विविध (परंपरागत सामान्य ज्ञान) भाग-II

Total Questions: 30

1. भारत के किस संघ राज्य क्षेत्र के नाम पर एक समुद्र का नाम है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह
Solution:
  • अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के नाम पर एक समुद्र है। इसका नाम अंडमान सागर है।
  • बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीपों की लंबी श्रृंखला जो उत्तर से दक्षिण तक फैली हुई है
  • अडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह कही जाती है। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में कुल द्वीप/आइसलेट्स / रॉकी आउटक्रॉप्स की संख्या 836 है।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का विवरण
    • यह भारत का एक प्रमुख संघ राज्य क्षेत्र है, जिसमें 265 से अधिक बड़े-छोटे द्वीप शामिल हैं
    • 203 अंडमान द्वीप और 62 निकोबार द्वीप। कुल क्षेत्रफल लगभग 8,249 वर्ग किलोमीटर है
    • जो 6°45' उत्तरी अक्षांश से 13°45' उत्तरी अक्षांश और 92°10' पूर्वी देशांतर से 94°15' पूर्वी देशांतर तक फैला हुआ है।
    • मुख्य द्वीपसमूह ग्रेट अंडमान (उत्तर, मध्य, दक्षिण अंडमान) और निकोबार हैं
    • जो टेन डिग्री चैनल से अलग हैं। सबसे उत्तरी द्वीप कार निकोबार और सबसे दक्षिणी ग्रेट निकोबार है।​
  • प्रमुख जलमार्ग और चैनल
    • टेन डिग्री चैनल: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह को अलग करता है।
    • ग्रेट चैनल: ग्रेट निकोबार और सुमात्रा के बीच।
    • कोको जलडमरू: उत्तरी अंडमान और म्यांमार के कोको द्वीप के बीच।
    • ये चैनल नौवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग बनाते हैं।
    • द्वीप मुख्यतः बलुआ पत्थर, चूना पत्थर से बने हैं, जबकि बैरन और नारकोडम ज्वालामुखीय हैं।​
  • ऐतिहासिक और सामरिक महत्व
    • अंडमान सागर ब्रिटिश काल से ही सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है, जहां पोर्ट ब्लेयर मुख्यालय है।
    • द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी सेना ने कब्जा किया था। आज यह भारत की 'आंख और कान' है
    • जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में निगरानी रखता है।
    • यह सागर बंगाल की खाड़ी से थाईलैंड की खाड़ी को जोड़ता है, जिससे व्यापार और सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं।​
  • अन्य संघ राज्य क्षेत्रों से तुलना
    • भारत के अन्य संघ राज्य क्षेत्र जैसे लक्षद्वीप (अरब सागर), दादरा और नगर हवेली व दमन और दीव (अरब सागर तट), चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, पुडुचेरी के नाम पर कोई समुद्र नामित नहीं है।
    • पुडुचेरी में चार जिले (पुडुचेरी, कराईकल, माहे, यनम) हैं
    • लेकिन कोई सागर इससे जुड़ा नहीं। केवल अंडमान और निकोबार ही ऐसा अनोखा उदाहरण है।​
  • जैव विविधता और पर्यावरण
    • अंडमान सागर प्रवाल भित्तियों, मैंग्रोव और समुद्री जीवों से समृद्ध है।
    • यहां व्हेल शार्क, डॉल्फिन और दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। पर्यटन के लिए हavelock, Neil द्वीप प्रसिद्ध हैं
    • लेकिन जलवायु परिवर्तन से खतरा है। भारत सरकार ने यहां संरक्षित क्षेत्र बनाए हैं।​

2. निम्नलिखित में से कौन-सी मणिपुर राज्य की एक भारतीय युद्ध-कला है? [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) थांग-टा
Solution:
  • थांग-टा मणिपुर राज्य की एक भारतीय युद्ध कला है। थांग-टा का अर्थ होता है
  • तलवार और भाला चलाने की कला। इस कला को 'हुयेन लालॉन्ग' यानि सुरक्षित रक्षा की विधि के रूप में जाना जाता हैं।
  • थांग-ता का अर्थ और उत्पत्ति
    • थांग-ता में "थांग" का अर्थ तलवार और "ता" का अर्थ भाला होता है।
    • यह कला मुख्य रूप से मैतेई समुदाय से जुड़ी हुई है
    • प्राचीन काल से मणिपुर के योद्धाओं द्वारा राज्य रक्षा के लिए उपयोग की जाती रही है।
    • औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश शासन द्वारा इसे प्रतिबंधित करने के बाद भी यह गुप्त रूप से गुरुकुल परंपरा में जीवित रही।
  • तकनीकें और हथियार
    • यह युद्ध-कला शस्त्रपूर्ण (सशस्त्र) और निहत्थे दोनों रूपों में अभ्यास की जाती है।
    • मुख्य हथियारों में तलवार, भाला, ढाल, कुल्हाड़ी शामिल हैं, जबकि निहत्थे रूप में मुक्केबाजी, लातें और जोड़ तोड़ने की तकनीकें प्रमुख हैं।
    • प्रदर्शन के दौरान इसे नृत्य के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है, जो शारीरिक चपलता, मानसिक दृढ़ता और अनुशासन का प्रतीक है।
  • अन्य संबंधित कलाएँ
    • मणिपुर की एक और प्राचीन कला हुईयेन ललॉन्ग (या ह्यूएन लैंगलॉन) है, जिसे थांग-ता का व्यापक रूप माना जाता है।
    • हुईयेन" का अर्थ युद्ध और "ललॉन्ग" का अर्थ कला या जाल है। यह सरित सरक (निहत्थे) और थांग-ता (शस्त्रपूर्ण) को मिलाकर बनी है।
    • इसके अलावा चेइबी गाद-गा नामक शैली भी मणिपुर से जुड़ी है, जिसमें द्वंद्व युद्ध पर जोर दिया जाता है।​​
  • आधुनिक महत्व
    • आज थांग-ता को खेलो इंडिया और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। बिहार जैसे राज्यों में भी इसके खिलाड़ी उभर रहे हैं।
    • यह आत्मरक्षा, शारीरिक फिटनेस और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए प्रासंगिक बनी हुई है
    • यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल करने की मांग चल रही है।​​

3. भारत-चीन सीमा को कितने सेक्टरों में बांटा गया है? [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 3
Solution:
  • भारत-चीन सीमा को 3 सेक्टरों में बांटा गया है, पश्चिमी क्षेत्र, मध्य क्षेत्र एवं पूर्वी क्षेत्र।
  • पश्चिमी क्षेत्र लद्दाख में स्थित है, मध्य क्षेत्र उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश में स्थित है जबकि पूर्वी क्षेत्र सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक फैला है।
  • पश्चिमी सेक्टर
    • यह सबसे लंबा और विवादास्पद सेक्टर है, जो करीब 1,597 किलोमीटर में फैला हुआ है।
    • लद्दाख (पहले जम्मू-कश्मीर का हिस्सा) और चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र तथा तिब्बत के बीच स्थित।
    • अक्साई चिन यहां का प्रमुख विवादित क्षेत्र है, जहां चीन ने 1950-60 के दशक में सड़क बनाकर कब्जा जमा लिया।
    • गलवान घाटी, डेपसांग, हॉट स्प्रिंग्स और पांगोंग त्सो झील जैसे बिंदु तनाव के केंद्र रहे हैं
    • खासकर 2020 की झड़प के बाद। भारतीय सेना यहां 65 गश्ती बिंदुओं (PP) पर निगरानी रखती है।
  • मध्य सेक्टर
    • यह सेक्टर लगभग 350-400 किलोमीटर लंबा है और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ हिस्सों से लगा हुआ है।
    • तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के साथ सटी यह सीमा अपेक्षाकृत कम विवादित है
    • लेकिन बारामचा ला, नौटी ला और शिपकी ला जैसे दर्रे महत्वपूर्ण हैं।
    • यहां ऊंचाई अधिक होने से सैन्य तैनाती चुनौतीपूर्ण है, फिर भी गंभीर झड़पें कम हुई हैं।
  • पूर्वी सेक्टर
    • सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश को कवर करते हुए यह सेक्टर करीब 1,400 किलोमीटर का है।
    • मैकमोहन रेखा (1914 की ब्रिटिश-तिब्बती संधि) यहां LAC का आधार है, लेकिन चीन इसे अस्वीकार करता है
    • पूरे क्षेत्र को 'दक्षिण तिब्बत' मानता है।
    • तवांग, डोकलाम (भूटान सीमा के पास) और चिकन नेक (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) जैसे क्षेत्र संवेदनशील हैं। 2022 की तवांग झड़प इसी सेक्टर की मिसाल है।​​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • सीमा विभाजन की जड़ें 19वीं सदी में हैं, जब ब्रिटिश भारत ने जॉनसन लाइन (1865) और मैकमोहन लाइन निर्धारित कीं।
    • चीन ने इन्हें कभी मान्यता नहीं दी। 1962 युद्ध ने LAC को वास्तविकता प्रदान की, जो 1993/96 की संधियों से स्थापित हुई।
    • दोनों देशों की LAC धारणा अलग है—भारत इसे 65 किमी संकरी मानता है
    • चीन व्यापक। हाल के समझौतों (2024 तक) से गलवान जैसे क्षेत्रों में डिसइंगेजमेंट हुआ, लेकिन पूर्ण समाधान बाकी है।
  • सामरिक महत्व
    • पश्चिमी: अक्साई चिन से चीन को तिब्बत-शिनजियांग कनेक्टिविटी मिलती है; भारत के लिए लद्दाख की सुरक्षा।
    • मध्य: हिमालयी दर्रे से सैन्य आवागमन।
    • पूर्वी: चिकन नेक भारत के पूर्वोत्तर को जोड़ता है; चीन की CPEC महत्वाकांक्षा प्रभावित।

4. भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018, जिसे 21 अप्रैल, 2018 को लागू किया गया था, को किस क्षेत्र सीमा तक विस्तारित किया गया है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) संपूर्ण भारत
Solution:
  • भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018, जिसे 21 अप्रैल, 2018 को लागू किया गया था, को संपूर्ण भारत में विस्तारित किया गया है।
  • वर्ष 2018 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम कानून को लाने का उद्देश्य, कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए देश छोड़ने वाले आर्थिक अपराधियों को रोकना है।
  • क्षेत्रीय विस्तार
    • अधिनियम पूरे भारत में प्रभावी है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश और राज्य दोनों शामिल हैं।
    • कोई भी सीमित क्षेत्रीय प्रतिबंध नहीं है
    • यह राष्ट्रीय स्तर पर लागू होता है। भारत या विदेश में स्थित संपत्तियों को कुर्क या जब्त किया जा सकता है।
  • प्रमुख प्रावधान
    • भगोड़ा घोषणा: यदि कोई व्यक्ति 100 करोड़ से अधिक के निर्दिष्ट अपराध (जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी, चेक बाउंस) में आरोपी है
    • गिरफ्तारी वारंट लंबित है और वह मुकदमे से बचने को देश छोड़ चुका है, तो विशेष अदालत उसे भगोड़ा घोषित कर सकती है।
    • संपत्ति कार्रवाई: अनंतिम कुर्की (180 दिनों तक), अंतिम जब्ती और निपटान। बेनामी या अपराध आय से खरीदी संपत्ति पर भी लागू।
    • अधिकारी शक्तियां: निदेशक या डिप्टी डिप्टी स्तर के अधिकारी आवेदन दायर करते हैं; सर्वेक्षण, तलाशी, जब्ती जैसी PMLA शक्तियां।
  • कार्यान्वयन प्रक्रिया
    • प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसे अधिकारी विशेष अदालत में आवेदन देते हैं।
    • अदालत नोटिस जारी करती है; व्यक्ति को 45 दिनों में जवाब देना होता है।
    • घोषणा के बाद संपत्ति केंद्र सरकार के हवाले, देनदारियां माफ।
  • प्रभाव और उदाहरण
    • विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी जैसे मामलों में ED ने 8,000+ करोड़ की संपत्ति जब्ती की।
    • अधिनियम ने विदेशी भागने वालों पर लगाम कसी।​

5. निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं- [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

  • झारखंड में सरहुल उत्सव मनाया जाता है।
  • सरहुल उत्सव के अवसर पर साल के वृक्ष के फूल एकत्र कर देवताओं को भेंट किए जाते हैं।
  • साल के वृक्ष के फूल भूमि में उर्वरता का प्रतीक हैं।
  • आपका प्रश्न अधूरा लग रहा है
  • क्योंकि इसमें "निम्नलिखित" कथन स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं किए गए हैं।
  • बिना कथनों के यह बताना संभव नहीं कि कौन-से सही हैं।
  • सामान्य व्याख्या
    • ऐसे प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, UPSC) में आम हैं
    • जहाँ 2-4 कथन दिए जाते हैं और विकल्प होते हैं
    • जैसे "केवल 1 सही", "केवल 2 सही", "दोनों सही" आदि।​
  • उदाहरण विश्लेषण
    • एक सामान्य उदाहरण (जनगणना 2011 से):
    • कथन 1: सेवन सिस्टर राज्यों में मिजोरम की साक्षरता दर सबसे अधिक (सही, 91.33%)।
    • कथन 2: बिहार में साक्षरता दर सबसे कम (सही, 61.80%)।
Correct Answer: (a) सभी A, B और C
Solution:चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया को प्रारंभ होने वाला सरहुल पर्व झारखंड में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। सरहुल पर्व पर पेड़ और प्रकृति के तत्वों की पूजा होती है और इस दिन झारखंड में राजकीय अवकाश रहता है। इस अवसर पर साल के वृक्ष के फूल एकत्र कर देवताओं को भेंट किए जाते हैं। इन फूलों को भूमि में उर्वरता का प्रतीक माना जाता है।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य दही हांडी को एक खेल आयोजन के रूप में मान्यता देता है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) महाराष्ट्र
Solution:
  • महाराष्ट्र राज्य दही हांडी को एक खेल आयोजन के रूप में मान्यता देता है।
  • दही हांडी खेल पारंपरिक रूप से भगवान कृष्ण के जन्मदिन, जन्माष्टमी के उत्सव के समय खेला जाता है
  • जो दही और मक्खन चुराने की उनकी बचपन की शरारत को दर्शाता है।
  • दही हांडी का परिचय
    • दही हांडी एक पारंपरिक भारतीय उत्सव है, जो मुख्य रूप से जन्माष्टमी के अवसर पर मनाया जाता है।
    • इसमें दही से भरी मटकी को ऊंचाई पर लटकाया जाता है और युवा मानव पिरामिड बनाकर उसे तोड़ने का प्रयास करते हैं।
    • यह खेल गोविंदाओं के बीच साहस, सामंजस्य और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन करता है।​
  • महाराष्ट्र में आधिकारिक मान्यता
    • महाराष्ट्र सरकार ने 2022 में दही हांडी को साहसिक खेल (एडवेंचर स्पोर्ट) का दर्जा दिया।
    • मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में घोषणा की कि इसे आधिकारिक खेल आयोजन माना जाएगा।
    • इससे गोविंदाओं को सरकारी नौकरियों में खेल कोटा का लाभ मिलेगा।
  • सरकारी लाभ और सुविधाएं
    • इस मान्यता के बाद गोविंदाओं के लिए ₹10 लाख का जीवन बीमा कवर और चोट पर ₹5 लाख का मुआवजा प्रदान किया जाता है।
    • चोटिल खिलाड़ियों का इलाज सरकार वहन करती है। मुंबई-ठाणे में प्रशिक्षण केंद्र भी बनाए गए हैं ताकि खेल सुरक्षित हो।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 2014 में महाराष्ट्र सरकार ने इसे पहली बार साहसिक खेल घोषित किया था।
    • 2022 की घोषणा ने इसे और मजबूत किया, जिसमें 'प्रो-दही हांडी' जैसे पेशेवर फॉर्मेट शामिल हैं।
    • कोई अन्य राज्य ने इसे आधिकारिक खेल का दर्जा नहीं दिया है।
  • अन्य राज्यों की स्थिति
    • दही हांडी गोवा, गुजरात और कर्नाटक में भी लोकप्रिय है
    • लेकिन केवल महाराष्ट्र ने इसे खेल के रूप में मान्यता दी।
    • अन्य जगहों पर यह धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन ही रहता है।

7. निम्नलिखित में से कौन 1700 ईसा पूर्व में हथियारों के निर्माण के लिए सबसे पहले लोहे का इस्तेमाल करने वाले देशों में से एक था? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) रोमानिया
Solution:
  • रोमानिया एक दक्षिण-पूर्वी देश है, जिसे लगभग 1700 ईसा पूर्व में हथियारों के निर्माण के लिए सबसे पहले लोहे का इस्तेमाल करने वाले देशों में से एक माना जाता है।
  • हित्ती साम्राज्य का परिचय
    • हित्ती एशिया माइनर (आधुनिक तुर्की) में ईसा पूर्व 1800 से 1200 तक शासन करने वाली एक शक्तिशाली सभ्यता थी।
    • वे लौह धातु को गलाने और हथियार बनाने की प्रारंभिक तकनीक विकसित करने के लिए प्रसिद्ध हुए, जो कांस्य युग से लौह युग की ओर संक्रमण का प्रतीक था।
  • लोहे के उपयोग की शुरुआत
    • पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, हित्ती लोगों ने लगभग 1700-1400 ईसा पूर्व में लोहे को गलाने की विधि अपनाई
    • जिससे मजबूत तलवारें, भाले और अन्य हथियार बनाए गए।
    • इससे पहले लोहे का उपयोग ज्यादातर प्राकृतिक गलित अवस्था (meteoritic iron) तक सीमित था
    • लेकिन हित्ती ने नियंत्रित गलन (smelting) शुरू की। यह तकनीक उनके सैन्य वर्चस्व का आधार बनी।
  • वैश्विक संदर्भ में महत्व
    • लंबे समय तक हित्ती को ही लौह युग का जनक माना जाता रहा
    • हालांकि हालिया भारतीय खुदाइयों (जैसे तमिलनाडु से 5300 वर्ष पुराने अवशेष) ने इस पर बहस छेड़ दी है।
    • फिर भी, 1700 ईसा पूर्व के संदर्भ में हित्ती सबसे पहले प्रमाणित उदाहरण है
    • क्योंकि उनके क्षेत्र में लोहे के हथियारों के प्रमाण व्यापक हैं। अन्य क्षेत्रों जैसे मिस्र या मेसोपोटामिया में यह बाद में फैला।
  • भारत में तुलना
    • भारत में लोहे के प्रमाण 1800 ईसा पूर्व (मध्य गंगा घाटी) या इससे पहले बताए जाते हैं
    • लेकिन 1700 ईसा पूर्व के ठीक आसपास हित्ती अधिक स्पष्ट रूप से जुड़े हैं।
    • ऋग्वेद में 'अयस्' का उल्लेख है, पर लौह की पुष्टि उत्तर वैदिक काल (1000 ईसा पूर्व) से मानी जाती है।

8. भारतीय पंचांग के अनुसार, वसंत ऋतु किन महीनों में आती है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली), Phaxe-XI 28 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) चैत्र-वैशाख
Solution:
  • भारतीय पंचांग के अनुसार, वसंत ऋतु का आगमन चैत्र-वैशाख माह में होता है। भारतीय पंचांग के अनुसार, वर्ष का पहला महीना चैत्र है
  • अंतिम महीना फाल्गुन है। वसंत ऋतु फरवरी, मार्च और अप्रैल के मध्य होता है।
  • ऐसा माना जाता है कि माघ महीने की शुक्ल पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन होता है।
  • पंचांग में वसंत ऋतु
    • शक संवत या भारतीय राष्ट्रीय पंचांग में वर्ष के 12 महीने सौर चक्र पर आधारित होते हैं
    • ऋतुएँ इन महीनों के अनुसार वर्गीकृत की जाती हैं।
    • वसंत ऋतु चैत्र (लगभग 22 मार्च से 21 अप्रैल) और वैशाख (21 अप्रैल से 22 मई) में पड़ती है।
    • कुछ स्रोतों में फाल्गुन महीने को भी इसमें जोड़ा जाता है
    • क्योंकि माघ शुक्ल पंचमी से वसंत का आरंभ माना जाता है, लेकिन मुख्य रूप से चैत्र-वैशाख ही वसंत के महीने हैं।
    • यह पंचांग 1957 में पंचांग सुधार समिति द्वारा अपनाया गया था
    • जो शक युग (78 ईस्वी से) पर आधारित है। चैत्र पंचांग का पहला महीना होता है, जो नववर्ष का प्रारंभ दर्शाता है।​
  • ग्रेगोरियन कैलेंडर से तुलना
    • ग्रेगोरियन कैलेंडर में वसंत ऋतु फरवरी के मध्य से अप्रैल के मध्य तक मानी जाती है
    • जो पंचांग के चैत्र-वैशाख से मेल खाती है।
    • फाल्गुन महीना (20 फरवरी से 21 मार्च) कभी-कभी शिशिर से वसंत के संक्रमण काल के रूप में देखा जाता है।
    • हालांकि, सटीक तिथियाँ लीप वर्ष या सूर्य की गति के कारण थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।
  • ऋतु की विशेषताएँ
    • वसंत में मौसम सुहावना रहता है, तापमान 25-32 डिग्री सेल्सियस तक होता है। पेड़ों पर कोमल पल्लव फूटते हैं
    • फूल खिलते हैं जैसे आम के बौर, गुलाब, चमेली। नीलकंठ की कोकिला सुनाई देती है
    • हवा में मधुर सुगंध फैलती है। आयुर्वेद में इसे कफ प्रधान ऋतु कहा जाता है, इसलिए हल्का भोजन और व्यायाम की सलाह दी जाती है।
  • संबंधित त्योहार और सांस्कृतिक महत्व
    • वसंत ऋतु में कई प्रमुख त्योहार आते हैं:
    • वसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी): सरस्वती पूजा, वसंत का आगमन।​
    • होली, राम नवमी, गुड़ी पड़वा, बैसाखी, उगादी आदि।​
    • यह ऋतु कवियों की प्रिय रही है, कालिदास के 'मेघदूत' में इसका सुंदर वर्णन है।
    • हिंदू मान्यताओं में वसंत राजा ऋतु है, जो नवसंवत का प्रतीक है।
  • अन्य पंचांगों में भिन्नता
    • हिंदू पंचांग क्षेत्रीय रूप से भिन्न होते हैं (जैसे विक्रम संवत, तेलुगु पंचांग), लेकिन सामान्यतः वसंत चैत्र-वैशाख ही रहता है।
    • उदाहरणस्वरूप, विकिपीडिया के अनुसार फाल्गुन-चैत्र को भी जोड़ा जाता है।
    • वर्ष छह ऋतुओं में विभक्त है: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर।

9. शिक्षा मंत्रालय की समग्र शिक्षा योजना के तहत स्कूलों और छात्रावासों का नाम बदलकर ....... के नाम पर रखा जाएगा। [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) नेताजी सुभाष चंद्र बोस
Solution:
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि देते हुए, शिक्षा मंत्रालय ने समग्र शिक्षा योजना के तहत वित्त पोषित आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों का नाम 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय' विद्यालय/छात्रावास रखने का निर्णय लिया है।
  • समग्र शिक्षा योजना तीन योजनाओं (सर्वशिक्षा अभियान, शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम, कार्यक्रम राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) को सम्मिलित करने के बाद शुरू की गई।
  • निर्णय का विवरण
    • यह निर्णय फरवरी 2021 में लिया गया था
    • जब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत वित्त पोषित 383 आवासीय स्कूलों और 680 छात्रावासों का नाम बदल दिया जाएगा।
    • इसका उद्देश्य नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति सम्मान व्यक्त करना और इन संस्थानों को गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रेरित करना था।
    • शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने कहा
    • यह नाम परिवर्तन छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ को उत्कृष्टता के उच्च मानकों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
  • समग्र शिक्षा योजना का संदर्भ
    • समग्र शिक्षा योजना स्कूली शिक्षा का एक एकीकृत कार्यक्रम है
    • जो पूर्व-प्राथमिक से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक (कक्षा 1 से 12) गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2018 में शुरू हुई।
    • यह योजना सरदार पटेल, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और पूर्व midday meal जैसी योजनाओं का विलय करके बनी है।
    • कम आबादी वाले, पहाड़ी, आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में जहां सामान्य स्कूल खोलना संभव नहीं
    • वहां आवासीय स्कूल और छात्रावास स्थापित करने के लिए राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
    • इन संस्थानों में रहने वाले बच्चे वे हैं जिन्हें अतिरिक्त आश्रय और देखभाल की जरूरत होती है।
  • नाम परिवर्तन का उद्देश्य
    • दुर्गम क्षेत्रों में इन स्कूलों/छात्रावासों की जागरूकता बढ़ाना।
    • नेताजी के नाम से प्रेरणा लेकर गुणवत्ता शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण (जैसे सेल्फ-डिफेंस), नियमित पाठ्यक्रम के अलावा विशेष कार्यक्रम चलाना।
    • कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के मानकों का पालन सुनिश्चित करना।
    • ये सभी स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।​
  • कार्यान्वयन और प्रभाव
    • 2021 तक मंजूर 383 स्कूलों और 680 छात्रावासों के अलावा, योजना में कुल 11.6 लाख स्कूल, 15.6 करोड़ छात्र और 57 लाख शिक्षक शामिल हैं।
    • समग्र शिक्षा का कार्यकाल 2026 तक बढ़ाया गया है (समग्र शिक्षा 2.0), जिसमें डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे पर जोर है।
    • नाम परिवर्तन से इन संस्थानों को ब्रांडिंग मिली, जिससे नामांकन और गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की गई।
  • वर्तमान स्थिति (2026 तक)
    • फरवरी 2026 तक कोई बड़ा अपडेट नहीं मिला, लेकिन योजना सक्रिय है
    • नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय के नाम से ही संचालित हो रहे हैं।
    • यह कदम स्वतंत्रता सेनानी के योगदान को याद रखने का प्रतीकात्मक तरीका है।

10. भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर इन चीफ होने के नाते गणतंत्र दिवस के अवसर पर मार्च पास्ट के दौरान सशस्त्र बलों के विभिन्न रेजिमेंटों की सलामी कौन लेता है? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) भारत के राष्ट्रपति
Solution:
  • भारत के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस के अवसर पर सशस्त्र बलों की विभिन्न रेजिमेंटों के मार्च पास्ट के दौरान सलामी लेते हैं।
  • भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ हैं, इसलिए गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सलामी लेना उनके लिए एक परंपरा है।
  • राष्ट्रपति की भूमिका
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार, कार्यपालिका की सर्वोच्च शक्ति राष्ट्रपति में निहित है
    • वे सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ हैं।
    • गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर दिल्ली के कर्तव्य पथ (पूर्व राजपथ) पर आयोजित परेड में राष्ट्रपति सलामी मंच से सलामी ग्रहण करते हैं।
    • यह परंपरा 1950 से चली आ रही है, जब पहली परेड में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सलामी ली थी।
    • परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्वारा ध्वजारोहण से होती है
    • उसके बाद परेड कमांडर (आमतौर पर दिल्ली एरिया के जीओसी) परेड का नेतृत्व करते हुए राष्ट्रपति के समक्ष पहुंचते हैं।
    • राष्ट्रपति सलामी लेने के बाद परेड आगे बढ़ती है, जिसमें सेना, नौसेना, वायुसेना और अर्धसैनिक बलों के दस्ते मार्च पास्ट करते हैं।
    • प्रत्येक रेजिमेंट राष्ट्रपति को सलामी देते हुए "भारत माता की जय" या अपने रेजिमेंटल मार्च के साथ गुजरती है।​​
  • परेड का प्रारूप
    • परेड कमांडर: दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जैसे 2025-26 में लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार) परेड का संचालन करते हैं। वे सबसे पहले राष्ट्रपति को सलामी देते हैं।​​
    • दस्तों का क्रम: पहले सेना के इन्फैंट्री रेजिमेंट्स (जैसे राजपूताना राइफल्स, गोरखा रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट), फिर आर्टिलरी, एयर डिफेंस, मैकेनाइज्ड कॉलम (टैंक, मिसाइल जैसे ब्रह्मोस, आकाश),
    • नौसेना के मॉडल, वायुसेना के दस्ते और अंत में ताल दस्ते आते हैं।
    • सलामी प्रक्रिया: प्रत्येक दस्ता सलामी मंच के ठीक सामने रुकता है
    • अधिकारी तलवार या राइफल से सलामी देते हैं, और राष्ट्रपति जवाबी सलामी देते हैं। बैंड रेजिमेंटल ट्यून बजाता है।
    • उदाहरण के लिए, 2025 की 76वीं परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को मुख्य अतिथि बनाकर सलामी ली
    • जिसमें पैरा रेजिमेंट, महा रेजिमेंट आदि शामिल थे। इसी तरह 2026 की 77वीं परेड में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई।
  • विशेष परंपराएं और अपवाद
    • यदि राष्ट्रपति अस्वस्थ हों या अनुपस्थित रहें, तो उपराष्ट्रपति या वरिष्ठतम अधिकारी सलामी ले सकते हैं
    • लेकिन यह दुर्लभ है। मुख्य अतिथि (विदेशी नेता) राष्ट्रपति के साथ सलामी मंच पर बैठते हैं
    • लेकिन सलामी राष्ट्रपति ही लेते हैं। परेड के बाद राष्ट्रपति पुरस्कार वितरित करते हैं, जैसे शौर्य चक्र।
    • यह समारोह न केवल सैन्य शक्ति प्रदर्शित करता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी है
    • जिसमें विभिन्न रेजिमेंट्स (जैसे जाट, मराठा, डोगरा, कुमाऊं) अपनी सांस्कृतिक विविधता दिखाती हैं।
    • कुल मिलाकर, सलामी राष्ट्रपति के पद की गरिमा और सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान को दर्शाती है।