उद्योग (भारत का भूगोल)

Total Questions: 13

11. भारत का निम्नलिखित में से कौन-सा लौह और इस्पात संयंत्र बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) विशाखापत्तनम
Solution:
  • भारत का विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है।
  • यह इस्पात संयंत्र आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित है।
  • पूरा विवरण:
    • विशिष्टता: दुर्गापुर स्टील प्लांट पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर शहर के पास स्थित है
    • भारतीय इस्पात उद्योग का एक बड़ा एकीकृत संयंत्र है।
    • यह केंद्र सरकार द्वारा संचालित कंपनी के अंतर्गत आता है
    • कोयला-आधारित आपूर्ति पर आधारित बड़ी उत्पादन इकाई है।
    • [उत्पादन क्षमता, इतिहास और संरचना के संज्ञानात्मक विवरण सामान्य पाठ्य पुस्तकों में मिलता है]।
    • भौगोलिक स्थिति: बंगाल की खाड़ी के तट से थोड़ा दूर स्थित यह संयंत्र प्राकृतिक खनिज/कच्चे माल के निकटवर्ती क्षेत्रों से जलमार्ग के माध्यम से कच्चा माल प्राप्त कर सकता है
    • लेकिन स्पष्टता के लिए प्रामाणिक श्रोतों में दिखता है
    • यह क्षेत्रीय औद्योगिक रीढ़ बन चुका है। [उच्चस्तरीय संदर्भ जिक्र]।
    • इतिहास/कनेस: भारत के शुरुआती बड़े इस्पात संयंत्रों में से एक के रूप में देखा जाता है
    • इसका विकास 1950s-1960s के दशकों में हुआ और यह फ्रेमवर्क के भीतर उन्नत तकनीकी सहयोगों के साथ विकसित हुआ। [आम रूप से उपलब्ध पाठ्य सामग्री]।
    • भारत में बंगाल की खाड़ी के पास और भी कई प्रमुख लौह-इस्पात केंद्र हैं
    • जैसे जमशेदपुर (टिस्को/टाटा स्टील क्षेत्र), बोकारो (झारखंड), राउरकेला (उड़ीसा), भिलाई (छत्तीसगढ़), विशाखापट्टनम आदि।
    • इनमें से कुछ कोयला-खनीज क्षेत्रों के नज़दीकी होने के कारण बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से संबद्ध माना जाते हैं
    • मुख्य प्रश्न के अनुरोध के अनुसार पश्चिम बंगाल में स्थित और बंगाल की खाड़ी के निकट स्थित एक प्रमुख संयंत्र के रूप में दुर्गापुर सबसे उपयुक्त उत्तर है।
    • [सामान्य ज्ञान/स्थानीय इंडस्ट्री पन्ने]।
    • संक्षेप में: बंगाल की खाड़ी के तट से जुड़ा प्रमुख लौह-इस्पात संयंत्र दुर्गापुर स्टील प्लांट है
    • जो पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर जिले में स्थित है।
    • यदि चाहें, असली नाम, स्थापना वर्ष, उत्पादन क्षमता और संबद्ध संस्थाओं के साथ एक विस्तृत तालिका/सूची भी दे सकता हूँ।

12. निम्नलिखित में से कौन-सा "कृषि आधारित उद्योगों (Agro based industries)" का एक उदाहरण नहीं है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) लोहा एवं इस्पात उद्योग
Solution:
  • कृषि आधारित उद्योग में सूती वस्त्र, चीनी, चमड़ा और वनस्पति तेल से संबंधित उद्योग शामिल हैं।
  • इस उद्योग में कच्चे माल के रूप में कृषि उत्पाद का उपयोग किया जाता है।
  • लोहा एवं इस्पात उद्योग कृषि उद्योग के अंतर्गत नहीं आता है।
  • व्याख्या:
    • लोहा-इस्पात उद्योग एक खनिज आधारित उद्योग है
    • क्योंकि इसका प्रमुख कच्चा माल लौह अयस्क और कोयला है
    • जो खनिज-आधारित संसाधन हैं, न कि कृषि उत्पाद।
    • अतः इसे कृषि आधारित के बजाय खनिज/धातु-आधारित उद्योग के अंतर्गत सूचीबद्ध किया जाता है.​
  • दिशा-निर्देश:
    • अगर चाहें, नीचे एक स्पष्ट तुलना तालिका दे सकता हूँ
    • जिसमें कृषि आधारित उद्योगों के उदाहरण बनाम खनिज/धातु आधारित उद्योगों के उदाहरण दिए जाएँ
    • ताकि चयन अधिक स्पष्ट हो सके ।​
  • उद्धरण के साथ विवरण:
    • कृषि आधारित उद्योगों में चीनी, जूट, डेयरी, कपास प्रसंस्करण आदि शामिल हैं
    • ये कृषि उपज से सीधे कच्चा माल प्राप्त करते हैं.​
    • लोहा-इस्पात उद्योग का प्रमुख कच्चा माल लौह अयस्क और कोयला होता है
    • जो कृषि से नहीं जुड़ा होता, इसलिए इसे कृषि आधारित नहीं माना जाता.​

13. टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) ने सन् ....... में स्टील का उत्पादन शुरू किया था। [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 1912
Solution:
  • टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना जमशेदजी टाटा द्वारा की गई थी।
  • टिस्को झारखंड में स्थित है। वर्ष 1912 में यहां से स्टील का उत्पादन शुरू हुआ।
  • स्थापना का इतिहास
    • टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना 26 अगस्त 1907 को दोराबजी टाटा द्वारा की गई थी
    • हालांकि वास्तविक उत्पादन कार्य 1908 में शुरू हुआ।
    • जमशेदजी नुसरवानजी टाटा के विजन से प्रेरित होकर यह कंपनी बनाई गई
    • जिन्होंने लोहे और स्टील उद्योग को भारत में स्वदेशी बनाने का सपना देखा था।
  • प्रारंभिक उत्पादन क्षमता
    • शुरुआत में कंपनी की क्षमता 1,60,000 टन पिग आयरन, 1,00,000 टन इंगॉट स्टील, 70,000 टन रेल, बीम और आकृतियां तथा 20,000 टन बार, हूप्स और रॉड की थी।
    • इसमें 300 टन का हॉट मेटल मिक्सर, चार 50 टन ओपन हार्थ फर्नेस, 40 इंच रिवर्सिंग ब्लूमिंग मिल और अन्य रोलिंग मिलें शामिल थीं।
    • मूल पूंजी लगभग 2 करोड़ 31 लाख 75 हजार रुपये थी, जो उस समय के लिए बड़ी राशि थी।​
  • विकास और विस्तार
    • प्रारंभिक चुनौतियों जैसे तकनीकी समस्याओं और प्रथम विश्व युद्ध के बावजूद, कंपनी ने तेजी से प्रगति की।
    • 1955 में दो मिलियन टन कार्यक्रम शुरू हुआ, जिससे क्षमता बढ़ी।
    • 1980 के दशक में आधुनिकीकरण के चार चरणों में एलडी शॉप, सिंटर प्लांट और कोक बैटरी जैसी नई सुविधाएं जोड़ी गईं
    • जिससे क्रूड स्टील क्षमता 2.5 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई। 2000 में हॉट स्ट्रिप मिल और कोल्ड रोलिंग मिल का विस्तार हुआ।​
  • वर्तमान स्थिति
    • आज टाटा स्टील भारत की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी है, जिसकी वार्षिक क्षमता 34 मिलियन टन से अधिक है।
    • यह 26 देशों में संचालित होती है और वैश्विक स्तर पर 12वीं सबसे बड़ी स्टील उत्पादक है।
    • कंपनी लौह अयस्क उत्पादन को 2030 तक 60-65 मिलियन टन प्रति वर्ष करने की योजना बना रही है।
    • 2012 में 100 वर्ष पूरे होने पर इसकी ऐतिहासिक भूमिका को याद किया गया।​