केंद्र-राज्य संबंध

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1. भारत के संविधान का कौन-सा भाग संघ (केंद्र) एवं राज्यों के बीच के संबंधों से संबंधित है? [MTS (T-I) 12 अक्टूबर, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) भाग XI
Solution:
  • भारतीय संविधान का भाग XI (Part XI), जिसका शीर्षक "संघ और राज्यों के बीच संबंध" है, अनुच्छेद 245 से 263 तक फैला हुआ है।
  • यह भाग मुख्य रूप से केंद्र और राज्यों के बीच विधायी संबंध (Legislative Relations) और प्रशासनिक संबंध (Administrative Relations) को परिभाषित करता है।
  • भाग XI का संक्षिप्त उद्देश्य
    • केंद्र और राज्यों के बीच विधायिका, कार्यपालिका और वित्तीय दृष्टि से शक्तियों के वितरण को व्यवस्थित करना।
    • संघीय संरचना का मूल आधार स्थापित करना ताकि केंद्र और राज्‍य अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारपूर्वक कार्य कर सकें।
  • प्रमुख तत्व और प्रवाधान
    • विभाजन सूची: संघ सूची (List I), राज्य सूची (List II) और समवर्ती सूची (List III) की व्यवस्था।
    • तकनीकी विवरण: केंद्र और राज्यों के बीच विषय-वार अधिकारों का विभाजन तीन सूचियों के जरिये किया गया है ताकि नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णय स्पष्ट हों।
    • परिवर्तन और परिवर्तन-प्रक्रिया: संविधान में संशोधन के माध्यम से इन सूचियों के विषयों या शक्तियों में बदलाव संभव है, लेकिन आम तौर पर यह संसदीय प्रक्रियाओं के अधीन रहता है।
    • न्यायपालिका का rollen: न्यायपालिका संघीय संरचना के अनुरूप विवादों को हल करने का दायित्व निभाती है, ताकि राज्यों के भीतर और राज्यों के बीच विवादों में संतुलन बना रहे।
  • वित्तीय संबंध (संघ-राज्य)
    • भाग XII के अंतर्गत वित्तीय संबंधों के प्रावधान शामिल हैं (जैसे अनुच्छेद 268-293), जो केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय अधिकार और संसाधनों के आवंटन से जुड़ा है। भाग XI से संघ-राज्य संबंधों के विद्युतीय (विधायी) और प्रशासनिक आयाम स्पष्ट होते हैं, जबकि वित्तीय आयाम भाग XII में आते हैं।​
    • केंद्र-राज्य के बीच वित्तीय अनुबंध, राजस्व, कर-स्वामित्व आदि के प्रावधान विद्यमान हैं ताकि कार्यपालिका संचालन में स्थिरता रहे।​
  • इतिहास और संदर्भ
    • संविधान की संरचना के अनुसार संघ और राज्यों के संबंध के सिद्धांत आधुनिक भारत के संवैधानिक ढांचे का केंद्रीय हिस्सा बनाते हैं, जो देश के संघीय चरित्र को दर्शाता है।​
    • कुछ संदर्भों में भाग XI के साथ-साथ भाग XII को भी केंद्र-राज्य संबंध समझी जाती है, खासकर संघ-राज्य शक्तियों के वितरण और वित्तीय संबंधों के बीच संतुलन स्थापित करते समय।​
  • संक्षेप Table (संघ-राज्य संबंध बनाम अन्य भाग)
    • भाग XI: संघ और राज्यों के बीच संबंधों का मुख्य ढांचा (विधायी और प्रशासनिक शक्तियों का विभाजन)।
    • भाग XII: वित्तीय संबंधों के प्रावधान (कर-राजस्व, वित्तीय आवंटन आदि)।
    • भाग VIII/VIII के केंद्र-राज्य संबंधों से सामान्य प्रशासनिक नियंत्रण संबद्ध लग सकता है, पर मूल संरचना भाग XI व XII में ही स्पष्ट तौर पर निहित है।​

2. भारत के संविधान द्वारा केंद्र और राज्यों दोनों में किस प्रकार की सरकार स्थापित की जाती है? [Phase-XI 28 जून, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) संसदीय
Solution:
  • इंडिया अर्थात भारत राज्यों का एक संघ है। यह संसदीय प्रणाली की सरकार वाला एक स्वतंत्र, प्रभुसत्ता संपन्न, समाजवादी, लोकतंत्रात्मक गणराज्य है।
  • भारत में केंद्र व राज्य दोनों ही स्तर पर शासन की संसदीय व्यवस्था को अपनाया गया है।
  • भारत का संविधान केंद्र में संसदीय प्रणाली (Parliamentary System) और राज्यों में संसदीय प्रणाली ही स्थापित करता है
  • लेकिन यह एक संघीय ढांचे (Federal Structure) के साथ एकात्मक विशेषताओं (Unitary Features) को समाहित करता है, जिसे 'quasi-federal' या 'federal with unitary bias' कहा जाता है। यह व्यवस्था संविधान की प्रस्तावना में 'राज्यों का संघ' (Union of States) के रूप में वर्णित है
  • जहां केंद्र मजबूत है लेकिन राज्यों को पर्याप्त स्वायत्तता प्रदान की गई है।​​
  • विधायी ढांचा
    • संविधान की सातवीं अनुसूची के माध्यम से शक्तियों का विभाजन किया गया है: संघ सूची (97 विषय, जैसे रक्षा, विदेश नीति, मुद्रा) पर केवल संसद कानून बना सकती है
    • राज्य सूची (66 विषय, जैसे पुलिस, कृषि, स्वास्थ्य) पर राज्य विधानमंडल; तथा समवर्ती सूची (47 विषय, जैसे शिक्षा, वन) पर दोनों। यदि टकराव हो तो केंद्र का कानून प्रबल होता है (अनुच्छेद 254), और अवशिष्ट शक्तियां (जैसे कराधान के नए रूप) केंद्र के पास हैं (अनुच्छेद 248)।
    • संसद राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बना सकती है यदि राष्ट्रीय हित हो (अनुच्छेद 249) या आपातकाल हो (अनुच्छेद 250)।​
  • कार्यपालिका व्यवस्था
    • केंद्र में राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख है, वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास है, जो लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है (अनुच्छेद 74-75)। राज्यों में राज्यपाल नाममात्र का प्रमुख है
    • मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद राज्य विधानसभा के प्रति उत्तरदायी (अनुच्छेद 163-164), लेकिन राज्यपाल को केंद्र द्वारा नियुक्त किया जाता है
    • जो केंद्र-राज्य संबंधों में नियंत्रण का माध्यम है। केंद्र राज्यपाल को निर्देश दे सकता है (अनुच्छेद 256-257), और असफलता पर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है (अनुच्छेद 356)।​​
  • वित्तीय संबंध
    • वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) केंद्र-राज्य करों के बंटवारे की सिफारिश करता है, जिसमें राज्यों को हिस्सा मिलता है।
    • केंद्र अनुदान देता है (अनुच्छेद 275), लेकिन जीएसटी जैसे सुधारों से वित्तीय एकीकरण बढ़ा है। यह व्यवस्था राज्यों को आर्थिक स्वायत्तता देती है लेकिन केंद्र पर निर्भरता बनाए रखती है।​
  • प्रशासनिक और अन्य संबंध
    • अखिल भारतीय सेवाएं (IAS, IPS) केंद्र-राज्य को जोड़ती हैं, जहां अधिकारी केंद्र के अधीन रहते हैं। अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263) विवाद सुलझाती है
    • नीति आयोग सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है। कुल मिलाकर, यह प्रणाली एक मजबूत केंद्र के साथ संसदीय लोकतंत्र स्थापित करती है, जो भारत सरकार अधिनियम 1935 से प्रेरित है।​

3. भारतीय संविधान की तीन सूचियों से संबंधित केंद्र-राज्य संबंधों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

  • A. जो विषय तीनों सूचियों में से किसी में भी शामिल नहीं हैं, उन्हें अवशिष्ट विषय कहा जाता है।
  • B. यदि संघ सूची और राज्य सूची के बीच कोई संघर्ष है, तो पूर्व की सूची प्रबल होती है।
  • C. जब संसद दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर कोई कानून बनाती है, तो राज्य सूची में संसद द्वारा बनाया गया वह कानून सभी राज्यों पर लागू होता है।
Correct Answer: (a) केवल A और B
Solution:
  • कोई ऐसा विषय जो संविधान की सातवीं अनुसूची की तीनों सूचियों में से किसी भी सूची में शामिल नहीं हैं वे अवशिष्ट विषय कहलाते हैं।
  • अनुच्छेद 248 के तहत अवशिष्ट विषयों पर विधि बनाने की शक्ति संसद को दी गई है।
  • संघ सूची एवं राज्य सूची में किसी विवाद की स्थिति में संघ सूची अभिभावी होगी। अतः कथन A एवं B सही हैं।
  • दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद द्वारा राज्य सूची के किसी विषय पर निर्मित कानून सभी राज्यों पर लागू नहीं होते हैं। अतः कथन C गलत है।
  •  यदि संघ सूची और राज्य सूची के बीच कोई विरोधाभास है, तो पहला ही मान्य होता है।
  •  संघ और राज्य सूची के बीच टकराव की स्थिति में, केंद्रीय संसद द्वारा बनाया गया कानून राज्य के कानून पर हावी होता है।
  •  यह क्षेत्रीय हितों पर राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की सर्वोच्चता सुनिश्चित करने के लिए है। इसलिए, कथन B भी सही है।
  •  जब संसद दो या दो से अधिक राज्यों के अनुरोध पर कोई कानून बनाती है तो राज्य सूची पर संसद द्वारा बनाया गया वह कानून सभी राज्यों पर लागू होता है। ये ग़लत है।
  •  यदि दो या दो से अधिक राज्य संसद से राज्य सूची के अंतर्गत आने वाले किसी विषय पर कानून बनाने का अनुरोध करते हैं, तो यह कानून केवल उन राज्यों पर लागू होता है
  • भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में तीन सूचियां—संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची—केंद्र-राज्य विधायी संबंधों को परिभाषित करती हैं
  • जहां संघ सूची (97 विषय) पर केवल संसद कानून बना सकती है, राज्य सूची (66 विषय) पर राज्य विधानमंडल तथा समवर्ती सूची (47 विषय) पर दोनों।​
  • यदि संघ सूची और राज्य सूची के विषयों में टकराव होता है, तो संघ सूची का कानून प्रबल होता है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करता है।
  • अवशिष्ट शक्तियां (जो किसी सूची में न हों) संसद के पास होती हैं (अनुच्छेद 248)।​
  • विधायी संबंध
    • संविधान के अनुच्छेद 245-255 इन संबंधों को नियंत्रित करते हैं, जिसमें केंद्र को राज्य सूची के विषयों पर भी कुछ परिस्थितियों (जैसे राष्ट्रीय आपातकाल) में कानून बनाने का अधिकार है। राज्यपाल द्वारा पारित राज्य विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजे जा सकते हैं।​
  • प्रशासनिक संबंध
    • अनुच्छेद 256-263 के तहत केंद्र राज्य सरकारों को निर्देश दे सकता है, लेकिन कार्यकारी शक्तियां सामान्यतः सूचियों के अनुसार ही विभाजित रहती हैं।​
  • वित्तीय संबंध
    • भाग XII (अनुच्छेद 268-293) में कराधान और वित्तीय संसाधनों का वितरण वर्णित है, जो तीन सूचियों से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है।​