केंद्रीय मंत्रिपरिषद

Total Questions: 6

1. भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राष्ट्रपति के कार्यों के निष्पादन में राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद का प्रावधान करता है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 74
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 74 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है
  • राष्ट्रपति को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी।
  • राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करते हैं।
  • 44वें संविधान संशोधन (1978) के बाद, राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया कि वह मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं
  • लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह को मानने के लिए वह बाध्य होते हैं।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 74 राष्ट्रपति के कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद का प्रावधान करता है।
  • यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को कार्यकारी प्रमुख बनाते हुए वास्तविक शक्ति मंत्रिपरिषद को प्रदान करता है।​
  • अनुच्छेद 74 की मूल संरचना
    • जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। राष्ट्रपति अपने सभी कृत्यों का प्रयोग इसी सलाह के अनुसार करेगा
    • हालांकि 42वें संशोधन (1976) के बाद इसमें पुनर्विचार का प्रावधान जोड़ा गया। अनुच्छेद 74(2) न्यायालयों को यह जांचने से रोकता है
    • मंत्रियों ने राष्ट्रपति को क्या सलाह दी।​
  • ऐतिहासिक संशोधन
    • मूल संविधान में राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह माननी बाध्यकारी नहीं था, लेकिन 42वें संशोधन ने इसे अनिवार्य कर दिया।
    • 44वें संशोधन (1978) ने राष्ट्रपति को सलाह पर पुनर्विचार की शक्ति बहाल की, जिससे वह एक बार सलाह वापस भेज सकता है।
    • ये बदलाव राष्ट्रपति की नाममात्र की भूमिका को मजबूत करते हैं।​
  • मंत्रिपरिषद की भूमिका
    • मंत्रिपरिषद में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री शामिल होते हैं, जो वास्तविक नीति निर्माण और प्रशासन चलाते हैं।
    • प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के प्रमुख के रूप में राष्ट्रपति को सभी महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी देते हैं
    • जैसा कि अनुच्छेद 78 में वर्णित है। यह व्यवस्था संसदीय लोकतंत्र की आधारशिला है।​
  • महत्वपूर्ण निहितार्थ
    • यह प्रावधान राष्ट्रपति को रबर स्टैंप न बनाकर संतुलित भूमिका देता है
    • लेकिन वास्तविक कार्यकारी शक्ति लोकसभा में बहुमत वाली मंत्रिपरिषद के पास रहती है। इससे लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित होती है।​

2. जब राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उस समय भारत के राष्ट्रपति कौन थे? [C.P.O.S.I. (T-I) 23 नवंबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) ज्ञानी जैल सिंह
Solution:
  • राजीव गांधी ने 31 अक्टूबर 1984 को अपनी माँ इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।
  • उस समय ज्ञानी जैल सिंह भारत के राष्ट्रपति थे।
  • ज्ञानी जैल सिंह का कार्यकाल: 1982 से 1987
    • राजीव गांधी ने जैल सिंह के कार्यकाल के दौरान शपथ ली और उन्हीं के कार्यकाल में 1987 में आर. वेंकटरमन ने राष्ट्रपति पद संभाला।
  • शपथ ग्रहण का संदर्भ
    • इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद यह घटना घटी। राजीव गांधी उस समय बंगाल में थे
    • दिल्ली लौटते ही कांग्रेस नेताओं ने उन्हें संसदीय दल का नेता चुना।
    • राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने शाम 6:45 बजे राष्ट्रपति भवन में उन्हें शपथ दिलाई।​
  • राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का कार्यकाल
    • ज्ञानी जैल सिंह भारत के पहले सिख राष्ट्रपति थे
    • जिनका कार्यकाल 1982 से 1987 तक रहा। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके थे
    • राज्यसभा सदस्य भी। राजीव गांधी की शपथ के समय वे विदेश से लौटे थे।​
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • शपथ के साथ प्रणब मुखर्जी, पीवी नरसिम्हा राव और अन्य मंत्रियों ने भी पद ग्रहण किया
    • सिख विरोधी दंगों के कारण कैबिनेट का विस्तार किया गया। राजीव गांधी सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में से एक थे।​

3. निम्न में से किस अवधि के दौरान, मोरारजी देसाई भारत के उप-प्रधानमंत्री रहे थे? [C.P.O.S.I. (T-I) 23 नवंबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 1967-1969
Solution:
  • मोरारजी देसाई भारत के चौथे उप-प्रधानमंत्री थे। उन्होंने 1967 से 1969 तक यह पद संभाला, जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं।
  • बाद में, वह 1977 में भारत के चौथे प्रधानमंत्री बने और यह पद संभालने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे।
  • उप-प्रधानमंत्री का पद संवैधानिक नहीं है, लेकिन राजनीतिक कारणों से यह नियुक्त किया जाता रहा है।
  • राजनीतिक पृष्ठभूमि
    • मोरारजी देसाई ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई और 1930-40 के दशक में कई बार जेल गए।
    • 1952 में वे बॉम्बे (मुंबई) के मुख्यमंत्री बने, जहां उन्होंने भूमि सुधार और पुलिस प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव किए।
    • 1956 से केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवा दी, जिसमें वाणिज्य, उद्योग और वित्त मंत्रालय शामिल थे।​
  • उप-प्रधानमंत्री बनना
    • 1967 में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर देसाई को उप-प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री नियुक्त किया गया।
    • इस दौरान उन्होंने आर्थिक नीतियों पर जोर दिया, लेकिन कांग्रेस के भीतर मतभेद उभरे।
    • जुलाई 1969 में इंदिरा गांधी ने उनसे वित्त मंत्रालय छीन लिया, जिससे आहत होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया।​
  • इस्तीफे के कारण
    • इस्तीफा मुख्य रूप से वैचारिक मतभेदों और कांग्रेस विभाजन से जुड़ा था।
    • देसाई कांग्रेस (ओ) के साथ रहे, जबकि इंदिरा गांधी की कांग्रेस (आर) अलग हो गई।
    • इससे उनकी राजनीतिक यात्रा में नया मोड़ आया, जो बाद में 1977 में जनता पार्टी सरकार के प्रधानमंत्री बनने तक चली।​
  • बाद का सफर
    • उप-प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद देसाई विपक्ष के प्रमुख नेता बने।
    • 1975 में गुजरात में अनिश्चितकालीन उपवास कर सरकार पर दबाव बनाया। 1977 में भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने और 1979 तक पद पर रहे।
    • उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

4. निम्नलिखित में से किसने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सबसे कम अवधि तक अपनी सेवाएं दी? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) चंद्रशेखर
Solution:
  • एच.डी. देवगौड़ा: 1 जून 1996 से 21 अप्रैल 1997 (लगभग 11 महीने)।
  • चंद्रशेखर: 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 (लगभग 7.5 महीने)।
  • वी.पी. सिंह: 2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990 (लगभग 11.5 महीने)।
  • आई.के. गुजराल: 21 अप्रैल 1997 से 19 मार्च 1998 (लगभग 11 महीने)।
  • यदि विकल्प में अटल बिहारी वाजपेयी होते, तो उन्होंने पहली बार 16 मई 1996 से 1 जून 1996 तक केवल 13 दिनों के लिए कार्य किया था
  • जो कि प्रधानमंत्री के रूप में सबसे कम अवधि है। हालाँकि, दिए गए विकल्पों में चंद्रशेखर (7.5 महीने) का कार्यकाल देवगौड़ा (11 महीने) से कम है
  • अतः सबसे कम अवधि तक अपनी सेवाएं देने वाले चंद्रशेखर हैं।
  • गुलजारीलाल नंदा ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सबसे कम अवधि तक सेवा दी।
  • उन्होंने दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में कुल 26 दिनों का कार्यकाल संभाला, जिसमें प्रत्येक बार 13 दिन शामिल थे।​
  • पहला कार्यकाल
    • पहला कार्यकाल 27 मई 1964 से 9 जून 1964 तक चला, जब जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद उन्होंने पद संभाला।
    • इस दौरान लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री बनने तक अंतरिम व्यवस्था की। नेहरू की अचानक मृत्यु से उत्पन्न शून्य को भरने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।​
  • दूसरा कार्यकाल
    • दूसरा कार्यकाल 11 जनवरी 1966 से 24 जनवरी 1966 तक था, जो लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मृत्यु के बाद शुरू हुआ।
    • इस छोटी अवधि में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में नई सरकार गठित होने तक जिम्मेदारी निभाई। दोनों कार्यकाल मिलाकर वे सबसे कम समय वाले प्रधानमंत्री बने।​
  • राजनीतिक योगदान
    • गुलजारीलाल नंदा स्वतंत्रता सेनानी रहे और श्रम मंत्री के रूप में प्रसिद्ध हुए।
    • उन्होंने मजदूर हितों के लिए कई कानून बनवाए, जैसे न्यूनतम मजदूरी अधिनियम।
    • कार्यवाहक भूमिका के बावजूद उनका योगदान स्थायी रहा, और उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।​
  • अन्य कम कार्यकाल वाले
    • अटल बिहारी वाजपेयी का पहला कार्यकाल 16 दिनों का था (1996), जो गठबंधन सरकार गिरने से समाप्त हुआ।
    • चौधरी चरण सिंह ने 170 दिनों तक सेवा दी। हालांकि, नंदा का प्रत्येक कार्यकाल सबसे छोटा रहा।

5. ड्राफ्ट 'ड्रग, मेडिकल डिवाइसेस एंड कॉस्मेटिक बिल 2022' किस केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है? [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
Solution:
  • 'ड्रग, मेडिकल डिवाइसेस एंड कॉस्मेटिक बिल 2022' का ड्राफ्ट स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) द्वारा जारी किया गया था।
  • इस विधेयक का उद्देश्य पुराने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 को प्रतिस्थापित करना है।
  • यह विधेयक विशेष रूप से मेडिकल डिवाइसेस (चिकित्सा उपकरणों) के विनियमन के लिए अलग अध्याय जोड़कर स्वास्थ्य उत्पादों के विनियमन को आधुनिक बनाने और मजबूत करने पर केंद्रित है।
  • जारी करने वाला मंत्रालय
    • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस बिल का ड्राफ्ट तैयार किया और जारी किया।
    • मंत्रालय ने 8 जुलाई 2022 को इसे हितधारकों से सुझाव मांगने के लिए प्रकाशित किया। यह मौजूदा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 को बदलने का प्रयास है।​
  • बिल का उद्देश्य
    • यह विधेयक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और प्रसाधन सामग्री के नियमन को मजबूत करने के लिए लाया गया।
    • इसमें चिकित्सा उपकरणों को स्पष्ट रूप से अलग श्रेणी में रखा गया है और केंद्रीय औषधि नियामक प्राधिकरण (CDSCO) की भूमिका बढ़ाई गई।
    • पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों जैसे आयुर्वेद को भी कवर किया गया है।​
  • प्रमुख प्रावधान
    • चिकित्सा उपकरणों का अलग विनियमन, जिसमें आयात, निर्माण और बिक्री शामिल।
    • कठोर दंड व्यवस्था नकली दवाओं और उपकरणों के लिए।
    • केंद्र सरकार को नियामक प्राधिकरण गठित करने का अधिकार।​

6. अंतरराज्य परिषद में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत केंद्रीय मंत्रिपरिषद में केंद्र के ....... मंत्री होते हैं। [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) छः
Solution:
  • अंतरराज्य परिषद (Inter-State Council) का गठन अनुच्छेद 263 के तहत किया जाता है। इसकी संरचना में शामिल हैं:
  • अध्यक्ष:
    • भारत के प्रधानमंत्री
  • सदस्य:
    • सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासक (विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री)।
  • विशेष सदस्य:
    • प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत छः (6) केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मंत्री होते हैं।
    • इन मंत्रियों को परिषद की बैठकों में स्थायी आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है
    • यह संरचना संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत स्थापित परिषद की विशेषता है।​
  • अंतरराज्य परिषद का गठन
    • अंतरराज्य परिषद की स्थापना 1990 में हुई, जिसमें प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं।
    • केंद्रीय मंत्रिपरिषद से चार सदस्यों को प्रधानमंत्री मनोनीत करते हैं, जो सामान्यतः गृह, वित्त, रक्षा और योजना जैसे प्रमुख मंत्रालयों के मंत्री होते हैं।
    • सभी राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों को भी इसमें स्थान मिलता है।​
  • सदस्यों की संख्या और भूमिका
    • केंद्रीय भाग में ठीक चार केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं, जो केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
    • ये मंत्री परिषद की बैठकों में केंद्र की नीतियों पर चर्चा करते हैं। परिषद राज्य-केंद्र संबंधों, विवाद समाधान और सहयोग पर सलाह देती है।​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • प्रधानमंत्री द्वारा चार मंत्रियों का चयन लचीला होता है, लेकिन प्रमुख मंत्रालयों से।
    • परिषद में राज्य सभा अध्यक्ष, लोक सभा अध्यक्ष और कुछ अन्य भी हो सकते हैं।
    • यह संघीय ढांचे को मजबूत करने का मंच है।​