गुप्त एवं गुप्तोत्तर युग (UPPCS) (Part-2)

Total Questions: 50

1. चंद्रगुप्त के नौ रत्नों में से निम्न में से कौन फलित-ज्योतिष से संबंधित था? [U.P. Lower Sub. (Spl) (Pre) 2008]

Correct Answer: (c) क्षपणक
Solution:

चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के नौ रत्नों में से क्षपणक फलित ज्योतिष से संबंधित थे। हालांकि, वराहमिहिर भी एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री और ज्योतिषी थे, लेकिन जब विशिष्ट रूप से "फलित ज्योतिष" के संदर्भ में विकल्प दिए जाते हैं, तो कई स्रोतों में क्षपणक को ज्योतिष से जोड़ा गया है, जबकि वराहमिहिर को मुख्य रूप से खगोल विज्ञान और बृहत् संहिता के लिए जाना जाता है।

चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के नवरत्न:
• कालिदास: महान कवि और नाटककार (शकुंतलम, मेघदूत के रचयिता)।
• धनवंतरी: प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य और चिकित्सक।
• अमरसिंह: संस्कृत कोशकार, 'अमरकोश' के रचयिता।
• वराहमिहिर: खगोलशास्त्री और ज्योतिषी (बृहत्संहिता के रचयिता)।
• वररुचि: व्याकरण विशेषज्ञ और संस्कृत विद्वान।
• वेतालभट्ट: जादूगर और नीतिशास्त्र के ज्ञाता।
• घटखर्पर: कवि।
• क्षपणक: ज्योतिषी।
• शंकु: वास्तुकार (Architect)।

2. कालिदास किसके शासनकाल में थे? [M.P.P.C.S. (Pre) 1990]

Correct Answer: (d) चंद्रगुप्त II
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

3. इनमें से किसने पहली बार यह व्याख्या की थी कि पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण प्रतिदिन सूर्योदय एवं सूर्यास्त होता है? [64th B.P.S.C. (Pre) 2018]

Correct Answer: (a) आर्यभद
Solution:

प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट ने सबसे पहले यह व्याख्या की थी कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जिसके कारण प्रतिदिन सूर्योदय और सूर्यास्त होता है। उन्होंने 5वीं शताब्दी (499 ईस्वी) में रचित अपने ग्रंथ 'आर्यभटीय' में यह क्रांतिकारी सिद्धांत दिया था, जो तत्कालीन प्रचलित धारणाओं से भिन्न था।

4. अधोलिखित में कौन गुप्तकालीन स्वर्ण मुद्रा है? [U.P.P.C.S. (Pre) 1992]

Correct Answer: (b) दीनार
Solution:

गुप्त काल के सोने के सिक्के, जिन्हें दीनार के नाम से जाना जाता है, मुद्राशास्त्र और सौंदर्य उत्कृष्टता के बेहतरीन उदाहरणों में से हैं। सिक्कों के अग्रभाग पर शासक राजा और उनसे संबंधित कथाएँ चित्रित थीं, जबकि पिछले भाग पर एक देवी का चित्र बना हुआ था। फाह्यान के अनुसार, यद्यपि बड़े लेन-देन में दीनार का प्रयोग होता था, लेकिन सामान्य जनता रोजमर्रा की खरीदारी के लिए कौड़ियों का उपयोग करती थी।

5. गुप्त स्वर्ण मुद्रा को कहा जाता था- [U.P. R.O/A.R.O. (Mains) 2017]

Correct Answer: (b) दीनार
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

6. गुप्तकालीन रजत मुद्राओं को नाम दिया गया था- [L.A.S. (Pre) 1996 & U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2002]

Correct Answer: (c) रूपक
Solution:

यद्यपि गुप्त काल अपनी स्वर्ण मुद्राओं ('दीनार') के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जिन्हें 'स्वर्ण युग' का आधार माना जाता है, लेकिन चांदी के 'रूपक' सिक्कों का भी अपना ऐतिहासिक महत्व है। चंद्रगुप्त द्वितीय ने जब अंतिम शक राजा रुद्रसिंह तृतीय को पराजित किया, तो उन्होंने उस क्षेत्र की आर्थिक निरंतरता बनाए रखने के लिए चांदी की मुद्राएं जारी कीं। इन सिक्कों पर सम्राट को 'शकारि' (शकों का विनाशक) के रूप में दर्शाया गया है। सामान्य व्यापार और दैनिक लेन-देन में जहाँ सोने के सिक्के बहुत मूल्यवान थे, वहीं 'रूपक' और 'कौड़ियों' का प्रयोग अधिक सुलभ था।

7. निम्नलिखित में से किस गुप्त शासक ने सर्वप्रथम सिक्के जारी किए? [U.P.P.C.S. (Mains) 2010 & U.P.P.C.S. (Pre) 2011]

Correct Answer: (a) चंद्रगुप्त प्रथम ने
Solution:

गुप्त शासकों में चंद्रगुप्त प्रथम द्वारा सर्वप्रथम सिक्के जारी किए गए। चंद्रगुप्त प्रथम के पूर्व के शासकों, श्रीगुप्त एवं घटोत्कच द्वारा सिक्के जारी करने का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। समुद्रगुप्त द्वारा भी कई प्रकार के सिक्के जारी किए गए थे, परंतु इसका काल चंद्रगुप्त प्रथम के बाद का है।

8. गुप्त काल में लिखित संस्कृत नाटकों में स्त्री और शूद्र बोलते थे- [I.A.S. (Pre) 1995]

Correct Answer: (b) प्राकृत
Solution:

गुप्त काल में लिखित संस्कृत नाटकों में स्त्री और शूद्र प्राकृत भाषा बोलते थे। इस काल के नाटकों (जैसे कालिदास का अभिज्ञानशाकुन्तलम्) में सामाजिक पदानुक्रम के अनुसार, उच्च वर्णीय पात्र (राजा, ब्राह्मण) संस्कृत बोलते थे, जबकि स्त्रियां, निम्न वर्ग और आम लोग प्राकृत बोलते थे।

मुख्य बिंदु:
• स्त्रियां और शूद्र: प्राकृत।
• उच्च वर्ग (पुरुष): संस्कृत।
कारण: उस समय संस्कृत शिक्षित और कुलीन वर्ग की भाषा थी, जबकि प्राकृत आम बोलचाल की भाषा थी।

9. सती प्रथा का प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य प्राप्त हुआ है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2010]

Correct Answer: (a) एरण से
Solution:

सती प्रथा का प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य भानुगुप्त के 510 ईस्वी के एरण अभिलेख (मध्य प्रदेश) में मिलता है। इस अभिलेख के अनुसार, गुप्त शासक भानुगुप्त के मित्र गोपराज की युद्ध में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सती हो गई थीं। यह अभिलेख सती प्रथा का पहला पुरातात्विक/लिखित प्रमाण माना जाता है।

10. गुप्त संवत् की स्थापना किसने की? [M.P. P.C.S. (Pre) 1991]

Correct Answer: (a) चंद्रगुप्त I
Solution:

इतिहासकारों के अनुसार, चंद्रगुप्त प्रथम गुप्त वंश का पहला वास्तविक शक्तिशाली शासक था। उसने अपनी सत्ता को सुदृढ़ करने के लिए न केवल लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया, बल्कि एक नया कालक्रम भी शुरू किया जिसे 'गुप्त संवत' कहा जाता है। प्रसिद्ध खगोलशास्त्री अल-बरूनी के अनुसार, गुप्त संवत और शक संवत (78 ईस्वी) के बीच 241 वर्षों का अंतर है। यह संवत गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद भी कई शताब्दियों तक भारत के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रहा, जो गुप्त काल के सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।