(A) अब्दुल हमीद लाहौरी लिखता है कि साम्राज्य का यह नियम था कि जिन मनसबदारों के पास हिंदुस्तान के किसी भी प्रांत में यदि जागीरें थीं, चाहे वे साम्राज्य में कही भी नियुक्त हो, उन्हें अपने सवार ओहदे के एक तिहाई के बराबर घुड़सवारों को पहचान (मस्टर) के लिए लाना होता था।
(B) यदि वे बल्ख और बदख्शां में नियुक्त होते थे, तो उन्हें सवार ओहदे के पाचवें हिस्से के बराबर लाना होता था।
(C) बल्ख और बदख्शां से संबंधित यह नियम बाद में पूरे काबुल प्रांत के नियुक्त सभी (मनसबदारों) पर लगाया जाने लगा।
(D) औरंगजेब काल के उत्तरार्ध में लिखे गए खुलासन-उस सियाक ने इस नियमों की पुष्टि की है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः
Correct Answer: (d) केवल (B), (C) और (D)
Solution:मनसबदारी व्यवस्था मुगल सैनिक व्यवस्था का मूलाधार थी। यह मंगोलो की "दशमलव पद्धति” पर आधारित थी। अकबर के राज्य में पहली बार मनसब प्रदान किया गया तथा इसमें 'जात' एवं 'सवार' नामक द्वैध मनसब प्रथा का प्रारम्भ किया। इन्हें 'नकद' और 'जागीर' के रूप में वेतन मिलता था, किन्तु जागीर से उसे केवल राजस्व प्राप्ति का ही अधिकार होता था। मनसबदार यदि बल्ख और बदख्शा में नियुक्त होते, तो उन्हें सवार ओहदें के पाँचवे हिस्से के बराबर लाना होता था। यहाँ से संबंधित नियम आगे चलकर पूरे काबुल प्रांत में नियुक्त सभी मनसबदारों पर लगाया गया। औरंगजेब के राज्य में मनसबदारों की संख्या में इतनी वृद्धि हुई कि उन्हें देने के लिए जागीर नहीं बची और इस स्थिति को 'बेजागिरी' कहा गया।