उप-राष्ट्रपति

Total Questions: 10

1. भारत के उप-राष्ट्रपति का पद कितने वर्षों का होता है? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) पांच
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार, उप-राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से लेकर पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करते हैं।
  • हालाँकि, पाँच वर्ष की अवधि समाप्त होने पर भी, वह तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक कि उनका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता।
  • वह अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपकर या महाभियोग जैसी प्रक्रिया द्वारा पद से हटाए जाकर भी अपनी अवधि से पहले पद छोड़ सकते हैं।
  • सामान्यतः निर्धारित समय पर समाप्त होता है, हालांकि उत्तराधिकारी के पदभार ग्रहण करने तक पद पर बने रहने का प्रावधान है।​
  • संवैधानिक आधार
    • भारतीय संविधान के भाग V, अध्याय I में उपराष्ट्रपति के प्रावधान दिए गए हैं। अनुच्छेद 63 एक उपराष्ट्रपति के पद की स्थापना करता है
    • जबकि अनुच्छेद 67 स्पष्ट रूप से पदावधि को पांच वर्ष घोषित करता है। यदि पद रिक्त हो जाता है
    • जैसे इस्तीफा, मृत्यु या हटाए जाने से—तो अनुच्छेद 68 के तहत नया चुनाव होता है
    • नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति को पूर्ण पांच वर्ष का कार्यकाल मिलता है, न कि शेष अवधि।​
  • पुनर्निर्वाचन और विस्तार
    • उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होने के बावजूद पुनर्निर्वाचन की कोई सीमा नहीं है
    • जिससे वे अनिश्चित काल तक पद पर रह सकते हैं। उदाहरण के लिए, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 1952-1962 तक दो कार्यकाल पूरे किए
    • मोहम्मद हामिद अंसारी ने 2007-2017 तक दो पूर्ण कार्यकाल संभाले। कार्यकाल समाप्ति के बाद भी उत्तराधिकारी के आने तक पद धारण करना अनिवार्य है।​
  • पद रिक्ति की स्थिति
    • अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार, पद रिक्त होने पर नया उपराष्ट्रपति पूर्ण पांच वर्ष का कार्यकाल भोगेगा।
    • हालिया संदर्भों में, जैसे जगदीप धनखड़ के संभावित इस्तीफे पर चर्चा, यह स्पष्ट किया गया कि नया व्यक्ति पूरी अवधि पाएगा।
    • उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है, इसलिए यह पद कार्यकारी और विधायी दोनों भूमिकाओं का समन्वय करता है।​

2. सेवानिवृत्त होने वाले उप-राष्ट्रपति के कार्यकाल की समाप्ति की कितनी अवधि के भीतर अगले उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन होता है? [CHSL (T-I) 02 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 60 दिन
Solution:
  • संविधान के अनुच्छेद 68 के अनुसार, उप-राष्ट्रपति के पद की अवधि की समाप्ति से उत्पन्न होने वाली रिक्ति (रिक्ति) को भरने के लिए चुनाव अवधि की समाप्ति से पहले ही पूरा कर लिया जाना चाहिए।
  • हालाँकि, यदि पद उप-राष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या निष्कासन के कारण रिक्त होता है
  • तो चुनाव जितनी जल्दी हो सके (जल्द से जल्द) कराया जाना चाहिए, अक्सर दो महीने की अवधि के भीतर।
  • भारत के संविधान के अनुसार, सेवानिवृत्त होने वाले उप-राष्ट्रपति के कार्यकाल की समाप्ति के 60 दिनों के भीतर अगले उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन कराना अनिवार्य होता है।
  • यह प्रावधान उप-राष्ट्रपति के पद की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है
  • ताकि राज्यसभा के सभापति के रूप में उनकी भूमिका बिना देरी के निभाई जा सके।​
  • संवैधानिक आधार
    • उपराष्ट्रपति का चुनाव अनुच्छेद 66 के तहत संसद के दोनों सदनों के सदस्यों (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है
    • जो एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली पर आधारित होता है। कार्यकाल समाप्ति से पहले ही चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाती है
    • लेकिन यदि पद रिक्ति मृत्यु, इस्तीफा या अन्य कारणों से होती है, तो रिक्ति के बाद यथाशीघ्र (60 दिनों के भीतर) चुनाव आयोजित किया जाता है।
    • चुनाव आयोग इसकी व्यवस्था करता है, और निर्वाचन अधिकारी के रूप में संसद के महासचिवों को बारी-बारी नियुक्त किया जाता है।​
  • चुनाव प्रक्रिया
    • निर्वाचक मंडल में कुल सांसदों की संख्या के आधार पर कोटा तय होता है, जो कुल वैध वोटों को 2 से भाग देकर 1 जोड़ने से निकाला जाता है।
    • प्रत्येक सांसद अपनी प्राथमिकताओं के क्रम में वोट देता है, और गुप्त मतदान होता है। यदि कार्यकाल समाप्ति सामान्य है
    • तो 60 दिनों की समय सीमा सख्ती से लागू होती है, जबकि मध्यावधि रिक्ति में "जल्द से जल्द" चुनाव कराने का निर्देश है
    • लेकिन व्यवहार में यही 60 दिनों की सीमा मानी जाती है।​
  • नए उप-राष्ट्रपति का कार्यकाल
    • नए उप-राष्ट्रपति को बचे हुए कार्यकाल का हिस्सा नहीं मिलता; वे पद ग्रहण की तिथि से अपना पूर्ण 5 वर्षीय कार्यकाल शुरू करते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि कोई उप-राष्ट्रपति मध्य में इस्तीफा देता है, तो भी नया निर्वाचित व्यक्ति 5 वर्ष तक पद पर रहता है।
    • इस दौरान राज्यसभा के उप-सभापति अस्थायी रूप से सभापति के कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।​​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • हाल के उदाहरण में, उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई 2025 को इस्तीफे के बाद नए चुनाव की प्रक्रिया इसी 60 दिनों के भीतर शुरू होने की चर्चा हुई।
    • संविधान पद की रिक्ति को भरने में लचीलापन देता है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती के लिए समयबद्धता जरूरी है।​

3. निम्नलिखित में से कौन-सा शासकीय अधिकारी राज्य सभा का पदेन सभापति (ex-officio chairman) होता है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) भारत के उप-राष्ट्रपति
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 64 और अनुच्छेद 89(1) में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है
  • भारत के उप-राष्ट्रपति राज्य सभा (Council of States) के पदेन सभापति होंगे।
  • पदेन का अर्थ है कि जैसे ही कोई व्यक्ति उप-राष्ट्रपति का पद ग्रहण करता है
  • वह स्वतः ही राज्य सभा के सभापति का पद भी धारण कर लेता है।
  • वह राज्य सभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं।
  • जो उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति के रूप में पदेन नियुक्त करता है।​
  • संवैधानिक प्रावधान
    • अनुच्छेद 64 कहता है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और वह किसी अन्य लाभ के पद को धारण नहीं करेगा।
    • यह व्यवस्था संसदीय लोकतंत्र में उच्च सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने के लिए बनाई गई है
    • जहां उपराष्ट्रपति निष्पक्षता बनाए रखते हुए सदन की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। यदि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हों
    • तो वे सभापति के दायित्वों से मुक्त हो जाते हैं, और तब राज्यसभा के उप-सभापति या राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य कर्तव्यों का पालन करते हैं।​
  • भूमिका और कर्तव्य
    • राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति सदन की बहसों को नियंत्रित करते हैं, मतदान प्रक्रिया संचालित करते हैं
    • सदन के नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं। वे सदन में प्रश्नकाल, शून्यकाल और विधेयकों पर चर्चा का संचालन करते हैं
    • सदन को स्थगित या भंग करने के निर्णय लेते हैं। उपराष्ट्रपति का यह पदेन कर्तव्य उन्हें संसद के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के रूप में स्थापित करता है, जो राष्ट्रपति के बाद आता है।​
  • अपवाद और विकल्प
    • उपराष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर राज्यसभा अपने सदस्यों में से उप-सभापति चुनती है
    • जो सभापति के कर्तव्यों का निर्वहन करता है। उदाहरण के लिए, हाल के वर्षों में जगदीप धनखड़ ने इस भूमिका निभाई
    • लेकिन यदि कोई रिक्ति हो तो उप-सभापति सक्रिय हो जाता है। संविधान अनुच्छेद 89 में राज्यसभा के सभापति और उप-सभापति के प्रावधानों को विस्तार से बताता है।​
  • ऐतिहासिक महत्व
    • यह व्यवस्था ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से प्रेरित है, जहां हाउस ऑफ लॉर्ड्स का लॉर्ड चांसलर पदेन सभापति होता है।
    • भारत में यह 1950 से लागू है, और सभी उपराष्ट्रपति इस भूमिका निभाते रहे हैं, जो संसदीय शिष्टाचार और संतुलन को मजबूत करता है।​

4. उप-राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करने हेतु, उम्मीदवार को कम-से-कम ....... निर्वाचकों द्वारा प्रस्तावित किया जाना चाहिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 20
Solution:
  • उप-राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करने हेतु, उम्मीदवार को कम-से-कम 20 निर्वाचकों द्वारा प्रस्तावित (Proposers) किया जाना चाहिए
  • 20 अन्य निर्वाचकों द्वारा अनुमोदित (Seconders) किया जाना चाहिए।
  • ये निर्वाचक वे सदस्य होते हैं जो उप-राष्ट्रपति के चुनाव के लिए बने निर्वाचन मंडल (संसद के दोनों सदनों के सदस्य) का हिस्सा होते हैं।
  • इसके अतिरिक्त, उम्मीदवार को ₹15,000 की जमानत राशि भी जमा करनी होती है।
  • नामांकन प्रक्रिया
    • उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
    • नामांकन पत्र में कम से कम 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, जो निर्वाचक मंडल के सदस्य होने चाहिए।
    • एक निर्वाचक केवल एक ही उम्मीदवार के एक नामांकन पत्र पर ही प्रस्तावक या अनुमोदक के रूप में हस्ताक्षर कर सकता है।
    • उम्मीदवार अधिकतम चार नामांकन पत्र दाखिल कर सकता है, लेकिन जमानत राशि 15,000 रुपये एक ही बार जमा करनी होती है।​
  • संवैधानिक आधार
    • यह प्रावधान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति (चुनाव) अधिनियम, 1952 की धारा 5B के तहत विनियमित है, जो संविधान के अनुच्छेद 66 से जुड़ा है।
    • निर्वाचक मंडल में वर्तमान में लगभग 782 सदस्य हैं (राज्यसभा के 233 निर्वाचित + 12 मनोनीत, लोकसभा के 543 निर्वाचित, रिक्तियां घटाकर)।
    • मतदान एकल संक्रमणीय मत (single transferable vote) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली पर होता है, और प्रत्येक सदस्य का मत मूल्य 1 होता है।​
  • राष्ट्रपति से तुलना
    • राष्ट्रपति पद के लिए यह संख्या 50-50 है, लेकिन उप-राष्ट्रपति के लिए 20-20 रखी गई है ताकि प्रक्रिया सरल रहे।
    • हालिया 2025 चुनाव में 46 उम्मीदवारों ने 68 नामांकन भरे, जिनमें से कई खारिज हो गए, जो नियमों की सख्ती दर्शाता है।​
  • अतिरिक्त शर्तें
    • उम्मीदवार को भारत का नागरिक, 35 वर्ष से अधिक आयु का और लोकसभा सदस्य बनने योग्य होना चाहिए।
    • नामांकन की जांच रिटर्निंग अधिकारी द्वारा होती है, और गैर-गंभीर उम्मीदवारों को बाहर करने के लिए ये न्यूनतम संख्याएं अनिवार्य हैं।​

5. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में उल्लिखित है कि भारत का एक उप-राष्ट्रपति भी होगा? [CGL (T-I) 13 अगस्त, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 63
Solution:
  • भारतीय संविधान के भाग V (संघ) के तहत, अनुच्छेद 63 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है
  • भारत का एक उप-राष्ट्रपति होगा।" यह अनुच्छेद उप-राष्ट्रपति के पद की स्थापना करता है, जो देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
  • यह पद राष्ट्रपति के बाद आता है और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कार्यों का निर्वहन करता है।
  • भारत का एक उप-राष्ट्रपति होगा। यह प्रावधान संविधान के भाग V (संघ) के अध्याय I (कार्यपालिका) के अंतर्गत आता है।​
  • अनुच्छेद 63 का पाठ
    • अनुच्छेद 63 सरल शब्दों में कहता है: "भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।" यह उप-राष्ट्रपति के पद की स्थापना करता है
    • जो राष्ट्रपति के बाद देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। यह पद राष्ट्रपति के उत्तराधिकारी के रूप में कार्य करता है और राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है।​
  • संबंधित अनुच्छेद
    • उप-राष्ट्रपति से जुड़े प्रावधान अनुच्छेद 63 से 73 तक विस्तृत हैं:
    • अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं करेगा।​
    • अनुच्छेद 65: राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर उपराष्ट्रपति उसके कर्तव्यों का निर्वहन करेगा।​
    • अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होगा।​
    • ये अनुच्छेद योग्यता, चुनाव, शपथ, अवधि और हटाने की प्रक्रिया को परिभाषित करते हैं।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • संविधान सभा ने 14 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 63 को अपनाया, जो ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से प्रेरित है।
    • वर्तमान में (2025 तक) जगदीप धनखड़ इस पद पर हैं, जिनका चुनाव 2022 में हुआ। यह प्रावधान संघीय ढांचे में कार्यपालिका की निरंतरता सुनिश्चित करता है।​

6. भारत के उप-राष्ट्रपति को पद की शपथ कौन दिलाता है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) भारत के राष्ट्रपति
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 69 के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति या उनके द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियुक्त कोई व्यक्ति, उप-राष्ट्रपति को उनके पद की शपथ दिलाता है।
  • शपथ या प्रतिज्ञान लेने के बाद ही उप-राष्ट्रपति औपचारिक रूप से अपना पद ग्रहण करते हैं
  • जिसमें वे संविधान और विधि के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखने की शपथ लेते हैं।
  • भारत के उपराष्ट्रपति को पद की शपथ राष्ट्रपति द्वारा दिलाई जाती है।
  • यदि राष्ट्रपति उपलब्ध न हों, तो राष्ट्रपति द्वारा नामित कोई अन्य व्यक्ति शपथ दिला सकता है।​
  • शपथ की विधि
    • उपराष्ट्रपति की शपथ तीसरी अनुसूची में उल्लिखित रूप में ली जाती है
    • जिसमें संविधान के प्रति निष्ठा और कर्तव्यों का ईमानदार निर्वहन करने का वचन होता है।
    • यह औपचारिक समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाता है, जिसमें उच्च पदस्थ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहते हैं।
    • शपथ ग्रहण के बाद उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्यभार संभालते हैं।​
  • संवैधानिक आधार
    • अनुच्छेद 63 उपराष्ट्रपति के पद की स्थापना करता है, जो देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है।
    • अनुच्छेद 69 स्पष्ट रूप से शपथ दिलाने की जिम्मेदारी राष्ट्रपति को सौंपता है। यह व्यवस्था राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बीच पदानुक्रम को दर्शाती है।​
  • ऐतिहासिक उदाहरण
    • हाल ही में सी. पी. राधाकृष्णन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाई।
    • पूर्व उपराष्ट्रपतियों जैसे वेंकैया नायडू को भी इसी प्रक्रिया से शपथ दी गई।
    • यह परंपरा स्वतंत्र भारत की शुरुआत से चली आ रही है।

7. भारत का उप-राष्ट्रपति बनने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी पात्रता आवश्यक नहीं है? [CHSL (T-I) 11 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) उनकी आयु 40 वर्ष पूरा होना चाहिए।
Solution:
  • उप-राष्ट्रपति बनने के लिए संविधान में निर्धारित पात्रताएँ (अनुच्छेद 66 और अनुच्छेद 63) हैं:
  • वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • उनकी आयु 35 वर्ष पूरी होनी चाहिए (न कि 40 वर्ष)।
  • वह राज्य सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के लिए अर्हित होना चाहिए।
  • वह केंद्र या राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन लाभ का कोई पद धारण नहीं करता हो।
  • चूंकि न्यूनतम आयु 35 वर्ष है, इसलिए 40 वर्ष की आयु पूरी होना आवश्यक नहीं है।
  •  वास्तव में, उपराष्ट्रपति का पद ग्रहण करते समय संसद का कोई सदस्य नहीं हो सकता, और यदि चुने जाने पर सदस्यता हो तो त्यागपत्र देना पड़ता है।
  • यह शर्त पद की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए है।​
  • मुख्य पात्रताएँ
    • उपराष्ट्रपति निर्वाचन के लिए व्यक्ति को निम्नलिखित योग्यताएँ पूरी करनी होती हैं:
    • भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।​
    • न्यूनतम आयु 35 वर्ष पूरी होनी चाहिए।​
    • राज्यसभा सदस्य बनने योग्य होना चाहिए, अर्थात न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और अन्य राज्यसभा मानदंड।​
    • किसी लाभ के पद (सरकारी लाभकारी नौकरी) पर न होना चाहिए।​
  • अनावश्यक शर्त
    • लोकसभा या राज्यसभा सदस्यता उपराष्ट्रपति पद के लिए बाधा है, न कि आवश्यकता।
    • संविधान स्पष्ट करता है कि चुने जाने पर सदस्यता समाप्त हो जाती है।
    • नामांकन के लिए 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक सांसदों की आवश्यकता होती है, लेकिन स्वयं सदस्य होना जरूरी नहीं।​​
  • संवैधानिक संदर्भ
    • अनुच्छेद 66(3) में विस्तृत योग्यताएँ दी गई हैं, जो राष्ट्रपति से भिन्न हैं।
    • ऐतिहासिक रूप से सभी उपराष्ट्रपति इन मानदंडों पर चुने गए, जैसे वर्तमान सी.पी. राधाकृष्णन।
    • यह व्यवस्था संसदीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए है।​

8. भारत के उप-राष्ट्रपति के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? [CGL (T-I) 02 दिसंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) लोक सभा और राज्य सभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के माध्यम से राष्ट्रपति के अनुमोदन से इन्हें इनके पद से हटाया जा सकता है।
Solution:
  • उप-राष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्य सभा में ही शुरू किया जा सकता है (राज्य सभा के प्रभावी बहुमत से)।
  • लोक सभा केवल इस प्रस्ताव से सहमत होती है (लोक सभा के साधारण बहुमत से)।
  • इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति का कोई अनुमोदन आवश्यक नहीं होता है।
  • बाकी कथन सत्य हैं:
    • कार्यकाल पांच वर्ष होता है, वह राज्य सभा के पदेन सभापति होते हैं, और राज्य विधानमंडल के सदस्य उनके चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।
    • भारत के उपराष्ट्रपति के पद से जुड़े सामान्य कथनों में सबसे अधिक भ्रमित करने वाला और गलत कथन यह है
    • उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सदस्य होते हैं।" वास्तव में, उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, लेकिन वे उसके औपचारिक सदस्य नहीं होते।​
  • मुख्य तथ्य
    • उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है, जो संविधान के अनुच्छेद 63 से 71 तक वर्णित है।
    • वे राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, लेकिन मतदान का अधिकार केवल टाई की स्थिति में निर्णायक वोट तक सीमित रहता है।
    • यदि कोई सांसद उपराष्ट्रपति चुना जाता है, तो उसकी संसदीय सीट स्वतः रिक्त हो जाती है।​
  • चुनाव प्रक्रिया
    • उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों—जिनमें नामित सदस्य भी शामिल हैं
    • द्वारा एकल हस्तांतरणीय वोट प्रणाली पर आधारित आनुपातिक प्रतिनिधित्व से होता है।
  • योग्यताएं:
    • भारतीय नागरिक, कम से कम 35 वर्ष आयु, राज्यसभा सदस्य बनने योग्य, और कोई लाभ का पद न धारण करना। राज्य विधानमंडलों के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते।​
  • कार्यकाल निष्कासन
    • कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन पुनर्निर्वाचन के लिए पूर्णतः पात्र होते हैं—यह कथन कि "वे पुनः चुनाव के लिए अयोग्य होते हैं" पूरी तरह गलत है।
    • निष्कासन राज्यसभा के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प (14 दिन पूर्व सूचना अनिवार्य) पर लोकसभा की सहमति से होता है
    • राष्ट्रपति इसमें केवल भूमिका निभाते हैं, न कि सीधे हटाते। संविधान में हटाने का कोई विशिष्ट आधार नहीं बताया गया।​
  • अन्य कर्तव्य
    • राष्ट्रपति पद रिक्त होने पर (अनुच्छेद 65) उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कर्तव्य निभाते हैं, तब राज्यसभा की अध्यक्षता उपसभापति करते हैं।
    • वेतन राज्यसभा सभापति के समान होता है। वे राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र देते हैं।​

9. भारतीय संविधान में उप-राष्ट्रपति पद का प्रावधान ....... से लिया गया था। [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) संयुक्त राज्य अमेरिका
Solution:
  • भारतीय संविधान में उप-राष्ट्रपति का पद, विशेष रूप से उनकी भूमिका और कार्य, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के संविधान से प्रेरित है।
  • जिस तरह अमेरिकी उप-राष्ट्रपति सीनेट (सीनेट) के पदेन सभापति होते हैं, उसी तरह भारतीय उप-राष्ट्रपति भी राज्य सभा के पदेन सभापति होते हैं।
  • यह संघीय प्रणाली में शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने के लिए लिया गया एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।
  • यह प्रावधान राष्ट्रपति पद की निरंतरता सुनिश्चित करने और राज्यसभा (उच्च सदन) की अध्यक्षता के लिए बनाया गया, जैसा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति सीनेट के अध्यक्ष होते हैं।​
  • संवैधानिक आधार
    • संविधान के अनुच्छेद 63 से 71 तक उपराष्ट्रपति से संबंधित प्रावधान हैं, जहां अनुच्छेद 63 स्पष्ट रूप से कहता है
    • भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।" अनुच्छेद 64 में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होंगे और कोई लाभ का पद धारण नहीं करेंगे।
    • अमेरिकी मॉडल से प्रेरित होकर यह पद कार्यकारी और विधायी शाखाओं को जोड़ता है।​
  • अन्य देशों से उधार
    • भारतीय संविधान संविधान सभा की बहसों के दौरान विभिन्न देशों के संविधानों से विशेषताएं ग्रहण करता है।
    • राष्ट्रपति पद आयरलैंड और ब्रिटेन से लिया गया, जबकि संघीय ढांचा कनाडा से, लेकिन उपराष्ट्रपति जैसा दूसरा पद विशेष रूप से अमेरिका से अपनाया गया ताकि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में शासन सुचारू रहे।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है
    • (अनुच्छेद 66)। वे राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कर्तव्य निभाते हैं (अनुच्छेद 65), लेकिन राज्य विधानसभाओं का इसमें कोई भूमिका नहीं।
    • यह प्रावधान संविधान निर्माण के दौरान अमेरिकी प्रभाव को दर्शाता है।​

10. भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति कौन थे? [JE मैकेनिकल परीक्षा 27 अक्टूबर, 2020 (II-पाली), CGL (T-I) 16 अगस्त, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) डॉ. एस. राधाकृष्णन
Solution:
  • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan) स्वतंत्र भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति थे।
    • उन्होंने 1952 से 1962 तक (दो कार्यकालों के लिए) इस पद पर कार्य किया। बाद में, वह 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति भी बने।
    • उनका जन्मदिन, 5 सितंबर, भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • प्रारंभिक जीवन
    • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तनी में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
    • उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज से दर्शनशास्त्र में एमए किया और प्रोफेसर के रूप में करियर शुरू किया।
    • वे एक प्रसिद्ध विद्वान, दार्शनिक और शिक्षाविद् थे, जिन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भी पढ़ाया।​
  • राजनीतिक यात्रा
    • स्वतंत्रता के बाद, राधाकृष्णन ने 1946-1952 तक यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधित्व किया और सोवियत संघ में राजदूत रहे।
    • 1952 में वे भारत के पहले उप-राष्ट्रपति चुने गए, जो राज्यघटना के अनुच्छेद 63 के तहत नियुक्ति है।
    • वे निर्विरोध चुने गए और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के साथ कार्य किया।​
  • उपलब्धियाँ
    • उनके सम्मान में जन्मदिन (5 सितंबर) को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाद में वे 1962-1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने।
    • वे उप-राष्ट्रपति के रूप में राज्यसभा के सभापति भी रहे।​
  • उत्तराधिकारी
    • उनके बाद डॉ. जाकिर हुसैन 1962 में दूसरे उप-राष्ट्रपति बने। राधाकृष्णन सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले पहले उप-राष्ट्रपति थे।