Solution:'येन स्वः स्तभितं येन नाकः' मन्त्रांशोऽयं 'प्रजापति सूक्तात्' अस्ति अर्थात् यह मन्त्रांश प्रजापति सूक्त से गृहीत है। इसके ऋषि हिरण्यगर्भ, देवता क संज्ञक प्रजापति तथा छन्द त्रिष्टुप् है। येन घोरुग्रा पृथिवी च दृष्ठता येन स्वःस्तभितं येन नाकः । यो अन्तरिक्षे रजसो विमानः कस्मै देवाय हविषा विधेम ।।
अर्थात् जिसके द्वारा स्वर्ग और सौर मण्डल को स्थिर किया गया था, जो आकाश में जल को व्याप्त किये है ऐसे किस देव के लिए हवि से स्तुति करें।
इन्द्रसूक्त ऋषि-मृत्समद, देवता इन्द्र, छन्द त्रिष्टुप्। विष्णु सूक्त ऋषि- दीर्घतमा, देवता-विष्णु, छन्द त्रिष्टुप्। अग्नि सूक्त ऋषि-मधुच्छन्दा, देवता अग्नि, छन्द गायत्री