Solution:अधिकांश आधुनिक और मध्यकालीन इतिहासकारों, जैसे कि मोहसिन फानी (जिन्होंने अपनी पुस्तक दबिस्तान-ए-मज़ाहिब में इसका उल्लेख किया), ने दीन-ए-इलाही को एक धर्म माना है। हालांकि, कुछ विद्वान इसे धर्म के बजाय अकबर की 'सुलह-ए-कुल' (सार्वभौमिक शांति) नीति पर आधारित एक प्रशासनिक-आध्यात्मिक आचार संहिता मानते हैं, जिसे ब्रिटिश काल में "धर्म" के रूप में गलत समझा गया।