Correct Answer: (c) असूया भाव की
Solution:प्रश्नोक्त पंक्ति में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने असूया भाव की अभिव्यक्ति मानी है। निर्गुण भक्तिभाव सगुण भक्तिभाव से विपरीत धारा है। निर्गुण भक्तिभाव में ईश्वर की सत्ता को स्वीकार नहीं करते हैं।
निर्गुण शाखा प्रमुख कवि कबीर, रैदास, जंभनाथ, लालदास, दादू दयाल आदि है।
सगुण शाखा के प्रमुख कवि- सूरदास, तुलसीदास, मीरा, नन्ददास, कृष्णदास, परमानन्ददास, कुम्भनदास आदि हैं।
असूया भाव - इसमें दूसरे के गुण में दोष निकालने की प्रवृत्ति होती है।
दैहिक श्रृंगार - बाहरी साज सज्जा का स्वरूप जो मुख्य रूप से स्त्रियों में देखने को मिलता है। निर्गुण काव्य की विशेषताएं-
(i) निर्गुणोपासना
(ii) रहस्यवाद का उत्कृष्ट वर्णन
(iii) बहुदेववाद का विरोध
(iv) सामाजिक अन्याय और आडम्बर का विरोध
(v) लोक-कल्याण की भावना और जाति का विरोध
(vi) नारी के कामिनी रूप की निन्दा
(vii) सधुक्कड़ी भाषा का प्रयोग।