NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

1. कारक का सही अनुक्रम है:

(A) संप्रदान कारक
(B) करण कारक
(C) अधिकरण कारक
(D) अपादान कारक
(E) संबंध कारक
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) (B), (A), (D), (E), (C)
Solution:कारक का सही अनुक्रम इस प्रकार है-
करण कारक → सम्प्रदान कारक →  अपादान कारक → सम्बंध कारक → अधिकरण
→ संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका सम्बन्ध वाक्य के किसी दूसरे शब्द के साथ प्रकाशित होता है, उस रूप को कारक कहते है।
जैसे- रामचन्द्र जी ने खारे जल के समुद्र पर बंदरों से पुल बंधवा दिया।
→ हिन्दी में कारक आठ है। कारकों के बोध के लिए संज्ञा या सर्वनाम के आगे जो परसर्ग (चिन्ह) लगाये जाते है, उन्हें व्याकरण में विभक्तियाँ कहते है।
कारक  विभक्तियाँ  
कर्ताने
कर्मको
करणसे, के द्वारा
सम्प्रदानको, के लिए
अपादानसे (अलग होने से सन्दर्भ में)
सम्बन्धका, के, की, रा, रे, री
अधिकरणमें, पर
सम्बोधनहे, अजी, अहो, अरे इत्यादि।

2. 'गोदान' के आधार पर कौन से कथन सत्य हैं?

(A) बेईमानी का धन जैसे आता है वैसे ही जाता है।
(B) भाई का हक मारकर किसी को फलते-फूलते नहीं देखा।
(C) गोबर को राय साहब के पास भेज देना।
(D) भोला उधार देनेवाला आदमी नहीं है।
(E) तुम जैसे मर्द साठे पर पाठे होते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) केवल (A), (B), (D)
Solution:'गोदान' के आधार पर सत्य कथन हैं-
(A) बेईमानी का धन जैसे आता है वैसे ही जाता है।
(B) भाई का हक मारकर किसी को फलते-फूलते नहीं देखा।
(D) भोला उधार देनेवाला आदमी नहीं है।
(ये सभी कथन हीरा के है) धनिया ने होरी से कहा 'तुम जैसे मर्द साठे पर पाठे नहीं होते हैं।' गोदान में प्रेमचंद ने भारतीय किसान जीवन की महागाथा का चित्रण किया है। यह इनकी प्रौढ़तम कृति है। इसमें प्रेमचंद का सम्पूर्ण जीवन अनुभव सिमट कर केन्द्रीभूत हो गया है। इसकी कथा के दो प्रमुख सूत्र है- होरी, गोबर, धनिया, झुनिया तथा अन्य ग्रामीण व्यक्तियों जैसे दातादीन, नोखेराम, पटेश्वरी, झिंगुरी सिंह को लेकर चलने वाला कथा-सूत्र ग्राम्य जीवन के साथ विकसित है। नागरिक जीवन को लेकर दूसरा कथासूत्र में पं. ओंकारनाथ (सम्पादक), श्यामबिहारी तंखा (बीमा कम्पनी के दलाल), मिस्टर खन्ना (उद्योगपति), मिस्टर मेहता (दर्शनशास्त्र के अध्यापक), मिस्टर मिर्जा (जूते के दुकानदार) और मिस मालती (लेडी डॉक्टर) प्रधान पात्र हैं। दोनों कथासूत्रों को जोड़ने वाले इलाके के जमींदार रायसाहब अमरपाल सिंह है। होरी उपन्यास का नायक है। वह किसानों का प्रतिनिधि है। धर्म के ठेकेदारों, छोटे-बड़े महाजनों और जमींदारों के जाल में उलझा हुआ मर्यादावादी किसान घिसते-घिसते मजदूर हो जाता है और घिसते- घिसते शव । संक्षेप में यही इसका जीवन है।
→ प्रेमचन्द के उपन्यास -
देवस्थान रहस्य (1905), प्रेमा (1907), सेवासदन (1918), वरदान (1921), प्रेमाश्रम (1922), रंगभूमि (1925), कायाकल्प (1926), निर्मला (1927), गबन (1931), कर्मभूमि (1932), गोदान (1936)1

3. "यह पंच नहीं हैं, पक्के राक्षस हैं, पक्के राक्षस। यह सब हमारी जगह है।" 'गोदान' उपन्यास में यह किसका कथन है?

Correct Answer: (b) धनिया
Solution:"यह पंच नहीं है, पक्के राक्षस है, पक्के राक्षस । यह सब हमारी जगह है।" 'गोदान' उपन्यास में यह कथन धनिया का है। गोदान उपन्यास में धनिया ने यह कथन होरी से कहा।

4. निम्न में से कौन सी पंक्ति और नाटक का मिलान सही नहीं है?

(A) बकरी को क्या पता था मशक बन के रहेगी, पानी भरेंगे लोग, और कुछ न कहेगी अंधेरी नगरी
(B) दो आदमी जितना ज्यादा साथ रहें, एक हवा में साँस ले, उतना ही ज्यादा अपने को एक-दूसरे से अजनबी महसूस करें - आधे - अधूरे
(C) निस्सन्देह। अनन्तदेवी के इंगित पर कुमारगुप्त नाच रहे हैं - एक घूंट
(D) सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की दुर्बलता के नाम हैं - ध्रुवस्वामिनी
(E) सुना है, उनके भतीजे असदुल्लाह की शादी हो गयी - आगरा बाजार
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) केवल (A), (C)
Solution:"बकरी को क्या पता था मशक बन के रहेगी, पानी भरेंगे लोग, और कुछ न कहेगी।” यह कथन जनवादी नाटककार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना के नाटक 'बकरी' के पहले अंक (पहला दृश्य) से उद्धृत है। बकरी नाटक में दो अंक है और प्रत्येक अंक में 3 दृश्य हैं। इसमें आधुनिक राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा नेताओं द्वारा गांधी के विचारों की बार-बार की जा रही हत्या का चित्रण है। यह एक व्यंग्य नाटक है, जो 1974 में प्रकाशित हुआ।
⇒ "दो आदमी जितना ज्यादा साथ रहे, एक हवा में सॉस ले, उतना ही ज्यादा अपने को एक दूसरे से अजनबी महसूस करे।" यह कथन आधुनिक भावबोध के नाटककार मोहन राकेश के नाटक 'आधे-अधूरे' से उद्धृत है। यह कथन बड़ी लड़की का है। यह नाटक 1969 में धर्मयुग पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। यह नाटक स्त्री-पुरूष सम्बन्ध और दाम्पत्य संबन्ध के खोखलेपन तथा पारिवारिक विघटन की जीवन स्थितियों को दर्शाने वाला नाटक है।
आधे-अधूरे नाटक के पात्र -
महेन्द्रनाथ (काले सूट वाला आदमी), सिंघानिया, जगमोहन, जुनेजा, सावित्री (महेन्द्रनाथ की पत्नी), बिन्नी (बड़ी लड़की), किन्नी (छोटी लड़की), अशोक (लड़का)।
⇒ "निस्सन्देह ! अनन्तदेवी के इंगित पर कुमारगुप्त नाच रहे है।" यह कथन जयशंकर प्रसाद के नाटक स्कंदगुप्त के प्रथम अंक में मातृगुप्त का है। यह नाटक 1928 में प्रकाशित हुआ था। इसमें 5 अंक हैं। प्रसाद ने इस नाटक में भारत तथा यूरोप दोनों की नाट्य कलाओं का समावेश किया है। इस ऐतिहासिक नाटक में राजनीतिक घटनाओं के साथ-साथ पारिवारिक घटनाएँ भी जीवन को प्रभावित करती है। इस नाटक में पुरुष पात्रों को स‌मार्ग दिखाने का कार्य स्त्री पात्र करती है। इस दृष्टि से इस नाटक में स्त्री पात्रों का विशेष महत्व है।
स्कन्दगुप्त नाटक के पात्र -
पुरुष पात्र-
स्कन्दगुप्त, कुमारगुप्त, गोविन्दगुप्त, पर्णदत्त, चक्रपालित, बंधुवर्मा, भीमवर्मा, मातृगुप्त, प्रपंचबुद्धि, सर्वनाग, कुमारदास (धातुसेन), परगुप्त, भट्टार्क, पृथ्वीसेन, सिंगल, मुद्गल, प्रख्यातकीर्ति । नारीपात्र- देवकी, अनंतदेवी, जयमाला, देवसेना, विजया, कमला, रामा, मालिनी।
⇒ "सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की दुर्बलता के नाम है।" यह कथन जयशंकर प्रसाद के नाटक 'ध्रुवस्वामिनी' के द्वितीय अंक में 'शकराज' का है। यह 1933 में प्रकाशित हुई थी। इसमें कुल अंक है तथा प्रत्येक अंक में एक दृश्य है। इसमें स्त्री पात्रों सशक्तीकरण का भी चित्रण मिलता है।
ध्रुवस्वामिनी नाटक के पात्रः-
पुरुष पात्रः-
चन्द्रगुप्त, रामगुप्त, शिखरस्वामी, पुरोहित शकराज, खिंगल, मिहिरदेव ।
नारीपात्रः - ध्रुवस्वामिनी, मंदाकिनी, कोमा ।
⇒ "सुना है, उनके भतीजे असदुल्लाह की शादी हो गयी।"
उक्त कथन हबीब तनवीर के नाटक 'आगरा बाजार' के पात्र 'शायर' का है। इस नाटक की रचना हबीब तनवीर ने 18वीं सदी के भारतीय शायर एवं नज्म के पिता कहे जाने वाले नजीर अकबरावादी को प्रतिष्ठित करने के लिए किया है। यह दो अंकों में विभक्त है। इस नाटक का सर्वप्रथम मंचन 14 मार्च 1954 को 'जामिया मिलिया इस्लामिया' के कला विभाग के खुले मंच पर किया गया था।

5. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए :

सूची-I (पत्रकार)सूची-II (पत्र)
A. युगल किशोर शुक्ल1. उचित वक्ता
B. दुर्गा प्रसाद मिश्र2. उदंत मार्त्तण्ड
C. मदनमोहन मालवीय3. छत्तीसगढ़ मित्र
D. माधव राव सप्रे4. अभ्युदय

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c)
Solution:पत्रकार और पत्र का सही सुमेलन है-
पत्रकार-पत्र
युगल किशोर शुक्ल-उदंत मार्त्तण्ड
दुर्गाप्रसाद मिश्र-उचितवक्ता
मदनमोहन मालवीय-अभ्युदय
माधवराव सप्रे-छत्तीसगढ़ मित्र

हिन्दी का प्रथम समाचार पत्र 'उदंत मार्तण्ड' को माना जाता है। इसका प्रकाशन 30 मई 1826 ई. से साप्ताहिक पत्र के रूप में कलकत्ता से प्रारम्भ हुआ। इसके संपादक जुगल किशोर कानपुर के निवासी थे। इसमें खड़ी बोली का उल्लेख 'मध्यदेशीय भाषा' के नाम से हुआ है। 30 मई को उदन्त मार्तण्ड के प्रकाशन तिथि को आधार मानकर 'राष्ट्रीय हिन्दी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है। 'उचित वक्ता' 1880 में प्रकाशित होने वाला समाचार पत्र था। यह पत्र व्यंग्य, मीठी कटारी मारने और मुँह चिढ़ाने में पंच का काम करता था। इसका प्रकाशन 15 वर्षों तक लगातार हुआ। 'अभ्युदय' 1907 से प्रयाग से निकलने वाला एक साप्ताहिक पत्र है, जिसके सम्पादक मदनमोहन मालवीय थे। इस पत्र का मूल तत्व 'स्वराज' था। जिसमें महामना ने ग्रामीणों की समस्याओं को महत्वपूर्ण स्थान दिया था।
⇒ 1900 ई. में 'छत्तीसगढ़ मित्र' का प्रकाशन रायपुर से प्रारम्भ हुआ। यह एक मासिक पत्रिका थी। जिसके सम्पादक माधव राव सप्रे थे। अप्रैल 1901 के अंक में माधवराव सप्रे की कहानी 'एक टोकरी भर मिट्टी' छपी जो हिन्दी की प्रथम मौलिक कहानी मानी गई है।

6. "इस बार मोर्चे पर जाना पड़ेगा। हिन्दू राज कायम करने के लिए पहले गाँव में ही लोहा लेना पड़ेगा।" 'मैला आँचल' उपन्यास में तहसीलदार हरगौरी सिंह किससे कहते हैं?

Correct Answer: (a) काली टोपीवाले नौजवानों से
Solution:उक्त कथन 'मैला आँचल' उपन्यास में तहसीलदार हरगौरी सिंह 'काली टोपीवाले नौजवानों' से कहते है।
⇒ 'मैला आँचल' फणीश्वरनाथ रेणु का 1954 में प्रकाशित एक आँचलिक उपन्यास है। हिन्दी उपन्यास के सन्दर्भ में 'आंचलिक' शब्द का प्रथम प्रयोग रेणु ने 'मैला आँचल' की भूमिका में किया है। 'मैला आँचल' उपन्यास में पूर्णिया जिले के 'मेरीगंज' गाँव को कथा का केन्द्र बनाया गया है। इस उपन्यास का कथाकाल 1946-1948 ई. के बीच का है। यह उपन्यास आजाद भारत के ग्रामीण अंचलों के सामाजिक, राजनितिक और आर्थिक यथार्थ का जीवंत चित्रण करता है।
मैला आँचल उपन्यास के पात्रः- डॉ. प्रशान्त, कमली, बालदेव, कालीचरन, मंगलादेवी, लक्ष्मी, महन्त, सेवादास, तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद, रामदास, बावनदास ।
फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यासः- मैला आँचल (1954), परती परिकथा (1957), दीर्घतपा (1963), जुलूस (1965), कितने चौराहे (1966), कलंकमुक्ति (1972), पल्टूबाबू रोड (1978), रामरतन राय (1971)1

7. स्त्री विमर्श के संदर्भ में कौन-से कथन सत्य हैं?

(A) सावित्री बाई फुले ने स्त्रियों की शिक्षा के लिए काम किया।
(B) इस विमर्श की एक महत्वपूर्ण पुस्तक है सुशान बेसनेट की फेमिनिस्ट एक्सपीरिएन्सेज ।
(C) अमेरिका में राष्ट्रीय महिला संगठन का गठन 1980 में किया गया।
(D) ओमप्रकाश वाल्मीकि और मोहनदास नैमिशराय स्त्री विमर्श के प्रमुख लेखक है।
(E) नारीवाद पूँजीवादी पितृसत्ता का समर्थक है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) केवल (A), (B)
Solution:(A) सावित्री बाई फुले ने स्त्रियों की शिक्षा के लिए काम किया।
(B) इस विमर्श की एक महत्वपूर्ण पुस्तक है सुशान बेसनेट की फेमिनिस्ट एक्सपीरिएन्सेज ।
स्त्री विमर्श के सन्दर्भ में दोनों कथन सत्य है।
→ सावित्री बाई फुले ने अनेक संघर्ष किए तथा स्त्री शिक्षा हेतु विद्यालय खोले, जिससे स्त्रियाँ शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बन सके। इन्होंने बाल-विवाह, पर्दाप्रथा, सतीप्रथा आदि सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने हेतु स्त्रियों का शिक्षित होना ही एक मात्र विकल्प समझा।
→ अमेरिका में राष्ट्रीय महिला संगठन का गठन 30 जून 1966 को वाशिंगटन डीसी में आयोजित महिलाओं की स्थिति पर आयोग के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में हुआ था राष्ट्रीय महिला संगठन की प्रथम अध्यक्ष बेट्टी फ्रीडन हैं। यह संगठन सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों में लैंगिक समानता प्राप्त करने के साझा लक्ष्य पर केन्द्रित लोगों का एक समूह है।
→ ओमप्रकाश बाल्मीकि और मोहनदास नैमिश्राय दलित विमर्श के प्रमुख लेखक हैं।
→ नारीवाद पूँजीवाद पितृसत्ता का विरोध करता है।

8. रचनाकारों एवं रचना का युग्म सुमेलित कीजिए :

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का कीजिए।

Correct Answer: (c) (A), (C), (E)
Solution:रचनाकारों एवं रचना का सही सुमेलित युग -
रचनाकार-रचना
सोमप्रभसूरि-कुमारपाल प्रतिबोध
नरपति नाल्ह-बीसलदेव रासो
भट्टकेदार-जयचंद प्रकाश

→ जैनाचार्य मेरुतुंग प्रसिद्ध जैन आचार्य थे। इन्होंने 'प्रबन्ध चिन्तामणि' (1304) संस्कृत में लिखा। इसमें अनेक ऐतिहासिक कथा प्रबन्ध है। इसमें अपभ्रंश के जो दोहे उद्धृत हैं वे दूसरों के बनाये हुए हैं। इनमें मुंज के दोहों का साहित्यिक महत्व सबसे अधिक है।
→ श्रीधर ने 14वीं शताब्दी में 'रणमल्ल छंद' नाम का वीरगीत लिखा। जिसमें ईडर के राठौर राजा रणमल्ल की पाटन के सूबेदार जफर खाँ पर प्राप्त विजय का वर्णन है। 'कुमारपालप्रतिबोध' जैनाचार्य सोमप्रभ सूरी का 1184 ई.में गद्य पद्यमय संस्कृत-प्राकृत काव्य है। बीच-बीच में अपभ्रंश के दोहे आए है।
→ 'बीसलदेव रासो' नरपति नाल्ह द्वारा 12वीं सदी में लिखा एक वीरगीत है। यह एक विरहपरक संदेश काव्य है जिसमें अजमेर के राजा चौहान बीसलदेव तथा राजा भोज की पुत्री राजमती के विवाह, वियोग और पुनर्मिलन की कथा है। हिन्दी में सर्वप्रथम बाहरमासा वर्णन इसमें मिलता है। रासो होते हुए भी यह श्रृंगारी काव्य है।
→ 'जयचंद प्रकाश' 12वी सदी में भट्ट केदार द्वारा लिखा वीरगीत, महाकाव्य है। किन्तु यह ग्रंथ अप्राप्य है। जिसमें कन्नौज के सम्राट जयचंद के शौर्य और पराक्रम की कथा का वर्णन होना अनुमानित है।
नोट:- प्रश्न में रचनाकार एवं रचनाओं का युग्म सुमेलित करने के लिए दिया गया है, जो कि विकल्प के असंगत है। प्रश्न का सही रूप होगा - रचनाकारों एवं रचनाओं के सही युग्म का चयन कीजिए।

9. "अरे भाई, रात होती है, अंधेरा होता है तो तुम चाहो या ना चाहो, प्रभात का प्रकाश स्वयंमेव उतर आता है। कि नहीं?" उठ जाग मुसाफिर' निबन्ध में उपरोक्त पंक्तियाँ किस पात्र द्वारा कही गई हैं?

Correct Answer: (c) जगदीश बाबू
Solution:'उठ जाग मुसाफिर' निबन्ध में उपर्युक्त पंक्तियाँ मास्टर साहब अर्थात् जगदीश बाबू द्वारा कही गई हैं।
→ 'उठ जाग मुसाफिर' विवेकी राय का ललित निबन्ध है। इसकी भूमिका में विवेकी राय ने लिखा है- “कई बार चर्चाओं में यह बात आई कि ललित निबन्ध एक ठहरी हुई विधा है और इसमें अब ज्यादा कुछ लिखने करने की सम्भावना नहीं है।" इस निबन्ध की शुरुआत मास्टर साहब से मिलने जाने की घटना से शुरु होती है। ग्रामीण जीवन की गहरी रागात्मकता विवेकी राय के लेखन की खास पहचान है। गंवई जीवन के प्रति ऐसा जुड़ाव हिन्दी के किसी निबन्धकार में सर्वथा दुर्लभ रहा है।
विवेकी राय के निबन्ध संग्रहः- किसानों का देश (1956), गाँवों की दुनिया (1957), त्रिधारा (1958), फिर बैतलवा डाल पर (1962), जुलूस रुका है (1977), आस्था और चिन्तन (1991), गँवई गंध गुलाब (1980), नया गाँव नाम (1984), आम रास्ता नही है (1988), जगत तपोवन सो कियो (1995), वन तुलसी की गंध (2002), जीवन अज्ञात का गणित है। (2004), उठ जाग मुसाफिर (2012)।

10. निम्नलिखित में से कौन से युग्म सही हैं?

(A) संवृत्त स्वर - उ
(B) स्पर्श व्यंजन - क
(C) विवृत स्वर - अ
(D) संघर्षी व्यंजन - आ
(E) लुंठित - ल
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) केवल (A), (B)
Solution:'संवृत्त स्वर उ, स्पर्श व्यंजन क' युग्म सही है।
→ मुखविवर के खुलने के आधार पर स्वर ध्वनियों का वर्गीकरणः
मुखविवर-स्वर
अर्धसंवृत-अ, ए, ओ
विवृत-आ, ऑ
संवृत-इ, ई, उ, ऊ, ऋ
अर्धविवृत-ऐ, औ

→ आभ्यान्तर प्रयत्न के आधार पर ध्वनियों का वर्गीकरण

स्पर्श व्यंजन
(क वर्ग)क, ख, ग, घ, ङ
(च वर्ग)च, छ, ज, झ, ञ
(ट वर्ग)ट, ठ, ड, ढ, ण
(त वर्ग)त, थ, द, ध, न
(प वर्ग)प, फ, ब, भ, म
अंतस्थ व्यंजन-य, र, ल, व
ऊष्म व्यंजन-श, ष, स, ह
अर्धस्वर-य, व
पार्श्विक-
लुण्ठित/प्रकंपित-

अनुनासिक - प्रत्येक वर्ग का अंतिम वर्ण (ङ, अ, ण, न, म)
संघर्षी व्यंजनः- जिस व्यंजन के उच्चारण में वायु संघर्ष पूर्वक निकती हो, उसे संघर्षी व्यंजन कहते है। श, ष, स, ह चार संघर्षी व्यंजन हैं।