फतेहपुर सीकरी का इबादतखाना (प्रार्थना भवन) अकबर द्वारा निर्मित एक ऐसी ऐतिहासिक इमारत थी, जहाँ विभिन्न धर्मों के विद्वान एकत्र होकर धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करते थे। इसकी स्थापना अकबर ने 1575 ईस्वी में करवाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सत्य की खोज करना और विभिन्न धर्मों के मूल सिद्धांतों को समझना था। इबादतखाना के अनुभवों के आधार पर ही अकबर ने सभी धर्मों के सार को मिलाकर 'दीन-ए-इलाही' नामक एक नई आचार-संहिता पेश की। शुरुआत में इसमें केवल मुस्लिम विद्वानों (शेख, सैयद, उलेमा) को ही चर्चा की अनुमति थी। 1578 के बाद अकबर ने इसे सभी धर्मों (हिंदू, जैन, ईसाई, पारसी, बौद्ध) के विद्वानों के लिए खोल दिया।