NTA यू.जी.सी. नेट/ जेआरएफ पुनर्परीक्षा,जून 2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

1. निम्नलिखित आत्मकथाओं को प्रकाशन वर्ष के आधार पर बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

(A) राहुल सांकृत्यायन कृत 'मेरी जीवन-यात्रा'
(B) राजेन्द्र प्रसाद कृत 'आत्मकथा'
(C) बाबू श्यामसुंदर दास कृत 'मेरी आत्म कहानी'
(D) सठे गोविंददास कृत 'आत्मनिरीक्षण'
(E) बनारसी दास जैन कृत 'अर्द्धकथा'
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) (E), (C), (A), (B), (D)
Solution:आत्मकथाओं का प्रकाशन वर्ष के आधार पर क्रम इस प्रकार है-
रचनाकारआत्मकथाप्रकाशन वर्ष
बनारसीदास जैनअर्द्धकथा1641 ई.
बाबूश्याम सुंदरदासमेरी आत्मकहानी1941 ई.
राहुल सांकृत्यायनमेरी जीवन यात्रा1946 ई.
राजेन्द्र प्रसादआत्मकथा1947 ई.
सेठ गोविंददासआत्मनिरीक्षण1958 ई.

2. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए :

सूची-I/(कथन)सूची-II/(पात्र)
(A)आप लोग समझदार हैं। गाँधी जी और उनकी बकरी की महिमा जानते हैं।(I)विलोम
(B)मैं उसे मांगता नहीं और क्षमा देने का अधिकार भी तुम्हारा नहीं रहा।(II)चाणक्य
(C)महत्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में रहता है।(III)दुर्जन
(D)मैं इस समय अपना तुम्हारे पास होना बहुत आवश्यक समझता हूँ।(IV)चन्द्रगुप्त

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) (A)-(III), (B)-(IV), (C)-(II), (D)-(I)
Solution:प्रमुख नाट्य कथनों एवं उनके पात्रों से संबंधित सूची का सही मिलान इस प्रकार है-
कथनपात्रनाटक
1आप लोग समझदार हैं। गाँधी जी और उनकी बकरी की महिमा जानते हैं।दुर्जनबकरी
2मैं उसे माँगता नहीं और क्षमा देने का अधिकार भी तुम्हारा नहीं रहा।चन्द्रगुप्तचन्द्रगुप्त
3महत्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में रहता है।चाणक्यचन्द्रगुप्त
4मैं इस समय अपना तुम्हारे पास होना बहुत आवश्यक समझता हूँ।विलोमआषाढ़ का एक दिन

• सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कृत 'बकरी' (1974ई.) प्रगतिशील जनवादी चेतना युक्त नाटक है।
• बकरी नाटक के प्रमुख पात्र दुर्जन, सत्यवीर, कर्मवीर, विपती आदि हैं।
• जयशंकर प्रसाद कृत 'चन्द्रगुप्त' (1931ई.) ऐतिहासिक नाटक है।
• चन्द्रगुप्त नाटक के प्रमुख पात्र चन्द्रगुप्त, चाणक्य, पर्वतेश्वर, सिंहरण, शकटार हैं।
• मोहन राकेश कृत 'आषाढ़ का एक दिन (1958ई.) ऐतिहासिक नाटक है। यह कालिदास के जीवन पर आधारित नाटक है।
नाटक के प्रमुख पात्र- कालिदास, विलोम, मातुल, दन्तुल अनुस्वार, मल्लिका, अंबिका, प्रियंगुमंजरी आदि हैं।

3. निम्नलिखित में से कौन सी रचना संस्मरण है?

(A) बापू
(B) टूटा तारा
(C) साधना
(D) मुक्ति फौज
(E) एलबम
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (A), (B), (E)
Solution:घनश्यामदास बिड़ला कृत 'बापू (1940 ई.), राधिकारमण प्रसाद सिंह 'टूटा तारा' (1940 ई.) तथा सत्यजीवन वर्मा कृत एलबम (1949 ई.) संस्मरण विधा की रचना है, जबकि रायकृष्णदास कृत 'साधना' (1916 ई.), गद्यकाव्य विधा की तथा श्रीकांत वर्मा कृत 'मुक्ति फौज' रिपोर्ताज विधा की रचना है।

4. 'मनुष्य का मन है भैया, जब कभी भटक जाता है तो रो पड़ता है।'यह वाक्य किस उपन्यास का है?

Correct Answer: (d) मानस का हंस
Solution:'मनुष्य का मन है भैया, जब कभी भटक जाता है तो रो पड़ता है'। उक्त कथन अमृतलाल नागर कृत 'मानस का हंस' (1927 ई.) उपन्यास का है। यह उपन्यास गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर लिखा गया है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र-पंडित आत्माराम, भैरोसिंह, पंडाइन, हुलसिया, पण्डित गणपति उपाध्याय, रामू द्विवेदी, बकरीदी कक्का, राजा, श्यामो की बुआ, पार्वती इत्यादि । अमृतलाल नागर के उपन्यास - महाकाल, सेठ बांकेलाल, बूँद और समुद्र, शतरंज के मोहरे, सुहाग के नुपूर, अमृत और विष, सात घूँघट वाला मुखड़ा, एकदा नैमिषारण्ये, मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल, खंजन नयन, बिखरे तिनके, अग्निगर्भा आदि।
भीष्म साहनी के उपन्यास - बसंती, तमस, कुन्तो, नीलू नीलिमा नीलोफर, झरोखे, कड़ियाँ।
यशपाल के प्रमुख उपन्यास- दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, झूठा सच, अप्सरा का शाप, क्यों फंसे, तेरी मेरी उसकी बात आदि।
यशपाल के प्रमुख उपन्यास- दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, झूठा सच, अप्सरा का शाप, क्यों फंसे, तेरी मेरी उसकी बात आदि।
कृष्णा सोबती के प्रमुख उपन्यास- सूरजमुखी अँधरें के, जिन्दगी नामा, दिलोदानिश, समय सरगम आदि।

5. 'राष्ट्रभाषा केवल रईसों और अमीरों की भाषा नहीं हो सकती। उसे किसानों और मजदूरों की भाषा बनना पड़ेगा।' कहानी के संदर्भ में यह किसका कथन है?

Correct Answer: (d) प्रेमचंद
Solution:राष्ट्रभाषा केवल रईसों और अमीरों की भाषा नहीं हो सकती। उसे किसानों और मजदूरों की भाषा बनना पड़ेगा। कहानी के संबंध में उक्त कथन 'प्रेमचंद' का है।
• प्रेमचंद ने लिखा है- "सबसे उत्तम कहानी वह होती है; जिसका आधार किसी मनोवैज्ञानिक सत्य पर होता है।"
प्रेमचंद की प्रमुख कहानियाँ - नमक का दारोगा, सज्जनता का दण्ड, ईश्वरीय न्याय, बूढ़ी काकी, सवा सेर गेहूँ, शतरंज के खिलाड़ी, अलग्योझा, पूस की रात, सद्गति, दो बैलों की कथा, ठाकुर का कुँआ, ईदगाह, बड़े भाई साहब, कफन आदि।

6. निम्नलिखित में से संकेतार्थक वाक्य का उदाहरण है:

Correct Answer: (d) यदि वह परिश्रम करता तो सफल अवश्य होता।
Solution:'यदि वह परिश्रम करता तो सफल अवश्य होता। उक्त संकेतार्थक वाक्य का उदाहरण है।
• संकेतार्थक वाक्य - जहाँ एक वाक्य दूसरे की संभावना पर निर्भर हो।
• विधिवाचक वाक्य -  जिससे किसी बात के होने का बोध हो।
• निषेधवाचक वाक्य - जिससे किसी तरह की आज्ञा का बोध हो। जैसे- वह खाता है।
• आज्ञावाचक वाक्य - जिससे किसी तरह की आज्ञा का बोध हो। जैसे - तुम जाओ, वह पढ़े।
• अर्थ के अनुसार वाक्य के आठ भेद हैं- 1.विधिवाचक, 2.निषेध वाचक, 3. आज्ञावाचक, 4. प्रश्नवाचक, 5. विस्मयवाचक, 6. संदेहवाचक, 7.इच्छावाचक 8. संकेतवाचक ।

7. 'छायावाद विलायती अभिव्यंजनावाद का नया संस्करण है' यह उक्ति किसकी हैं?

Correct Answer: (d) रामचन्द्र शुक्ल
Solution:छायावाद विलायती अभिव्यंजनावाद का नया संस्करण है यह उक्ति आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की है। छायावाद के संबंध में विद्वानों के कथन -
कथनविद्वान
छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह हैं।डॉ. नगेन्द्र
मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म, किन्तु व्यक्त सौन्दर्य में आध्यात्मिक छाया का भान छायावाद है।नंददुलारे वाजपेयी
"छायावाद तत्वतः प्रकृति के बीच जीवन का उद्गीत है।"महादेवी वर्मा
"छायावाद मूलतः शक्ति का काव्य है।"डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी

8. निम्नलिखित में कौन-सा कथन 'अंधेर नगरी' नाटक के संदर्भ में असत्य है?

(A) यह नाटक 1881 में लिखा गया था और काशी के दशाश्वमेध घाट पर उसी दिन अभिनीत भी हुआ। (B) इस नाटक में पाँच दृश्य हैं।
(C) द्वितीय अंक स्थान जंगल है।
(D) तीसरे दृश्य में ज्ञान और अज्ञान की टकराहट दिखाई पड़ती है।
(E) साँच कहैं तो पनही खावें, झूठे बहु विधि पदबी पावैं। यह चौथे अंक का गीत है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (B), (C), (E)
Solution:'अंधेर नगर' नाटक के संदर्भ में असत्य कथन निम्नलिखित हैं-
1.इस नाटक में पाँच दृश्य हैं।
2. द्वितीय अंक स्थान जंगल है।
3. साँच कहें तो पनही खावैं, झूठे बहु विधि पदवी पावें। यह चौथे अंक का गीत है।
• भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत 'अंधेर नगरी' (प्रहसन) के संबंध में प्रमुख बिन्दु-
1. यह नाटक 1881 ई. में लिखा गया था और काशी के दशाश्वमेध घाट पर उसी दिन अभिनीत भी हुआ।
2. इस नाटक में कुल छः (6) दृश्य हैं।
3. द्वितीय अंक का स्थान बाजार है।
4. तीसरे दृश्य में ज्ञान और अज्ञान की टकराहट दिखाई पड़ती है।
5. पाँचवे अंक में गोबरधनदास 'राग काफी' में गाते हुए आते हैं- 'साँच कहें तो पनही खावें, झूठे बहु विधि पदबी पावें।
भारतेन्दु की प्रमुख कृतियाँ (मौलिक नाटक) -
वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, सत्य हरिश्चन्द्र, श्री चन्द्रावली, विषस्य विषमौषधम्, भारत दुर्दशा, नील देवी, अंधेर नगरी, प्रेम जोगिनी, सती प्रताप ।

9. निम्नलिखित में कौन-सी घटना गोदान उपन्यास से संबंधित है?

(A) मैं तो सोनारीवालों से कह दूंगी, अगर तुमने एक पैसा भी दहेज में लिया, तो मैं तुमसे ब्याह न करूंगी।
(B) कैसी चाकरी और किसकी चाकरी ? यहाँ तो कोई किसी चाकर नहीं। सभी बराबर हैं।
(C) दबे पाँव उठे। बच्चे के पास जाकर एक बार उसे देखा, पत्नी को अपना ओढ़ा हुआ दुशाला उढ़ाया।
(D) मन के रंगीन आकाश में स्वच्छन्द उड़ाने भरते हुए नवयुवक की आँखों के आगे सहसा अँधेरा छा गया।
(E) लजाते क्यों हो, गोद में ले लो, प्यार करो, कैसा काठ का कलेजा है तुम्हारा?
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (A), (B), (E)
Solution:प्रेमचंद कृत गोदान उपन्यास से संबंधित घटनाएं-
1. मैं तो सोनारी वालों से कह दूँगी, अगर तुमने एक पैसा भी दहेज में लिया, तो मैं तुमसे ब्याह न करूँगी।
2.कैसी चाकरी और किसकी चाकरी ? यहाँ तो कोई किसी का चाकर नहीं। सभी बराबर हैं।
3. लजाते क्यों हो, गोद में लेलो, प्यार करो, कैसा काठ का कलेजा है तुम्हारा ?
• गोदान (1936 ई.) प्रेमचन्द का अन्तिम पूर्ण और सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास है। गोदान ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का महाकाव्य है। इसमें प्रगतिवाद, गाँधीवाद और मार्क्सवाद (साम्यवाद) का पूर्ण परिप्रेक्ष्य में चित्रण हुआ है।
गोदान उपन्यास के प्रमुख पात्र - होरी, धनिया, गोबर, झुनिया, रायसाहब, मेहता, मालती, भोला, सोना, रूपा, खन्ना, गोविंदी, हीरा, सिलिया, मातादीन, दातादीन, ओंकार नाथ, सोभा, नोहरी आदि।

10. निम्नलिखित में से असत्य कथन/कथनों की पहचान कीजिए :

(A) अरस्तू त्रासदी के लिए दुखान्त होना अनिवार्य मानते थे।
(B) अरस्तू ने केवल गंभीर कार्य की अनुकृति को त्रासदी का विषय माना है।
(C) अरस्तू का विचार है कि त्रासदी का कार्य अपने आपमें पूर्ण होना चाहिए।
(D) कथावस्तु से अरस्तू का तात्पर्य घटनाओं के विन्यास से है। यह कथावस्तु को त्रासदी की आत्मा मानता है।
(E) अरस्तू का मानना है कि बिना चरित्र चित्रण के त्रासदी संभव नहीं है, किन्तु कार्य-व्यापार की अवहेलना की जा सकती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल (A) और (E
Solution:अरस्तू के त्रासदी संबंधी सत्य कथन निम्नलिखित -
1. अरस्तू त्रासदी के लिए दुखान्त होना अनिवार्य मानते थे।
2. अरस्तू का मानना है कि बिना चरित्र चित्रण के त्रासदी संभव नहीं है, किन्तु कार्य व्यापार की अवहेलना की जा सकती है।
• अरस्तू प्रथम काव्यशास्त्री थे जिन्होने उपयोगी कला  और ललित कला  का भेद स्पष्ट किया और ललित कला की स्वायत्तता घोषित की।
• अरस्तू ने केवल गंभीर कार्य की अनुकृति को त्रासदी का विषय माना है।
• अरस्तू का विचार है कि त्रासदी का कार्य अपने आप में पूर्ण होना चाहिए।
• कथावस्तु से अरस्तू का तात्पर्य घटनाओं के विन्यास से है। यह कथावस्तु को त्रासदी की आत्मा मानता है।