Correct Answer: (b) थैलैल्डिहाइड
Solution:- थैलेल्डिहाइड (Phthalaldehyde) में बेंजीन वलय पर आसन्न कार्बन केंद्रों से जुड़े दो फॉर्मिल समूह होते हैं
- प्राथमिक अमीन के साथ फ्लोरोसेंट संयुग्मन उत्पाद बनाते हैं।
- इसका रासायनिक सूत्र C₆H₄(CHO)₂ है।
- जहां बेंजीन रिंग के दो लगातार कार्बन पर -CHO समूह विद्यमान रहते हैं।
- यह यौगिक प्राथमिक अमीन (R-NH2) के साथ अभिक्रिया करके Schiff base या इमाइन यौगिक बनाता है
- जो फ्लोरोसेंट (प्रकाश उत्सर्जक) संयुग्मन उत्पाद के रूप में जाना जाता है।
- संरचना और गुण
- इसकी विशेषता आसन्न फॉर्मिल समूहों के कारण इंट्रामॉलिक्यूलर हाइड्रोजन बॉन्डिंग होती है
- जो इसे स्थिर बनाती है। यह पीले रंग का ठोस पदार्थ है
- जो जल में थोड़ा घुलनशील होता है और विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान में अमीनों की पहचान के लिए उपयोगी है।
- प्राथमिक अमीन के साथ इसकी अभिक्रिया में निम्न प्रतिक्रिया होती है:
- अभिक्रिया तंत्र
- अभिक्रिया न्यूक्लियोफिलिक एडिशन के माध्यम से आगे बढ़ती है
- जहां अमीन का नाइट्रोजन फॉर्मिल कार्बन पर आक्रमण करता है
- इंटरमीडिएट कार्बिनोलएमाइन बनता है
- जो फिर डिहाइड्रेशन द्वारा इमाइन में परिवर्तित हो जाता है।
- दो आसन्न -CHO समूहों के कारण यह अभिक्रिया तेजी से और चयनात्मक रूप से होती है।
- फ्लोरोसेंस का कारण कंजुगेटेड सिस्टम का π-इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन है
- जो बेंजीन रिंग और इमाइन दोहरे बंधों से उत्पन्न होता है।
- यह गुण इसे बायोकेमिकल और फॉरेंसिक विश्लेषण में अमीन ट्रेसिंग के लिए आदर्श बनाता है।
- अनुप्रयोग
- यह यौगिक जैव-अणुओं जैसे अमीनो अम्लों या प्रोटीनों में प्राथमिक अमीन समूहों की मात्रात्मक पहचान के लिए उपयोग होता है।
- इसके अलावा, यह ऑप्टिकल सेंसर और फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कोपी में भी प्रयुक्त है।
- अन्य डायल्डिहाइड्स फ्लोरोसेंस नहीं देते क्योंकि उनके समूहों की स्थिति कंजुगेशन को अनुकूल नहीं बनाती।