओं) द्वारा धार्मिक और अन्य त्योहारों के दौरान मठों में किया जाता है।
  • यह बुरी आत्माओं और राक्षसों को भगाने के लिए किया जाता है।
  • यह नृत्य मुख्य रूप से तिब्बती बौद्ध धर्म से जुड़ा हुआ है, जो ग्रेट हिमालय पर्वत श्रृंखला में संबद्ध है।
  • उत्पत्ति और महत्व
    • छम नृत्य तिब्बती बौद्ध धर्म की वज्रयान परंपरा से जुड़ा है, जहां इसे 'चाम' या 'छाम' कहा जाता है।
    • यह धार्मिक उत्सवों जैसे गुस्तोर महोत्सव के दौरान मठों के आंगन में आयोजित होता है
    • जिसका मुख्य उद्देश्य बुरी शक्तियों, राक्षसों और विघ्न-बाधाओं को नष्ट करना है।
    • नृत्य के माध्यम से लामा देवी-देवताओं, दानवों और जानवरों के विशाल मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं
    • जो दर्शकों को आध्यात्मिक शुद्धि प्रदान करता है और पापों से मुक्ति दिलाता है।
  • प्रदर्शन की प्रक्रिया
    • लामा विशेष प्रशिक्षण लेकर पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोल, बांसुरी, शंख और डमरू के साथ नृत्य करते हैं।
    • मुखौटे मिट्टी या लकड़ी से बने हल्के होते हैं, जो रंग-बिरंगे होते हैं। पहले ब्लैक हैट डांस होता है
    • जिसमें काली टोपी पहनकर बाधाएं दूर की जाती हैं, फिर मुख्य छम नृत्य तांत्रिक अनुष्ठानों के साथ होता है।
    • यह सामान्यतः 3 दिनों तक चलता है, जैसे बोधगया के भूटान मठ में भूटानी कैलेंडर के अनुसार।
  • सांस्कृतिक प्रभाव
    • यह नृत्य न केवल बुरी आत्माओं से रक्षा करता है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और आंतरिक बुराइयों से भी बचाव का प्रतीक है।
    • दर्शक इसे देखकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, और यह बौद्ध संस्कृति की जीवंत परंपरा को दर्शाता है।
    • आधुनिक समय में भी, जैसे 2026 में गयाजी में आयोजित कार्यक्रमों में भूटान के लामा इसमें भाग लेते हैं।​