Correct Answer: (b) महानदी और गोदावरी
Solution:- महानदी तथा गोदावरी प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र का भाग हैं।
- महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा नामक स्थान से होता है
- जबकि गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र में नासिक के निकट त्र्यंबकेश्वर से निकलती है। ये दोनों नदियां बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
- उत्पत्ति और भू-विज्ञानीय पृष्ठभूमि
- प्रायद्वीपीय भारत का भू-तट पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाले प्रमुख नदियों के साथ गंगा-बंगाल की खाड़ी जैसे बड़े जल-समुदायों से अलग जल-निकासी दर्शाती हैं।
- इस भाग में गहराई से जल का प्रवाह और नदी घाटियों की संरचना (V-आकार बनाम खुली V-आकार) दिखती है
- [web स्रोतों के अनुसार, प्रायद्वीपीय भूगोल में नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं
- अरब सागर में गिरने वाली कुछ नदियाँ समानांतर प्रतिरूप बनाती हैं] ।
- प्रमुख नदियाँ और उनके तंत्र
- गोदावरी तंत्र: सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी प्रणाली मानी जाती है; महाराष्ट्र के नासिक से निकलकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जन करती है।
- इसकी सहायक नदियाँ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से होकर गुजरती हैं।
- इसे अक्सर दक्षिण गंगा कहा जाता है क्योंकि इसका विशाल जल-स्तर और डेल्टा बनना गंगा-यमुना तंत्र से संकेत मिलते हैं ।
- कृष्णा-कावेरी और अन्य प्रमुख प्रणालियाँ: प्रायद्वीपीय नदियाँ सामान्यतः पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं
- कई बार रामायण-सी रेखाओं के समान जल-स्तर बनते हैं; कुछ नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं
- कुछ बंगाल की खाड़ी में। कृष्णा और कावेरी जैसे तंत्र इन भू-तट से संबद्ध हैं ।
- जल-गृह और प्रवाह-विधि
- प्रायद्वीपीय नदियाँ आम तौर पर वृद्ध अवस्था के होते हैं
- तेजी से कटाव के बजाय नदी घाटियों को चौड़ा-उथला बनाती है
- जिससे इनका जल प्रवाह तुलनात्मक ढंग से मंद रहता है। अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ अक्सर डेल्टा-समेत स्पष्ट प्रकार के जल-प्रवाह बनाती हैं
- जबकि गोदावरी जैसे तंत्र बंगाल की खाड़ी की ओर विसर्जित होते हैं।
- यह भू-आकृतिक संरचना प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र की विशिष्ट पहचान है ।
- तुलनात्मक सार
- हिमालयी: युवा अवस्था, ऊँचे ढाल, बारहमासी नदियाँ, गंगा-यमुना- ब्रह्मपुत्र आदि की प्रणाली प्रमुख।
- ये बंगाल की खाड़ी वाले जल-समुदाय से जुड़ती हैं और ऊँचे हिमानी पिघलाव पर निर्भर होती हैं।
- प्रायद्वीपीय: आर्द्र-स्थिर जल-निष्कासन, पुरानी अवस्था, पश्चिमी घाट/अरावली के जल-बंध से जल एक-चैनल से पूर्व की ओर बहता है
- अरब सागर या बंगाल की खाड़ी में गिरता है, गोदावरी जैसी विशाल प्रणाली इसे परिभाषित करती है ।
- महत्वपूर्ण उद्धरण और स्रोत संकेत
- प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र की प्रमुख नदियाँ: गोदावरी, महानदी, कृष्णा-कावेरी इत्यादि; गोदावरी सबसे बड़ी प्रमुख प्रणाली के रूप में वर्णित है ।
- गोदावरी के जल-निर्वहन का बंगाल की खाड़ी में होना और प्रायद्वीपीय भू-रचना के अनुसार नदियाँ पश्चिम से पूर्व तक बहना सामान्य प्रवृत्ति है ।
- अन्य मॉड्यूलों और नोट्स के अनुसार भी गोदावरी, महानदी आदि प्रायद्वीपीय तंत्र के केंद्रीय भाग माने जाते हैं ।
- संकेतित स्पष्टिकरण
- सवाल का शीर्षक-ध्यान: “नदियों का समूह प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र का भाग है?” के लिए उत्तर में प्रमुख समूह वे नदियाँ हैं
- जो प्रायद्वीपीय भारत की जल-निकासी तंत्र के अंतर्गत आती हैं; इनमें गोदावरी-तंत्र सबसे बड़ा और प्रमुख उदाहरण है
- साथ ही कृष्णा-कावेरी और महानदी आदि भी शामिल हैं ।
- सामान्य पाठ्यपुस्तक-प्रस्तुति के अनुसार प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र का मानक संकलन: गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी, ताप्ती-नर्मदा आदि, जिनका जल अरब सागर या बंगाल की खाड़ी में गिरता है
- भू-आकृतिक कारणों से पश्चिम से पूर्व की ओर बहना सामान्य प्रवृत्ति है ।