Solution:चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के नौ रत्नों में से क्षपणक फलित ज्योतिष से संबंधित थे। हालांकि, वराहमिहिर भी एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री और ज्योतिषी थे, लेकिन जब विशिष्ट रूप से "फलित ज्योतिष" के संदर्भ में विकल्प दिए जाते हैं, तो कई स्रोतों में क्षपणक को ज्योतिष से जोड़ा गया है, जबकि वराहमिहिर को मुख्य रूप से खगोल विज्ञान और बृहत् संहिता के लिए जाना जाता है।
चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के नवरत्न:
• कालिदास: महान कवि और नाटककार (शकुंतलम, मेघदूत के रचयिता)।
• धनवंतरी: प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य और चिकित्सक।
• अमरसिंह: संस्कृत कोशकार, 'अमरकोश' के रचयिता।
• वराहमिहिर: खगोलशास्त्री और ज्योतिषी (बृहत्संहिता के रचयिता)।
• वररुचि: व्याकरण विशेषज्ञ और संस्कृत विद्वान।
• वेतालभट्ट: जादूगर और नीतिशास्त्र के ज्ञाता।
• घटखर्पर: कवि।
• क्षपणक: ज्योतिषी।
• शंकु: वास्तुकार (Architect)।