Correct Answer: (c) लोक सभा और राज्य सभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के माध्यम से राष्ट्रपति के अनुमोदन से इन्हें इनके पद से हटाया जा सकता है।
Solution:- उप-राष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्य सभा में ही शुरू किया जा सकता है (राज्य सभा के प्रभावी बहुमत से)।
- लोक सभा केवल इस प्रस्ताव से सहमत होती है (लोक सभा के साधारण बहुमत से)।
- इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति का कोई अनुमोदन आवश्यक नहीं होता है।
- बाकी कथन सत्य हैं:
- कार्यकाल पांच वर्ष होता है, वह राज्य सभा के पदेन सभापति होते हैं, और राज्य विधानमंडल के सदस्य उनके चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।
- भारत के उपराष्ट्रपति के पद से जुड़े सामान्य कथनों में सबसे अधिक भ्रमित करने वाला और गलत कथन यह है
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सदस्य होते हैं।" वास्तव में, उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, लेकिन वे उसके औपचारिक सदस्य नहीं होते।
- मुख्य तथ्य
- उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है, जो संविधान के अनुच्छेद 63 से 71 तक वर्णित है।
- वे राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, लेकिन मतदान का अधिकार केवल टाई की स्थिति में निर्णायक वोट तक सीमित रहता है।
- यदि कोई सांसद उपराष्ट्रपति चुना जाता है, तो उसकी संसदीय सीट स्वतः रिक्त हो जाती है।
- चुनाव प्रक्रिया
- उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों—जिनमें नामित सदस्य भी शामिल हैं
- द्वारा एकल हस्तांतरणीय वोट प्रणाली पर आधारित आनुपातिक प्रतिनिधित्व से होता है।
- योग्यताएं:
- भारतीय नागरिक, कम से कम 35 वर्ष आयु, राज्यसभा सदस्य बनने योग्य, और कोई लाभ का पद न धारण करना। राज्य विधानमंडलों के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते।
- कार्यकाल व निष्कासन
- कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन पुनर्निर्वाचन के लिए पूर्णतः पात्र होते हैं—यह कथन कि "वे पुनः चुनाव के लिए अयोग्य होते हैं" पूरी तरह गलत है।
- निष्कासन राज्यसभा के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प (14 दिन पूर्व सूचना अनिवार्य) पर लोकसभा की सहमति से होता है
- राष्ट्रपति इसमें केवल भूमिका निभाते हैं, न कि सीधे हटाते। संविधान में हटाने का कोई विशिष्ट आधार नहीं बताया गया।
- अन्य कर्तव्य
- राष्ट्रपति पद रिक्त होने पर (अनुच्छेद 65) उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कर्तव्य निभाते हैं, तब राज्यसभा की अध्यक्षता उपसभापति करते हैं।
- वेतन राज्यसभा सभापति के समान होता है। वे राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र देते हैं।