Solution:निशिथ सूत्र, तत्वार्थाधिगम सूत्र और अभिधान चिन्तामणि जैन ग्रंथ से सम्बन्धित है। जैन भिक्षुकों के लिए विधि नियमों का संकल्प (6 छेद सूत्र) निशिथ सूत्र, महानिशिथ, व्यवहार, आचार दशा, कल्प, पंचकल्प हैं।
उमास्वाती (पहली सदी) श्वेताम्बर और दिगम्बर दोनों सम्प्रदायों के श्रद्धेय थे तथा इनका ग्रंथ तत्वार्थाधिगम सूत्र एवं उनकी टीका जैन धर्मावलम्बियों में बहुत अधिक लोकप्रिय हुई। अभिधान-चिन्तामणि ग्रंथ के लेखक हेमचन्द्र हैं। यमक बौद्ध धर्म के अभिधम्मपिटक की छठीं पुस्तक है।
यमक को दस अध्यायों में विभाजित किया गया है जो निम्न है- मूल, खंड, आयतन, धातु, सक्का, संखरा, अनुसाय, चित्त, धम्म और इंद्रिय । दस डिवीजनों में से प्रत्येक के उपचार की विधि तीन गुना होती है। बुद्धघोष द्वारा यमक पर एक भाष्य है जो पंचप्पाकरनत्यकथा में शामिल हैं।