Solution:शक्तियों का पृथक्करण और शक्तियों का विभाजन या वितरण दोनों अलग-अलग संकल्पनाए है।शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत राज्य के सुशासन का एक मॉडल है जिसके तहत राज्य को भिन्न उत्तरदायित्व वाली कई शाखाओं में विभाजित किया जाता है। प्रायः यह विभाजन कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका के रूप में किया जाता है।
जबकि संघ और राज्यों में शक्तियों का वितरण परिसंघ का एक आवश्यक लक्षण है। प्रत्येक सरकार अपने क्षेत्र में स्वतंत्र होती है और वह एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र मे हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
भारतीय संविधान में शक्तियों के पृथक्करण का साफ वर्णन न होकर संकेत मात्र है, जबकि शक्तियों के वितरण का उल्लेख अनु0 245- 293 के तहत स्पष्ट रूप से किया गया है।