Correct Answer: (d) वैष्णव
Solution:अलवार संत दक्षिण भारत में 6वीं से 9वीं शताब्दी ईस्वी के बीच के वैष्णव कवि-संत थे।- वे भगवान विष्णु और उनके विभिन्न अवतारों, विशेषकर कृष्ण और राम के प्रति समर्पित थे। उनकी कविता और भजनों ने दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उनके भक्ति गीतों को सामूहिक रूप से दिव्य प्रबंधन में संकलित किया गया है, जो वैष्णव भक्ति परंपरा का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
- उनकी शिक्षाओं में स्वयं को ईश्वर के प्रति समर्पित करने के महत्व पर जोर दिया गया और उन्होंने जाति-आधारित भेदभाव के विचार को खारिज कर दिया।
- आलवारों के दो प्रकार के नाम मिलते हैं-एक तमिल, दूसरे संस्कृत नाम। इनकी स्तुतियों का संग्रह नालायिरप्रबंधम् (4,000 पद्य) के नाम से विख्यात है
- जो भक्ति, ज्ञान, प्रेम सौंदर्य तथा आनंद से ओतप्रोत आध्यात्मिकता की दृष्टि से यह संग्रह '"तमिलवेद"' की संज्ञा से अभिहित किया जाता है।
- अलवारों की संख्या 12 मानी जाती है।
- आलवारों के दोनों प्रकार के नाम हैं-(1) सरोयोगी (पोयगैआलवार), (2) भूतयोगी (भूतत्तालवार), (3) महत्योगी (पेय आलवार), (4) भक्तसागर (तिरुमडिसै आलवार), (5) शठकोप या परांकुश मुनि (नम्म आलवार), (6) मधुर कवि, (7) कुलशेखर, (8) विष्णुचित्त (परि आलवार), (9) गोदा या रंगनायकी (आंडाल), (10) विप्रनारायण या भक्तपदरेणु (तोंडर डिप्पोलि), (11) योगवाह या मुनिवाहन (तिरुप्पन), (12) परकाल या नीलन् (तिरुमंगैयालवार)।
Other Information
- शक्तिवादः-
- यह हिंदू धर्म का एक संप्रदाय है जो परमात्मा के स्त्री पहलू की पूजा करता है।
- शैववादः-
- यह एक संप्रदाय है जो भगवान शिव की पूजा करता है।
- जैन धर्म:-
- यह एक अलग धर्म है जिसकी उत्पत्ति भारत में हुई और यह अहिंसा और आध्यात्मिक शुद्धता के महत्व पर जोर देता है।