खिलजी वंश (UPPCS)

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21. बाजार कीमतों को नियंत्रित करने के अलाउद्दीन खिलजी के प्रयास ने - [U.P.P.C.S. (Mains) 2017]

Correct Answer: (c) बहुत सफलता प्राप्त की।
Solution:

अलाउद्दीन का आर्थिक सुधार मुख्यतः एक बड़ी सेना का भरण-पोषण, कालाबाजारी को रोकना और विद्रोहों पर अंकुश लगाने के लिए था। इन सब के लिए सुल्तान ने बाजार में मूल्य नियंत्रण के लिए कई नियम और प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति की। उसने मलिक कबूल को शहना या बाजार अधीक्षक नियुक्त किया और उसको मूल्य में स्थिरता बनाएं रखने के लिए कई सहायक और विस्तृत अधिकार दिए, जिससे नियमों को उसने बड़ी कठोरता से लागू किया, जिसका परिणाम हुआ कि मुनाफाखोरी और कालाबाजारी बंद हो गई।

22. निम्नलिखित में से किस मध्यकालीन शासक ने 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' प्रारंभ की थी? [U.P.P.C.S. (Mains) 2010]

Correct Answer: (a) अलाउद्दीन खिलजी ने
Solution:

मध्यकालीन भारत में अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) ने सबसे पहले 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' या बाजार नियंत्रण प्रणाली शुरू की थी। उसने अपनी विशाल सेना को कम वेतन में बनाए रखने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में सरकारी अनाज के गोदाम स्थापित किए थे।

23. सल्तनकाल में 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' किसने प्रारंभ की थी ? [66th B.P.S.C. (Re-Exam) 2020]

Correct Answer: (a) अलाउद्दीन खिलजी
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

24. 'घरी' अथवा गृहकर लगाने वाला दिल्ली का प्रथम सुल्तान कौन था? [U.P.P.C.S. (Mains) 2011]

Correct Answer: (b) अलाउद्दीन खिलजी
Solution:

अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का पहला सुल्तान था जिसने घरों पर 'घरी' (गृहकर) और दुधारू पशुओं पर 'चराई' (चरागाह कर) नामक कर लगाए थे। उसने अपनी सेना के भरण-पोषण और साम्राज्य विस्तार के लिए कृषि योग्य भूमि की पैमाइश करवाकर यह अतिरिक्त कर लगाए थे।

25. 1306 ई. के बाद अलाउद्दीन खिलजी के समय में दिल्ली के सुल्तान तथा मंगोलों के बीच सीमा क्या थी ? [U.P.P.C.S. (Pre) 2014]

Correct Answer: (b) रावी
Solution:

अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का वह सुल्तान था जिसने मंगोलों के सबसे ज्यादा और सबसे खतरनाक आक्रमणों का सामना किया। उसने अपनी सीमा सुरक्षा के लिए 'सीरी' को अपनी राजधानी बनाया और पुराने किलों की मरम्मत करवाई। 1306 ईस्वी के बाद अलाउद्दीन खिलजी के साम्राज्य और मंगोलों के बीच रावी नदी मुख्य सीमा बनी थी। इतिहासकार फ़रिश्ता के अनुसार, 1306 ई. में मंगोलों के भीषण आक्रमण (कवक और इकबालमंद के नेतृत्व में) को विफल करने के बाद, अलाउद्दीन के सेनापति गाजी मलिक (जो बाद में गयासुद्दीन तुगलक बना) ने सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा इतनी मजबूत कर दी थी कि मंगोलों का भारत में प्रवेश रुक गया।

26. भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - [I.A.S. (Pre) 2022]

1. भारत पर पहला मंगोल आक्रमण जलालुद्दीन खिलजी के राज्यकाल में हुआ।
2. अलाउद्दीन खिलजी के राज्यकाल में, एक मंगोल आक्रमण दिल्ली तक आ पहुंचा और उस शहर पर घेरा डाल दिया।
3. मुहम्मद बिन तुगलक मंगोलों से अपने राज्य के कुछ उत्तरी- पश्चिमी भाग अस्थायी रूप से हार गया था।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct Answer: (b) केवल 2
Solution:

भारतीय इतिहास के संदर्भ में भारत पर पहला मंगोल आक्रमण इल्तुतमिश के शासनकाल में हुआ था। अलाउद्दीन खिलजी के काल में मंगोल आक्रमणकारी कुतलुग ख्वाजा के नेतृत्व में दिल्ली पर आक्रमण हुआ था। उस समय अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ अभियान पर था। मुहम्मद बिन तुगलक के काल में तरमाशरीन के नेतृत्व में मंगोल अभियान हुआ था। लेकिन कलानौर और पेशावर पर मुहम्मद बिन तुगलक ने अधिकार कर मंगोलों के अभियान को विफल कर दिया।

27. निम्नलिखित में से किस सुल्तान ने साम्राज्य की सीमाओं की सुरक्षा हेतु एक विशेष सेना को नियुक्त किया? [U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2021]

Correct Answer: (d) अलाउद्दीन खिलजी
Solution:

अलाउद्दीन खिलजी ने साम्राज्य की सीमाओं की सुरक्षा हेतु एक विशेष सेना को नियुक्त किया था। उसने उत्तर-पश्चिमी सीमा पर विशेष सैन्य टुकड़ियाँ तैनात कीं और पुराने किलों की मरम्मत करवाकर वहाँ अनुभवी सेनापतियों को नियुक्त किया। वह दिल्ली का पहला सुल्तान था जिसने केंद्र में एक विशाल स्थायी सेना रखी। उसने सैनिकों को नकद वेतन देना शुरू किया। सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए उसने घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का विस्तृत विवरण (हुलिया) रखने की प्रथा शुरू की।

28. निम्नलिखित युग्मों में कौन सही सुमेलित नहीं है? [U.P.P.C.S. (Pre) 2018]

रियासतशासक
A. देवगिरिशंकरदेव
B. वारंगलरामचंद्रदेव
C. होयसलवीर बल्लाल
D. मदुरावीर पाण्ड्या
Correct Answer: (b)
Solution:

अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण भारत पर आक्रमण के समय देवगिरि का शासक रामचंद्रदेव था। रामचंद्रदेव की मृत्यु के बाद उनका पुत्र शंकरदेव शासक बना। तेलंगाना में काकतीय वंश का शासन था। यहां का तत्कालीन शासक प्रताप रुद्र द्वितीय था, इसकी राजधानी वारंगल थी। शेष अन्य विकल्प सही सुमेलित हैं।

29. इनमें से किसने खलीफा की शक्ति का विरोध किया? [67th B.P.S.C. (Pre) (Re. Exam) 2022]

Correct Answer: (e) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
Solution:

विकल्पगत किसी भी सुल्तान ने खलीफा की शक्ति का विरोध नहीं किया। इल्तुतमिश ने खलीफा से मान्यता प्राप्त जरूर की थी; परंतु बंगाल के सुल्तान गयासुद्दीन ने भी खलीफा से मान्यता प्राप्त की थी। जिस पर आक्रमण कर इल्तुतमिश ने एक तरीके से खलीफा की सत्ता का विरोध भी किया था। अलाउद्दीन खिलजी, बलबन, मुहम्मद बिन तुगलक सभी व्यावहारिक रूप में स्वतंत्र शासक ही थे, लेकिन किसी ने खलीफा की शक्ति या सत्ता का विरोध नहीं किया था। केवल मुबारक खलजी था, जिसने स्वयं खलीफा की उपाधि ली थी। इस तरह उसने खलीफा की सत्ता का विरोध किया था।

30. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने अपने आप को 'खलीफा' घोषित कर दिया था? [U.P.R.O./A.R.O. (Re. Exam) (Pre) 2016]

Correct Answer: (c) मुबारक खिलजी
Solution:

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के पश्चात मलिक काफूर ने मुबारक खिलजी को कैद कर कारावास में डाल दिया था। बाद में कैद से मुक्त होकर वह सुल्तान बना। मुबारक खिलजी दिल्ली का पहला और एकमात्र सुल्तान था जिसने बगदाद के खलीफा की सत्ता को पूरी तरह नकार दिया और खुद को ही 'खलीफा' घोषित कर दिया। उसने 'अल-इमाम' (Al-Imam), 'उल-इमाम', और 'खिलाफत-उल्लाह' ( ईश्वर का प्रतिनिधि) जैसी भव्य उपाधियाँ धारण कीं। उसने अपने शासनकाल के सिक्कों पर भी स्वयं को 'खलीफा' के रूप में अंकित करवाया था।