Solution:बौद्ध दर्शन के अनुसार 'सम्यक व्यायाम' का आशय विचार शुद्धि से है। बौद्ध परंपरा में जिन अष्टांगिक मार्गों का विवेचन किया गया है, उनमें सम्यक् व्यायाम का अर्थ है- विचारपूर्वक किया गया पुरुषार्थ। हम कौन हैं, कहां से आए हैं, कहा जाना है और हमारे जन्म लेने का क्या अभिप्राय है। इन जिज्ञासाओं के समाधान में आचार्यों ने कहा है कि व्यक्ति का अपने जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे पुरुषार्थों की प्राप्ति करना ही इसका लक्ष्य है।
और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किया जाने वाला कर्म ही 'सम्यक् व्यायाम' है। इसके व्याख्यान में उनका यह अभिमत प्रकट होता है कि इसे अपने जीवन में अकरणीय, अकुशलकर्म, प्रारंभ ही नहीं करने चाहिए। जैसे कि वह असत्य न बोले चोरी न करे, जुआ न खेले, व्यभिचार से दूर रहे, हिंसा न करे, और परद्रव्यहरण तथा परनिंदा जैसे अकर्मों से बचे।