Solution:हर समाज या शासन में एक वास्तविक यथार्थ होता है – यानी ज़मीनी सच्चाई, आम लोगों की ज़िंदगी, उनकी समस्याएँ, वास्तविक हालात आदि।इसके साथ ही एक अलग नौकरशाही यथार्थ भी होता है – यानी फाइलों में दिखने वाली दुनिया, कागज़ों पर बने नियम, रिपोर्टें, आंकड़े, प्रक्रियाएँ, जो अक्सर ज़मीनी सच्चाई से कटी हुई होती हैं।
कथन कहता है कि समय कितना भी बदल जाए, यह नौकरशाही वाला यथार्थ अपना प्रभाव और अधिकार बनाए रखता है, यानी सिस्टम, नियम और दफ्तरों की शक्ति बनी रहती है, भले ही आम आदमी की वास्तविक स्थिति में बहुत बदलाव न आए।
आसान शब्दों में: ज़मीन पर जो हो रहा है, वह एक सच्चाई है; और दफ्तर व फाइलों में जो दिखाई देता है, वह दूसरी सच्चाई है – और अक्सर असली ताकत उसी दूसरी (नौकरशाही) सच्चाई के हाथ में रहती है।
मैक्स वेबर प्रशासन और नौकरशाही के सिद्धांतों पर गहराई से लिखने वाले प्रमुख समाजशास्त्री थे, इसलिए यह टिप्पणी उनके नाम से जोड़ी जाती है।