NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 दृश्य कला (VISUAL ART)

Total Questions: 100

1. जल एवं ग्रीस की पा रस्परिक प्रतिकूलता को यह कहा जा सकता है:

Correct Answer: (c) लिथोग्राफी
Solution:

लियोछपाई या पत्थर छपाई को सतह या समतल लिखावट प्रक्रम भी कहते हैं। इसमें मुद्रणीय और अमुद्रणीय क्षेत्र एक ही तल पर होते हैं, परन्तु डिजाइन चिकनी स्याही से बने होने के कारण और बाकी सतह नम रखी जाने के कारण स्याही रोलर स्याही को स्याही ग्राही डिजाइन पर ही निक्षिप्त कर पाता है। अमुद्रणीय क्षेत्र की नमी, या आर्द्रता, स्याही को प्रतिकर्षित करती है। इस प्रकार लिथो छपाई चिकनाई और पानी के विद्वेष सिद्धान्त पर आधारित है। लियोग्राफी की खोज बबेरिया में एलॉइस जेनेफेल्डर ने किया था।

2. एक भारतीय छापा चित्रकार जो युएसए में रोबर्ट ब्लैक बर्न प्रिंट स्टूडियों में कार्यशील है।

Correct Answer: (b) डाकोजी देवराज
Solution:

डाकोजी देवराज एक भारतीय छापा चित्रकार है, जो युएसए में रोबर्ट ब्लैक बर्न प्रिन्ट स्टूडियों में कार्यशील है। इनका जन्म 1944 ई. में हैदराबाद में हुआ था। ये गढ़ी कलाकार कार्यशाला के पर्यवेक्षक भी रहे हैं। केन्द्रीय ललित कला अकादमी, नई दिल्ली ने 1983 ई.में इन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। ये छापाकला के अम्लांकन (एचिंग) विधा के लिए जाने जाते हैं। इनके चित्रों के विषय कौवे, बन्दर, कुत्ते और हांथी आदि पशु- पक्षी है। प्रसिद्ध छापा श्रृंखला- प्रमाणु श्रृंखला है।

3. एक भारतीय द्वारा की गई एन्विंग, वर्ष 1816 में इस पुस्तक के लिए उत्कीर्ण की गई।

Correct Answer: (d) ओनूध मोंगल (आनंद मंगल)
Solution:

एक भारतीय द्वारा की गई एन्विंग, वर्ष 1816 में ओनूध मोंगल (आनन्द मंगल) पुस्तक के लिए उत्कीर्ण की गई। आनन्द मंगल को पहली बार 1816 में गंगा किशोर भट्टाचार्य द्वारा प्रकाशित किया गया था। आनंद मंगल या नूतन मंगल 1752-53 में लिखी गई भारत चन्द्र रे द्वारा तीन भागों में एक बंगाली कथा कविता है। यह हिन्दू देवी अन्नपूर्णा, पार्वती का एक रूप है, जिसे बंगाल में पूजा जाता है।

4. 'पॉप आर्ट' आंदोलन का प्रादुर्भाव किस देश से हुआ?

Correct Answer: (d) ब्रिटेन
Solution:

पॉप कला का उदय इंग्लैंड में हुआ था। 1952 से लन्दन की समकालीन कला संस्था में वास्तुकार अॅलिसन व स्मिथसन्, मूर्तिकार पाओलोसि, चित्रकार हॅमिल्टन व अन्य कलाकारों के सम्मेलन आरम्भ हुए। ये कलाकार स्वयं को 'स्वतन्त्र मण्डल' कहलाते हैं। उनकी चर्चाएँ यंत्र, विज्ञापन, चलचित्रपट, अवकाश संचार आदि आविष्कारों से परिवर्तित जनजीवन व संस्कृति एवं उसके स्वाभाविक परिणाम पर केन्द्रित हुआ करती है।

5. जापानीज़ युकियो ई प्रिंट में बिजिंगा शब्द किस के लिए जाना जाता है?

Correct Answer: (a) खूबसुरत महिलाओं के चित्रण
Solution:

विजिन-गा (खूबसूरत व्यक्ति चित्र) जापानी कला में सुन्दर महिलाओं (बिजिन) के चित्रों के लिए एक सामान्य शब्द है, विशेष रूप से यूकेयो-ए शैली के वुड ब्लॉक प्रिंटिंग में। कोजियन बिजिन-गा को एक ऐसी तस्वीर के रूप में परिभाषित करते हैं जो केवल 'महिलाओं की सुन्दरता पर जोर देती है। युकियो-ई अपने  आप में वुडब्लॉक प्रिन्ट और पेंटिंग की एक शैली है जो जापान में 17वीं सदी से 19वीं सदी तक बनाई गई थी। ये प्रिन्ट जापानी व्यापारियों और उस समय के मध्यम वर्ग के बीच बहुत लोकप्रिय थे।

6. दीदारगंज याक्षी की अवधि थीः

Correct Answer: (a) मौर्य
Solution:

हाथ में चामर (चौरी) पकड़े खड़ी यक्षिणी की जो आदमकद मूर्ति आधुनिक पटना के दीदारगंज में मिली है, वह भी मौर्य कालीन मूर्तिकला की परम्परा का एक अच्छा उदाहरण है। यह मूर्ति पटना संग्रहालय में रखी हुई है। यह लम्बी मूर्ति बलुआ पत्थर की बनी है। इसका अंग विन्यास सन्तुलित एवं समानुपातिक है। इसकी सतह पॉलिश की हुई (चिकनी) है।

7. बलबीर सिंह कट्ट किस के छात्र थे?

Correct Answer: (a) रामकिंकर बैज
Solution:

बलबीर सिंह कट्ट का जन्म 1939 ई. में रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था। इन्होंने राम किंकर बैज के सानिध्य में रहकर मूर्तिकला का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। बलबीर सिंह कट्ट पत्थर की विशाल मूर्तियों को बनाने के लिए प्रसिद्ध थे। ये वर्ष 2000 में रहस्यमय ढंग से गायब हो गये थे। कट्ट बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में मूर्तिकला विभाग में प्रोफेसर पद पर भी अपनी सेवायें दी है। प्रमुख मूर्तिशिल्प चक्र, नगर चौक, नादेश्वर, आरोह अवरोह, सिटी स्कवैयर, पोट्रेट ऑफ रामाकिंकर बैज, जेजेन्ट फ्लॉवर आदि।

8. निम्नलिखित में से किस मूर्तिकार को पद्मश्री की पदवी दी गई है:

Correct Answer: (b) राजेन्द्र टिक्कू
Solution:

भारत सरकार ने प्रसिद्ध समकालीन संगतराश राजेन्द्र टिक्कू को वर्ष 2013 में पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया था। इनका जन्म 1953 ई. में वादवान जम्मू कश्मीर में हुआ था। ये मूर्तिकार (संगतराश) के लिए प्रसिद्ध थे। इन्हें अपने मूर्तिशिल्पों में कश्मीरी भाषा की शारदा लिपि का प्रयोग करने का श्रेय दिया जाता है। प्रमुख चित्र-नाइट ऑफ द येलो मून, ए मिड डे, नाइट ऑफ द व्हाइट मून। प्रमुख मूर्ति शिल्प द फोर्ट, स्तूप, मेमोरीज ऑफ द कॉबलर, द ग्रीन लैटर्न, वाइट लॉक एण्ड द ब्लैक की आदि।

9. कौन से भारतीय मूर्तिकार अपने ओक्सिडाइज़ड पीतल मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध थेः

Correct Answer: (d) पी.वी. जानकीरमन
Solution:

पी.वी.जानकीरमन भारतीय मूर्तिकार अपने ओक्सिडाइजड पीतल मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध थे। इनका जन्म 1930 ई. में चेनई में हुआ था और ये के.सी.एस. पनिक्कर के शिष्य थे। ये मूर्तिकार (संगतराश) के लिए जाने जाते थे। उन्हें 1973 ई. में हंगरी सरकार ने मूर्तिकला में मानद डिप्लोमा प्रदान किया था। इन्होंने गवर्नमेंट कालेज ऑफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्टस मद्रास में मूर्तिकला विभाग में शिक्षक पद पर रहकर अपनी सेवायें दी थी। प्रमुख मूर्तिशिल्प घुड़सवारहॉर्स राइडर, गणेश, वन दुर्गा, बांसुरी वादक फ्लूट प्लेयर, गरुण, बुद्ध, कृष्णा, वूमेन, उल्लू, कालिया मर्दन, औरत, देवी भक्तों के साथ आदि।

10. एक प्रसिद्ध वास्तुकार जिन्होंने हाल ही में भित्तिचित्र, चित्रकारी एवं पत्थर की मूर्तियों को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया है:

Correct Answer: (a) सतीश गुजराल
Solution:

सतीश गुजराल एक प्रसिद्ध वास्तुकार जिन्होंने हाल ही में भित्तिचित्र, चित्रकारी एवं पत्थर की मूर्तियों को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया है। इनका जन्म वर्ष 1925 में झेलम पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था, तथा इनकी मृत्यु 2020 में हुयी थी। ये मैक्सिन अभिव्यंनावादी कलाकार कहलाते हैं और इन्हें मनः स्थिति का कलाकार भी कहा जाता है। ऐक्रेलिक रंगो की खोज का श्रेय भी इन्हें ही प्राप्त है। बेल्जियम सरकार ने इन्हें 'ऑर्डर ऑफ द क्राउन' पुरस्कार से पुरस्कृत किया था।