अकार्बनिक रसायन (रसायन विज्ञान)

Total Questions: 19

11. 'तत्व-संयोजकता' का निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

I. बोरॉन-2

II. फ्लुओरीन-3

Correct Answer: (b) न तो I और न ही II
Solution:
  • बोरॉन का परमाणु क्रमांक 5 है तथा फ्लुओरीन का परमाणु क्रमांक 9 है।
  • किसी तत्व के बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन की संख्या उसकी संयोजकता होगी।
  • बोरॉन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 1s² 2s² 2p¹
  • अतः बोरॉन की संयोजकता 3 होगी। फ्लुओरीन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p⁵ है।
  • फ्लुओरीन की संयोजकता 7 होगी।
  • तत्व-संयोजकता की अवधारणा
    • तत्व-संयोजकता (Valency of elements) रसायन विज्ञान में एक मूलभूत अवधारणा है
    • जो किसी तत्व के परमाणु की संयोजन क्षमता को दर्शाती है।
    • यह स्थायी यौगिक बनाने के लिए तत्व द्वारा ग्रहण, त्याग या साझा किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या को व्यक्त करती है
    • मुख्यतः सबसे बाहरी कोश (valence shell) के इलेक्ट्रॉनों पर आधारित।
    • संयोजकता का निर्धारण तत्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से होता है
    • जहां octet नियम (8 इलेक्ट्रॉन वाला स्थिर विन्यास) प्राप्त करने की प्रवृत्ति प्रमुख होती है।
  • प्रश्न का विश्लेषण
    • प्रश्न "तत्व-संयोजकता का निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही है?" संभवतः बहुविकल्पीय प्रश्न है
    • जहां विकल्प I. बोरॉन - 2 और II. फ्लोरीन - 3 दिए गए हैं।
    • मानक रसायन शास्त्र के अनुसार, सही युग्म बोरॉन - 3 है
    • जबकि फ्लोरीन - 3 गलत है क्योंकि फ्लोरीन की संयोजकता 1 होती है।
    • यह युग्म सही नहीं माना जाता, लेकिन यदि विकल्पों में बोरॉन-3 शामिल हो तो वह सही होगा।
  • बोरॉन की संयोजकता
    • बोरॉन (परमाणु संख्या 5, इलेक्ट्रॉन विन्यास 2,3) समूह 13 का तत्व है
    • जिसकी संयोजकता 3 होती है।
    • यह अपने तीन संयोजी इलेक्ट्रॉनों को खोकर या साझा करके स्थिर अष्टक विन्यास प्राप्त करता है
    • जैसे BF₃ यौगिक में। बोरॉन कभी-कभी अपवाद दिखाता है
    • (जैसे B₂H₆ में 3-सेंटर बंधन), लेकिन सामान्यतः संयोजकता 3 ही मानी जाती है। विकल्प I (बोरॉन-2) गलत है।
  • फ्लोरीन की संयोजकता
    • फ्लोरीन (परमाणु संख्या 9, इलेक्ट्रॉन विन्यास 2,7) समूह 17 का हैलोजन है
    • जिसकी संयोजकता 1 होती है। यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण या साझा करके octet पूर्ण करता है
    • जैसे HF में। फ्लोरीन कभी भी संयोजकता 3 नहीं दिखाता। विकल्प II (फ्लोरीन-3) स्पष्ट रूप से गलत है।
  • सही युग्म की पहचान
    • यदि पूर्ण विकल्प उपलब्ध हों, तो सही युग्म वह होगा जहां संयोजकता तत्व के valence इलेक्ट्रॉनों से मेल खाए
    • जैसे बोरॉन-3 या फ्लोरीन-1। उपलब्ध संदर्भों के आधार पर, कोई भी दिया युग्म (I या II) पूर्णतः सही नहीं
    • लेकिन प्रश्न का सही उत्तर विकल्प 1 माना गया है जहां फ्लोरीन-1 और बोरॉन-3 पर जोर दिया गया।
    • अन्य उदाहरण: हाइड्रोजन-1, ऑक्सीजन-2, नाइट्रोजन-3, कार्बन-4।

12. जब लेड नाइट्रेट को गर्म किया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सी गैस उत्पन्न होती है? [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
Solution:
  • जब लेड नाइट्रेट को गर्म किया जाता है
  • तो उत्पाद के रूप में लेड मोनोऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड व ऑक्सीजन का उत्पादन होता है।
  • 2Pb(NO₃)₂(s) →2PbO(s) +4 NO₂(g)+ O₂(g)
  • रासायनिक प्रतिक्रिया
    • लेड नाइट्रेट (Pb(NO₃)₂) का सूत्र Pb(NO₃)₂ है, जो गर्म करने पर निम्नलिखित अपघटन प्रतिक्रिया से गुजरता है:
    • 2Pb(NO₃)₂ (s) → 2PbO (s) + 4NO₂ (g) + O₂ (g)
    • यहाँ पीला ठोस लेड ऑक्साइड (PbO) अवशेष के रूप में बचता है
    • जबकि NO₂ भूरी गैस और O₂ रंगहीन गैस के रूप में उत्सर्जित होती हैं।
    • प्रतिक्रिया लगभग 300-400°C तापमान पर तेजी से होती है।
  • उत्पन्न गैसों की विशेषताएँ
    • नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) एक जहरीली, लाल-भूरी गैस है
    • जो तीखी गंध वाली होती है और वायु प्रदूषक के रूप में जानी जाती है।
    • यह अम्लीय वर्षा और श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।
    • दूसरी ओर, ऑक्सीजन (O₂) रंगहीन, गंधहीन गैस है जो दहन को समर्थन देती है।
    • प्रयोगशाला में NO₂ की उपस्थिति भूरे धुएँ से स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
  • प्रयोगिक अवलोकन
    • प्रयोग के दौरान लेड नाइट्रेट के सफेद क्रिस्टल गर्म करने पर पहले पिघलते हैं
    • फिर भूरा धुआँ निकलता है और टेस्ट ट्यूब के ऊपरी भाग पर पीला अवशेष (PbO) जम जाता है।
    • गैस की पहचान के लिए जलती हुई तीलि को पास लाने पर वह तेज जलती है
    • (O₂ की उपस्थिति), जबकि NO₂ स्वयं दहन को रोक सकती है।
    • यह प्रतिक्रिया कक्षा 10 की रसायन शास्त्र पाठ्यपुस्तक में थर्मल अपघटन का क्लासिक उदाहरण है।

13. निम्नलिखित में से कौन-सी सामान्य पानी को पीने योग्य पानी में बदलने की तकनीक या उपाय नहीं है? [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) ब्रोमीनीकरण
Solution:
  • ब्रोमीनीकरण, सामान्य पानी को पीने योग्य पानी में बदलने की तकनीक है।
  • ब्रोमीन का उपयोग कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है।
  • सामान्य पीने योग्य जल उपचार के लिए क्लोरीनीकरण प्रक्रिया का भी उपयोग किया जाता है।
  • पीने योग्य पानी बनाने की सामान्य विधियाँ
    • फिल्ट्रेशन, जैसे कैंडल फिल्टर या सिरेमिक फिल्टर से निलंबित कण हटाए जाते हैं
    • जबकि क्लोरीन की गोलियाँ या फिटकरी डालकर रासायनिक शुद्धिकरण किया जाता है
    • पोटैशियम परमैंगनेट या विरंजक चूर्ण भी घरेलू स्तर पर कीटाणुनाशक के रूप में प्रयुक्त होते हैं ।
  • ब्रोमीकरण क्यों नहीं गिना जाता
    • ब्रोमीकरण पानी शुद्धिकरण की मानक या सामान्य विधि नहीं है
    • क्योंकि यह क्लोरीन की तुलना में कम प्रभावी और महंगा होता है।
    • इसका उपयोग विशेष मामलों जैसे पूल या औद्योगिक जल में हो सकता है
    • लेकिन घरेलू या सामान्य पीने के पानी के लिए अनुशंसित नहीं
    • क्लोरीनिकरण ही प्रचलित रासायनिक विधि है, जो सुरक्षित और सुलभ है ।
  • अन्य उन्नत या वैकल्पिक उपाय
    • पराबैंगनी विकिरण (UV), सौर कीटाणुशोधन या RO सिस्टम आधुनिक तरीके हैं
    • लेकिन घरेलू स्तर पर उबालना, फिल्टर और क्लोरीन सबसे आम रहते हैं
    • टमाटर-सेब के छिलके जैसे प्राकृतिक उपाय प्रयोगात्मक हैं
    • इन्हें मानक नहीं माना जाता । ये विधियाँ पानी से रोगाणु, गंदगी और रसायनों को दूर कर सुरक्षित बनाती हैं।

14. ऐक्टिनाइड श्रेणी ....... धात्विक रासायनिक तत्वों का एक वर्ग है। [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 15
Solution:
  • ऐक्टिनाइड श्रेणी 15 धात्विक रासायनिक तत्वों का एक वर्ग है
  • जो ऐक्टिनियम से लेकर लॉरेंशियम तक आवर्त सारणी में पाए जाते हैं।
  • परिभाषा और सदस्य तत्व
    • ऐक्टिनाइड श्रेणी ऐक्टिनियम (Ac, Z=89) से शुरू होकर लॉरेंसियम (Lr, Z=103) तक के तत्वों को शामिल करती है
    • जिसमें थोरियम (Th), यूरेनियम (U), नेप्ट्यूनियम (Np), प्लूटोनियम (Pu) आदि प्रमुख हैं।
    • इन्हें 5f-श्रेणी भी कहा जाता है, क्योंकि इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में 5f उपकोश भरता है।
    • कुल 15 तत्व होने के कारण ये लैन्थेनाइड श्रेणी (4f-श्रेणी) के समकक्ष हैं
    • लेकिन अधिक रेडियोधर्मी और संश्लेषित होते हैं।
  • रासायनिक और भौतिक गुण
    • ऐक्टिनाइड तत्व परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (+3 से +7 तक) प्रदर्शित करते हैं
    • जिसमें +3 सबसे स्थायी है। ऐक्टिनाइड संकुचन के कारण इनकी परमाणु त्रिज्या परमाणु क्रमांक बढ़ने पर घटती जाती है
    • जो 5f इलेक्ट्रॉनों के कम परिरक्षण प्रभाव से होता है।
    • ये रंगीन लवण बनाते हैं (5f संक्रमण के कारण), संकुल यौगिकों का निर्माण करते हैं
    • (लैन्थेनाइड से अधिक), तथा अधिकांश अनुचुम्बकीय होते हैं
    • अयुग्मित f-इलेक्ट्रॉनों के कारण। रासायनिक रूप से ये क्रियाशील धातुएँ हैं
    • जो हवा, अम्लों और हैलोजनों से प्रतिक्रिया करती हैं।
  • विशेषताएँ और उपयोग
    • ये तत्व अधिक घनत्व वाले, चांदी जैसी चमक वाले धातु हैं
    • लेकिन रेडियोधर्मिता के कारण प्राकृतिक रूप से कम पाए जाते है
    • यूरेनियम और थोरियम को छोड़कर बाकी कृत्रिम हैं।
    • परमाणु ऊर्जा, चिकित्सा (अमेरिकियम) और अनुसंधान में उपयोगी।
    • लैन्थेनाइड से भिन्न ये अधिक विषैले और जटिल संरचना वाले होते हैं।

15. उस तत्व की पहचान करें जो आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 1 से संबंधित नहीं है। [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) हाइड्रोजन
Solution:
  • आधुनिक आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान निश्चित नहीं है।
  • आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 1 में लीथियम, सोडियम, पोटैशियम, रुबिडियम, सीजियम तथा फ्रैंशियम हैं।
  • अतः हाइड्रोजन आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 1 से संबंधित नहीं है।
  • जबकि हाइड्रोजन (H) को इस समूह से अलग माना जाता है।
  • हाइड्रोजन इस समूह का पूर्ण सदस्य नहीं है क्योंकि यह एक गैर-धातु है
  • क्षारीय धातुओं के गुणों से भिन्न व्यवहार करता है।
  • समूह 1 के तत्व
    • समूह 1 के तत्वों में सभी धातुएँ होती हैं जो ns¹ इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाली होती हैं
    • अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होती हैं। ये तत्व पानी के साथ तीव्र प्रतिक्रिया करते हैं
    • हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं, जो क्षारीय प्रकृति के कारण इन्हें क्षारीय धातुएँ कहा जाता है।
    • लिथियम से फ्रान्सियम तक के ये तत्व समान रासायनिक गुण दिखाते हैं
    • जैसे एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर +1 ऑक्सीकरण अवस्था प्राप्त करना।
  • हाइड्रोजन की स्थिति
    • हाइड्रोजन को परमाणु संख्या 1 वाला तत्व होने और 1s¹ इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण समूह 1 के शीर्ष पर रखा जाता है
    • लेकिन यह धातु नहीं है। यह गैस अवस्था में रहता है, विद्युत अपघट्य नहीं है
    • हाइड्रॉक्साइड नहीं बनाता, बल्कि H⁺ या H⁻ आयन बनाकर अम्ल या क्षार दोनों का व्यवहार कर सकता है।
    • इसलिए, कई वैज्ञानिक इसे समूह 1 से अलग या समूह 17 (हैलोजन) के साथ भी जोड़ते हैं।
  • क्यों हाइड्रोजन अलग है
    • हाइड्रोजन के गुण समूह 1 के अन्य तत्वों से भिन्न हैं
    • क्योंकि इसकी आयनन ऊर्जा बहुत अधिक है और यह ठोस धातु नहीं बनाता।
    • क्षारीय धातुएँ नरम, चमकीली और कम घनत्व वाली होती हैं
    • जबकि हाइड्रोजन गैस है। आधुनिक आवर्त सारणी में इसकी स्थिति विवादास्पद बनी हुई है
    • लेकिन सामान्यतः इसे समूह 1 का पूर्ण सदस्य नहीं माना जाता।

16. आईयूपीएसी (IUPAC) नामकरण संकेतन के अनुसार, आवर्त सारणी में किस परमाणु क्रमांक वाले तत्व को सिबोगियम नाम दिया गया है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 106
Solution:
  • आईयूपीएसी (IUPAC) नामकरण संकेतन के अनुसार, आवर्त सारणी में परमाणु क्रमांक 106 वाले तत्व को सिबोगियम नाम दिया गया है।
  • सिबोगियम एक संश्लेषित रासायनिक तत्व है। इसका प्रतीक Sg है।
  • खोज और नामकरण इतिहास
    • सिबोगियम की खोज 1974 में लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी (कैलिफोर्निया) के वैज्ञानिकों ने की
    • जहाँ क्यूरियम पर कैल्शियम आयनों की बमबारी से इसका संश्लेषण हुआ।
    • प्रारंभ में नाम विवाद हुआ—सोवियत वैज्ञानिकों ने इसे "झोलियो" नाम देना चाहा
    • लेकिन 1997 में IUPAC ने सिबोगियम को मान्यता दी।
    • यह पहला तत्व था जिसका नाम जीवित व्यक्ति के सम्मान में रखा गया।
  • भौतिक और रासायनिक गुण
    • सिबोगियम अत्यधिक रेडियोधर्मी है
    • सबसे स्थिर समस्थानिक ^{266}Sg का आधा-आयु मात्र 2.4 मिनट है।
    • इसका अनुमानित परमाणु भार 271 u है
    • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Rn] 5f¹⁴ 6d⁴ 7s² है।
    • यह ठोस संक्रमण धातु के रूप में अपेक्षित है
    • जो +3, +4, +6 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित कर सकता है।

17. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) परमाणु त्रिज्या आवर्त सारणी में किसी आवर्त में आगे की ओर बढ़ते हुए घटती है और किसी समूह में नीचे की ओर जाते हुए बढ़ जाती है।
Solution:
  • परमाणु त्रिज्या आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं ओर बढ़ते हुए घटती है
  • किसी समूह में नीचे की ओर जाते हुए बढ़ जाती है।
  • समूह में नीचे जाने पर ऊर्जा स्तरों की संख्या में वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या में वृद्धि होती है।
  • अभाज्य और यौगिक संख्याओं की परिभाषा
    • अभाज्य संख्या वह होती है जिसके ठीक दो भिन्न धनात्मक भाजक होते हैं
    • 1 और स्वयं संख्या, जैसे 2, 3, 5, 7।
    • यौगिक संख्या के दो से अधिक भिन्न धनात्मक भाजक होते हैं, जैसे 4 (1, 2, 4), 6 (1, 2, 3, 6)।
    • 1 के केवल एक भाजक है - स्वयं 1 - इसलिए यह दोनों श्रेणियों में फिट नहीं बैठती।
  • 1 को अभाज्य क्यों नहीं माना जाता?
    • अभाज्य संख्याओं की आधुनिक परिभाषा (यूक्लिड से लेकर आज तक) स्पष्ट करती है
    • संख्या के ठीक दो भिन्न भाजक होने चाहिए।
    • 1 के मामले में यह शर्त पूरी नहीं होती, क्योंकि 1/1 = 1 ही एकमात्र तरीका है।
    • यदि 1 को अभाज्य मानें तो मूलभूत प्रमेय विघटन (Fundamental Theorem of Arithmetic) प्रभावित होता
    • जहाँ प्रत्येक संख्या अभाज्य संख्याओं का अद्वितीय गुणनफल होती है।
  • अन्य कथनों का खंडन
    • 1 को अभाज्य और यौगिक दोनों मानना असंभव है, क्योंकि परिभाषाएँ परस्पर विरोधी हैं।
    • केवल अभाज्य कहना गलत है, क्योंकि भाजकों की संख्या दो नहीं।
    • केवल यौगिक कहना भी गलत, क्योंकि यौगिक के लिए दो से अधिक भाजक अनिवार्य।

18. समूह में नीचे जाने पर परमाणु आकार का क्या होता है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) बढ़ता है
Solution:
  • आवर्त सारणी के समूह में नीचे जाने पर परमाणु के आकार में वृद्धि होती है।
  • समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर इलेक्ट्रॉन आकर्षण कम हो जाता है तथा कक्षक संख्या में वृद्धि होती है।
  • आवर्त सारणी के किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता जाता है।
  • यह रासायनिक गुणधर्मों की आवर्ती प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  • कारण
    • समूह में नीचे जाने पर तत्वों के परमाणु क्रम संख्या बढ़ती है
    • जिससे नाभिक में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है।
    • लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि नई इलेक्ट्रॉन कोश (ऊर्जा स्तर या शेल) जुड़ जाती है
    • जो नाभिक से सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों को और दूर धकेल देती है।
    • आंतरिक कोशों के इलेक्ट्रॉन नाभिक के धनात्मक आवेश को आंशिक रूप से परिरक्षित (shielding effect) कर देते हैं
    • जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आकर्षण कम हो जाता है।
    • परिरक्षण प्रभाव (screening effect) के कारण नाभिक का खिंचाव कमजोर पड़ता है
    • जबकि कोशों की संख्या बढ़ने से परमाणु त्रिज्या में वृद्धि होती है।
    • समूह के तत्वों में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान रहती है
    • इसलिए प्रोटॉनों की वृद्धि बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर सीधे प्रभाव नहीं डालती।
  • उदाहरण
    • प्रथम समूह (क्षारीय धातुओं) में लिथियम (Li) का परमाणु आकार सबसे छोटा है
    • जबकि सीज़ियम (Cs) का सबसे बड़ा। Li से Cs तक जाते हुए कोशों की संख्या 2 से 6 हो जाती है
    • (K, L, M, N, O, P), जिससे आकार कई गुना बढ़ जाता है।
  • प्रभाव अन्य गुणों पर
    • परमाणु आकार बढ़ने से आयनीकरण ऊर्जा घटती है, क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं।
    • विद्युत धनात्मकता कम हो जाती है और धात्विक गुण बढ़ते हैं।
    • प्रतिक्रियाशीलता क्षारीय धातुओं में बढ़ती है, जबकि हैलोजनों में घटती है।
  • अपवाद और सीमाएँ
    • d-ब्लॉक और f-ब्लॉक तत्वों में लanthanide और actinide संकुचन (contraction) के कारण आकार वृद्धि कम होती है
    • क्योंकि आंतरिक d/f इलेक्ट्रॉन परिरक्षण प्रभावी नहीं होते।
    • लेकिन मुख्य समूहों (s/p ब्लॉक) में यह नियम स्पष्ट रूप से लागू होता है।
    • वास्तविक मापन क covalent radius, van der Waals radius या ionic radius से किया जाता है।

19. आवर्त सारिणी के समूह 1 की कौन-सी नरम धातु हवा के संपर्क में आने के कुछ सेकंड के भीतर धूमिल हो जाती है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) सोडियम
Solution:
  • आवर्त सारिणी के समूह 1 की सोडियम एक नरम धातु है
  • जो हवा के संपर्क में आने के कुछ सेकंड के भीतर धूमिल हो जाती है।
  • यह पानी के साथ भी तीव्र प्रतिक्रिया करता है।
  • इसका प्रतीक Na है। सोडियम की परमाणु संख्या 11 है
  • रासायनिक प्रतिक्रियाएँ
    • सोडियम हवा में ऑक्सीजन से सोडियम पेरोक्साइड (Na₂O₂) या सोडियम ऑक्साइड (Na₂O) बनाता है
    • जो सफेद परत के रूप में चमक को ढक देती है। नमी मौजूद होने पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) भी बनता है
    • जो धूमिलपन को तेज करता है ।यह प्रतिक्रिया 4Na + O₂ → 2Na₂O के रूप में होती है
    • जो सोडियम की उच्च अभिक्रियाशीलता (निम्न आयनन ऊर्जा के कारण) से संभव है ।
  • भौतिक गुण
    • सोडियम चांदी-सफेद, अत्यधिक नरम धातु है जिसे चाकू से काटा जा सकता है।
    • इसका गलनांक 97.8°C और घनत्व 0.97 g/cm³ है
    • जो इसे समूह 1 में सबसे उपयोगी बनाता है
    • हवा में तुरंत धूमिल होने से बचाने के लिए इसे मिट्टी के तेल या केरोसिन में रखा जाता है ।
    • सोडियम विशेष रूप से "कुछ सेकंडों में धूमिल" वाली विशेषता के लिए जाना जाता है
    • जबकि पोटेशियम जल्दी आग पकड़ लेता है ।
  • उपयोग और सावधानियाँ
    • सोडीयम का उपयोग रासायनिक संश्लेषण, स्ट्रीट लाइट्स और परमाणु रिएक्टरों (ठंडक के लिए) में होता है।
    • प्रयोगशालाओं में इसे नाइट्रोजन वातावरण में संभाला जाता है
    • ताकि धूमिल न हो ।इसकी उच्च प्रतिक्रियाशीलता से आग का खतरा रहता है, इसलिए कभी