कार्बनिक रसायन (रसायन विज्ञान)

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11. किस डायल्डिहाइड में बेंजीन वलय पर आसन्न कार्बन केंद्रों से जुड़े दो फॉर्मिल समूह होते हैं और प्राथमिक ऐमीन के साथ फ्लोरोसेंट संयुग्मन उत्पाद बनाते हैं? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) थैलैल्डिहाइड
Solution:
  • थैलेल्डिहाइड (Phthalaldehyde) में बेंजीन वलय पर आसन्न कार्बन केंद्रों से जुड़े दो फॉर्मिल समूह होते हैं
  • प्राथमिक अमीन के साथ फ्लोरोसेंट संयुग्मन उत्पाद बनाते हैं।
  • इसका रासायनिक सूत्र C₆H₄(CHO)₂ है।
  • जहां बेंजीन रिंग के दो लगातार कार्बन पर -CHO समूह विद्यमान रहते हैं।
  • यह यौगिक प्राथमिक अमीन (R-NH2) के साथ अभिक्रिया करके Schiff base या इमाइन यौगिक बनाता है
  • जो फ्लोरोसेंट (प्रकाश उत्सर्जक) संयुग्मन उत्पाद के रूप में जाना जाता है।
  • संरचना और गुण
    • इसकी विशेषता आसन्न फॉर्मिल समूहों के कारण इंट्रामॉलिक्यूलर हाइड्रोजन बॉन्डिंग होती है
    • जो इसे स्थिर बनाती है। यह पीले रंग का ठोस पदार्थ है
    • जो जल में थोड़ा घुलनशील होता है और विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान में अमीनों की पहचान के लिए उपयोगी है।
    • प्राथमिक अमीन के साथ इसकी अभिक्रिया में निम्न प्रतिक्रिया होती है:
  • अभिक्रिया तंत्र
    • अभिक्रिया न्यूक्लियोफिलिक एडिशन के माध्यम से आगे बढ़ती है
    • जहां अमीन का नाइट्रोजन फॉर्मिल कार्बन पर आक्रमण करता है
    • इंटरमीडिएट कार्बिनोलएमाइन बनता है
    • जो फिर डिहाइड्रेशन द्वारा इमाइन में परिवर्तित हो जाता है।
    • दो आसन्न -CHO समूहों के कारण यह अभिक्रिया तेजी से और चयनात्मक रूप से होती है।
    • फ्लोरोसेंस का कारण कंजुगेटेड सिस्टम का π-इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन है
    • जो बेंजीन रिंग और इमाइन दोहरे बंधों से उत्पन्न होता है।
    • यह गुण इसे बायोकेमिकल और फॉरेंसिक विश्लेषण में अमीन ट्रेसिंग के लिए आदर्श बनाता है।
  • अनुप्रयोग
    • यह यौगिक जैव-अणुओं जैसे अमीनो अम्लों या प्रोटीनों में प्राथमिक अमीन समूहों की मात्रात्मक पहचान के लिए उपयोग होता है।
    • इसके अलावा, यह ऑप्टिकल सेंसर और फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कोपी में भी प्रयुक्त है।
    • अन्य डायल्डिहाइड्स फ्लोरोसेंस नहीं देते क्योंकि उनके समूहों की स्थिति कंजुगेशन को अनुकूल नहीं बनाती।

12. निम्नलिखित में से किस बहुलक का प्रयोग विद्युतीय उपकरणों के ऊष्मारोधी भागों में किया जाता है? [C.P.O. S.I. 11 जून, 2016 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) बैकेलाइट
Solution:
  • बैकेलाइट एक प्लास्टिक (पॉलीमर) है।
  • इसकी खोज वर्ष 1907 में बेल्जियम मूल के अमेरिकी रसायनशास्त्री लियो बैकलैंड ने की थी।
  • बैकेलाइट फीनॉल तथा फॉर्मेल्डिहाइड का रासायनिक मिश्रण है।
  • इसका उपयोग विद्युतीय उपकरणों के ऊष्मारोधी भागों में किया जाता है।
  • बैकेलाइट की संरचना और निर्माण
    • बैकेलाइट फिनॉल (C₆H₅OH) और फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) के बीच कंडेंसेशन पॉलीमराइजेशन से बनता है।
    • अम्लीय या क्षारीय उत्प्रेरक की उपस्थिति में यह अभिक्रिया होती है, जिसमें दो प्रकार के उत्पाद प्राप्त होते हैं
    • नोवोलेक (रैखिक, थर्मोप्लास्टिक) और रेजिनॉल (क्रॉस-लिंक्ड, थर्मोसेटिंग)।
    • हीटिंग पर रेजिनॉल क्रॉस-लिंकिंग के माध्यम से कठोर संरचना बना लेता है
    • जो पिघलता नहीं। यह प्रक्रिया इसे पुनः गलाने योग्य नहीं बनाती, जिससे ऊष्मा प्रतिरोध बढ़ता है।
  • ऊष्मारोधी गुण
    • बैकेलाइट 150-200°C तक ऊष्मा सहन कर सकता है
    • बिना अपनी संरचना खोए। क्रॉस-लिंक्ड संरचना के कारण यह थर्मल स्थिरता प्रदान करता है
    • जो विद्युतीय उपकरणों में उत्पन्न ऊष्मा से बचाव करता है।
    • इसके अतिरिक्त, यह उत्कृष्ट विद्युत इंसुलेटर है
    • (डाइइलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ उच्च), नमी प्रतिरोधी और रासायनिक रूप से स्थिर होता है।
  • विद्युतीय उपकरणों में उपयोग
    • विद्युत स्विच, प्लग, सॉकेट और इंसुलेटर के निर्माण में।
    • हीटर हैंडल, आयरन बॉक्स, इलेक्ट्रिक मोटर पार्ट्स।
    • रेडियो, टेलीफोन केसिंग, ट्रांसफॉर्मर बॉबिन।
    • कम्प्यूटर हार्डवेयर और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड।
    • इन उपयोगों में बैकेलाइट की मशीनेबिलिटी (काटने-घिसने की क्षमता) और कठोरता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

13. विस्कोस फाइबर, ....... से प्राप्त किया जाता है। [CGL (T-I) 13 अगस्त, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) सेलुलोज
Solution:
  • विस्कोस फाइबर, सेलुलोज (Cellulose) से प्राप्त किया जाता है
  • जो कि पादप कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है।
  • विस्कोस रेशा (Viscose fiber) प्राप्त करने के लिए सेल्युलोज की विभिन्न रासायनिक पदार्थों से क्रिया कराई जाती है।
  • विस्कोस फाइबर क्या है?
    • विस्कोस फाइबर एक अर्ध-सिंथेटिक रेयॉन फाइबर है
    • जो प्राकृतिक सेल्यूलोज को रासायनिक प्रक्रिया से पुनर्जीवित करके बनाया जाता है।
    • यह मूल रूप से पेड़ों जैसे बीच, देवदार, नीलगिरी या बांस के गूदे से प्राप्त होता है
    • जहां सेल्यूलोज की मात्रा 90-98% तक शुद्ध होती है।
    • विस्कोस को "आर्टिफिशियल सिल्क" भी कहा जाता है
    • क्योंकि यह सिल्क जैसी चमक, मुलायम स्पर्श और ड्रेप प्रदान करता है।
  • उत्पादन प्रक्रिया
    • विस्कोस बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है:
    • कच्चा माल तैयार करना: लकड़ी के गूदे को छोटे टुकड़ों में काटा जाता है।
    • स्टेपिंग: सेल्यूलोज को 18-20% सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) में 50°C पर 1-2 घंटे भिगोया जाता है
    • जिससे अल्कली सेल्यूलोज बनता है।
    • प्रेसिंग और सूखना: अतिरिक्त तरल निष्कासित कर चिप्स को सुखाया जाता है।
    • सल्फराइजेशन: कार्बन डाइसल्फाइड (CS2) से सेल्यूलोज ज़ैंथेट बनता है।
    • विस्कोस घोल बनाना: इसे पतले NaOH में घोलकर चिपचिपा विस्कोस घोल तैयार किया जाता है
    • जो फिल्टर और पकाया जाता है।
    • स्पिनिंग: घोल को स्पिनरेट से एसिड स्नान में निकाला जाता है, जहां यह ठोस फाइबर बन जाता है।
  • गुण और विशेषताएं
    • विस्कोस फाइबर शोषक, हल्का, सांस लेने योग्य और मुलायम होता है।
    • यह कपास जैसा आराम देता है लेकिन सिल्क जैसी चमक रखता है।
    • हालांकि, यह गीलेपन में कमजोर होता है और आसानी से सिकुड़ सकता है।
    • इसका उपयोग अंडरगारमेंट्स, ड्रेसेज, स्कार्फ और होम टेक्सटाइल में होता है।
  • उपयोग और लाभ
    • कपड़ा उद्योग: साड़ी, कुर्ते, ब्लाउज आदि में लोकप्रिय।
    • मिश्रण: पॉलिएस्टर या स्पैन्डेक्स के साथ मिलाकर मजबूती बढ़ाई जाती है।
    • अन्य: मेडिकल ड्रेसिंग, हाइजीन उत्पाद।

14. रासायनिक सूत्र CH₃CH₂Cl वाला निम्नलिखित में से कौन-सा रासायनिक यौगिक फोमयुक्त प्लास्टिक में धमक कर्मक (ब्लोइंग एजेंट) के रूप में उपयोग किया जाता है? [CHSL (T-I) 08 जून, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) क्लोरोइथाइल
Solution:
  • क्लोरोइथेन कमरे के तापमान और दबाव पर एक रंगहीन गैस है।
  • इसमें विशेष प्रकार की तीव्र गंध होती है। यह हाइड्रोकार्बन में संघनित रूप में एक उच्च तरल होता है।
  • इसका उपयोग धमक कर्मक (ब्लोइंग एजेंट) के रूप में और अन्य औद्योगिक एवं व्यापारिक रसायनों के उत्पादन में किया जाता है।
  • यौगिक की पहचान
    • CH₃CH₂Cl, जिसे क्लोरोएथेन या एथिल क्लोराइड भी कहा जाता है
    • एक रंगहीन, ज्वलनशील गैस है जो सामान्य तापमान पर वाष्प रूप में रहता है।
    • यह एक प्राथमिक अल्किल हैलाइड है जिसमें एथेन (C₂H₅) समूह क्लोरीन परमाणु से जुड़ा होता है।
    • इसकी संरचना सरल है: CH₃-CH₂-Cl, जो क्लोरोमीथेन (CH₃Cl) का अगला होमोलॉग है।
  • ब्लोइंग एजेंट के रूप में उपयोग
    • फोमयुक्त प्लास्टिक (जैसे पॉलीयूरेथेन फोम या XPS फोम) बनाने में ब्लोइंग एजेंट गैस उत्पन्न करता है
    • जो प्लास्टिक को फोम संरचना प्रदान करता है।
    • क्लोरोएथेन इस प्रक्रिया में वाष्पीकृत होकर छोटे-छोटे बुलबुले बनाता है
    • जो इन्सुलेशन सामग्री या पैकेजिंग फोम में स्थिरता लाता है।
    • पहले बड़े पैमाने पर CFC (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) का उपयोग होता था
    • लेकिन पर्यावरणीय चिंताओं (ओजोन क्षरण) के कारण क्लोरोएथेन जैसे हाइड्रोकार्बन-आधारित विकल्प अपनाए गए।
  • अन्य उपयोग और गुण
    • औद्योगिक उपयोग: एथिलबेंजीन उत्पादन में एल्यूमिनियम क्लोराइड उत्प्रेरक प्रक्रिया के लिए प्रेरक रसायन के रूप में कार्य करता है।
    • भौतिक गुण: उबलने बिंदु लगभग 12.3°C, जो इसे आसानी से वाष्पीकृत होने वाला बनाता है।
    • यह पानी में थोड़ा घुलनशील है लेकिन कार्बनिक विलायकों में अच्छी घुलनशीलता रखता है।
    • रासायनिक प्रतिक्रियाएँ: SN2 प्रतिक्रियाओं में सक्रिय
    • जैसे एथिलीन ग्लाइकॉल या अन्य एथर संश्लेषण में। हालांकि, फोम उद्योग में इसका मुख्य भूमिका ब्लोइंग ही है।
  • पर्यावरणीय और सुरक्षा पहलू
    • क्लोरोएथेन ओजोन को कम नुकसान पहुँचाता है लेकिन ग्रीनहाउस गैस हो सकता है
    • इसलिए आधुनिक फोम उत्पादन में HFO या हाइड्रोकार्बन जैसे पेंटेन से प्रतिस्थापित हो रहा है।
    • सुरक्षा के लिए, यह ज्वलनशील है और सिलेंडर में संग्रहीत किया जाता है।
    • भारत जैसे देशों में प्लास्टिक उद्योग (फ्रीजर पैकिंग, इन्सुलेशन) में इसका पारंपरिक उपयोग देखा जाता है।

15. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल सरसों के तेल में पाया जाता है? [MTS (T-I) 14 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) इरूसिक अम्ल
Solution:
  • रसों के तेल में इरूसिक अम्ल (Erucic Acid) पाया जाता है।
  • इरूसिक अम्ल एक मोनो अनसैचुरेटेड ओमेगा-9 वसीय अम्ल है।
  • इसका रासायनिक सूत्र CH₃(CH₂)₇ CH = CH (CH₂)₁₁ CO₂H है।
  • रासायनिक संरचना
    • इरुसिक अम्ल का रासायनिक सूत्र C22H42O2 है
    • जो 22 कार्बन श्रृंखला वाला एक लंबी चेन वाला संतृप्त फैटी अम्ल है।
    • सरसों के तेल में इसकी मात्रा लगभग 42% तक होती है
    • जबकि ओलेइक अम्ल (Oleic Acid) करीब 12% और अन्य फैटी अम्ल
    • जैसे लिनोलेनिक अम्ल (Omega-6), अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल (Omega-3) तथा पामिटिक अम्ल भी मौजूद रहते हैं।
    • यह अम्ल सरसों के बीजों से तेल निष्कर्षण के दौरान प्राप्त होता है
    • इसे रेपसीड तेल (Canola oil का उच्च इरुसिक वाला रूप) में भी पाया जाता है।
  • स्वास्थ्य प्रभाव
    • इरुसिक अम्ल हृदय स्वास्थ्य के लिए विवादास्पद है
    • क्योंकि उच्च मात्रा में यह हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है
    • मायोकार्डियल लिपिडोसिस का कारण बन सकता है।
    • अमेरिका और यूरोप में सरसों के तेल पर खाद्य उपयोग प्रतिबंध इसी कारण है
    • जहां इरुसिक अम्ल की सीमा 2% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
    • हालांकि, भारत में पारंपरिक रूप से इसका उपयोग पाचन, जोड़ों के दर्द और त्वचा के लिए किया जाता है
    • लेकिन अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए।
  • अन्य अम्ल और तुलना
    • सरसों के तेल में इरुसिक अम्ल के अलावा ओलेइक अम्ल (स्वास्थ्यवर्धक मोनोअनसैचुरेटेड), लिनोलेइक अम्ल (पॉलीअनसैचुरेटेड) और संतृप्त वसा जैसे पामिटिक अम्ल पाए जाते हैं।
    • प्रश्न के संदर्भ में अन्य विकल्प जैसे टार्टरिक अम्ल (अंगूर में)
    • मेलिक अम्ल (सेब में) या लॉरिक अम्ल (नारियल तेल में) सरसों के तेल में नहीं पाए जाते।
  • उपयोग और सावधानियां
    • यह अम्ल औद्योगिक स्नेहक, बायोडीजल और सौंदर्य प्रसाधनों में उपयोगी है।
    • खाना पकाने में मध्यम मात्रा में उपयोग सुरक्षित माना जाता है
    • लेकिन कम इरुसिक वाली किस्में (जैसे पंजाब गोल्डन) चुनें।
    • एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह मालिश के लिए लोकप्रिय है।

16. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल जैतून के तेल का 55-80% हिस्सा बनाता है, जो इसे खाना पकाने की अधिकांश तकनीकों के लिए एक अच्छा विकल्प बनाता है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) ओलिक अम्ल
Solution:
  • ओलिक अंश जैतून के तेल का 55-80% हिस्सा बनाता है
  • जो इसे खाना पकाने की अधिकांश तकनीकों के लिए एक अच्छा विकल्प बनाता है।
  • ओलिक अंश एक फैटी अंश है। ओलिक अंश का रासायनिक सूत्र C₁₈H₃₄O₂ है।
  • ओलिक अम्ल की संरचना
    • ओलिक अम्ल रासायनिक रूप से C18:1 (18 कार्बन श्रृंखला वाला एकल डबल बॉन्ड वाला फैटी अम्ल) है
    • जो जैतून के फलों से निकलता है। यह तेल की कुल फैटी अम्ल सामग्री का प्रमुख घटक होता है
    • जबकि अन्य जैसे पाल्मिटिक अम्ल (10-20%, संतृप्त) और लिनोलेरिक अम्ल (5-10%, पॉलीअनसैचुरेटेड) कम मात्रा में पाए जाते हैं।
    • इसकी उच्च सांद्रता जैतून के तेल को मेडिटेरेनियन डाइट का आधार बनाती है।
  • खाना पकाने के लिए उपयुक्तता
    • ओलिक अम्ल की वजह से जैतून का तेल ऑक्सीडेशन से कम प्रभावित होता है
    • जो उच्च तापमान पर हानिकारक यौगिकों (जैसे ऐक्रिलामाइड) के बनने को रोकता है।
    • एक्स्ट्रा वर्जिन जैतून का तेल (EVOO) भी मध्यम गर्मी (180°C तक) पर इस्तेमाल योग्य है
    • क्योंकि ओलिक अम्ल पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स की तुलना में गर्मी प्रतिरोधी है।
    • यह तेल को हल्का स्वाद और लंबी शेल्फ लाइफ देता है।
  • स्वास्थ्य लाभ
    • यह अम्ल LDL कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और HDL को बढ़ाता है
    • हृदय स्वास्थ्य सुधारता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन घटाते हैं
    • एंटीऑक्सीडेंट्स (जैसे पॉलीफेनॉल्स) के साथ मिलकर कैंसर व मधुमेह से बचाव करते हैं।
    • दैनिक 1-2 चम्मच सेवन से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।

17. निम्नलिखित में से कौन-सी सीधी-शृंखला एल्केन है, जिसमें 12 कार्बन परमाणु हैं, जिनका उपयोग मिट्टी के तेल और कुछ जेट ईंधन अनुप्रयोगों और रबर या कागज प्रसंस्करण उद्योगों में एक प्रमुख घटक के रूप में किया जाता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) डोडेकेन
Solution:
  • डोडेकेन एक सीधी शृंखला एल्केन है, जिसमें 12 कार्बन परमाणु हैं।
  • इसका उपयोग मिट्टी के तेल और जेट ईंधन अनुप्रयोगों में और रबर या कागज संसंकरण उद्योग में एक प्रमुख घटक के रूप में किया जाता है। इसका रासायनिक सूत्र C₁₂H₂₆ है।
  • डोडेकेन (n-Dodecane) सही उत्तर है।
    • यह एक सीधी-शृंखला (straight-chain) एल्केन है जिसमें ठीक 12 कार्बन परमाणु होते हैं
    • इसका रासायनिक सूत्र C₁₂H₂₆ है। सामान्य एल्केन सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ के अनुसार, यह संतृप्त हाइड्रोकार्बन है
    • जिसमें केवल एकल C-C और C-H बंध होते हैं।
  • रासायनिक गुण
    • डोडेकेन कच्चे तेल (कृषोसीन फ्रैक्शन) से प्राप्त होता है
    • कमरे के तेंपरेचर पर रंगहीन, गंधहीन तरल होता है।
    • इसका क्वथनांक लगभग 216°C है
    • जो इसे मध्यम-भारी हाइड्रोकार्बन बनाता है।
    • यह अपेक्षाकृत स्थिर होता है
    • लेकिन उच्च ताप पर क्रैकिंग (भंजन) से छोटे एल्केन जैसे हेप्टेन और पेंटेन बनाता है
    • जैसा कि किरोसिन प्रोसेसिंग में उपयोगी है।
  • औद्योगिक उपयोग
    • मिट्टी के तेल (कृषोसीन) और जेट ईंधन (जैसे Jet A-1) में डोडेकेन प्रमुख घटक है
    • क्योंकि इसकी श्रृंखला लंबाई ईंधन की चिपचिपाहट, ज्वलन गुण और फ्रीजिंग पॉइंट (-10°C के आसपास) को अनुकूल बनाती है।
    • रबर प्रसंस्करण में यह सॉफ्टनर और विलायक के रूप में कार्य करता है
    • जबकि कागज उद्योग में कोटिंग्स और इंक विलायक के रूप में प्रयुक्त होता है।
    • इसके अतिरिक्त, यह लुब्रिकेंट्स, पेंट्स और रासायनिक संश्लेषण में प्रारंभिक पदार्थ है।