Solution:सांख्य शास्त्र का प्रमुख उद्देश्य दुःख निवारणम् है। सांख्य शास्त्र का प्रवर्तक महर्षि कपिल को माना जाता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार महर्षि कपिल, विष्णु जी के पंचम अवतार माने गए हैं। कर्दम व देवहूति से इनकी उत्पत्ति मानी गयी है। बाद में इन्होंने अपनी माता देवहूति को सांख्यज्ञान का उपदेश दिया था जिसका विशद वर्णन श्रीमद्भागवत के तीसरे स्कन्ध में मिलता है।
सांख्य दर्शन के 25 तत्व हैं -
* आत्मा (पुरुष)
* अन्तःकरण (4) - मन, बुद्धि, चिन्त, अहंकार
* ज्ञानेन्द्रियाँ (5) - नासिका, जिह्वा, नेत्र, त्वचा, कर्ण
* कर्मेन्द्रियाँ (5) - पाद, हस्त, उपस्थ, पायु, वाक्
* तन्मात्रायें (5) - गंध, रस, रूप, स्पर्श, शब्द
* महाभूत (5) - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश