आर्थिक भूगोल (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 12

1. निम्नलिखित में से कौन-से देश में दुनिया का सबसे बड़ा कृषि भूमि क्षेत्र है? [कांस्टेबल GD 2 मार्च, 2019 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) संयुक्त राज्य अमेरिका
Solution:
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व का सबसे बड़ा कृषि भूमि क्षेत्र है। कृषि भूमि क्षेत्र के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है।
  • नीचे विस्तृत विवरण दिया जा रहा है:
    • प्रमुख तथ्य: CIA World Factbook, विश्व के कृषि योग्य भूमि क्षेत्र की गणना में USA को अग्रणी दिखाता है, उसके बाद चीन और भारत आते हैं.​
    • माप और संदर्भ: कृषि योग्य भूमि क्षेत्र वह हिस्सा है
    • जो खेती के लिए उपयुक्त है और स्थायी तौर पर खेती/पशुपालन के लिए इस्तेमाल होता है
    • USA के पास विशाल भूभाग होने के कारण उसका कृषि योग्य क्षेत्र सबसे अधिक माना जाता है.​
    • अन्य स्रोतों की पुष्टि: विभिन्न शैक्षणिक और शिक्षण प्लेटफॉर्म्स USA को विश्व में सबसे बड़े कृषि भूमि क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध करते हैं
    • जबकि चीन और भारत क्रमशः दूसरी और तीसरी स्थितियों में आते हैं.​
    • नोट: कुछ साइटों पर आंकड़े साल दर साल अपडेट होते हैं
    • सामान्यतः 1.6 करोड़ से 1.7 करोड़ वर्ग किलोमीटर के दायरे में USA का कृषि भूमि क्षेत्र दर्ज किया जाता है।​
  • क्यों questo महत्वपूर्ण है:
    • कृषि भूमि क्षेत्र का आकार सीधे उत्पादन क्षमता, खाद्यान्न सुरक्षा और कृषि योग्य संसाधनों के बराबरी वितरण को प्रभावित करता है।
    • विकसित देशों में उन्नत कृषि तकनीक, सिंचाई और फसल की विविधता इसे अधिक प्रभावी बनाती है
    • भले ही भूमि का भाग तुलनात्मक रूप से छोटा हो, लेकिन USA का क्षेत्रफल इतना बड़ा है
    • यह कुल मिलाकर उच्चतम संयुक्त उत्पादन क्षमता देता है।​

2. निम्नलिखित में से कौन-सी हरित क्रांति की एक अनिवार्य विशेषता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) HYV बीजों से फसल उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
Solution:
  • हरित क्रांति के पश्चात HYV बीजों से फसल उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
  • मुख्य विशेषताएं
    • ये बीज आनुवंशिक रूप से संशोधित होते हैं
    • जो सामान्य बीजों से 2-3 गुना अधिक उपज देते हैं।​
    • भारत में एम.एस. स्वामीनाथन ने इनका विकास किया
    • जिससे गेहूं और चावल का उत्पादन तेजी से बढ़ा।​
  • अन्य सहायक तत्व
    • रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का व्यापक उपयोग फसलों को रोगों से बचाता है।​
    • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, जैसे ट्यूबवेल और नहरें, वर्षा पर निर्भरता कम करता है।​
    • कृषि यंत्रीकरण और दोहरी फसल प्रणाली ने उत्पादकता को दोगुना कर दिया।​
  • भारत में प्रभाव
    • 1960 के दशक में शुरू हुई हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न आत्मनिर्भर बनाया।​
    • गेहूं उत्पादन 1965-66 में 10 मिलियन टन से 1970-71 में 20 मिलियन टन हो गया।​
    • पंजाब, हरियाणा जैसे क्षेत्रों में यह सबसे सफल रही, लेकिन छोटे किसानों को सीमित लाभ मिला।

3. वृक्ष और झाड़ियों की खेती ....... कहलाती है [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अर्बोरीकल्चर
Solution:
  • अर्बोरीकल्चर वृक्षों और झाड़ियों की खेती है
  • जिसमें भू-निर्माण, लकड़ी उत्पादन और संरक्षण जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए वृक्षों और झाड़ियों का रोपण, देखभाल और रखरखाव शामिल हैं।
  • क्या है वृक्षारोपण खेती
    • परिभाषा: वृक्षों और झाड़ियों की खेती जिसमें बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे रोपे जाते हैं
    • ताकि लकड़ी, फल, चारा, आय और मिट्टी की गुणवत्ता जैसी विविध उपज प्राप्त की जा सके।
    • यह एक बहु-उपयोगीय कृषि व्यवस्था है जिसमें भूमि की सतह पर अधिकांश पादप स्थिर रहते हैं
    • पेड़/झाड़ियाँ प्रमुख रहते हैं [ भेजी गई सामग्री के अनुसार सामान्य रूप से समझा गया ].
    • उद्देश्य: आय बढ़ाना, लकड़ी/फल/चारा उत्पादन, भूमि सुरक्षा (ईrosion नियंत्रण), प्राकृतिक जैव विविधता और जल चक्र में सुधार, साथ ही उपभोक्ता बाजार के अनुसार उत्पादित चीजें (फल, फलों के पेड़, चाय/कॉफी/कागज़ आदि) का उत्पादन।
  • क्या-क्या शामिल होता है
    • रोपण क्रम और चयन: पेड़ों के प्रकार का चयन स्थानीय जलवायु, मिट्टी की प्रकृति और बाजार मांग के अनुरूप किया जाता है
    • (जैसे नीम, शीशम, आम आदि अक्सर जूनियर/मध्यावस्था के पेड़ के तौर पर लगे जाते हैं)।
    • देखभाल: शुरुआती वर्षों में सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, पोषक तत्व संतुलन (गोबर खाद आदि) और नुकसानदायक pests/रोगों की रोकथाम।
    • उत्पादन: पेड़ से मिलने वाली जैसे फल, लकड़ी, चारा आदि एकत्रित कर बाजार में बेचे जाते हैं
    • साथ ही जैव विविधता और पर्यावरणीय लाभ भी प्राप्त होते हैं।
  • लाभ और चुनौतियाँ
  • लाभ:
    • आय के विविध स्रोत: पेड़-झाड़ियाँ आय के स्थिर धारा बनाते हैं (फल, लकड़ी, चारा, बायोमास)।
    • मिट्टी की उर्वरता और संरक्षा: नाइट्रोजन-फिक्सिंग प्रजातियाँ या पत्तों का गिरना मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।
    • मौसम-रोधी आय: अधिकांश एग्रीफोरेस्ट्री मॉडल वर्ष-दर-वर्ष आय दे सकते हैं, जिससे जोखिम कम होते हैं।
  • चुनौतियाँ:
    • शुरुआती लागत और लम्बा समय-काल: फल/लकड़ी के पेड़ों को लाभ देने में समय लगता है।
    • बाजार और मूल्य अस्थिरता: बाजार मांग के अनुसार कीमतें ऊपर-नीचे हो सकती हैं।
    • कृषि-व्यवस्था की जरूरतें: सही पेड़ चयन, गम्य-जलवायु, मिट्टी परीक्षण और उचित देखभाल की आवश्यकता।
  • कैसे शुरू करें
    • स्थानीय सलाह: अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र, वन विभाग या किसान प्रशिक्षण केंद्र से मार्गदर्शन लें; प्रमाणित पौधे और तकनीकी सहायता मिल सकती है।
    • भूमि तैयारी: मिट्टी परीक्षण करवाकर पर्याप्त गोबर खाद/जैव उर्वरक डालना, जल निकासी का ध्यान रखना।
    • पेड़ चयन: क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी की उर्वरता और बाजार मांग के अनुसार पेड़ चुनें (उदा. नीम, शीशम, आम आदि सफल विकल्प हो सकते हैं)।
    • प्लांटेशन प्लान: एक हेक्टेयर पर 100-150 पेड़ एक सामान्य योजना हो सकती है
    • लेकिन यह स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
    • रिसोर्सेज और सपोर्ट: सरकार की बागवानी/कृषि योजनाओं का लाभ उठाएं (ग्रांट, सब्सिडी, मुफ्त पौधे आदि) और क्षेत्रीय पोर्टलों पर रजिस्टर करें।
  • संबंधित शब्दावली
    • आर्बोरिकल्चर – वृक्षों और झाड़ियों की खेती/देखभाल का विज्ञान।
    •  वृक्षारोपण खेती के लिए प्रयुक्त सामान्य शब्द।
    •  कृषि-विद्या में पेड़-पौधों का समायोजन करके बहु-उपयोगी प्रणालियाँ।

4. कपास उगाने के लिए कितने पाला रहित दिनों की आवश्यकता होती है? [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 210
Solution:
  • पौधों के जीवित रहने और निर्बाध विकास को सुनिश्चित करने के लिए कपास की खेती के लिए विशेष रूप से पाला रहित लगभग 210 दिनों की आवश्यकता होती है।
  • विस्तृत जानकारी:
    • पाला कपास की फसल के लिए प्रमुख खतरा होता है।
    • धूप और गर्म तापमान में कपास बेहतर बढ़ता है, इसलिए पाला मुक्त मौसम जरूरी माना जाता है।
    • शोध और पाठ्य सामग्री के अनुसार कपास के विकास चक्र के लिए कम से कम लगभग 210 पाला रहित दिन चाहिए आते हैं
    • ताकि पौधा पर्याप्त समय पनप सके, फूल आ सकें और फसल पूरी तरह से परिपक्व हो सके.​
    • तापमान और वर्षा का संतुलन भी अहम है: कपास उच्च तापमान को पसंद करती है
    • वर्षा पर्याप्त होनी चाहिए लेकिन फूल आने के समय से पहले शुष्क मौसम लाभदायक रहता है
    • ताकि बोंडिंग और फसल की गुणवत्ता बेहतर हो सके.​
    • कुछ स्रोतों में यह संख्या ±20–30 दिन तक भिन्न दिख सकती है
    • जैसे 150–180 दिन के संदर्भ भी मिलते हैं
    • लेकिन व्यापक रूप से “210 पाला रहित दिन” एक सामान्य मानक के रूप में उद्धृत किया जाता है.​
  • कौन से कारक मायने रखते हैं:
    • रोपण के समय से लेकर कटाई तक कुल मौसम अवधि: frost-free अवधि का मतलब ऐसी दिन(s) जिनमें तापमान 0°C से नीचे नहीं जाता।
    • गिरावट/पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान के उतार-चढ़ाव, वर्षा की मात्रा, और धूप का समय—ये सभी मिलकर विकास चक्र को प्रभावित करते हैं।
    • फसल के लिए उचित कुँजी जलवायु: गर्म वातावरण में जन्म से फूल तक की प्रक्रिया बेहतर होती है
    • फसल के कुछ चरणों में हल्की वर्षा या सिंचाई आवश्यक हो सकती है ताकि पौधे मजबूत हों और फसल अच्छी बने.​
  • दिशानिर्देश अगर आप स्थानीय खेती के लिहाज से योजना बना रहे हों:
    • स्थानीय मौसम डेटा देखें: अंतिम ठंडे दिन कब तक प्रचलित रहते हैं
    • कब से पाला-रहित मौसम शुरू होता है।
    • खेत की स्थितियाँ मूल्यांकन करें: ऊँचाई, मिट्टी की जलधारणा, और कि बारिश कैसे वितरित होती है
    • ये सभी पाले-रहित दिनों के प्रभाव को बदला सकते हैं।
    • विविधीकरण और बीमा विकल्प पर विचार करें: किसी क्षेत्र में यदि पाले की घटनाओं की संभावना अधिक हो
    • तो कटाई चक्र को समायोजित करने के उपाय अपनाएं (जैसे संकेन्द्रीय बुआई तिथियां, वैकल्पिक फसल)।

5. रोपण कृषि के मुख्य क्षेत्र विश्व के ....... प्रदेशों में पाए जाते हैं। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) उष्णकटिबंधीय
Solution:
  • रोपण कृषि के मुख्य क्षेत्र विश्व के उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में पाए जाते हैं।
  • थाईलैंड में प्राकृतिक रबड़, ब्राजील में कहवा, भारत और चीन में चाय इसके कुछ उदाहरण हैं।
  • क्षेत्रीय उदाहरण:
    • चाय: भारत, श्रीलंका, भारत के कुछ पहाड़ी क्षेत्र; अन्य एशिया के उष्णकटिबंधीय पहाड़ी क्षेत्र।
    • रबड़: मॉनसून एशिया के देशों में प्रमुख; मालेशिया, इंडोनेशिया आदि में व्यापक उत्पादन.​
    • कॉफी: ब्राज़ील शीर्ष उत्पादक, अन्य देशों में भी रोपण कृषि पाये जाते हैं; भारत आदि में भी कॉफी उत्पादन होता है.​
    • अन्य नकदी फसलें: कहवा (कॉफी के निकट), नारियल, मसाले आदि भी रोपण कृषि के अंतर्गत आते हैं.​
  • 특징 और परिचालन:
    • यह एक एकल फसल कृषि है
    • जिसमें बड़े पैमाने पर श्रम-पूँजी निवेश, विस्तृत क्षेत्र, उन्नत तकनीकों, प्रबंधन और प्रसंस्करण इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है.​
    • उत्पादन का प्रसंस्करण खेतों पर या निकट के कारखानों में किया जाता है
    • जिससे परिवहन-जाल (supply chain) का महत्व बढ़ जाता है.​
    • रोपण कृषि का विकास विशिष्ट उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में हुआ है
    • यह क्षेत्रीय उद्योग, विदेशी पूंजी और प्रबंधित कृषि तकनीकों पर निर्भर करता है.​
  • क्यों यह जानकारी कहीं अधिक उपयोगी है
    • यदि अध्ययन/उपयोग हेतु क्षेत्र-विशिष्ट डेटा चाहिए (जैसे किसी विशिष्ट देश में कौन-सी फसल प्रमुख है
    • किस क्षेत्र में कौन-सी फसल उगाई जाती है), तो एक स्पष्ट देश/भू-भाग चुनकर संबंधित आधिकारिक कृषि आंकड़े देखना बेहतर रहता है।
    • रोपण कृषि के बारे में आपकी रुचि यदि किसी खास फसल (जैसे रबड़ या चाय) या क्षेत्र (जैसे भारत के नीलगिरि क्षेत्र) तक सीमित है
    • तो उसे पूछकर अधिक सटीक विवरण दिया जा सकता है।

6. चावल की खेती के लिए ....... के साथ-साथ अत्यधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। [MTS (T-I) 04 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) उच्च तापमान और अधिक आर्द्रता
Solution:
  • चावल की खेती के लिए उच्च तापमान और अधिक आर्द्रता की आवश्यकता होती है।
  • चावल एक खरीफ फसल है और इस फसल के लिए कम-से-कम 100 सेमी. की औसत वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • पर्यावरणीय आवश्यकताएं
    • तापमान: चावल की फसल के लिए औसत तापमान लगभग 21–37°C के बीच उत्तम माना जाता है
    • तापमान 35°C से ऊपर या 10°C से नीचे लंबे समय तक रहने पर नुकसान हो सकता है।
    • आर्द्रता: फसल के पूरे विकास चक्र में उच्च आर्द्रता सहायक रहती है
    • जलयुक्त परिस्थितियाँ रोगप्रतिकारिता और पोषक तत्व अवशोषण के लिहाज़ से महत्वपूर्ण होती हैं।
    • जबकि कुछ क्षेत्रों में सिंचाई द्वारा वर्षा कमी को पूरा किया जाता है।
    • अधिक वर्षा से खेत बाढ़ग्रस्त हो सकते हैं यदि जल निकासी बेहतर न हो।
  • मिट्टी और स्थलरचना
    • उपयुक्त मिट्टी: जल-धारण_capacity और उर्वरता अच्छी होने के बावजूद जल-जमाव सहन करने की क्षमता वाली दोमट/जलोढ़ मिट्टियाँ सबसे उपयुक्त रहती हैं
    • नदी डेल्टा और डेल्टा-डेल्टा जैसी मृदाओं में चावल अच्छी तरह उगता है।
    • भूमि स्तर: समतल या ढलान पर सीढ़ीदार खेत बनाकर खेती की जाती है ताकि पानी का नियंत्रण संभव हो सके।
  • जल प्रबंधन
    • पंक्ति में जल-स्थापना: नहरों, पानी के स्रोतों, और बाढ़-रोधी उपायों की उपस्थिति आवश्यक होती है
    • ताकि रोपण से लेकर कटाई तक पानी की उपलब्धता संतुलित रहे।
    • सिंचाई बनाम वर्षा-आधारित: अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में भी जल-प्रबंधन के ठीक से किया जाए तो चरम जल-संकट से बचा जा सकता है
    • कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता बढ़ जाती है।
  • भूगोलिक वितरण
    • व्यापक रूप से चावल की खेती उष्णकटिबंधीय और गर्म आर्द्र क्षेत्रों में की जाती है
    • नदी घाटियाँ, डेल्टा क्षेत्र और समतल मैदानी इलाके जहां जल-प्रचुरता और मिट्टी की उपजाऊ गुणवत्ता बेहतर हो, वहां फसल अच्छी होती है।
  • उत्पादन के लिए अतिरिक्त नोट
    • रोपण समय: उत्तम पानी-युक्त खेतों में खरीफ मौसम में रोपण किया जाता है
    • काटने का समय स्थानिक मौसमवार्ता के अनुसार तय होता है।
    • मजदूदास्री और मांग: चावल की खेती में उन्नत उपायों के साथ बड़े पैमानے पर मजदूरी की मांग रहती है
    • इसलिए क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक माहौल का भी प्रभाव पड़ता है।

7. ....... दुनिया में बॉक्साइट (bauxite) का सबसे बड़ा उत्पादक है। [CHSL (T-I) 15 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) ऑस्ट्रेलिया
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक देश है।
  • वर्ल्ड मिनिरल प्रोडक्शन 2018- 22 के अनुसार, गिनी विश्व में बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
  • मुख्य निष्कर्ष
    • ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक देश है।
    • इसका वैश्विक उत्पादन में बड़ा हिस्सा और भंडार का प्रमुख भाग ऑस्ट्रेलिया के पास माना जाता है।​
  • विश्व स्तर पर बॉक्साइट का वितरण और स्थिति
    • वैश्विक उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया का हिस्सा लगभग एक-तिहाई के आसपास और बॉक्साइट भंडार का बड़ा भाग ऑस्ट्रेलिया में स्थित है
    • जबकि गिनी, ब्राजील, चीन और भारत भी प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में आते हैं।
    • यह स्थिति समय के साथ कुछ हद तक değişim दिखाती है
    • परंतु अधिकांश स्रोत ऑस्ट्रेलिया को आगे मानते हैं।​
    • जो इसे शीर्ष स्थान पर बैठाता है।​
  • आकलन के लिए उपयोगी संदर्भ
    • सामान्य तौर पर बॉक्साइट एक एल्यूमीनियम बनाने के लिए आवश्यक प्रमुख अयस्क है
    • जिसमें बॉक्साइट से एल्यूमीना बनती है
    • फिर अल्यूमीनियम के पिघलन/उत्पादन के क्रम में फिर से संसाधित होती है।
    • ऑस्ट्रेलिया में बॉक्साइट के स्रोतों की प्रचुरता और खनन क्षमता इसे वैश्विक आपूर्ति में उच्च स्थान पर रखती है।​
  • यदि चाहें, तो निम्न अतिरिक्त बिंदुओं पर भी विस्तार किया जा सकता है:
    • ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख बॉक्साइट क्षेत्र कौन से हैं और उनके उत्पादन के प्रमुख राज्य/क्षेत्र कौन से हैं?
    • बॉक्साइट के खनन से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव और सतत खनन के उपाय क्या हैं?
    • बॉक्साइट उत्पादन and एल्यूमीनियम प्रसंस्करण में चीन, गिनी, ब्राजील, और भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?

8. वित्त वर्ष (FY) 2020-21 के लिए कौन-सा देश दुनिया में कच्चे इस्पात का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) भारत
Solution:
  • प्रश्नकाल तथा वर्तमान में भी भारत दुनिया में कच्चे इस्पात का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • स्टील एक मिश्र धातु या धातुओं का मिश्रण है, जो मुख्य रूप से लोहे और कार्बन से बना है।
  • वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन के अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, विश्व में कच्चे इस्पात का सबसे बड़ा उत्पादक देश चीन है।
  • पर विस्तृत विवरण:
    • संदर्भ और रैंकिंग ने स्पष्ट किया है
    • 2020-21 के दौरान चीन ने विश्व के कच्चे इस्पात उत्पादन में सबसे ऊँचा स्थान बनाए रखा।
    • यह स्थिति सामान्यतः विश्व स्टील संस्था (World Steel Association) के वार्षिक आंकड़ों के साथ ही उद्धृत होती है ।​
    • उसी वर्ष भारत ने कच्चे इस्पात का उत्पादन बढ़ाते हुए वैश्विक शृंखला में दूसरा स्थान प्राप्त किया
    • जिसकी पुष्टि भारत सरकार के प्रेस बयानों और PIB के सार्वजनिक उद्घोषणाओं से मिलती है ।​
    • उस FY में भारत ने कच्चे इस्पात के उत्पादन के साथ-साथ घरेलू मांग, आयात-निर्यात तालमेल, और निर्माण-उद्योगों के लिए जरूरी आपूर्ति श्रृंखलाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की थी
    • जो द्वितीय स्थान के तंत्र को स्थिर बनाये रखने में सहायक रहा ।​
  • विस्तार से समझाने के कुछ बिंदु:
    • चीन का प्रभाव और मात्रा: चीन का कच्चे इस्पात उत्पादन विश्व स्तर पर हमेशा उच्च रहा है
    • 2020-21 में भी यह स्थिति बनी रही। चीन की विशाल उत्पादन क्षमता और निरंतर बढ़ती मांग इसे शीर्ष पर बनाए रखती है ।​
    • भारत की उन्नति: 2020-21 तक भारत ने अपने इस्पात क्षेत्र में क्षमता, उत्पादन और निर्यात-आयात संतुलन में काफी सुधार किया।
    • सरकार की घोषणाओं के अनुसार भारत ने 2018-19 से 2022-23 के बीच विशेष प्रगति दर्शायी और 2020-21 में भी वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर पहुँचा
    • संदर्भित स्रोत: PIB/सरकारी प्रेस रिलीज़ तथा PIB पन्नों द्वारा FY 2020-21 और उसके बाद के वर्षों में भारत के रैंकिंग और उत्पादन के आंकड़े साझा किए जाते हैं
    • जिन्हें आधिकारिक पुष्टि के तौर पर देखा जा सकता है ।​

9. कुद्रेमुख की खानें निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित हैं? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) कर्नाटक
Solution:
  • कुद्रेमुख की खानें कर्नाटक राज्य में स्थित हैं। यह मुख्यतः लौह अयस्क के खनन के कारण प्रसिद्ध है।
  • विस्तार से विवरण:
    • कुद्रेमुख क्या है: कुद्रेमुख कर्नाटक के पश्चिमी घाट में स्थित एक प्रसिद्ध लौह अयस्क खनन क्षेत्र है
    • यह क्षेत्र चिक्कमगलुरु जिले के भीतर आता है
    • घाटियों-पहाड़ों से घिरा हुआ है
    • लोकेशन और भू-रचना: कर्नाटक के चिक्कमंगलूर जिले में स्थित यह पर्वतीय क्षेत्र मुल्लायनगिरि के आस-पास के क्षेत्र से ऊँचा है
    • स्थानीय स्तर पर खनन गतिविधियों के लिए जाना जाता है.
    • इतिहास और खनन: कुद्रेमुख लौह अयस्क खनन क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया था
    • सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के संचालन के कारण इसके इतिहास में खनन परियोजनाएं प्रमुख रहीं
    • हालांकि कुछ पर्यावरणीय वजहों से गतिविधियों में समय-समय पर बदलाव आए हैं.
    • अन्य संदर्भ: अनेक विश्वसनीय स्रोतों में कुद्रेमुख को कर्नाटक का एक प्रमुख लौह अयस्क केंद्र बताया गया है
    • जिससे यह राज्य के भीतर एक प्रमुख खनजन-क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है

10. 2022 तक, निम्नलिखित में से कौन-सा देश भारतीय लौह अयस्क का सबसे बड़ा आयातक (importer) है? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) चीन
Solution:
  • 2022 तक, चीन भारतीय लौह अयस्क का सबसे बड़ा आयातक था।
  • भारत दुनिया में लौह अयस्क के प्रमुख निर्यातकों में से एक है और चीन इस खनिज का सबसे बड़ा उपभोक्ता है
  • विस्तारपूर्ण उत्तर
    • पृष्ठभूमि: लौह अयस्क के वैश्विक व्यापार में प्रमुख खिलाड़ी चीन है
    • जिसका लौह अयस्क की मांग व्यापक इस्पात उत्पादन के कारण तेज रहती है।
    • भारत प्रचुर लौह अयस्क स्रोतों के बावजूद कुछ वर्षों में आयात बढ़ा कर शुद्ध आयातक बना रहा है
    • विशेषकर वैश्विक व्यापार एवं आपूर्ति श्रृंखला के बदलावों के कारण.​
    • यह स्थिति इस प्रकार है कि भारत लौह अयस्क का प्रमुख निर्यातक होने के बाद भी कई वर्षों में आयात पर निर्भर बना रहा है
    • खासकर चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों के कारण.​
    • अन्य प्रमुख आयातक (तुलनात्मक संदर्भ): ऑस्ट्रेलिया आदि अन्य बड़े लौह अयस्क उत्पादक देश हैं
    • लेकिन वे निर्यातक हैं; चीन के साथ व्यापारिक संतुलन और मांग-आपूर्ति की गतिशीलता के कारण 2022 में चीन अब भी सबसे बड़ा आयातक रहा.​
    • संदर्भ और caveats: लौह अयस्क के वैश्विक आयात-निर्यात समाचार समय-समय पर परिवर्तनशील रहते हैं
    • इसलिए 2022 के डेटा एकत्रीकरण स्रोतों के अनुसार सबसे बड़ा आयातक चीन ही माना गया है
    • स्थानीय संदर्भों में आयात-निर्यात के आंकड़े सरकारीय पोर्टल्स या उद्योग विश्लेषण में परिवर्तन हो सकते हैं.​
  • संभावित स्रोत (उद्धृत किए जाने योग्य):
    • व्यापार/विश्लेषण पन्ने जो 2022 तक चीन को भारतीय लौह अयस्क का सबसे बड़ा आयातक बताते हैं.​
    • भारतीय आयात-निर्यात पर प्रकाश डालते हुए 2018–2020 के संदर्भ में चीन की मांग और आयात की भूमिका का उल्लेख करने वाले लेख.​
    • समेकित जानकारी वाले अन्य स्रोत जो 2022 के दौरान चीन को प्रमुख आयातक मानते हैं.​