कोशिका (जीव विज्ञान) (भाग-II)

Total Questions: 30

11. जब द्वार कोशिकाओं में जल प्रवाहित होता है, तो उनमें क्या होता है? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) स्टोमी छिद्र खुल जाते हैं।
Solution:
  • द्वार कोशिकाएं (Guard cells) वे विशेषीकृत कोशिकाएं होती हैं
  • जो पत्ती की सतह पर मौजूद स्टोमाटा (Stomata) नामक छोटे छिद्रों को घेरती हैं
  • उनके खुलने और बंद होने को नियंत्रित करती हैं।
  • जब द्वार कोशिकाओं में जल प्रवाहित होता है (यानी जल अंदर आता है
  • तो वे जल को अवशोषित करके स्फित (turgid) हो जाती हैं।
  • उनकी आंतरिक दीवारें, जो छिद्र के पास होती हैं, मोटी और कम लोचदार होती हैं
  • जबकि बाहरी दीवारें पतली और अधिक लोचदार होती हैं। जल के प्रवेश से द्वार कोशिकाओं में दबाव बढ़ता है
  • जिससे वे बाहर की ओर झुक जाती हैं और उनके बीच का स्टोमी छिद्र खुल जाता है (stomata open)
  • इसके विपरीत, जब द्वार कोशिकाओं से जल बाहर निकलता है
  • तो वे शिथिल हो जाती हैं और स्टोमी छिद्र बंद हो जाता है।
  • जल प्रवाह का तंत्र
    • जिससे आसपास के एपोप्लास्ट या सहायक कोशिकाओं से जल परासरण द्वारा द्वार कोशिकाओं में प्रवेश करता है
    • इससे कोशिकाओं का टर्गर दाब (turgor pressure) बढ़ता है
    • कोशिकाएँ गुर्दे के आकार में फूलकर तनावपूर्ण हो जाती हैं
    • द्वार कोशिकाओं की मोटी दीवारें असमान रूप से विस्तार करती हैं, जिससे रंध्र का छिद्र चौड़ा हो जाता है ।​
  • कोशिकीय परिवर्तन
    • जल प्रवेश से द्वार कोशिकाएँ स्फीति (turgid) हो जाती हैं
    • उनकी लंबाई बढ़ती है और आकार में परिवर्तन होता है।
    • क्लोरोप्लास्ट युक्त ये कोशिकाएँ प्रकाश संश्लेषण भी करती हैं
    • जो ABA (abscisic acid) जैसे हार्मोन के साथ मिलकर प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं ।​
    • कोशिका झिल्ली में आयन चैनल सक्रिय हो जाते हैं, जो जल के तेज प्रवाह को संभव बनाते हैं ।​
  • रंध्र खुलने के प्रभाव
    • रंध्र के खुलने से पौधा CO₂ ग्रहण करता है प्रकाश संश्लेषण के लिए, लेकिन O₂ और जल वाष्प का नुकसान भी होता है
    • यह विनियमन पर्यावरणीय कारकों जैसे प्रकाश, आर्द्रता और CO₂ सांद्रता पर निर्भर करता है
    • जब जल की कमी होती है, तो विपरीत प्रक्रिया में जल का बहिर्वाह होता है
    • कोशिकाएँ शिथिल (flaccid) हो जाती हैं, और रंध्र बंद हो जाते हैं ।​
  • महत्वपूर्ण भूमिका
    • यह तंत्र पौधों को जल संरक्षण और गैस विनिमय में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है
    • विशेषकर शुष्क स्थितियों में । अध्ययनों से पता चलता है
    • द्वार कोशिकाओं में जल प्रवाह की दर फिक के नियम (Fick's law) का पालन करती है

12. निम्नलिखित में से क्या केवल पादप कोशिकाओं में पाया जाता है? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) कोशिका भित्ति
Solution:
  • कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिकाओं में पाया जाता है। यह सेल्युलोज से बनी एक कठोर कोशिका भित्ति होती है
  • जो कोशिका को संरचना एवं सुरक्षा प्रदान करती है।
  • कोशिका भित्ति जंतु कोशिकाओं में नहीं पाई जाती है। यह पादप कोशिका की विशेषता है।
  • कोशिका भित्ति (Cell Wall)
    • पादप कोशिकाओं का सबसे प्रमुख बाह्य आवरण कोशिका भित्ति होती है
    • जो सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज और पेक्टिन जैसे अजीवित पदार्थों से निर्मित कठोर संरचना है।
    • यह कोशिका को निश्चित आकार, यांत्रिक बल (mechanical strength) और सुरक्षा प्रदान करती है
    • जल संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है। जंतु कोशिकाओं में यह अनुपस्थित होती है
    • क्योंकि जंतु कोशिकाएँ लचीली प्लाज्मा झिल्ली पर निर्भर रहती हैं।​
  • लवक (Plastids)
    • लवक पादप कोशिकाओं के अर्ध-स्वायत्त अंगक (semi-autonomous organelles) हैं
    • जो अपना डीएनए रखते हैं और तीन प्रकार के होते हैं
    • हरित लवक (Chloroplasts), क्रोमोप्लास्ट (Chromoplasts) तथा ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplasts)।
    • हरित लवक प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के लिए क्लोरोफिल युक्त होते हैं
    • जो सूर्य प्रकाश से भोजन बनाते हैं; क्रोमोप्लास्ट फूलों व फलों को रंग प्रदान करते हैं
    • ल्यूकोप्लास्ट स्टार्च भंडारण करते हैं।
    • जंतु कोशिकाओं में लवक बिल्कुल नहीं पाए जाते, क्योंकि जंतु परपोषी (heterotrophic) होते हैं।​
  • बड़ी केंद्रीय रिक्तिका (Large Central Vacuole)
    • पादप कोशिकाओं में एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है
    • जो कोशिका द्रव्य का लगभग 90% स्थान घेरती है और टोनोप्लास्ट नामक झिल्ली से घिरी रहती है।
    • यह कोशिका रस (cell sap) से भरी होती है, जो अपशिष्ट पदार्थ, पोषक तत्व, आयन और पानी संग्रहित करती है
    • तथा टurgor pressure बनाकर कोशिका को तनावपूर्ण (turgid) रखती है।
    • जंतु कोशिकाओं में रिक्तिकाएँ छोटी व असंख्य होती हैं, कोई एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका नहीं होती।

13. कोशिकाओं में, प्रोटीन का संश्लेषण किसमें होता है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) राइबोसोम
Solution:
  • राइबोसोम (Ribosomes) वे कोशिका अंगक हैं
  • जहाँ प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) की प्रक्रिया होती है
  • जिसे अनुवाद (translation) भी कहा जाता है।
  • राइबोसोम मैसेंजर RNA (mRNA) पर मौजूद आनुवंशिक कोड को पढ़ते हैं
  • उस जानकारी का उपयोग करके अमीनो एसिड को जोड़कर विशिष्ट प्रोटीन बनाते हैं।
  • अनुलेखन की प्रक्रिया
    • अनुलेखन केंद्रक (न्यूक्लियस) में होता है
    • जहाँ डीएनए की आनुवंशिक सूचना आरएनए पॉलिमरेज एंजाइम की सहायता से मैसेंजर आरएनए (mRNA) में प्रतिलिपित होती है।
    • डीएनए का एक स्ट्रैंड टेम्प्लेट के रूप में कार्य करता है
    • जिसमें क्षारक जोड़ी A-U, T-A, G-C और C-G के अनुसार mRNA बनता है।
    • यह प्रक्रिया प्रोमोटर साइट से शुरू होकर टर्मिनेटर साइट पर समाप्त होती है।​
  • अनुवादन की प्रक्रिया
    • अनुवादन कोशिका द्रव्य में राइबोसोम पर होता है, जहाँ mRNA, tRNA और rRNA मिलकर कार्य करते हैं।
    • प्रक्रिया में सबसे पहले अमीनो एसिड सक्रिय होकर tRNA से जुड़ते हैं
    • फिर राइबोसोम के P-साइट और A-साइट पर कोडॉन-एंटीकोडॉन जोड़ी बनाकर पेप्टाइड बंध बनते हैं।
    • मेथियोनीन (AUG कोडॉन) से शुरुआत होती है और UAA, UAG या UGA जैसे स्टॉप कोडॉन पर समाप्त।​
  • स्थान और प्रकार
    • प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में यह प्रक्रिया कोशिका द्रव्य में ही होती है
    • जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाओं में अनुलेखन केंद्रक में और अनुवादन राइबोसोम (फ्री या ER से जुड़े) पर।
    • रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (RER) पर जुड़े राइबोसोम स्रावी प्रोटीन बनाते हैं। ऊर्जा GTP और ATP से प्राप्त होती है।​
  • महत्वपूर्ण घटक
    • राइबोसोम: 70S (प्रोकैरियोट्स) या 80S (यूकैरियोट्स), जिसमें छोटी और बड़ी सबयूनिट होती हैं।
    • आरएनए प्रकार: mRNA (सूचना वाहक), tRNA (अमीनो अम्ल वाहक), rRNA (राइबोसोमल संरचना)।
    • एंजाइम: पेप्टिडाइल ट्रांसफरेज पेप्टाइड बंध बनाता है। पोस्ट-ट्रांसलेशनल मॉडिफिकेशन से प्रोटीन सक्रिय होता है।

14. निम्नलिखित में से किस कोशिका विभाजन को न्यूनीकरण विभाजन के रूप में जाना जाता है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) अर्धसूत्री विभाजन
Solution:
  • अर्धसूत्री विभाजन को न्यूनीकरण विभाजन के रूप में जाना जाता है।
  • इस प्रकार के विभाजन में कोशिकाओं के अंदर गुणसूत्रों की संख्या कम हो जाती है
  • जिसके परिणामस्वरूप अगुणित कोशिकाएं बनती हैं। यह प्रक्रिया प्रजनन के लिए आवश्यक है
  • क्योंकि यह मूल कोशिका के रूप में गुणसूत्रों की आधी संख्या वाले युग्मकों के निर्माण की अनुमति देती है
  • जिससे ये निषेचन के दौरान संयोजित होकर गुणसूत्रों के पूरे सेट के साथ युग्मनज बनाते हैं।
  • न्यूनीकरण विभाजन अर्धसूत्री विभाजन है।​
    • यह कोशिका विभाजन का वह प्रकार है जो गुणसूत्रों की संख्या को आधी कर देता है
    • जिससे द्विगुणित (2n) कोशिका से चार अगुणित (n) पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं।​
  • परिभाषा
    • न्यूनीकरण विभाजन, जिसे अंग्रेजी में reduction division कहा जाता है
    • मुख्य रूप से यौन प्रजनन में युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) के निर्माण के लिए होता है।
    • यह प्रक्रिया गुणसूत्रों की संख्या को बनाए रखने के लिए आवश्यक है
    • क्योंकि निषेचन के दौरान दो अगुणित युग्मक मिलकर द्विगुणित युग्मनज बनाते हैं।​
  • प्रकार
    • अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I): यह मुख्य न्यूनीकरण चरण है
    • जहाँ होमोलॉगस गुणसूत्र जोड़े अलग हो जाते हैं, जिससे प्रत्येक पुत्री कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है।
    • इसमें क्रॉसिंग ओवर होता है, जो आनुवंशिक विविधता पैदा करता है।​
    • अर्धसूत्री विभाजन-II (Meiosis-II): यह समसूत्री विभाजन जैसा होता है
    • लेकिन अगुणित कोशिकाओं में, जो चार अलग-अलग अगुणित कोशिकाएँ बनाता है।​
  • समसूत्री विभाजन से अंतर
    • समसूत्री विभाजन (माइटोसिस) वृद्धि और मरम्मत के लिए होता है, जिसमें गुणसूत्र संख्या समान रहती है
    • (2n से दो 2n कोशिकाएँ)। न्यूनीकरण विभाजन में डीएनए प्रतिकृति केवल एक बार होती है
    • लेकिन विभाजन दो बार, जबकि समसूत्री में प्रतिकृति और विभाजन दोनों एक चक्र में।​

15. किस अंगक को कोशिका का डाकघर कहा जाता है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) गॉल्जी उपकरण
Solution:
  • गॉल्जी उपकरण को कोशिका का डाकघर कहा जाता है
  • क्योंकि यह अणुओं (प्रोटीन व लिपिड) को कोशिका के विभिन्न भागों में तथा कोशिका के बाहर पैक करता है
  • वितरित करता है। यह अणुओं को पुटिकाओं में संशोधित एवं वर्गीकृत करता है
  • पैक कर उन्हें गंतव्य स्थानों तक भेजता है।
  • गॉल्जी उपकरण, यूकैरियोटिक कोशिकाओं में उपस्थित होता है
  • जिसमें जंतु एवं पादप कोशिकाएं शामिल होती हैं।
  • संरचना
    • गॉल्जी काय चपटी, झिल्लीदार थैलियों (सिस्टर्न) के ढेर से बना होता है
    • जिनका व्यास 0.5 से 1.0 माइक्रोमीटर तक होता है।​
    • ये सिस्टर्न समानांतर रूप से व्यवस्थित रहते हैं और cis, medial तथा trans क्षेत्रों में विभाजित होते हैं
    • जहां क्रमशः प्राप्ति, प्रसंस्करण और वितरण होता है।​
    • यह यूकेरियोटिक कोशिकाओं (जंतु और पादप दोनों) में पाया जाता है
    • लेकिन पादप कोशिकाओं में अधिक सक्रिय रूप से कार्य करता है।​
  • कार्य
    • गॉल्जी काय अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) से प्राप्त प्रोटीन और लिपिड को संशोधित करता है
    • उन्हें पुटिकाओं में पैक करता है और कोशिका के विभिन्न भागों या बाहर भेजता है।​
    • यह लाइसोसोम का निर्माण करता है, जो कोशिका के अपशिष्ट को पचाने में मदद करते हैं
    • कोशिका भित्ति या झिल्ली के घटकों को तैयार करता है।​
    • डाकघर की उपमा इसलिए दी जाती है क्योंकि यह "पता" पढ़कर अणुओं को सही गंतव्य तक पहुंचाता है
    • जैसे ग्लाइकोप्रोटीन को प्लाज्मा झिल्ली पर।​

16. किस कोशिकाविज्ञानी ने 1960 के दशक में विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में प्रोटीन प्रसंस्करण और छंटाई में एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER) की भूमिका की व्याख्या की? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) जॉर्ज ई. पलाडे
Solution:
  • जॉर्ज ई. पलाडे (George E. Palade) एक रोमानियाई-अमेरिकी कोशिकाविज्ञानी थे
  • जिन्हें "आधुनिक कोशिका जीव विज्ञान के जनक" के रूप में जाना जाता है।
  • उन्होंने 1960 के दशक में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का उपयोग करके कोशिका के भीतर प्रोटीन के पथ पर महत्वपूर्ण काम किया।
  • उन्होंने एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER), राइबोसोम और गॉल्जी उपकरण की भूमिका को स्पष्ट किया
  • कैसे प्रोटीन को संश्लेषित किया जाता है
  • संसाधित किया जाता है, छांटा जाता है
  • कोशिका के भीतर या बाहर उनके अंतिम गंतव्य तक पहुंचाया जाता है।
  • इस कार्य के लिए उन्हें 1974 में क्रिश्चियन डी डूव और अल्बर्ट क्लॉड के साथ फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • पलाडे का योगदान
    • जॉर्ज एमिल पलाडे, एक रोमानियाई-अमेरिकी कोशिकाविज्ञानी, ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और रेडियोएक्टिव ट्रेसर तकनीकों का उपयोग करके ER को प्रोटीन संश्लेषण, संशोधन और परिवहन के केंद्र के रूप में स्थापित किया।
    • उन्होंने दिखाया कि रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (RER) पर राइबोसोम प्रोटीन बनाते हैं
    • जो ER ल्यूमेन में प्रवेश कर ग्लाइकोसिलेशन जैसी प्रसंस्करण प्रक्रियाओं से गुजरते हैं
    • फिर गोल्जी उपकरण की ओर छांटे जाते हैं।​
  • प्रमुख खोजें
    • प्रोटीन मार्ग का पता: पलाडे ने पलाडे पाथवे की अवधारणा दी
    • जिसमें प्रोटीन ER से शुरू होकर गोल्जी, वेसिकल्स के माध्यम से प्लाज्मा मेम्ब्रेन या लाइसोसोम तक पहुंचते हैं।
    • विभिन्न कोशिकाओं में अध्ययन: अग्न्याशय, जंतु कोशिकाओं सहित कई प्रकारों में प्रयोगों से सिद्ध किया
    • ER सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं में प्रोटीन स्रावी तंत्र का प्रारंभिक केंद्र है।​
    • प्रयोगात्मक प्रमाण: 1950-60 के दशक में पल्स-चेस प्रयोगों से ट्रैक किया
    • प्रोटीन ER में 3-5 मिनट में पहुंचते हैं, फिर गोल्जी में 20-30 मिनट बाद।​
  • नोबेल पुरस्कार और विरासत
    • 1974 में पलाडे को कोशिका की संरचना-कार्य संबंधों पर कार्य के लिए फिजियोलॉजी/मेडिसिन नोबेल मिला
    • जिसमें ER की भूमिका केंद्रीय थी।
    • उनके कार्य ने सेल बायोलॉजी को बदल दिया
    • प्रोटीन मिसफोल्डिंग रोगों (जैसे अल्जाइमर) की समझ और दवा विकास को बढ़ावा दिया।​

17. पादप कोशिकाएं जंतु कोशिकाओं से भिन्न होती हैं, क्योंकि उनमें कोशिका झिल्ली के चारों ओर एक अतिरिक्त परत होती है जिसे ....... कहा जाता है। [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) कोशिका भित्ति
Solution:
  • कोशिका भित्ति (Cell Wall) पादप कोशिकाओं की एक विशिष्ट विशेषता है
  • जो उन्हें जंतु कोशिकाओं से अलग करती है।
  • यह कोशिका झिल्ली के बाहर स्थित एक कठोर और सुरक्षात्मक परत है
  • जो मुख्य रूप से सेल्यूलोज से बनी होती है।
  • यह कोशिका को आकार, संरचनात्मक समर्थन और आंतरिक दबाव से सुरक्षा प्रदान करती है।
  • जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती है।
  • कोशिका भित्ति की संरचना
    • कोशिका भित्ति मुख्यतः सेल्युलोज, हेमिसेल्युलोज और पेक्टिन जैसे बहुलक पदार्थों से बनी होती है
    • जो जंतु कोशिकाओं में अनुपस्थित होती है।
    • यह प्राथमिक भित्ति (लचीली) और द्वितीयक भित्ति (कठोर) के रूप में दो परतों में विभाजित हो सकती है
    • जो कोशिका के विकास के चरण पर निर्भर करती है।
    • कोशिका भित्ति कोशिका झिल्ली को घेरती हुई बाहरी संरचना बनाती है
    • पादपों को यांत्रिक दबाव, आसमाटिक तनाव तथा रोगजनकों से बचाती है।​
  • कार्य और महत्व
    • यह परत पादप कोशिकाओं को दृढ़ता प्रदान कर उनके आकार को बनाए रखती है
    • विशेषकर जब कोशिका में टर्गर दबाव (turgor pressure) बढ़ता है।
    • जंतु कोशिकाओं में इसकी कमी के कारण वे अधिक लचीली होती हैं
    • आसानी से आकृति बदल सकती हैं।
    • कोशिका भित्ति प्रकाश संश्लेषण, जल संचयन और कोशिका विभाजन में भी सहायक होती है
    • क्योंकि यह मध्य भित्ति (middle lamella) के माध्यम से आसपास की कोशिकाओं को जोड़ती है।

18. निम्नलिखित में से कौन-सा अंगक स्वयं की प्रतियां बना सकता है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) सूत्रकणिका
Solution:
  • सूत्रकणिका (माइटोकॉण्ड्रिया - Mitochondria): ये कोशिका अंगक अपने स्वयं के डीएनए (circular DNA) और राइबोसोम (70S प्रकार के) रखते हैं।
  • यह उन्हें अपने कुछ प्रोटीन को संश्लेषित करने और कोशिका के बाकी हिस्सों से स्वतंत्र रूप से स्वयं की प्रतियां बनाने (self-replicate) की क्षमता प्रदान करता है।
  • यह विशेषता एंडोसिम्बायोटिक सिद्धांत का एक प्रमुख प्रमाण है।
  • सूत्रकणिका की संरचना
    • जबकि भीतरी झिल्ली मुड़ी हुई क्रिस्टे के रूप में होती है।
    • इन क्रिस्टों पर एटीपी संश्लेषण के लिए एंजाइम स्थित होते हैं।
    • कोशिका विभाजन के दौरान यह बाइनरी फिशन द्वारा स्वयं की प्रतियां बनाता है
    • जो कोशिका के न्यूक्लियस से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।​
  • स्व-प्रतिकृति की प्रक्रिया
    • माइटोकॉन्ड्रिया में अपना डीएनए (mtDNA) होता है, जो मातृ वंश से प्राप्त होता है
    • न्यूक्लियस के डीएनए से अलग होता है। कोशिका विभाजन से पहले यह अपनी डुप्लिकेशन करता है
    • जिसमें डीएनए प्रतिकृति और प्रोटीन संश्लेषण शामिल होता है।
    • यह प्रक्रिया बैक्टीरिया जैसी है, जो इसके अंतोगामी मूल (एंडोसिम्बायोटिक थ्योरी) को दर्शाती है।​

19. प्रोकैरियोटिक (प्राक्केंद्रकी) कोशिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) झिल्ली युक्त कोशिका अंगक (सेल ऑर्गेनेल) उपस्थित होते हैं।
Solution:
  • झिल्ली से बंधे (Membrane bound organelles) कोशिका के भीतर ही वह संरचनाएं हैं
  • जो एक झिल्ली से बंधे होते हैं। उदाहरण के लिए, माइटोकॉण्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट केंद्रक आदि।
  • ये यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाते हैं, न कि प्रोकैरियोटिका कोशिका में। अतः विकल्प (a) का कथन सही नहीं है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है
    • आनुवंशिक पदार्थ न्यूक्लियॉइड क्षेत्र में साइटोप्लाज्म के रूप में कुंडलित DNA के रूप में मौजूद रहता है।
    • इनमें झिल्ली-बद्ध कोशिका अंगक (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट, गॉल्जी बॉडी या लाइसोसोम) नहीं होते
    • केवल 70S राइबोसोम्स प्रोटीन संश्लेषण के लिए मौजूद रहते हैं।
    • कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन या अन्य पदार्थों से बनी होती है
    • माइकोप्लाज्मा को छोड़कर), और प्लाज्मा झिल्ली पर श्वसन एंजाइम जुड़े हो सकते हैं।​
  • गलत कथन की पहचान
    • प्रोकैरियोटिक कोशिका के संबंध में सबसे सामान्य गलत कथन यह है
    • इनमें झिल्ली-बद्ध कोशिका अंगक मौजूद होते हैं।" यह कथन पूरी तरह असत्य है
    • क्योंकि प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं की प्राथमिक परिभाषा ही झिल्ली-आबद्ध अंगकों की अनुपस्थिति पर आधारित है।
    • इसके विपरीत, यूकेरियोटिक कोशिकाओं में ये अंगक विद्यमान होते हैं।
    • अन्य कथन जैसे केन्द्रक झिल्ली का अभाव, छोटा आकार (1-10 μm), और रिंग DNA की उपस्थिति सत्य हैं।​
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • ये कोशिकाएँ अलैंगिक प्रजनन (बाइनरी फिशन) द्वारा गुणित होती हैं
    • प्रतिलेखन-अनुवाद साइटोप्लाज्म में ही होता है। छोटे आकार के कारण सतह-आयतन अनुपात अधिक होता है
    • जो पोषक तत्वों के तेजी से आदान-प्रदान में सहायक है।
    • उदाहरण: ई. कोलाई बैक्टीरिया या सायनोबैक्टीरिया।
    • इस प्रकार, झिल्ली-बद्ध अंगकों की उपस्थिति का कथन ही सही नहीं है।​

20. एकल कोशिका या कणों का तेजी से विश्लेषण करने के लिए किस कोशिका विश्लेषण तकनीक का उपयोग किया जाता है, जब वे उभय-प्रतिरोधित लवण-आधारित विलयन में निलंबित होने पर एकल या एकाधिक लेसरों के माध्यम से प्रवाहित होते हैं? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) प्रवाह कोशिकाभिति
Solution:
  • प्रवाह कोशिकाभिति (Flow Cytometry) एक शक्तिशाली जैव-विश्लेषणात्मक तकनीक है
  • जिसका उपयोग एक तरल धारा में निलंबित कोशिकाओं या कणों के भौतिक और रासायनिक विशेषताओं का तेजी से विश्लेषण करने के लिए किया जाता है
  • जब वे एक या एक से अधिक लेजर बीम के माध्यम से एक-एक करके गुजरते हैं।
  • यह कोशिका के आकार, आंतरिक जटिलता (ग्रेन्युलैरिटी), और विशिष्ट कोशिका घटकों (जैसे DNA, RNA, प्रोटीन, कोशिका सतह के मार्कर) की उपस्थिति और मात्रा को मापने के लिए फ्लोरोसेंट टैग का उपयोग कर सकती है।
  • यह तकनीक इम्यूनोफेनोटाइपिंग, कोशिका चक्र विश्लेषण, एपोप्टोसिस का पता लगाने और कोशिका छंटाई (cell sorting) जैसे अनुप्रयोगों के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
  • कार्य सिद्धांत
    • फ्लो साइटोमेट्री में कोशिकाओं को हाइड्रोडायनामिक फोकसिंग द्वारा एक तंग स्ट्रीम में प्रवाहित किया जाता है
    • जहां वे लेसर लाइट से टकराती हैं।
    • लेसर स्कैटरिंग (फॉरवर्ड और साइड स्कैटर) से कोशिका आकार व आंतरिक संरचना का पता चलता है
    • जबकि फ्लोरोसेंट एंटीबॉडीज से विशिष्ट प्रोटीन या मार्करों का पता चलता है।
    • डिटेक्टर्स फोटोमल्टीप्लायर्स द्वारा सिग्नल को कैप्चर करते हैं
    • जो डिजिटल डेटा में परिवर्तित होकर कंप्यूटर पर ग्राफ (जैसे डॉट प्लॉट, हिस्टोग्राम) बनाते हैं।​
  • मुख्य घटक
    • फ्लूइडिक्स सिस्टम: शीथ फ्लूइड कोशिकाओं को एकल फाइल में संरेखित करता है।
    • ऑप्टिकल सिस्टम: एक या अधिक लेसर (अक्सर 488 nm आर्गन लेसर) प्रकाश उत्सर्जन के लिए।
    • डिटेक्शन सिस्टम: फिल्टर्स और डिटेक्टर्स फ्लोरोसेंस (FITC, PE आदि) को अलग-अलग मापते हैं।
    • कंप्यूटर सॉफ्टवेयर: डेटा विश्लेषण, गेटिंग और सॉर्टिंग के लिए।​
  • अनुप्रयोग
    • फ्लो साइटोमेट्री का उपयोग कैंसर निदान (ल्यूकेमिया सेल टाइपिंग), इम्यूनोलॉजी (सीडी मार्कर विश्लेषण), माइक्रोबायोलॉजी (बैक्टीरिया गिनती), और दवा विकास में होता है।
    • यह सेकंड में हजारों कोशिकाओं का विश्लेषण कर 99% शुद्धता से सॉर्टिंग (FACS) भी प्रदान करता है।
    • बहु-रंग विश्लेषण (20+ पैरामीटर्स) जटिल कोशिका आबादी को अलग करने में सहायक है।​
  • लाभ सीमाएं
    • यह तकनीक उच्च थ्रूपुट (प्रति सेकंड 10,000 इवेंट्स) और मात्रात्मक डेटा देती है
    • लेकिन जीवित कोशिकाओं के लिए ताजा नमूने जरूरी हैं।
    • मृत कोशिकाओं को डाई (जैसे PI) से बाहर किया जाता है।
    • महंगा उपकरण होने से छोटे लैब में चुनौतीपूर्ण, किंतु माइक्रोफ्लो साइटोमेट्री जैसे नए संस्करण सस्ते विकल्प दे रहे हैं।​